CET 12 level Test - 02 Part A
1. निम्नलिखित में कौन-सा/से कथन कालीबंगा सभ्यता के संदर्भमें सही है/हैं?
सही उत्तर: (a) केवल (i) और (ii)
व्याख्यात्मक हल (Detailed Explanation):
कथन (i) सही है: कालीबंगा सिंधु घाटी सभ्यता (या हड़प्पा सभ्यता) से जुड़ा एक प्रमुख स्थल है, जिसका विकास प्राचीन दृषद्वती और सरस्वती नदी घाटी के क्षेत्र में हुआ था।
वर्तमान भू-आकृति विज्ञान के अनुसार, इस क्षेत्र में बहने वाली मुख्य नदी घग्गर है, जिसे प्राचीन सरस्वती और दृषद्वती नदियों का मार्ग माना जाता है। कथन (ii) सही है: भौगोलिक स्थिति के दृष्टिकोण से, कालीबंगा सभ्यता स्थल वर्तमान में भारत के राजस्थान राज्य के हनुमानगढ़ जिले में घग्गर नदी के बाएं तट पर स्थित है।
(पूर्व में यह क्षेत्र श्रीगंगानगर जिले के अंतर्गत आता था, किंतु नए जिले के गठन के बाद अब यह हनुमानगढ़ में है)। कथन (iii) असत्य है: कालीबंगा स्थल की खोज वर्ष 1952 में अमलानंद घोष द्वारा की गई थी, न कि बी.
बी. लाल द्वारा। हाँ, यह अवश्य है कि इस स्थल का वृहद स्तर पर उत्खनन कार्य (Excavation) वर्ष 1961 से 1969 के दौरान बी. बी. लाल (B.B. Lal) और बी. के. थापर (B.K. Thapar) के निर्देशन में हुआ था। परीक्षा में 'खोज' और 'उत्खनन' से जुड़े तथ्यों में अक्सर भ्रमित किया जाता है, इसलिए यह अंतर स्पष्ट होना आवश्यक है।
सही उत्तर: (d) रणकपुर मंदिर - कुम्भा द्वारा निर्मित (यह कथन गलत युग्म है, अतः यही सही विकल्प है)।
व्याख्यात्मक हल (Detailed Explanation):
कथन (a) सही है:
कीर्ति स्तम्भ (जिसे विजय स्तम्भ भी कहा जाता है) का निर्माण महाराणा कुम्भा द्वारा सारंगपुर विजय (1437 ई.) के उपलक्ष್ಯ में कराया गया था, जिसका निर्माण कार्य वर्ष 1448 में पूर्ण हुआ था। कथन (b) सही है:
कुम्भलगढ़ दुर्ग का निर्माण महाराणा कुम्भा द्वारा शिल्पी मंडन की देखरेख में करवाया गया था। इस दुर्ग का निर्माण कार्य मुख्य रूप से 1458 ई. के आसपास पूरा हुआ था (इसकी नींव 1443-1458 के मध्य रखी गई और इसका निर्माण पूर्ण हुआ)। कथन (c) सही है:
संगीतराज ग्रंथ की रचना स्वयं महाराणा कुम्भा ने की थी। यह संगीत पर लिखा गया एक अत्यंत प्रामाणिक और वृहद ग्रंथ है (इसके अलावा संगीतमीमांसा, सूप्रबंध, और संगीत रत्नाकर पर टीका भी कुम्भा की ही रचनाएँ हैं)। कथन (d) असत्य (गलत युग्म) है: रणकपुर के प्रसिद्ध जैन मंदिरों का निर्माण महाराणा कुम्भा के शासनकाल में हुआ था, लेकिन इनका निर्माण कुम्भा द्वारा स्वयं नहीं, बल्कि एक जैन व्यापारी सेठ धरणक शाह (धरणाशाह) द्वारा करवाया गया था।
इसके मुख्य वास्तुकार (शिल्पकार) देपा (दीपा) थे। चूँकि यह महाराणा कुम्भा के काल (संरक्षण) में बना था, इसलिए इसे कुम्भा द्वारा निर्मित बताना तथ्यात्मक रूप से गलत है।
सही उत्तर: (b) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या नहीं हैं।
व्याख्यात्मक हल (Detailed Explanation):
कथन (A) सही है: आमेर के महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय को इतिहास में उनके वैज्ञानिक दृष्टिकोण, खगोल विज्ञान में असाधारण योगदान और उत्कृष्ट नगर नियोजन के कारण "आधुनिक भारत का नक्षत्र" (या ज्योतिष व खगोल विद्या का चमकता सितारा) कहा जाता है।
कारण (R) सही है: यह बिल्कुल सत्य है कि सवाई जयसिंह ने खगोलीय गणनाओं की सटीकता के लिए उत्तर भारत में पाँच वेधशालाओं (दिल्ली, जयपुर, उज्जैन, वाराणसी और मथुरा) का निर्माण करवाया था तथा वास्तुविद विद्याधर भट्टाचार्य के सहयोग से जयपुर नगर की स्थापना की थी।
व्याख्या का विश्लेषण: यद्यपि कथन (A) और कारण (R) दोनों तथ्य अपनी जगह पूर्णतः सत्य हैं, परंतु कारण (R) इस बात की व्याख्या नहीं करता है कि उन्हें "आधुनिक भारत का नक्षत्र" क्यों कहा जाता है। उन्हें यह उपाधि उनके समग्र वैज्ञानिक सुधारों, नक्षत्रों की शुद्ध सारणी 'जीज मोहम्मद शाही' के निर्माण, और उस अंधकार युग में वैज्ञानिक चेतना जगाने के व्यापक योगदान के कारण दी गई है, केवल पाँच वेधशालाएँ बनाने या शहर बसाने मात्र से यह पदवी परिभाषित नहीं होती।
अतः दोनों कथन सही हैं, किंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
सही उत्तर: (a) बूँदी किसान आंदोलन 1923
व्याख्यात्मक हल (Detailed Explanation):
कथन (a) सही है: डाबी कांड का संबंध बूंदी किसान आंदोलन (1923) से है। बूंदी रियासत (जिसे बरड़ क्षेत्र भी कहा जाता है) के किसानों ने गैर-कानूनी और भारी लाग-बाग (करों) तथा बेगार प्रथा के खिलाफ पंडित नैनूराम शर्मा के नेतृत्व में आंदोलन शुरू किया था। 2 अप्रैल 1923 को डाबी गांव में किसानों की एक शांतिपूर्ण सभा हो रही थी, जिस पर बूंदी रियासत के पुलिस अधीक्षक इकराम हुसैन के आदेश पर अंधाधुंध गोलियां चलाई गईं। इस भीषण गोलीकांड में प्रसिद्ध किसान नेता नूनाक सिंह भील (नानकजी भील) और देवी सिंह गुर्जर शहीद हो गए थे। नानकजी भील उस समय झंडा गीत ("झंडा ऊँचा रहे हमारा" या स्थानीय जन-गीत) गाते हुए शहीद हुए थे।
कथन (b) असत्य है: मेव किसान आंदोलन (1932-33) का संबंध अलवर और भरतपुर रियासतों से था, जो मेव बहुसंख्यक किसानों द्वारा अत्यधिक भू-राजस्व और सामाजिक सुधारों से जुड़ा था।
कथन (c) असत्य है: भील आंदोलन (एकीकृत रूप से भगत आंदोलन या एक आंदोलन) का संबंध मुख्य रूप से गोविंद गुरु और मोतीलाल तेजावत के नेतृत्व में मेवाड़, डूंगरपुर और सिरोही क्षेत्रों से था (जैसे कि मानगढ़ धाम और संप सभा से जुड़ी घटनाएँ)।
कथन (d) असत्य है: बेगूं किसान आंदोलन (जो कि मेवाड़ रियासत के अंतर्गत था) का नेतृत्व विजय सिंह पथिक के कहने पर रामनारायण चौधरी ने किया था। इस आंदोलन से चर्चित रुपजी और कृपाजी धाकड़ का संबंध डीडवाना/गोविन्दपुरा कांड (13 जुलाई 1923) से था, न कि डाबी कांड से।
