आनुवंशिकी और मेंडल के नियम 
(Genetics and Mendel's Laws)



1. आनुवंशिकी का परिचय (Introduction to Genetics)

  • परिभाषा: विज्ञान की वह शाखा जिसके अंतर्गत आनुवंशिकता (Heredity - लक्षणों का माता-पिता से संतानों में जाना) और विभिन्नताओं (Variations - संतानों और माता-पिता के बीच अंतर) का अध्ययन किया जाता है।

  • जनक (Father of Genetics): ग्रेगर जोहान मेंडल (Gregor Johann Mendel)। उन्होंने मटर के पौधों पर अपने प्रयोगों के माध्यम से आनुवंशिकी के मूल सिद्धांतों की खोज की।

  • 'जेनेटिक्स' शब्द का प्रयोग: सबसे पहले डब्ल्यू. बेटसन (W. Bateson) ने 1906 में किया था। इसलिए बेटसन को आधुनिकआनुवांशिकी का जनक कहा जाता है | 


ग्रेगर जॉन मेंडल का प्रारंभिक जीवन और शिक्षा 

उनका जन्म 22 जुलाई 1822 को ऑस्ट्रियाई साम्राज्य (वर्तमान चेक गणराज्य) के हिन्जेन्डार्फ गाँव में हुआ था।
शिक्षा: वियना विश्वविद्यालय से भौतिकी, गणित और प्राकृतिक विज्ञान का अध्ययन। 1842 में ब्रून (Brno) के ऑगस्टिनियन मठ में पादरी (Monk) बने और 'ग्रेगर' नाम अपनाया। उन्होंने 1856 से 1863 तक लगातार 7 वर्षों तक मटर के पौधों पर संकरण (Hybridisation) के प्रयोग किए।

  • शोधपत्र का नाम: उनके इस शोधपत्र का शीर्षक "Versuche über Pflanzen-Hybriden" (अंग्रेजी में: Experiments on Plant Hybridization या "पादप संकरण पर प्रयोग") था
  • प्रस्तुतीकरण (1865): शोधपत्र को प्रकाशित करने से पहले मेंडल ने 8 फरवरी और 8 मार्च 1865 को ब्रून (Brunn) की 'नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी' (Natural History Society of Brunn) की बैठकों में इसे सबके सामने पढ़ा था 
  • प्रकाशन (1866): इसके अगले वर्ष यानी 1866 में यह शोधपत्र सोसाइटी की वार्षिक पत्रिका (Proceedings of the Society) में आधिकारिक रूप से छपकर जारी हुआ
  • हालांकि, उनके इस क्रांतिकारी शोधपत्र को तत्कालीन वैज्ञानिकों द्वारा नजरअंदाज कर दिया गया था। इसके महत्व को सन 1900 में तब समझा गया जब तीन अन्य वैज्ञानिकों ने स्वतंत्र रूप से उनके नियमों की पुनः खोज की। 

    ग्रेगर जॉन मेंडल के आनुवंशिकी के नियमों की पुनः खोज (Rediscovery) सन 1900 में हुई थी। मेंडल के शोधपत्र के प्रकाशित होने के 34 साल बाद और उनकी मृत्यु के 16 साल बाद, तीन अलग-अलग देशों के तीन वैज्ञानिकों ने स्वतंत्र रूप से काम करते हुए मेंडल के नियमों को दोबारा खोजा।
    इन तीनों पुनः खोजकर्ताओं के नाम और विवरण इस प्रकार हैं:
    • ह्यूगो डी व्रीस (Hugo de Vries): ये हॉलैंड (Netherlands) के वनस्पतिशास्त्री थे। इन्होंने 'ईवनिंग प्रिमरोज़' (Evening Primrose) पौधे पर काम करते हुए उत्परिवर्तन (Mutation Theory) का सिद्धांत भी दिया था।
    • कार्ल कोरेंस (Carl Correns): ये जर्मनी के आनुवंशिकीविद् और वनस्पतिशास्त्री थे। इन्होंने मक्के (Maize) पर प्रयोग किए थे और मेंडल के निष्कर्षों को 'नियमों' (Laws) के रूप में दुनिया के सामने रखा।
    • एरिच वॉन शेरमार्क (Erich von Tschermak): ये ऑस्ट्रिया के वनस्पतिशास्त्री और कृषि वैज्ञानिक थे। इन्होंने विभिन्न फलियों और मटर के पौधों पर संकरण (Hybridization) के प्रयोग किए थे।

    मेंडल ने मटर के पौधे (Pisum sativum) को ही क्यों चुना? (Reason for Selecting Pea Plant)

