पाचन तंत्र (Digestive System)


पाचन तंत्र 

(Digestive System) 


मानव शरीर में पाचन तंत्र एक लंबी नलिका (आहार नाल - Alimentary Canal) और उससे जुड़ी पाचक ग्रंथियों (Digestive Glands) से मिलकर बना होता है। इसका मुख्य कार्य जटिल भोज्य पदार्थों को सरल, घुलनशील और अवशोषित होने योग्य अणुओं में बदलना है।

आहार नाल के प्रमुख भाग (Parts of Alimentary Canal)

आहार नाल मुँह से शुरू होकर गुदा (Anus) तक लगभग 8-10 मीटर लंबी पेशीय नलिका होती है।

मुख गुहा (Oral/Buccal Cavity)


मुख गुहा आहार नाल का सबसे आगे वाला भाग होता है जिसमे दांत, जीभ एवं लार ग्रन्थियां पायी जाती है | 

मानव दाँत (Human Teeth) 


मानव शरीर में दाँत भोजन को चबाने, काटने और बोलने में मदद करते हैं। मानव दंत विन्यास (Dentition) की तीन प्रमुख विशेषताएं होती हैं:

  1. गर्तदंती (Thecodent): दाँत जबड़ों की हड्डियों (Alveolar bone) के खांचों या गर्त में धंसे होते हैं।

  2. द्विबारदंती (Diphyodont): जीवनकाल में दाँत दो बार आते हैं—पहले दूध के दाँत (Milk/Deciduous Teeth) जो संख्या में 20 होते हैं, और बाद में स्थायी दाँत (Permanent Teeth) जो संख्या में 32 होते हैं।

  3. विषमदंती (Heterodont): मनुष्य में दाँत आकार और कार्य के आधार पर चार अलग-अलग प्रकार के होते हैं।

1. दाँत के प्रकार (Types of Teeth)


मनुष्य के मुख में चार प्रकार के दाँत पाए जाते हैं:

  • 1. कृंतक (Incisors - I):

    • कार्य: ये सामने के चपटे और धारदार दाँत होते हैं, जो भोजन को काटने या कुतरने (Cutting/Biting) का काम करते हैं।

  • 2. रद्दनक (Canines - C):

    • कार्य: ये नुकीले दाँत होते हैं जो चीरने-फाड़ने (Tearing) के काम आते हैं। मांसाहारी जंतुओं में ये अत्यधिक विकसित होते हैं।

  • 3. अग्रचवर्णक (Premolars - PM):

    • कार्य: ये चबाने और पीसने में मदद करते हैं। (याद रखें: ये बच्चों के दूध के दाँतों में अनुपस्थित होते हैं)।

  • 4. चवर्णक (Molars - M):

    • कार्य: ये जबड़े के सबसे पिछले हिस्से में होते हैं और भोजन को बारीकी से पीसने (Grinding) का मुख्य कार्य करते हैं। इनमें सबसे आखिरी मोलार को 'अकल दाँत' (Wisdom Tooth) कहा जाता है, जो 18 से 25 वर्ष की आयु के बीच निकलता है।

2. दंत सूत्र (Dental Formula)


दंत सूत्र मनुष्य के ऊपरी और निचले जबड़े के आधे भाग (एक तरफ) में दाँतों की व्यवस्था को दर्शाता है। इसे हमेशा (I, C, PM, M) के क्रम में लिखा जाता है।

(क) वयस्क मनुष्य का स्थायी दंत सूत्र (Permanent Dentition):

$$I: \frac{2}{2}, C: \frac{1}{1}, PM: \frac{2}{2}, M: \frac{3}{3} = \frac{8}{8} \times 2 = \frac{16}{16} = 32$$
  • स्पष्टीकरण: एक जबड़े के आधे हिस्से में ऊपर 2 कृंतक, 1 रद्दनक, 2 अग्रचवर्णक और 3 चवर्णक होते हैं (कुल 8 दाँत)। दोनों तरफ मिलाकर ऊपरी जबड़े में 16 और निचले जबड़े में 16, यानी कुल 32 स्थायी दाँत होते हैं।