सही उत्तर: (a) A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
व्याख्यात्मक हल (Detailed Explanation):
कथन (A) सही है: राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में स्थित मानगढ़ पहाड़ी पर 17 नवंबर 1913 (मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन) को हुई ऐतिहासिक घटना को भारतीय इतिहास में "आदिवासियों का जलियाँवाला बाग हत्याकांड" कहा जाता है। यह ब्रिटिश भारत के सबसे भीषण आदिवासी नरसंहारों में से एक था।
कारण (R) सही है और सही व्याख्या करता है: जिस प्रकार 13 अप्रैल 1919 को अमृतसर के जलियाँवाला बाग में शांतिपूर्ण सभा कर रहे निहत्थे लोगों पर अंग्रेजों ने अंधाधुंध गोलियां चलाई थीं, ठीक उसी प्रकार मानगढ़ पहाड़ी पर गोविंद गुरु के नेतृत्व में एकत्रित हुए हजारों भील आदिवासी शांतिपूर्वक अपने सामाजिक-धार्मिक सुधारों (संप सभा के नियमों और गुरु के उपदेशों) पर चर्चा कर रहे थे। ब्रिटिश सेना (मेवाड़ भील कोर) ने पहाड़ी को घेरकर मशीनगनों और बंदूकों से अंधाधुंध गोलाबारी की, जिसमें लगभग 1,500 से अधिक आदिवासी शहीद हुए। यह कारण स्पष्ट रूप से कथन (A) की पुष्टि करता है क्योंकि दोनों घटनाओं में शांतिपूर्ण सभा, निहत्थे लोग और अंग्रेजों द्वारा किया गया बड़े पैमाने पर नरसंहार एक जैसी पृष्ठभूमि साझा करता है।
सही उत्तर: (d) सम्पूर्ण सिरोही
व्याख्यात्मक हल (Detailed Explanation):
कथन (a), (b), और (c) सही हैं (अर्थात ये राज्य पुनर्गठन के समय राजस्थान में मिलाए गए थे):
अजमेर-मेरवाड़ा: 1 नवंबर 1956 को राज्य पुनर्गठन के अंतिम चरण में, केंद्र शासित प्रदेश अजमेर-मेरवाड़ा का राजस्थान में विलय हुआ।
आबू-देलवाड़ा: राज्य पुनर्गठन आयोग (फजल अली आयोग) की सिफारिशों पर आबू और देलवाड़ा का क्षेत्र जो पूर्व में बम्बई राज्य (तत्कालीन बॉम्बे स्टेट) में चला गया था, उसे पुनः राजस्थान में शामिल किया गया।
सुनेल टप्पा: मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले का 'सुनेल टप्पा' क्षेत्र राजस्थान के झालावाड़ जिले में मिलाया गया। (बदले में राजस्थान के कोटा जिले का 'सिरोंज' उपखंड मध्य प्रदेश को सौंपा गया था)।
कथन (d) असत्य है (यह इस प्रश्न का सही उत्तर है): "सम्पूर्ण सिरोही" का विलय राज्य पुनर्गठन (1956) का हिस्सा नहीं था। सिरोही का विलय राजस्थान में दो चरणों में हुआ था:
पहला चरण: सिरोही रियासत का विलय (आबू-देलवाड़ा को छोड़कर) राजस्थान के छठे चरण (26 जनवरी 1950) में ही हो गया था।
दूसरा चरण: आबू और देलवाड़ा का विलय 1 नवंबर 1956 (सातवें चरण) को हुआ। अतः, राज्य पुनर्गठन (1956) के समय 'सम्पूर्ण' सिरोही का विलय नहीं हुआ था, क्योंकि उसका अधिकांश भाग पहले ही राजस्थान में शामिल हो चुका था; 1956 में केवल आबू-देलवाड़ा का शेष भाग मिलाया गया था।
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व्याख्यात्मक हल (Detailed Explanation):
दी गई सूचियों का सही मिलान इस प्रकार है:
व्याख्यात्मक हल (Detailed Explanation):
- कथन 1 सत्य है: राजस्थान में 1857 की क्रांति की शुरुआत 28 मई 1857 को नसीराबाद छावनी से हुई थी। यहाँ 15वीं बंगाल नेटिव इन्फेंट्री के सैनिकों ने सबसे पहले अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह का बिगुल बजाया था।
- कथन 2 सत्य है: नसीराबाद के पश्चात, 3 जून 1857 को नीमच छावनी में सैनिकों ने विद्रोह किया और यहाँ से विद्रोही सैनिक दिल्ली की ओर कूच कर गए थे।
- कथन 3 सत्य है: एरिनपुरा (पाली) छावनी में जोधपुर लीजन के सैनिकों द्वारा 21 अगस्त 1857 को विद्रोह किया गया था, जिन्होंने "चलो दिल्ली, मारो फिरंगी" का नारा दिया था।
- कथन 4 असत्य है: कोटा में 1857 की क्रांति का प्रसिद्ध और भीषण जन-विद्रोह 15 अक्टूबर 1857 को हुआ था, न कि 10 अक्टूबर को (जैसा कि इस कथन में दिया गया है)।
व्याख्यात्मक हल (Detailed Explanation):
- कथन (A) सही है: राजस्थान के महान क्रांतिकारी, देशभक्त और कवि केशरी सिंह बारहठ ने मेवाड़ के महाराणा फतेहसिंह को संबोधित करते हुए 13 सोरठे रचे थे, जिनका शीर्षक "चेतावनी रा चूंगट्या" था। इन सोरठों का उद्देश्य महाराणा के भीतर मेवाड़ के गौरवशाली इतिहास की याद दिलाकर राष्ट्रीय स्वाभिमान जगाना था।
- कारण (R) गलत है: कारण में यह उल्लेख किया गया है कि महाराणा फतेहसिंह को 1911 के दिल्ली दरबार में जाने से रोकना चाहता था और वायसराय लॉर्ड कर्जन का उल्लेख है। यह तथ्यात्मक रूप से गलत है क्योंकि:
- यह ऐतिहासिक घटना वर्ष 1903 के दिल्ली दरबार से संबंधित है, न कि 1911 के दिल्ली दरबार से। (1911 के दिल्ली दरबार में ब्रिटिश सम्राट जॉर्ज पंचम आए थे, जबकि 1903 के दिल्ली दरबार का आयोजन लॉर्ड कर्जन द्वारा एडवर्ड सप्तम के राज्यारोहण के उपलक्ष में किया गया था)।
- चूँकि वर्ष "1911" और "लॉर्ड कर्जन" का संदर्भ यहाँ गलत दिया गया है (1903 के दरबार में लॉर्ड कर्जन उपस्थित थे, जबकि 1911 के दरबार में लॉर्ड हार्डिंग थे), इसलिए कारण (R) असत्य हो जाता है।
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भगत पंत |
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बीकानेर का आधुनिक निर्माता |
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एकी आंदोलन |
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मारवाड़ लोक परिषद |
सही उत्तर: (c) A-3, B-4, C-1, D-2
व्याख्यात्मक हल (Detailed Explanation):
दी गई सूचियों का सही मिलान इस प्रकार है:
A. मोतीलाल तेजावत – 3. एकी आंदोलन:
मोतीलाल तेजावत ने वर्ष 1920 में चित्तौड़गढ़ के मातृकुंडिया से आदिवासियों और किसानों के उत्थान के लिए 'एकी आंदोलन' (जिसे भोमट भील आंदोलन भी कहा जाता है) की शुरुआत की थी। (A $\rightarrow$ 3) B. जयनारायण व्यास – 4. मारवाड़ लोक परिषद: जयनारायण व्यास ने मारवाड़ में राजनीतिक चेतना जागृत करने और उत्तरदायी शासन की मांग के लिए वर्ष 1938 में 'मारवाड़ लोक परिषद' की स्थापना की थी। (B $\rightarrow$ 4)
C. गोविंद गिरी – 1. भगत पंत: समाज सुधारक गोविंद गिरी ने भीलों में व्याप्त बुराइयों को दूर करने और उनमें नैतिक व धार्मिक सुधार लाने के लिए 'भगत आंदोलन' चलाया था तथा 'संप सभा' की स्थापना की थी। (C $\rightarrow$ 1)
D. महाराजा गंगासिंह – 2. बीकानेर का आधुनिक निर्माता: बीकानेर रियासत के महाराजा गंगासिंह को उनके आधुनिकीकरण, प्रशासनिक सुधारों, गंगानगर क्षेत्र में नहरों के निर्माण (गंग कैनाल) और शिक्षा के प्रसार के कारण 'आधुनिक बीकानेर का निर्माता' कहा जाता है। (D $\rightarrow$ 2)
अतः उपर्युक्त मिलान के आधार पर विकल्प (c) पूर्णतः सही है।
व्याख्यात्मक हल (Detailed Explanation):
- चगताई-उज्बेगों द्वारा भटनेर पर आक्रमण (4): ऐतिहासिक मान्यताओं और भाटी राजवंश के इतिहास के अनुसार, भटनेर पर सबसे प्रारंभिक आक्रमणों में से एक चगताई-उज्बेगों का माना जाता है, जो 5वीं शताब्दी (लगभग 479 ई.) के आसपास हुआ था।
- महमूद गजनवी का भटनेर पर अधिकार (1): गजनवी सुल्तान महमूद गजनवी ने भारत के अपने अभियानों के दौरान 1001 ई. में भटनेर दुर्ग पर आक्रमण कर अधिकार किया था।
- तैमूर लंग का भटनेर पर आक्रमण (2): मध्य एशिया के आक्रांता तैमूर लंग ने 1398 ई. में भटनेर के शासक राव दूलचंद भाटी को पराजित कर दुर्ग पर भीषण हमला किया था।
- हुमायूँ के भाई कामरान का भटनेर पर अधिकार (3): मुगल काल में 1534 ई. के आसपास, हुमायूँ के भाई कामरान मिर्जा ने बीकानेर के शासक राव जैतसी को पराजित कर भटनेर दुर्ग पर अधिकार किया था।
व्याख्यात्मक हल (Detailed Explanation):
- बच्छावतों की हवेली राजस्थान के बीकानेर जिले में स्थित है।
- इस हवेली का निर्माण करणसिंह बच्छावत के मंत्री अमरचंद बच्छावत द्वारा 16वीं शताब्दी (लगभग 1593 ई.) में करवाया गया था।
- यह बीकानेर की सबसे पुरानी हवेलियों में से एक है और अपनी बेहतरीन लाल बलुआ पत्थर की नक्काशी, भित्ति चित्रों (Frescoes) और वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है।
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व्याख्यात्मक हल (Detailed Explanation):
- (A) परनामी सम्प्रदाय - 2. पन्ना: परनामी सम्प्रदाय के प्रवर्तक प्राणनाथ जी थे और इस सम्प्रदाय की मुख्य पीठ मध्य प्रदेश के पन्ना में स्थित है। (A $\rightarrow$ 2)
- (B) निरंजनी सम्प्रदाय - 1. गाढ़ा: निरंजनी सम्प्रदाय की स्थापना संत हरिदास जी ने की थी, जिनका मुख्य केंद्र नागौर जिले का गाढ़ा (डीडवाना) स्थान है। (B $\rightarrow$ 1)
- (C) गूदड़ सम्प्रदाय - 4. दाँतड़ा: गूदड़ सम्प्रदाय के प्रवर्तक संत दास जी थे और इस सम्प्रदाय की प्रधान पीठ भीलवाड़ा जिले के दाँतड़ा में स्थित है। (C $\rightarrow$ 4)
- (D) रामस्नेही सम्प्रदाय - 3. शाहपुरा: रामस्नेही सम्प्रदाय की चार प्रमुख शाखाओं में से सबसे प्रमुख शाखा 'रामचरण जी' द्वारा स्थापित शाहपुरा (भीलवाड़ा) में स्थित है। (D $\rightarrow$ 3)
तथ्यात्मक स्पष्टीकरण (Detailed Explanation):
- श्रावक प्रतिक्रमण सूत्रचूर्णि – तेजसिंह: यह मेवाड़ शैली का सबसे प्राचीन ग्रंथ है, जो महाराणा तेजसिंह के शासनकाल (1260 ई.) में चित्रित किया गया था। (यह सही सुमेलित है)
- पारिजात अवतरण – नानाराम: यह ग्रंथ महाराणा उदयसिंह के समय का है, जिसे चित्रकार नानाराम ने चित्रित किया था। (यह सही सुमेलित है)
- ढोला-मारू री चौपाई – आहड़: यह ग्रंथ आहड़ (उदयपुर) में चित्रित किया गया था। (यह सही सुमेलित है)
- रसिकाष्टक – साहिबदीन: यह गलत सुमेलित है। 'रसिकाष्टक' नामक प्रसिद्ध ग्रंथ का चित्रण भीखमचंद (या भीमचंद) द्वारा किया गया था (संवत 1492 / 1435 ई.), न कि साहिबदीन द्वारा। साहिबदीन ने रसिकप्रिया, भागवत पुराण और रागमाला जैसे प्रसिद्ध ग्रंथों का चित्रण किया था।
चैत्र माह में आयोजित होने वाले इन मेलों का सही 'समय अनुक्रम' (Timeline) उनकी तिथियों के आधार पर इस प्रकार है:
विक्रमादित्य मेला: यह मेला चैत्र कृष्ण पक्ष की अष्टमी को आयोजित होता है (उदयपुर)।
सोनाणा खेतलाजी मेला:
यह मेला चैत्र सुदी (शुक्ल) प्रतिपदा को आयोजित होता है (पाली)। राम-रावण मेला:
यह मेला चैत्र शुक्ल दशमी को आयोजित होता है (बड़ीसादड़ी, चित्तौड़गढ़)। बीजासण माता मेला:
यह मेला चैत्र पूर्णिमा को आयोजित होता है (दौसा)।
उपरोक्त तिथियों के क्रम (चैत्र कृष्ण अष्टमी $\rightarrow$ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा $\rightarrow$ चैत्र शुक्ल दशमी $\rightarrow$ चैत्र पूर्णिमा) के अनुसार सही अनुक्रम (a) होगा।
सही उत्तर: (a) विक्रमादित्य मेला, सोनाणा खेतलाजी मेला, राम-रावण मेला, बीजासण माता मेला
सही उत्तर (a) कथन (1), (2) और (3) सत्य हैं।
तथ्यात्मक स्पष्टीकरण:
कथन (1) सत्य है: गैर नृत्य मुख्य रूप से मेवाड़ और बाड़मेर क्षेत्र का प्रसिद्ध लोक नृत्य है।
यह होली के दूसरे दिन (धुलेंडी) से शुरू होकर लगभग 15 दिनों तक चलता है। कथन (2) सत्य है: गैर नृत्य को पारंपरिक रूप से पुरुष प्रधान नृत्य माना जाता है (नृत्य करने वाले कलाकार 'गैरिये' कहलाते हैं)।
यद्यपि कुछ क्षेत्रों में महिलाएं फाग गीत गाने में सहयोग करती हैं, लेकिन मुख्य नर्तक पुरुष ही होते हैं। यह नृत्य भक्ति और शृंगार रस से ओत-प्रोत गीतों पर किया जाता है। कथन (3) सत्य है: इस नृत्य में लय और ताल बनाए रखने के लिए मुख्य रूप से ढोल, थाली, बाँकिया और मादल जैसे वाद्य यंत्रों का प्रयोग किया जाता है।