    मेंडल की सफलता का सबसे बड़ा श्रेय उनके द्वारा चुने गए "प्रायोगिक मॉडल" को जाता है। इसके चयन के मुख्य कारण निम्नलिखित थे:

    • स्पष्ट और विपरीत लक्षण (Clear Contrast): मटर के पौधों में स्पष्ट रूप से पहचाने जाने योग्य विपरीत लक्षण मौजूद थे (जैसे लंबा/बौना, पीला/हरा)। इसमें कोई "मध्यवर्ती" लक्षण नहीं थे, जिससे डेटा का विश्लेषण करना आसान था।

    • स्वपरागण (Self-Pollination): मटर में प्राकृतिक रूप से स्वपरागण होता है, जिससे वे पीढ़ी-दर-पीढ़ी 'शुद्ध वंशक्रम' (Pure breeding lines) बनाए रखते हैं।

    • परपरागण (Cross-Pollination): मटर के फूलों की संरचना ऐसी थी कि उनमें कृत्रिम परपरागण (विपुंसन - Emasculation के माध्यम से) करना बहुत सरल था।

    • जीवन चक्र (Short Life Cycle): मटर एक वार्षिक पौधा (Annual plant) है। यह कम समय में अपना जीवन चक्र पूरा कर लेता है, जिससे मेंडल कम समय में कई पीढ़ियों (Generations) का अध्ययन कर सके।

    • अधिक बीज उत्पादन: मटर के पौधे में एक बार में काफी बड़ी संख्या में बीज बनते हैं, जिससे सांख्यिकीय आंकड़े (Statistical data) अधिक विश्वसनीय होते हैं।

    मटर के पौधे के 7 विपरीत लक्षण (7 Contrasting Characters)

    मेंडल ने अपने प्रयोगों के लिए मटर के पौधे के 7 युग्म-विकल्पी लक्षणों (Contrasting Traits) का चयन किया था। इनमें से प्रत्येक लक्षण का एक प्रभावी (Dominant) और एक अप्रभावी (Recessive) रूप था:

    लक्षण (Character)प्रभावी लक्षण (Dominant)अप्रभावी लक्षण (Recessive)
    1. तने की लंबाईलंबा (Tall)बौना (Dwarf)
    2. फूल का रंगबैंगनी (Purple)सफेद (White)
    3. फूल की स्थितिकक्षीय (Axial)शीर्षस्थ (Terminal)
    4. फली का आकारफूला हुआ (Inflated)सिकुड़ा हुआ (Constricted)
    5. फली का रंगहरा (Green)पीला (Yellow)
    6. बीज का आकारगोल (Round)झुर्रीदार (Wrinkled)
    7. बीज का रंगपीला (Yellow)हरा (Green)

    मेंडल के प्रयोग की सफलता के कारण (Why Mendel Succeeded?)


    1. उद्यान मटर (Garden Pea / Pisum sativum) का चयन: मटर का जीवनकाल छोटा होता है, जिससे कम समय में कई पीढ़ियों का अध्ययन किया जा सकता है।

    2. विपरीत लक्षणों (Contrasting Characters): मेंडल ने मटर के स्पष्ट रूप से दिखाई देने वाले 7 विपरीत लक्षणों (जैसे लंबा/बोना, पीला/हरा बीज) को चुना।

    3. गणितीय और सांख्यिकीय दृष्टिकोण: मेंडल अपने प्रयोगों का रिकॉर्ड गणितीय और सांख्यिकीय आधार पर रखते थे, जो विज्ञान में एक नया दृष्टिकोण था।

    4. स्वपरागण और परपरागण: मटर में प्राकृतिक रूप से स्वपरागण होता है, लेकिन कृत्रिम रूप से परपरागण (Cross-pollination) करना भी आसान था।

    मेंडल के मुख्य प्रयोग (Mendelian Experiments)

    मेंडल के प्रयोगों को दो मुख्य श्रेणियों में बांटा गया है:

    A. एक-संकर क्रॉस (Monohybrid Cross)

    इसमें मेंडल ने केवल एक लक्षण (जैसे तने की लंबाई) को ध्यान में रखकर क्रॉस कराया।

    • प्रक्रिया: शुद्ध लंबे (TT) और शुद्ध बौने (tt) पौधों के बीच क्रॉस कराया गया।

    • परिणाम:

      • $F_1$ पीढ़ी: सभी पौधे लंबे (Tt) प्राप्त हुए।

      • $F_2$ पीढ़ी: स्वपरागण के बाद, लंबा और बौना अनुपात 3:1 (फेनोटाइपिक) और 1:2:1 (जीनोटाइपिक) प्राप्त हुआ।