(ख) बच्चों का दूध के दाँतों का सूत्र (Milk/Deciduous Dentition):

$$I: \frac{2}{2}, C: \frac{1}{1}, PM: \frac{0}{0}, M: \frac{2}{2} = \frac{5}{5} \times 2 = \frac{10}{10} = 20$$
  • स्पष्टीकरण: बच्चों में अग्रचवर्णक (Premolars) और अंतिम चवर्णक (Third Molar) पूरी तरह अनुपस्थित होते हैं। इसलिए बच्चों के मुख में कुल 20 दूध के दाँत होते हैं।

3. दाँत की आंतरिक संरचना (Structure of a Tooth)


प्रत्येक दाँत मुख्य रूप से तीन भागों में बंटा होता है: शिखा (Crown) (जो मसूड़ों के बाहर दिखाई देती है), ग्रीवा (Neck) (मसूड़े से सटा भाग), और मूल (Root) (जो जबड़े के अंदर धँसी होती है)।

दाँत की मुख्य परतें और हिस्से निम्नलिखित हैं:

  1. इनेमल (Enamel):

    • यह दाँत का सबसे बाहरी सफेद भाग है।

    • यह मानव शरीर का सबसे कठोर और मजबूत ऊतक है, जो मुख्य रूप से कैल्शियम हाइड्रॉक्सीएपाटाइट (Calcium Hydroxyapatite) का बना होता है। यह चबाने के दौरान घिसाव से दाँत की रक्षा करता है।

  2. डेंटाइन (Dentine):

    • इनेमल के ठीक नीचे का पीलापन लिए हुए भाग। यह हड्डी जैसा सख्त होता है और दाँत के मुख्य हिस्से का निर्माण करता है।

  3. पल्प कैविटी या मज्जा गुहा (Pulp Cavity):

    • दाँत का सबसे आंतरिक भाग, जिसमें रक्त वाहिकाएं (Blood vessels), तंत्रिकाएं (Nerves) और संयोजी ऊतक होते हैं। इसी से दाँत को पोषण और संवेदना (दर्द या ठंडे-गर्म का अहसास) मिलती है।

  4. सीमेंटम (Cementum):

    • यह जड़ की बाहरी सतह पर एक बोनी (हड्डीनुमा) पदार्थ होता है, जो दाँत को जबड़े की सॉकेट (मसूड़े की हड्डी) से मजबूती से बांधकर रखता है।

4. दंत क्षय (Dental Caries / Tooth Decay)


  • मुँह में मौजूद बैक्टीरिया भोजन के शर्करा (Sugar) पर क्रिया करके अम्ल (Acid) बनाते हैं।

  • यह अम्ल इनेमल को धीरे-धीरे घुलाकर कमजोर कर देता है, जिससे दाँत में छेद या कैविटी (Cavity) हो जाती है। इसे ही दंत क्षय कहा जाता है।



  • जीभ (Tongue): यह भोजन को मिलाने, निगलने और स्वाद का अनुभव कराने में मदद करती है (जीभ के विभिन्न हिस्सों से मीठा, खट्टा, नमकीन और कड़वा स्वाद पता चलता है)।

  • लार ग्रंथियाँ (Salivary Glands): मनुष्य में 3 जोड़ी लार ग्रंथियाँ होती हैं—पैरोटिड (Parotid), सबमैक्सिलरी (Submandibular), और सबलिंग्वल (Sublingual)।

    • लार में टायलिन (Ptyalin या Salivary Amylase) नामक एंजाइम होता है, जो स्टार्च (मंड) को माल्टोज शर्करा में तोड़ता है। इसके अलावा लार में लाइसोज़ाइम (Lysozyme) होता है जो बैक्टीरिया को नष्ट करता है।