सही उत्तर: (d) 1, 2, 3 और 4
तथ्यात्मक स्पष्टीकरण (Detailed Explanation):
लोक देवता मेहाजी मांगलिया के संदर्भ में दिए गए सभी चार कथन पूर्णतः सत्य हैं:
कथन (1) सत्य है: कर्नल जेम्स टॉड के अनुसार, मेहाजी मांगलिया का जन्म गुहिल/गहलोत वंश की मांगलिया शाखा में हुआ था। उन्हें 'मांगलिया सिसोदिया' भी कहा जाता है।
कथन (2) सत्य है: मेहाजी मांगलिया का मुख्य और प्रधान मंदिर राजस्थान के जोधपुर जिले के बापिणी गांव में स्थित है।
कथन (3) सत्य है: लोक मान्यताओं और साहित्य में मेहाजी के प्रसिद्ध घोड़े का नाम 'किरड़ काबरा' (या 'करड़ काबरा') बताया गया है।
कथन (4) सत्य है: मेहाजी मांगलिया का मेला प्रतिवर्ष भाद्रपद कृष्ण अष्टमी (श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन) को बापिणी में भरता है।
अतः, सभी चारों कथन सही हैं।
व्याख्यात्मक हल (Detailed Explanation):
- कथन (1) सत्य है: प्रसिद्ध भाषाविद एवं इतिहासकार डॉ. मोतीलाल मेनारिया ने मेवाड़ी बोली को मारवाड़ी बोली की ही एक प्रमुख उपबोली के रूप में वर्गीकृत किया है।
- कथन (2) सत्य है: भौगोलिक और भाषाई निकटता के कारण मेवाड़ी और मारवाड़ी बोली की भाषागत विशेषताओं, शब्दावली और संरचना में काफी समानता पाई जाती है।
- कथन (3) सत्य है: ऐतिहासिक साक्ष्यों और 'कीर्तिस्तम्भ प्रशस्ति' के विवरणों के अनुसार, महाराणा कुम्भा द्वारा रचित विभिन्न नाटकों तथा स्थानीय व सांस्कृतिक संदर्भों में मेवाड़ी बोली और इसके रूपों का प्रयोग इसके ऐतिहासिक एवं साहित्यिक महत्त्व को दर्शाता है।
- कथन (4) सत्य है: मेवाड़ी बोली की मुख्य भाषाई पहचान इसमें 'ए' (e) और 'ओ' (o) ध्वनियों का विशेष और विशिष्ट प्रयोग होना है।
सही उत्तर (b) 1 और 2 है।
स्पष्टीकरण:
कथन 1 सही है: राजस्थान के दौसा जिले के आभानेरी गाँव में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए हर वर्ष सितंबर-अक्टूबर के महीने में 'आभानेरी महोत्सव' आयोजित किया जाता है।
कथन 2 सही है: यहाँ स्थित 'चाँद बावड़ी' अपनी अनूठी वास्तुकला और विशालता के कारण विश्व प्रसिद्ध है, जो देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करती है।
कथन 3 गलत है: आभानेरी में पिपलाद माता का मंदिर नहीं, बल्कि प्रसिद्ध 'हर्षत माता (हर्षद माता) का मंदिर' स्थित है।
अतः विकल्प (b) सही है जिसमें कथन 1 और 2 सम्मिलित हैं।
सही उत्तर (a) है।
स्पष्टीकरण:
कथन (a) असत्य है: चौरासी खंभों की छतरी का निर्माण राव विष्णुसिंह के काल में नहीं, बल्कि बूंदी के शासक राव अनिरुद्ध सिंह के काल में उनकी धाय माँ के पुत्र 'देवा' (दाभाई) की स्मृति में करवाया गया था।
इसलिए विकल्प (a) गलत है और यही इस प्रश्न का सही उत्तर है। कथन (b) सही है: इस भव्य छतरी का निर्माण राव अनिरुद्ध सिंह के शासनकाल में हुआ था।
कथन (c) सही है:
यह प्रसिद्ध छतरी राजस्थान के बूंदी शहर के पास देवपुरा गाँव में स्थित है। कथन (d) सही है:
इस ऐतिहासिक छतरी का निर्माण कार्य 1683 से 1695 ई. के मध्य पूरा हुआ था।
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सही उत्तर (c) केवल तीन युग्म है।
स्पष्टीकरण:
पापीकोंडा राष्ट्रीय उद्यान - आंध्र प्रदेश:
यह युग्म सही है। यह उद्यान आंध्र प्रदेश के गोदावरी नदी बेसिन में स्थित है। रायमोना राष्ट्रीय उद्यान - असम:
यह युग्म सही है। यह असम के कोकराझार जिले में स्थित है। कुद्रेमुख राष्ट्रीय उद्यान - केरल:
यह युग्म गलत है। कुद्रेमुख राष्ट्रीय उद्यान केरल में नहीं, बल्कि कर्नाटक राज्य के चिकमगलूर जिले में स्थित है। इंदरकिला राष्ट्रीय उद्यान - हिमाचल प्रदेश:
यह युग्म सही है। यह हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में स्थित है।
यहाँ युग्म 1, 2 और 4 सही सुमेलित हैं, जबकि युग्म 3 गलत है।
- कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान (2): उत्तराखंड (लगभग $29^\circ \text{N}$ अक्षांश) — सबसे उत्तर में
- दुधवा राष्ट्रीय उद्यान (1): उत्तर प्रदेश (लगभग $28^\circ \text{N}$ अक्षांश)
- कान्हा राष्ट्रीय उद्यान (3): मध्य प्रदेश (लगभग $22^\circ \text{N}$ अक्षांश)
- बांदीपुर राष्ट्रीय उद्यान (4): कर्नाटक (लगभग $11^\circ \text{N}$ अक्षांश) — सबसे दक्षिण में
- कथन (A): लोकटक झील अपनी जैव विविधता और सांस्कृतिक महत्व के कारण पूर्वोत्तर भारत की सबसे बड़ी और सबसे महत्वपूर्ण ताजे पानी की झील मानी जाती है। यह कथन बिल्कुल सही है।
- कारण (R): इस झील की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ दुनिया का एकमात्र तैरता हुआ राष्ट्रीय उद्यान 'कैबुल लामजाओ राष्ट्रीय उद्यान' स्थित है, जो सड़े हुए वनस्पति और मिट्टी के अवशेषों से बने तैरते हुए द्वीपों पर स्थित है जिन्हें 'फुमडी' कहा जाता है।
- स्पष्टीकरण: कारण (R) पूरी तरह से सही है और यह स्पष्ट करता है कि लोकटक झील पूर्वोत्तर भारत की सबसे महत्वपूर्ण झील क्यों है (क्योंकि यहाँ विश्व का एकमात्र तैरता हुआ राष्ट्रीय उद्यान स्थित है)।
- युग्म 1 सही है: घाघरा नदी (कर्णाली) तिब्बत के पठार पर स्थित मापचाचुंगो हिमनद (Mapchachungo Glacier) से निकलती है।
- युग्म 2 सही है: तीस्ता नदी का उद्गम उत्तरी सिक्किम में स्थित चोलामू (त्सो ल्हामो) झील से होता है।
- युग्म 3 गलत है: गंडक नदी का उद्गम काराकोरम के नुब्रा हिमनद से नहीं होता है, बल्कि यह नेपाल-तिब्बत सीमा के पास धौलागिरि श्रेणी के क्षेत्र (नुबाइन हिमाल ग्लेशियर / नेपाल हिमालय) से निकलती है।
