मानव हॉर्मोन और उनकी कमी या अधिकता से होने वाले रोग Hormone-related Diseases

 

मानव हॉर्मोन और उनकी कमी या

 अधिकता से होने वाले रोग 

(Hormone-related Diseases/Disorders) 




1. हॉर्मोन का परिचय (Introduction)

  • परिभाषा: हॉर्मोन रासायनिक संदेशवाहक (Chemical Messengers) होते हैं जो शरीर की अंतःस्रावी ग्रंथियों (Endocrine Glands) द्वारा सीधे रक्त में स्रावित किए जाते हैं।

  • विशेषता:

    • इन्हें 'डक्टलेस ग्लैंड्स' (Noduct/Ductless Glands) द्वारा स्रावित किया जाता है क्योंकि इनमें नलिकाएं नहीं होतीं।

    • ये बहुत सूक्ष्म मात्रा में काम करते हैं और शरीर की चयापचय (Metabolism), वृद्धि, विकास, और होमियोस्टैसिस (संतुलन) को नियंत्रित करते हैं।

2. प्रमुख अंतःस्रावी ग्रंथियां और उनसे होने वाले रोग

A. पीयूष ग्रंथि (Pituitary Gland)

इसे 'मास्टर ग्रंथि' (Master Gland) भी कहा जाता है क्योंकि यह शरीर की अन्य अंतःस्रावी ग्रंथियों को नियंत्रित करती है। यह मस्तिष्क के हाइपोथैलेमस के नीचे स्थित होती है।

  • ग्रोथ हॉर्मोन (GH / Somatotropic Hormone):

    • अल्पस्राव (Hyposecretion):

      • बौनापन (Dwarfism): बच्चों में इस हॉर्मोन की कमी से शारीरिक वृद्धि रुक जाती है।

    • अतिस्राव (Hypersecretion):

      • विशालकायता / जाइंटिज़्म (Gigantism): बचपन में अतिस्राव के कारण शरीर अत्यधिक लंबा हो जाता है।

      • एक्रेमेगाली (Acromegaly): वयस्कों में इसके अतिस्राव से चेहरे, हाथ और पैर की हड्डियां असामान्य रूप से बड़ी हो जाती हैं।

  • ऑक्सीटोसिन (Oxytocin): इसे 'बर्थ हॉर्मोन' या 'लव हॉर्मोन' कहते हैं। यह प्रसव के दौरान गर्भाशय के संकुचन और स्तनपान के दौरान दुग्ध निष्कासन में मदद करता है।

  • वॅसोप्रेसिन या ADH (Anti-Diuretic Hormone):

    • कमी से होने वाला रोग: डायबिटीज इंसिपिडस (Diabetes Insipidus) – इसमें व्यक्ति को बार-बार मूत्र विसर्जन होता है और शरीर में अत्यधिक प्याس लगती है (यह मधुमेह/Diabetes Mellitus से अलग है)।

B. थायराइड ग्रंथि (Thyroid Gland)

यह मानव शरीर की सबसे बड़ी अंतःस्रावी ग्रंथि है, जो श्वास नली (Trachea) के पास गले में 'H' या तितली के आकार की होती है। इसके निर्माण के लिए आयोडीन अनिवार्य है।

  • थायरोक्सिन हॉर्मोन (T3 और T4):

  • अल्पस्राव (Hyposecretion):

    • घेंघा या गॉयटर (Goiter): भोजन में आयोडीन की कमी के कारण थायराइड ग्रंथि का आकार बहुत बढ़ जाता है।

    • क्रिटिनिज़्म (Cretinism): बच्चों में इसकी कमी से मानसिक मंदता (Mental Retardation) और शारीरिक वृद्धि रुक जाती है।

    • मिक्सएडिमा (Myxedema): वयस्कों में इसके अल्पस्राव से सुस्ती, वजन बढ़ना और त्वचा का रूखा होना।

  • अतिस्राव (Hypersecretion):

    • एक्सोथैल्मिक गॉयटर / ग्रेव्स रोग (Graves' Disease): इसमें आंखें बाहर की ओर उभर आती हैं, चयापचय दर बढ़ जाती है, वजन घटता है और बेचैनी रहती है।

C. पैराथायराइड ग्रंथि (Parathyroid Gland)

यह थायराइड ग्रंथि के पीछे स्थित चार छोटी ग्रंथियां होती हैं जो पैराथर्मोद (Parathormone) स्रावित करती हैं। यह रक्त में कैल्शियम और फॉस्फोरस के स्तर को नियंत्रित करती है।