ग्रसनी (Pharynx) और ग्रसिका (Oesophagus)

  • ग्रसनी: यह मुख गुहा का पिछلا भाग है जहाँ भोजन नली और श्वास नली मिलती है। एपिग्लोटिस (Epiglottis) नामक ढक्कन भोजन को श्वास नली में जाने से रोकता है।

  • ग्रसिका (Oesophagus / Food Pipe): यह एक लंबी नली है जो भोजन को मुँह से आमाशय तक पहुँचाती है। यहाँ कोई पाचन नहीं होता।

  • परिकुंचन (Peristalsis): ग्रसिका की दीवारों की पेशियों के क्रमिक संकुचन और शिथिलन को क्रमाकुंचन कहते हैं, जिससे भोजन नीचे की ओर सरकता है।





आमाशय की संरचना (Structure of Stomach)


आमाशय आहार नाल का सबसे चौड़ा, थैलेनुमा और अत्यधिक पेशीय (Muscular) अंग है। यह डायाफ्राम (Diaphragm) के ठीक नीचे उदर गुहा के ऊपरी बाएं हिस्से में स्थित होता है। अंग्रेजी के 'J' आकार का यह अंग भोजन के भंडारण, यांत्रिक मंथन (Churning) और रासायनिक पाचन का एक महत्वपूर्ण केंद्र है।

1. आमाशय के प्रमुख भाग (Regions of Stomach)

आमाशय को मुख्य रूप से चार भागों में विभाजित किया गया है:

  1. कार्डियक / जठरागम भाग (Cardiac region):

    • यह आमाशय का सबसे ऊपरी भाग है जहाँ ग्रास नली (Oesophagus) आकर खुलती है।

    • इसके प्रवेश द्वार पर कार्डियक स्पिंक्टर (Cardiac Sphincter / Gastro-oesophageal sphincter) नामक एक पेशीय वाल्व होता है, जो पचे हुए भोजन और आमाशय के अम्ल को वापस ग्रास नली में जाने से रोकता है।

  2. फंडस भाग (Fundus region):

    • यह कार्डियक के ऊपर और बाईं ओर स्थित गुंबद के आकार का हिस्सा होता है। सामान्यतः इसमें भोजन के साथ-साथ निगली गई हवा (गैस) एकत्र रहती है।

  3. बॉडी या काय भाग (Body region):

    • यह आमाशय का सबसे बड़ा और केंद्रीय मुख्य भाग है, जहाँ भोजन का अधिकांश पाचन और मंथन होता है।

  4. पाइलोरिक / जठरनिर्गम भाग (Pyloric region):

    • यह आमाशय का निचला और अंतिम संकरा भाग है, जो छोटी आंत के पहले हिस्से (ग्रहणी / Duodenum) में खुलता है।

    • इसकेिकास पर पाइलोरिक स्पिंक्टर (Pyloric Sphincter) होता है, जो आमाशय से भोजन को नियंत्रित मात्रा (Chyme के रूप में) में छोटी आंत में जाने देता है।





2. आमाशय की भित्ति और जठर ग्रंथियां (Gastric Glands)

आमाशय की आंतरिक दीवार (म्यूकोसा परत) में लाखों सूक्ष्म ग्रंथियां होती हैं, जिन्हें जठर ग्रंथियां (Gastric Glands) कहा जाता है। ये ग्रंथियां जठर रस (Gastric Juice) का स्राव करती हैं। जठर ग्रंथियों की प्रमुख कोशिकाएं निम्नलिखित हैं:

  • (क) श्लेष्म या म्यूकस कोशिकाएं (Mucus Neck Cells):

    • ये श्लेष्म (Mucus) का स्राव करती हैं। यह म्यूकस आमाशय की आंतरिक दीवार पर एक सुरक्षित परत बनाता है, जो आमाशय को उसके अपने ही प्रबल हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) के प्रभाव से बचाता है (ताकि आमाशय की दीवार खुद न पचे)।