(नुब्रा हिमनद लद्दाख/काराकोरम क्षेत्र में स्थित है और इससे श्योक की सहायक नुब्रा नदी निकलती है)। - युग्म 4 सही है: बराक नदी का उद्गम मणिपुर की पहाड़ियों में स्थित माउंट जापोवो (या जापुवो रेंज, नागा-मणिपुर बॉर्डर क्षेत्र) से होता है।
- नामचा बरवा: तिब्बत (अरुणाचल प्रदेश सीमा के पास) — सबसे पूर्व में
- कंचनजंगा: सिक्किम (भारत-नेपाल सीमा)
- माउंट एवरेस्ट: नेपाल-चीन सीमा
- नंदा देवी: उत्तराखंड (भारत) — सबसे पश्चिम में
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- A. मेघालय का पठार (3): मेघालय का पठार (जिसे शिलांग पठार भी कहते हैं) प्रायद्वीपीय पठार का ही उत्तर-पूर्वी विस्तार है, जो राजमहल-गारो गैप द्वारा मुख्य प्रायद्वीपीय पठार से अलग हो गया है।
- B. दक्कन का पठार (1): दक्कन का पठार मुख्य रूप से लावा निक्षेपों (बेसाल्ट चट्टानों) से निर्मित है, जिससे यहाँ काली मृदा (रेगुर) का क्षेत्र पाया जाता है।
- C. छोटानागपुर पठार (4): खनिज संसाधनों की अत्यधिक प्रचुरता (विशेषकर कोयला, लोहा, अभ्रक आदि) के कारण छोटानागपुर पठार को भारत का 'रूर' प्रदेश कहा जाता है।
- D. मध्य भारत का पठार (2): मध्य भारत का पठार मुख्य रूप से मालवा पठार के उत्तर-पूर्व में स्थित है।
- कथन 1 सत्य है: 'करेवा' (Karewas) कश्मीर घाटी में हिमनद और जलीय (लाकुस्ट्राइन) निक्षेपों से बने ऊंचे चबूतरेनुमा (Terraced) मैदान या पठार होते हैं।
- कथन 2 असत्य है: करेवा निक्षेपों की रचना मुख्य रूप से पीर पंजाल श्रेणी और महान हिमालय (Great Himalayas) के मध्य हुई है, न कि महान हिमालय और लद्दाख श्रेणी के मध्य।
- कथन 3 सत्य है: उपजाऊ चिकनी मिट्टी और विशेष जलवायु के कारण करेवा क्षेत्र स्थानीय स्तर पर 'जाफरान' यानी केसर (Saffron) की कृषि के लिए विश्व प्रसिद्ध है।
- कथन 1 असत्य है: 'आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005' के तहत गठित राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के पदेन अध्यक्ष प्रधानमंत्री होते हैं, न कि केंद्रीय गृह मंत्री।
- कथन 2 सत्य है: इस अधिनियम की धारा 44 के तहत आपदाओं के प्रति विशेष प्रतिक्रिया के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) का गठन किया गया है।
- कथन 3 असत्य है: राज्य स्तर पर राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) का नेतृत्व मुख्यमंत्री करते हैं, यह सही है। परंतु, जिला स्तर पर जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) का नेतृत्व जिला मजिस्ट्रेट/जिला कलेक्टर/उपायुक्त (अध्यक्ष के रूप में) करते हैं और जिला परिषद के सह-अध्यक्ष (Co-Chairperson) भी इसमें शामिल होते हैं। "केवल जिला मजिस्ट्रेट" कहना पूर्णतः सही नहीं है क्योंकि वहां एक सह-अध्यक्ष का प्रावधान भी होता है।
सही उत्तर (a) (A) और (R) दोनों सत्य हैं, और (R), (A) की सही व्याख्या है।
स्पष्टीकरण:
कथन (A) सत्य है: हाल के वर्षों में जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से अरब सागर में आने वाले उष्णकटिबंधीय चक्रवातों (Tropical Cyclones) की संख्या (आवृत्ति) और उनकी शक्ति (तीव्रता) दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है, जबकि पारंपरिक रूप से बंगाल की खाड़ी में अधिक चक्रवात आते थे।
कारण (R) सत्य है और सही व्याख्या है: चक्रवातों के विकास और मजबूती के लिए समुद्र की सतह का गर्म होना सबसे महत्वपूर्ण कारक है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण अरब सागर का तापमान (SST - Sea Surface Temperature) तेजी से बढ़ रहा है, जो चक्रवातों को पनपने और अत्यधिक तीव्र होने के लिए अनुकूल ऊर्जा प्रदान करता है।
अतः (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की बिल्कुल सही व्याख्या करता है। विकल्प (a) सही है।
- कथन 1 सही है: 'शहरी ऊष्मा द्वीप' (Urban Heat Island) प्रभाव के कारण शहर का तापमान आसपास के ग्रामीण इलाकों से अधिक हो जाता है। इससे स्थानीय स्तर पर हवा ऊपर उठती है और बादल बनते हैं, जिससे अचानक और तीव्र वर्षा (Cloudburst-like events) हो सकती है, जो शहरी बाढ़ का कारण बनती है।
- कथन 2 गलत है: कंक्रीट और डामर (Asphalt) की सतहें जल के लिए अभेद्य (Impermeable) होती हैं, न कि पारगम्य। इनके कारण वर्षा का जल जमीन के अंदर नहीं जा पाता (Infiltration कम हो जाता है), जिससे सतह पर पानी का बहाव (Run-off) बढ़ जाता है और बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होती है।
- कथन 3 सही है: वेटलैंड्स (आर्द्रभूमि) और झीलों जैसे प्राकृतिक जल निकासी स्रोतों पर अतिक्रमण के कारण वर्षा के अतिरिक्त जल के लिए कोई जगह नहीं बचती है, जो शहरी बाढ़ का एक प्रमुख कारण है।
- कथन 4 सही है: कई शहरों में ड्रेनेज सिस्टम बहुत पुराने हैं और उनकी क्षमता मौजूदा आबादी और वर्षा के बढ़ते दबाव के अनुरूप नहीं है, जिसके कारण जलभराव होता है।
- कथन (i) सही है: राजस्थान के भौगोलिक प्रदेशों या क्षेत्रों का वैज्ञानिक वर्गीकरण और निर्धारण करने का सबसे पहला सार्थक प्रयास वर्ष 1968 में प्रो. वी. सी. मिश्रा (V. C. Misra) द्वारा अपनी पुस्तक 'राजस्थान का भूगोल' में किया गया था।
- कथन (ii) सही है: प्रो. वी. सी. मिश्रा ने राजस्थान को मुख्य रूप से सात (7) प्रमुख भौगोलिक एवं कृषि-जलवायु प्रदेशों में विभाजित किया था (जैसे- नहरी क्षेत्र, मरुस्थलीय प्रदेश, अरावली प्रदेश आदि)।
- कथन (iii) सही है: वी. सी. मिश्रा के बाद वर्ष 1968 में ही ए. के. सेन (A. K. Sen) ने भी राजस्थान के प्रादेशिक वर्गीकरण में योगदान दिया और जलवायु तथा उच्चावच के आधार पर प्रदेशों के निर्धारण का अगला महत्वपूर्ण प्रयास किया।