    • निष्कर्ष: प्रभाविता का नियम और पृथक्करण का नियम।

    B. द्वि-संकर क्रॉस (Dihybrid Cross)

    इसमें मेंडल ने दो लक्षणों (जैसे बीज का रंग और आकार) को एक साथ लिया।

    • प्रक्रिया: गोल-पीले (RRYY) और झुर्रीदार-हरे (rryy) बीजों के बीच क्रॉस कराया गया।

    • परिणाम: $F_2$ पीढ़ी में 9 प्रकार के जीनोटाइप और 4 प्रकार के फेनोटाइप प्राप्त हुए, जिनका अनुपात 9:3:3:1 था।

    • निष्कर्ष: स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम (Law of Independent Assortment) – एक लक्षण की वंशागति दूसरे लक्षण को प्रभावित नहीं करती।


     मेंडल के आनुवंशिकता के नियम (Mendel's Laws of Inheritance)

    मेंडल ने अपने प्रयोगों के आधार पर वंशागति के तीन मुख्य नियम प्रतिपादित किए:

    A. प्रभाविता का नियम (Law of Dominance)

    • कथन: जब दो विपरीत लक्षणों वाले शुद्ध (Homozygous) पौधों के बीच क्रॉस कराया जाता है, तो पहली पीढ़ी ($F_1$ Generation) में केवल एक ही लक्षण दिखाई देता है, जिसे प्रभावी लक्षण (Dominant Character) कहते हैं; जबकि दूसरा लक्षण छिप जाता है, जिसे अप्रभावी लक्षण (Recessive Character) कहते हैं।

    • उदाहरण: लंबे पौधे (TT) और बौने पौधे (tt) का क्रॉस कराने पर $F_1$ पीढ़ी के सभी पौधे लंबे (Tt) होते हैं (क्योंकि लंबापन प्रभावी है)।

    B. पृथक्करण या युग्मकों की शुद्धता का नियम (Law of Segregation / Law of Purity of Gametes)

    • कथन: युग्मकों (Gametes - शुक्राणु और अंडाणु) के निर्माण के समय, किसी जीन के दोनों एलील (Alleles) एक-दूसरे से अलग (Segregate) हो जाते हैं, और प्रत्येक युग्मक में दोनों में से केवल एक ही एलील पहुंचता है।

    • विशेषता: यह नियम इस बात की गारंटी देता है कि $F_2$ पीढ़ी में अप्रभावी लक्षण बिना किसी संदूषण (Contamination) के वापस प्रकट हो सकते हैं। (यह मेंडल का सबसे सार्वभौमिक नियम है, जिसका कोई अपवाद नहीं है)।

    C. स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम (Law of Independent Assortment)

    • कथन: जब दो या दो से अधिक लक्षणों (Dihybrid Cross) को एक साथ ध्यान में रखकर क्रॉस कराया जाता है, तो किसी एक लक्षण के एलील, दूसरे लक्षण के एल्लिों से पूरी तरह स्वतंत्र होकर युग्मकों में वितरित होते हैं।

    • अपवाद: यह नियम सहसंलग्नता (Linkage) के मामले में लागू नहीं होता (यानी यदि दो जीन एक ही गुणसूत्र पर बहुत पास-पास स्थित हों, तो वे स्वतंत्र रूप से अलग नहीं होते)।

    महत्वपूर्ण आनुवंशिक शब्दावली (Key Genetic Terminology for Prelims)