  • (ख) ऑक्सिंटिक या पैराइटल कोशिकाएं (Oxyntic / Parietal Cells):

    • ये हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) और कैसल का इंट्रिंसिक कारक (Castle's Intrinsic Factor) स्रावित करती हैं।

    • कार्य: HCl माध्यम को अत्यधिक अम्लीय (pH 1.8 - 3.0) बनाता है, जिससे भोजन के साथ आए हानिकारक बैक्टीरिया नष्ट हो जाते हैं और निष्क्रिय पेप्सिनोजेन सक्रिय पेप्सिन में बदलता है। इंट्रिंसिक कारक विटामिन B12 के अवशोषण में मदद करता है।

  • (ग) मुख्य या ज़ाइमोजीन कोशिकाएं (Chief / Peptic / Zymogen Cells):

    • ये पेप्सिनोजेन (Pepsinogen) और प्रोरेनिन (Prorenin) जैसे निष्क्रिय पाचक एंजाइमों का स्राव करती हैं। HCl के संपर्क में आते ही ये सक्रिय पेप्सिन और रेनिन में बदल जाते हैं।

3. आमाशय के मुख्य कार्य (Functions of Stomach)

  1. भोजन का भंडारण: आमाशय भोजन को 3 से 4 घंटे तक संग्रहित रखता है, जिससे हमें बार-बार खाने की आवश्यकता नहीं पड़ती।

  2. यांत्रिक मंथन (Mechanical Churning): आमाशय की पेशीय दीवारें भोजन को जठर रस के साथ अच्छी तरह मथकर एक गाढ़े अर्ध-तरल पेस्ट में बदल देती हैं, जिसे काइम (Chyme) कहते हैं।

  3. प्रोटीन का पाचन: यहाँ पेप्सिन एंजाइम प्रोटीन को छोटे टुकड़ों (पेप्टोन्स) में तोड़ता है।

  4. शिशुओं में दूध का पाचन: शिशुओं के आमाशय में 'रेनिन' और 'लाइपेज' सक्रिय होते हैं जो दूध के प्रोटीन (कैसीन) को पचाने में मदद करते हैं।

नोट: आमाशय की आंतरिक परत पर यदि म्यूकस का स्राव कम हो जाए, तो HCl के कारण घाव हो जाते हैं, जिन्हें पेप्टिक अल्सर (Peptic Ulcer) कहा जाता है।


छोटी आंत (Small Intestine) 


मानव आहार नाल का सबसे लंबा और महत्वपूर्ण भाग छोटी आंत (Small Intestine) है। इसकी लंबाई औसतन 6 से 7 मीटर होती है, लेकिन यह अत्यधिक कुंडलित (Coiled) होने के कारण उदर गुहा में एक सीमित स्थान पर व्यवस्थित रहती है।

1. छोटी आंत की संरचना (Structure of Small Intestine)

छोटी आंत को मुख्य रूप से तीन भागों में विभाजित किया गया है:

(क) ग्रहणी (Duodenum):

  • यह छोटी आंत का पहلا और सबसे छोटा भाग (लगभग 25 सेमी लंबा) है, जो 'C' आकार का होता है।

  • आमाशय से निकलने वाला अर्ध-पचा भोजन (काइम) सबसे पहले यहीं आता है।

  • यहीं पर यकृत (Liver) से आने वाली पित्त वाहिका (Bile duct) और अग्न्याशय (Pancreas) से आने वाली अग्नाशयी वाहिका (Pancreatic duct) एक संयुक्त नली के रूप में खुलती हैं।

(ख) जेजुनम (Jejunum):

  • यह छोटी आंत का मध्य भाग है, जो लगभग 2.5 मीटर लंबा होता है।

  • यहाँ भोजन का रासायनिक पाचन और अधिकांश अवशोषण की प्रक्रिया तेजी से होती है।

(न) इलियम (Ileum):