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- A. शेरगाँव की पहाड़ियाँ (3) - खारी नदी: राजस्थान के सिरोही जिले में स्थित शेरगाँव की पहाड़ियों से खारी नदी का उद्गम होता है।
- B. खण्डेला की पहाड़ियाँ (4) - काँतली नदी: सीकर जिले की खण्डेला की पहाड़ियों से काँतली (काथली) नदी निकलती है, जो शेखावाटी क्षेत्र की प्रमुख नदी है।
- C. बैराठ की पहाड़ियाँ (1) - बाणगंगा नदी: जयपुर (अब कोटपूतली-बहरोड़) जिले में स्थित बैराठ की पहाड़ियों से बाणगंगा नदी का उद्गम होता है।
- D. खमनौर की पहाड़ियाँ (2) - बनास नदी: राजसमंद जिले में कुंभलगढ़ के निकट खमनौर की पहाड़ियों से बनास नदी का उद्गम होता है।
- कथन (i) सही है: गरड़दा सिंचाई परियोजना बूंदी जिले में मांगली नदी (इसे मांगली डूंगरी नदी के संदर्भ में भी जाना जाता है) और गणेश नाला पर स्थित है।
- कथन (ii) सही है: यह परियोजना बूंदी जिले के होलासपुरा गाँव के समीप स्थित है।
- कथन (iii) गलत है: यह परियोजना चम्बल नदी पर निर्मित नहीं है, बल्कि चम्बल की सहायक नदी मांगली पर स्थित है।
- जून माह के दौरान, राजस्थान के पश्चिमी मरुस्थलीय क्षेत्रों, विशेषकर जैसलमेर में सूर्य की किरणें लंबवत चमकती हैं, जिसके कारण यहाँ का तापमान बहुत अधिक हो जाता है।
- तापमान और वायुदाब का विपरीत संबंध होता है (उच्च तापमान = निम्न वायुदाब)। अतः अत्यधिक गर्मी के कारण जैसलमेर में हवाएँ गर्म होकर ऊपर उठती हैं, जिससे वहाँ न्यूनतम वायुदाब का केंद्र विकसित हो जाता है।
- राजस्थान के अन्य जिलों की तुलना में मरुस्थलीय क्षेत्र होने के कारण जैसलमेर में यह प्रभाव सबसे अधिक देखा जाता है, जो चक्रवाती दशाओं और मानसूनी हवाओं को आकर्षित करने में भूमिका निभाता है।
- कथन 1 सही है: थार मरुस्थल (पश्चिमी राजस्थान) में धरातलीय चट्टानें मुख्य रूप से ग्रेनाइट, सिस्ट और बलुआ पत्थर (Sandstone) की हैं। इनके अपक्षय (Weathering) से ही यहाँ बलुई मिट्टी (Sandy soil) का निर्माण हुआ है।
- कथन 2 सही है: राजस्थान के दक्षिणी भाग (जैसे उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा आदि) में आग्नेय और कायांतरित चट्टानें जैसे ग्रेनाइट, नीस (Gneiss) और क्वार्ट्जाइट पाई जाती हैं, जिनके क्षरण से 'लाल लोमी' (Red Loamy) मिट्टी का निर्माण हुआ है।
- कथन 3 सही है: राजस्थान का दक्षिण-पूर्वी भाग (हाड़ौती क्षेत्र) दक्कन ट्रैप का हिस्सा है, जहाँ बेसाल्टिक लावा के विखंडन और क्षरण से उपजाऊ 'काली मिट्टी' (वर्टीसॉल) का निर्माण हुआ है।
- कथन 4 गलत है: दक्षिणी भाग में मिश्रित लाल-काली मिट्टी का निर्माण फॉस्फेटिक शैलों से नहीं, बल्कि ग्रेनाइट, नीस और शिस्ट चट्टानों के मिश्रण से होता है। फॉस्फेटिक शैलें मुख्य रूप से रॉक फॉस्फेट के भंडार (जैसे उदयपुर के झामर कोटड़ा) के लिए जानी जाती हैं, न कि सामान्य मृदा निर्माण के लिए।
- 1. आरक्षित वन (Reserved Forests) - (कथन गलत है):इन वनों पर सरकार का पूर्ण नियंत्रण होता है। यहाँ लकड़ी काटने और पशु चराने पर पूर्णतः प्रतिबंध होता है। (प्रश्न में दी गई विशेषता रक्षित वनों से मेल खाती है)।
- 2. रक्षित या संरक्षित वन (Protected Forests) - (कथन गलत है):इन वनों की देखभाल भी सरकार करती है, लेकिन वनों को गंभीर नुकसान पहुँचाए बिना स्थानीय लोगों को नियमों के अधीन पशु चराने और सूखी लकड़ी काटने की छूट दी जाती है। (प्रश्न में दी गई पूर्ण प्रतिबंध वाली विशेषता आरक्षित वनों की है)।
- 3. अवर्गीकृत वन (Unclassified Forests) - (कथन बिल्कुल सही है):ये वे वन हैं जिन्हें आरक्षित या रक्षित श्रेणी में नहीं रखा गया है। इन वनों में लकड़ी काटने और पशु चराने पर सरकार की ओर से कोई विशेष प्रतिबंध नहीं होता है।
- कथन (I) सत्य है: वर्ष 2001-2011 की जनगणना के अनुसार, कोटा जिला न्यूनतम ग्रामीण जनसंख्या वृद्धि दर (6.1 प्रतिशत) दर्ज करने वाला जिला रहा है।
- कथन (II) सत्य है: जैसलमेर जिले में सर्वाधिक ग्रामीण जनसंख्या वृद्धि दर दर्ज की गई, जो कि 34.5 प्रतिशत थी।
- कथन (III) सत्य है: शहरी क्षेत्रों में जनसंख्या वृद्धि के मामले में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के प्रभाव के कारण अलवर जिला 50.5 प्रतिशत की दर के साथ शीर्ष पर रहा था।
- कथन (IV) सत्य है: डूंगरपुर जिले में न्यूनतम शहरी जनसंख्या वृद्धि दर दर्ज की गई थी, जिसका मान 9.8 प्रतिशत था।
- कथन-I सही है: 20वीं पशुगणना (2019) के अनुसार राजस्थान में भेड़ों की कुल संख्या 79.03 लाख ही दर्ज की गई थी।
- कथन-II सही है: भेड़ों की संख्या की दृष्टि से राजस्थान का देश में दूसरा स्थान है (प्रथम स्थान पर तेलंगाना है)।
- कथन-III सही है: राजस्थान में सर्वाधिक भेड़ों की संख्या वाला जिला बाड़मेर है।
- कथन-IV सही है: राजस्थान में न्यूनतम भेड़ों की संख्या वाला जिला बाँसवाड़ा है।
- रणथम्भौर बाघ परियोजना (सवाई माधोपुर): यह राजस्थान की पहली और सबसे प्रसिद्ध बाघ परियोजना है।
- मुकुन्दरा हिल्स बाघ परियोजना (कोटा/झालावाड़/चित्तौड़गढ़/बूंदी): यह राज्य की तीसरी बाघ परियोजना है।
- रामगढ़ विषधारी बाघ परियोजना (बूंदी): (यह सूची में नहीं है, लेकिन यह एक प्रमुख बाघ परियोजना है)।
- धौलपुर-करौली बाघ परियोजना: इसे हाल ही में राजस्थान की चौथी बाघ परियोजना के रूप में अधिसूचित किया गया है।
- केवलादेव (भरतपुर) एक राष्ट्रीय उद्यान और विश्व धरोहर स्थल है, लेकिन यह 'बाघ परियोजना' नहीं है।
- संयुक्त राज्य अमेरिका (USA)
- प्रथम स्थान - यूनाइटेड किंगडम (UK)
- द्वितीय स्थान - फ्रांस
- तृतीय स्थान (या यूके के बाद प्रमुख यूरोपीय देशों में) - जर्मनी
- चौथा स्थान