  • अल्पस्राव: रक्त में कैल्शियम की कमी हो जाती है, जिससे पेशियों में ऐंठन और टेटनी (Tetany) रोग होता है।

  • अतिस्राव: हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और आसानी से टूटने लगती हैं (ऑस्टियोपोरोसिस की स्थिति)।

D. अग्न्याशय (Pancreas) - लैंगरहैंस की द्वीपिकाएँ (Islets of Langerhans)

अग्न्याशय एक मिश्रित ग्रंथि (Mixed/Heterocrine Gland) है (यह बहिःस्रावी और अंतःस्रावी दोनों रूप में कार्य करती है)। इसके अंतःस्रावी भाग से हॉर्मोन निकलते हैं:

  • इंसुलिन (Insulin): यह बीटा (β) कोशिकाओं द्वारा स्रावित होता है। यह रक्त में ग्लूकोज के स्तर को नियंत्रित करता है (ग्लूकोज को ग्लाइकोजन में बदलता है)।

    • कमी से होने वाला रोग: मधुमेह / डायबिटीज मेलिटस (Diabetes Mellitus) – रक्त में ग्लूकोज की मात्रा अत्यधिक बढ़ जाती है।

  • ग्लूकागॉन (Glucagon): यह अल्फा (α) कोशिकाओं द्वारा स्रावित होता है। यह ग्लाइकोजन को वापस ग्लूकोज में बदलता है (रक्त में शर्करा की कमी होने पर)।

E. एड्रिनल ग्रंथि (Adrenal Gland)

इसे 'सुप्रारेनल ग्लैंड' (Suprarenal Gland) भी कहते हैं क्योंकि यह दोनों गुर्दों (Kidneys) के ऊपर टोपी की तरह स्थित होती है। इसके दो भाग होते हैं:

  1. एड्रिनल मेडुला (Adrenal Medulla):

    • इससे एड्रिनलीन (Adrenaline) या नॉरएड्रिनलीन हॉर्मोन निकलता है।

    • इसे 'लड़ो या उड़ो हॉर्मोन' (Fight or Flight Hormone) कहा जाता है क्योंकि यह संकट, भय, क्रोध या तनाव की स्थिति में शरीर को त्वरित प्रतिक्रिया के लिए तैयार करता है (दिल की धड़कन और रक्तचाप बढ़ाना)।

  2. एड्रिनल कॉर्टेक्स (Adrenal Cortex):

    • इससे कोर्टिसोल (Cortisol) और एल्डोस्टेरोोन जैसे कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स निकलते हैं।

    • कमी से होने वाला रोग: एडिसन रोग (Addison's Disease) – इसमें त्वचा का रंग कांस्य जैसा (Bronze-like) हो जाता है, अत्यधिक कमजोरी और रक्तचाप कम हो जाता है।

    • अतिस्राव: कुशिंग सिंड्रोम (Cushing's Syndrome) – शरीर में चर्बी का असामान्य संचय, चेहरे का चंद्रमा जैसा गोल होना (Moon face) और उच्च रक्तचाप।

F. जनन ग्रंथियां (Gonads)

  • वृषण (Testes - पुरुषों में):

    • स्रावित हॉर्मोन: टेस्टोस्टेरोन (Testosterone) (Androgen)

    • कार्य: पुरुष जननांगों का विकास, दाढ़ी-मूंछ आना, और शुक्राणु निर्माण।

    • विकार: इसकी कमी से पुरुषों में द्वितीयक लैंगिक लक्षणों का विकास रुक जाता है।

  • अंडाशय (Ovaries - महिलाओं में):

    • स्रावित हॉर्मोन: इस्ट्रोजन (Estrogen) और प्रोजेस्टेरोन (Progesterone)

    • कार्य: मादा जननांगों का विकास, मासिक धर्म चक्र का नियंत्रण, और गर्भावस्था को बनाए रखना।

    • विकार: हॉर्मोन असंतुलन से PCOS (Polycystic Ovary Syndrome) और अनियमित माहवारी जैसी समस्याएं होती हैं।

G. थाइमस ग्रंथि (Thymus Gland)

  • यह छाती में हृदय के पास स्थित होती है और थाइमोसिन (Thymosin) हॉर्मोन स्रावित करती है।

  • यह बच्चों की प्रतिरक्षा प्रणाली (Immunity / T-Lymphocytes) के विकास में मुख्य भूमिका निभाती है। उम्र बढ़ने के साथ यह ग्रंथि छोटी होती जाती है, जिससे वृद्धों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है।