  • यह छोटी आंत का अंतिम, सबसे लंबा और कुंडलित भाग (लगभग 3.5 मीटर) है।

  • यह बड़ी आंत के सीकम (Caecum) भाग में जाकर खुलती है। भोजन का जो हिस्सा यहाँ तक नहीं पचता या अवशोषित नहीं होता, उसे बड़ी आंत में भेज दिया जाता है।

2. आंतरिक भित्ति की विशेषता (Villi and Microvilli)

  • छोटी आंत की आंतरिक दीवार (म्यूकोसा) पर हजारों उंगली जैसी छोटी-छोटी उभारनुमा संरचनाएं पाई जाती हैं, जिन्हें रसांकुर (Villi / विलाई) कहते हैं।

  • प्रत्येक विलाई की सतह पर और भी सूक्ष्म उभार होते हैं जिन्हें माइक्रोविलाई (Microvilli) कहा जाता है।

  • महत्व: ये विलाई और माइक्रोविलाई अवशोषण के लिए उपलब्ध सतही क्षेत्रफल (Surface Area) को कई गुना बढ़ा देते हैं, जिससे पचे हुए पोषक तत्वों का रक्त में तेजी से अवशोषण होता है। प्रत्येक विलाई के अंदर रक्त केशिकाओं (Blood capillaries) और लसिका वाहिकाओं (Lacteals) का जाल होता है।

3. छोटी आंत के मुख्य कार्य (Functions of Small Intestine)

छोटी आंत पाचन तंत्र का केंद्रीय केंद्र है क्योंकि यहाँ भोजन का पाचन और अवशोषण दोनों पूर्ण होते हैं:

(क) भोजन का पूर्ण पाचन (Complete Digestion):

ग्रहणी में यकृत और अग्न्याशय के रस मिलते हैं, तथा छोटी आंत की अपनी ग्रंथियां आंत्र रस (Succus Entericus) स्रावित करती हैं:

  1. कार्बोहाइड्रेट का पाचन: आंत्र रस के एंजाइम (जैसे माल्टेज़, सुक्रेज़, लैक्टेज) कार्बोहाइड्रेट को पूरी तरह से ग्लूकोज में बदल देते हैं।

  2. प्रोटीन का पाचन: यहाँ मौजूद पेप्टिडेज़ एंजाइम प्रोटीन और पेप्टोन्स को अंतिम रूप से अमीनो एसिड में तोड़ देते हैं।

  3. वसा का पाचन: यकृत से आए पित्त रस द्वारा वसा का पायसीकरण (Emulsification) होता है, और अग्नाशयी व आंत्र रस का लाइपेज एंजाइम इसे वसीय अम्ल (Fatty Acids) और ग्लिसरोल में बदल देता है।

(ख) पोषक तत्वों का अवशोषण (Absorption of Nutrients):

  • ग्लूकोज, अमीनो एसिड, खनिज और जल का अवशोषण सीधे रक्त वाहिकाओं के माध्यम से होता है।

  • वसीय अम्ल और ग्लिसरोल पानी में अघुलनशील होने के कारण पहले लसिका वाहिकाओं (लैक्टियल्स / Lacteals) द्वारा अवशोषित किए जाते हैं और बाद में रक्त परिसंचरण में मिलते हैं।



बड़ी आंत (Large Intestine) 


छोटी आंत के बाद आहार नाल का अगला और अंतिम प्रमुख हिस्सा बड़ी आंत (Large Intestine) कहलाता है। इसे बड़ी आंत इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसकी चौड़ाई ( व्यास) छोटी आंत से अधिक होती है, हालांकि इसकी लंबाई छोटी आंत की तुलना में काफी कम (लगभग 1.5 मीटर) होती है।

1. बड़ी आंत की संरचना (Structure of Large Intestine)

बड़ी आंत को मुख्य रूप से तीन भागों में विभाजित किया गया है:

(क) सीकम (Caecum):