- कथन I सही है: 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 के द्वारा प्रस्तावना में 'समाजवादी' (Socialist), 'पंथनिरपेक्ष' (Secular) और 'अखंडता' (Integrity) शब्द जोड़े गए थे।
- कथन II गलत है: प्रस्तावना में प्रयुक्त 'गणराज्य' (Republic) शब्द यह इंगित करता है कि भारत का राज्य प्रमुख (राष्ट्रपति) प्रत्यक्ष रूप से नहीं, बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से जनता द्वारा निर्वाचित होता है (यानी जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों के माध्यम से)। भारत में वंशानुगत राजतंत्र नहीं है।
- कथन III सही है: 'पंथनिरपेक्ष' (या धर्मनिरपेक्ष) शब्द का अर्थ यही है कि राज्य का अपना कोई राजकीय धर्म नहीं होगा और वह सभी धर्मों को समान रूप से आदर व संरक्षण प्रदान करेगा (सर्वधर्म समभाव)।
- कथन IV सही है: प्रस्तावना में उल्लिखित 'स्वतंत्रता, समता और बंधुत्व' (Liberty, Equality and Fraternity) के आदर्शों को 1789 की फ्रांसीसी क्रांति से प्रेरित होकर ग्रहण किया गया है।
- कथन V सही है: भारतीय संदर्भ में 'समाजवादी' शब्द का अर्थ 'साम्यवादी समाजवाद' (राज्य-नियंत्रित उत्पादन के साधनों) से न होकर 'लोकतांत्रिक समाजवाद' से है। यह मिश्रित अर्थव्यवस्था (सार्वजनिक और निजी क्षेत्र का सह-अस्तित्व) पर आधारित है, जिसका उद्देश्य गरीबी, अज्ञानता और अवसर की असमानता को समाप्त करना है।
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- A. बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) - 2. किसी व्यक्ति को अवैध हिरासत से मुक्त करवाना:इसका शाब्दिक अर्थ 'को शरीर को प्रस्तुत किया जाए' है। इसके द्वारा न्यायालय किसी व्यक्ति को अवैध रूप से हिरासत में रखने पर उसे अपने समक्ष प्रस्तुत करने का आदेश देता है।
- B. परमादेश (Mandamus) - 3. सार्वजनिक अधिकारी को उसके विधिक कर्तव्य हेतु आदेश देना:इसका शाब्दिक अर्थ 'हम आदेश देते हैं' है। यह रिट किसी सार्वजनिक अधिकारी, अदालत या निगम को उसके वैधानिक कर्तव्यों का पालन करने के लिए जारी की जाती है।
- C. प्रतिषेध (Prohibition) - 4. निचली अदालत को अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाने से रोकना:इसका शाब्दिक अर्थ 'रोकना' है। यह सर्वोच्च या उच्च न्यायालय द्वारा अधीनस्थ न्यायालयों या अधिकरणों को उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर कार्य करने से रोकने के लिए जारी की जाती है।
- D. अधिकार-पृच्छा (Quo-Warranto) - 1. सार्वजनिक पद के अवैध उपभोग की जाँच करना:इसका शाब्दिक अर्थ 'किस प्राधिकार से' है। यह रिट किसी व्यक्ति द्वारा किसी सार्वजनिक कार्यालय के अवैध रूप से धारण या उपभोग करने की वैधता की जाँच करने के लिए जारी की जाती है।
- कथन (A): भारतीय संविधान के अनुच्छेद 83(1) के अनुसार राज्यसभा एक 'स्थायी सदन' (Permanent Body) है, जिसका कभी भी पूर्ण विघटन (Dissolution) नहीं होता है। (यह कथन सत्य है)
- कारण (R): राज्यसभा के प्रत्येक सदस्य का कार्यकाल 6 वर्ष का होता है और इसके एक-तिहाई सदस्य प्रत्येक दूसरे वर्ष की समाप्ति पर सेवानिवृत्त हो जाते हैं। (यह कथन भी पूर्णतः सत्य है)
- रघुकुल तिलक (1977-1981): इनके कार्यकाल के दौरान राजस्थान में दो बार राष्ट्रपति शासन लागू हुआ था।
- वर्ष 1977 में जब भैरवसिंह शेखावत की सरकार को बर्खास्त किया गया, तब रघुकुल तिलक राज्यपाल थे।
- वर्ष 1980 में भी उनके कार्यकाल के दौरान ही राष्ट्रपति शासन लगाया गया था।
- वेदपाल त्यागी के समय (1977) भी राष्ट्रपति शासन लगा था, लेकिन रघुकुल तिलक का नाम विशेष रूप से उन राज्यपालों में आता है जिनके कार्यकाल में राष्ट्रपति शासन लागू होने और हटने की प्रक्रियाएँ प्रभावी रूप से देखी गईं।
- हीरालाल देवपुरा
राजस्थान के मुख्यमंत्री रहने के साथ-साथ राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष (स्पीकर) के रूप में भी सेवा दे चुके हैं। - वह 20 मार्च 1985 से 16 अक्टूबर 1985 तक राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष रहे थे, और उससे पहले फरवरी 1985 से मार्च 1985 तक अल्पकाल के लिए राजस्थान के मुख्यमंत्री भी रहे थे।
- 29 अगस्त 1949 को जोधपुर में राजस्थान उच्च न्यायालय का उद्घाटन बृहत् राजस्थान के राजप्रमुख महाराजा सवाई मान सिंह द्वितीय द्वारा किया गया था।
- प्रारंभ में उच्च न्यायालय की मुख्य पीठ जोधपुर में स्थापित की गई थी और इसकी शाखाएँ जयपुर, उदयपुर, बीकानेर और कोटा में थीं, जिन्हें बाद में 1958 में सत्यनारायण राव समिति की सिफारिश पर समाप्त कर केवल जोधपुर में मुख्य पीठ और जयपुर में पीठ रखी गई।
- कथन (i) सही है (कारण है): राजस्थान का मरुस्थलीय और पहाड़ी धरातलीय स्वरूप तथा जल (पानी) की भारी कमी राज्य के औद्योगिक विकास में एक प्रमुख बाधा है।
- कथन (ii) गलत है (कारण नहीं है): यह कथन कहता है कि "ऊर्जा के साधनों एवं औद्योगिक कच्चे माल की प्रचुर उपलब्धता", जबकि वास्तविकता यह है कि राजस्थान में ऐतिहासिक रूप से ऊर्जा (विद्युत) के पारंपरिक साधनों और कुशल ढाँचे की कमी रही है (यद्यपि अब स्थिति सुधर रही है), इसलिए 'प्रचुर उपलब्धता' पिछड़ेपन का कारण नहीं बल्कि इसके विपरीत एक सकारात्मक स्थिति होती। यहाँ यह कथन गलत तथ्यों पर आधारित है और औद्योगिक पिछड़ेपन का कारण नहीं है।
- कथन (iii) सही है (कारण है): तकनीकी ज्ञान और प्रशिक्षित श्रमिकों की कमी राज्य के औद्योगिक पिछड़ेपन का एक मुख्य कारण है।
- कथन (iv) सही है (कारण है): सीमित पूँजी निवेश और आधारभूत संरचना (ढाँचागत सुविधाओं जैसे परिवहन, संचार आदि) की कमी भी औद्योगिक पिछड़ेपन का कारण है।
- कथन 1 सही है: राई और सरसों के उत्पादन में राजस्थान का देश में प्रथम स्थान है और इसका योगदान कुल उत्पादन का 40% से अधिक है।