    • जीन और एलील (Gene & Allele)
      • जीन (Gene): सजीवों में आनुवंशिकता की मूल इकाई। यह DNA का वह भाग है जो किसी खास लक्षण (जैसे आँखों का रंग) को तय करता है।
      • एलील (Allele) या युग्मविकल्पी एक ही जीन के दो या दो से अधिक वैकल्पिक रूपों (Alternative forms) को कहते हैं, जो किसी जीव में एक ही लक्षण (Trait) के अलग-अलग रूपों को नियंत्रित करते हैं। लंबा (T) और बौना (t)। 
      2. समयुग्मजी और विषमयुग्मजी (Homozygous & Heterozygous)
      • समयुग्मजी (Homozygous): जब किसी लक्षण के लिए दोनों एलील एक जैसे हों (जैसे: TT या tt)।
      • विषमयुग्मजी (Heterozygous): जब किसी लक्षण के लिए दोनों एलील अलग-अलग हों (जैसे: Tt)। 
      3. जीनोटाइप और फेनोटाइप (Genotype & Phenotype)
      • जीनोटाइप (Genotype): किसी जीव की आंतरिक आनुवंशिक संरचना (Genetic Makeup)। जैसे: TT, Tt, या tt।
      • फेनोटाइप (Phenotype): किसी जीव के बाहरी शारीरिक लक्षण जो बाहर से दिखाई देते हैं। जैसे: पौधा 'लंबा' है या 'बौना'। 
      4. प्रभावी और अप्रभावी (Dominant & Recessive)
      • प्रभावी लक्षण (Dominant): वह एलील जो विषमयुग्मजी (Tt) स्थिति में भी अपना प्रभाव दिखाता है। जैसे: लंबापन (T)।
      • अप्रभावी लक्षण (Recessive): वह एलील जो प्रभावी एलील की उपस्थिति में छिप जाता है और केवल समयुग्मजी (tt) स्थिति में ही प्रकट होता है। जैसे: बौनापन (t)।
      5. क्रॉस के प्रकार (Types of Cross)
      • एकसंकर क्रॉस (Monohybrid Cross): केवल एक लक्षण की वंशागति का अध्ययन करने के लिए कराया गया क्रॉस। (जैसे: केवल पौधे की लंबाई)।
      • द्विसंकर क्रॉस (Dihybrid Cross): एक साथ दो जोड़ी विपरीत लक्षणों की वंशागति का अध्ययन करने के लिए कराया गया क्रॉस। (जैसे: बीज का रंग और बीज का आकार)।
      • बैक क्रॉस (Back Cross): पहली पीढ़ी (F₁) के पौधे का क्रॉस उसके किसी भी जनक (Parent) के साथ कराना।
      • टेस्ट क्रॉस (Test Cross): अज्ञात जीनोटाइप वाले पौधे का क्रॉस केवल अप्रभावी जनक (tt) के साथ कराना (इसका उपयोग जीनोटाइप पता करने के लिए होता है)।

    मेंडेलियन आनुवंशिकी के अपवाद (Exceptions to Mendelian Genetics)

    मेंडल के नियमों के कुछ महत्वपूर्ण अपवाद भी हैं, जो आधुनिक आनुवंशिकी के अंतर्गत आते हैं:

    1. अपूर्ण प्रभाविता (Incomplete Dominance):

      • इसमें $F_1$ पीढ़ी का फेनोटाइप दोनों जनकों में से किसी एक के समान न होकर, उनके बीच का मिश्रित रूप (Intermediate) होता है।

      • उदाहरण: 'मिराबिलिस जलापा' (4 बजे फूल वाला पौधा) या श्वान फूल (Snapdragon) में लाल और सफेद फूलों का क्रॉस कराने पर गुलाबी फूल का बनना।

    2. सह-प्रभाविता (Co-dominance):

      • इसमें $F_1$ पीढ़ी में दोनों एलील स्वतंत्र रूप से और पूरी तरह से अपने आप को अभिव्यक्त करते हैं।

      • उदाहरण: मानव रक्त समूह (Human Blood Groups - ABO System) में AB रक्त समूह का होना।

    3. बहुयुग्मविकल्पी (Multiple Alleles):

      • जब किसी एक लक्षण को नियंत्रित करने के लिए दो से अधिक एलील मौजूद हों (जैसे ABO रक्त समूह के लिए $I^A, I^B,$ और $i$ तीन एलील होते हैं)।

    Exam Special Point : लिंकेज (Linkage) और क्रॉसिंग ओवर (Crossing Over)

    • सहसंलग्नता (Linkage):

      • इसकी खोज बेटसन और पुनेट ने की थी और टी.एच. मॉर्गन (T.H. Morgan) ने ड्रोसोफिला (फल मक्खी) पर प्रयोग करके इसे सिद्ध किया।

      • जब एक ही गुणसूत्र पर स्थित जीन पीढ़ी-दर-पीढ़ी एक साथ वंशागत होने की प्रवृत्ति रखते हैं, तो इसे लिंकेज कहते हैं (यह मेंडल के 'स्वतंत्र अपव्यूहन नियम' का उल्लंघन करता है)।

    • क्रॉसिंग ओवर (Crossing Over):

      • अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis) के दौरान समजात गुणसूत्रों (Homologous chromosomes) के बीच आनुवंशिक सामग्री (DNA) की अदला-बदली को क्रॉसिंग ओवर कहते हैं। इसी के कारण संतानों में नई विविधताएं (Variations) उत्पन्न होती हैं।