- कथन 2 सही है: बाजरा उत्पादन में राजस्थान देश में प्रथम स्थान पर है।
- कथन 3 गलत है: मूँगफली उत्पादन में गुजरात देश में प्रथम स्थान पर है, जबकि राजस्थान का स्थान दूसरा है।
- कथन 4 गलत है: बाजरा उत्पादन में उत्तर प्रदेश द्वितीय स्थान पर है (यह सही है), लेकिन मूँगफली उत्पादन में गुजरात द्वितीय नहीं बल्कि प्रथम स्थान पर है।
- कथन (i) सही है: वर्ष 2026-27 के बजट अनुमानों के अनुसार कुल राजस्व प्राप्तियाँ 3,25,740.14 करोड़ रुपये (लगभग 3,25,740 करोड़ रुपये) अनुमानित हैं।
- कथन (ii) सही है: वर्ष 2026-27 के लिए राजकोषीय घाटा 79,492.52 करोड़ रुपये अनुमानित है, जो कि राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) का लगभग 3.69% है।
- कथन (iii) सही है: वर्ष 2026-27 में राज्य का सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) प्रचलित कीमतों पर 21,52,100 करोड़ रुपये अनुमानित किया गया है।
सही उत्तर (d) ₹1,00,000 है।
स्पष्टीकरण:
राजस्थान सरकार की लाडो प्रोत्साहन योजना के संशोधित दिशा-निर्देशों के अनुसार, इस योजना के तहत बालिका के जन्म से लेकर स्नातक तक की शिक्षा के लिए कुल 1.50 लाख रुपये की सहायता राशि सात अलग-अलग किस्तों में दी जाती है।
इस योजना की अंतिम (सातवीं) किस्त के रूप में बालिका के स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण करने एवं 21 वर्ष की आयु पूर्ण करने पर ₹1,00,000 (एक लाख रुपये) सीधे बालिका के बैंक खाते में हस्तांतरित किए जाते हैं।
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के प्रावधानों के संदर्भ में सही उत्तर (a) है।
स्पष्टीकरण:
विकल्प (a) सही है: मनरेगा अधिनियम के अनुसार, यदि किसी आवेदक को आवेदन करने के 15 दिनों के भीतर रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो वह दैनिक बेरोजगारी भत्ते का हकदार होता है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
(b) 30 दिनों का प्रावधान:
यह गलत है, क्योंकि बेरोजगारी भत्ता 15 दिनों के भीतर रोजगार न मिलने पर देय होता है। (c) 150 दिनों का रोजगार: मनरेगा के तहत प्रति परिवार प्रति वित्तीय वर्ष 100 दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी दी गई है (हालांकि कुछ राज्यों में इसे विशेष परिस्थितियों में बढ़ाया जाता है, लेकिन अधिनियम का मानक प्रावधान 100 दिनों का ही है)।
(d) 10 किमी की दूरी: मनरेगा के प्रावधानों के अनुसार, काम आवेदक के निवास स्थान से 5 किलोमीटर के दायरे में दिया जाना चाहिए।
यदि काम 5 किलोमीटर से अधिक दूरी पर दिया जाता है, तो मजदूरी का 10% अतिरिक्त यात्रा भत्ता के रूप में देय होता है।
- कथन (A): लोहे में जंग लगना (Rusting of iron) एक रासायनिक परिवर्तन (Chemical change) है, क्योंकि इसमें लोहे की ऑक्सीजन और नमी के साथ क्रिया करके आयरन ऑक्साइड (नया पदार्थ) बनता है। यह कथन पूर्णतः सत्य है।
- कारण (R): रासायनिक परिवर्तन की मूलभूत परिभाषा यही है कि इसमें पदार्थों के रासायनिक गुण बदल जाते हैं और एक या अधिक नए पदार्थ बनते हैं। यह कथन भी सत्य है।
- सही व्याख्या: लोहे में जंग लगना एक रासायनिक परिवर्तन क्यों है? क्योंकि इसमें नया पदार्थ (आयरन ऑक्साइड) बनता है और रासायनिक गुण बदल जाते हैं। अतः कारण (R), कथन (A) की बिल्कुल सही व्याख्या करता है।
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- P. प्लास्टर ऑफ पेरिस: इसका रासायनिक नाम कैल्सियम सल्फेट हेमीहाइड्रेट ($CaSO_4 \cdot \frac{1}{2}H_2O$) है। (P-2)
- Q. धावन सोडा (धोने का सोडा): इसका रासायनिक नाम सोडियम कार्बोनेट ($Na_2CO_3 \cdot 10H_2O$) है। (Q-4)
- R. बेकिंग सोडा (खाने का सोडा): इसका रासायनिक नाम सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट ($NaHCO_3$) है। (R-1)
- S. ब्लीचिंग पाउडर: इसका रासायनिक नाम कैल्सियम ऑक्सीक्लोराइड ($CaOCl_2$) है। (S-3)
- कथन 1 गलत है: हीरा विद्युत का कुचालक (bad conductor) होता है, क्योंकि इसमें कोई भी मुक्त इलेक्ट्रॉन (free electron) उपस्थित नहीं होता है, इसके सभी चार संयोजी इलेक्ट्रॉन सहसंयोजक बंधों द्वारा मजबूती से बंधे होते हैं।
- कथन 2 सही है: ग्रेफाइट की संरचना षट्कोणीय परतों (layered structure) वाली होती है, और इसकी परतें एक-दूसरे पर आसानी से फिसल सकती हैं, जिस कारण यह एक अच्छा ठोस स्नेहक (lubricant) होता है।
- कथन 3 सही है: फुलरिन (विशेषकर $C_{60}$) की संरचना फुटबॉल के समान होती है, जिसे 'बकमिस्टर फुलरिन' भी कहा जाता है।
- प्रथम नियम: आपतित किरण (Incident ray), दर्पण के आपतन बिंदु पर अभिलंब (Normal), और परावर्तित किरण (Reflected ray) सभी एक ही तल में होते हैं।
- द्वितीय नियम: आपतन कोण हमेशा परावर्तन कोण के बराबर होता है ($\angle i = \angle r$)।
- पृथक्करण का नियम (Law of Segregation): इसे युग्मकों की शुद्धता का नियम भी कहा जाता है, क्योंकि इस नियम के अनुसार युग्मक निर्माण के समय एलील (युग्मविकल्पी) एक-दूसरे से अलग हो जाते हैं और प्रत्येक युग्मक में दोनों कारकों में से केवल एक ही कारक पहुँचता है, जिससे युग्मक हमेशा शुद्ध होते हैं (वे किसी एक ही लक्षण के लिए होते हैं, आपस में मिश्रित नहीं होते)।
- अन्य विकल्प:
- (a) प्रभाविता का नियम - यह मेंडल का प्रथम नियम है।
- (b) स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम - यह मेंडल का तृतीय नियम है।
- (d) सहलग्नता का नियम - यह मेंडल के नियमों का अपवाद है (इसकी खोज बेटसन और पुनेट ने की थी)।
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