  • यह बड़ी आंत का पहला छोटा थैलेनुमा भाग है, जहाँ छोटी आंत (इलियम) आकर मिलती है।

  • सीकम के पास से एक उंगली जैसी संकरी, नलीनुमा संरचना निकलती है जिसे वर्मीफॉर्म अपेंडिक्स (Vermiform Appendix) कहा जाता है। यह मनुष्य में एक अवशेषी अंग (Vestigial Organ) है, जिसका पाचन में अब कोई सक्रिय कार्य नहीं बचा है।

(ख) कोलन (Colon):

  • यह बड़ी आंत का सबसे लंबा और मुख्य हिस्सा है। इसे चार भागों में बांटा गया है:

    1. आरोही कोलन (Ascending colon): जो ऊपर की ओर जाता है।

    2. अनुप्रस्थ कोलन (Transverse colon): जो क्षैतिज रूप से होता है।

    3. अवरोही कोलन (Descending colon): जो नीचे की ओर आता है।

    4. सिग्मॉइड कोलन (Sigmoid colon): 'S' आकार का अंतिम घुमावदार हिस्सा जो मलाशय तक जाता है।

(ग) मलाशय और गुदा (Rectum and Anus):

  • मलाशय (Rectum): यह बड़ी आंत का अंतिम भाग है, जहाँ कुछ समय के लिए बिना पचा हुआ अपशिष्ट पदार्थ (मल / Faeces) अस्थायी रूप से संचित रहता है।

  • गुदा (Anus): यह शरीर का अंतिम द्वार है जिसके माध्यम से मल को समय-समय पर शरीर से बाहर त्याग दिया जाता है। गुदा पर पेशीय अवरोधनी (Anal Sphincters) होती हैं जो मल त्याग पर नियंत्रण रखती हैं।

2. बड़ी आंत के मुख्य कार्य (Functions of Large Intestine)

छोटी आंत में भोजन के पचने और पोषक तत्वों के अवशोषण के बाद जो बचा हुआ अपशिष्ट (Waste) बड़ी आंत में आता है, उसमें बड़ी आंत निम्नलिखित महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है:

(क) जल और खनिजों का अवशोषण (Absorption of Water and Minerals):

  • बड़ी आंत का सबसे महत्वपूर्ण कार्य बचे हुए अवांछित पदार्थ से अतिरिक्त पानी (Water) और कुछ लवणों (Minerals) का अवशोषण करना है।

  • यदि किसी कारण से बड़ी आंत पर्याप्त जल अवशोषित नहीं कर पाती, तो मल पतला हो जाता है (जिसे डायरिया या दस्त कहते हैं), और यदि आंत बहुत अधिक जल अवशोषित कर ले, तो मल बहुत सख्त हो जाता है जिससे कब्ज (Constipation) की समस्या होती है।

(ख) श्लेष्म (Mucus) का स्राव:

  • बड़ी आंत की दीवारें म्यूकस का स्राव करती हैं, जो बचे हुए कठोर अपशिष्ट पदार्थों को चिकना और आपस में चिपकाकर मल के रूप में आगे बढ़ने में मदद करता है।

(ग) सहजीवी बैक्टीरिया द्वारा विटामिन संश्लेषण:

  • बड़ी आंत में कुछ लाभदायक बैक्टीरिया (जैसे Escherichia coli / E. coli) पाए जाते हैं, जो बिना पचे भोजन पर क्रिया करके विटामिन K और विटामिन B-complex (विशेषकर B12) का संश्लेषण करते हैं, जिन्हें शरीर द्वारा अवशोषित कर लिया जाता है।

(घ) मलनिसारण (Defecation):

  • अपशिष्ट पदार्थ (मल) जब मलाशय में एकत्र हो जाता है, तो तंत्रिका संकेतों के माध्यम से मस्तिष्क को सूचना मिलती है और गुदा द्वार के माध्यम से इसे शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है।

2. UPSC और अन्य सिविल सेवा परीक्षाओं के दृष्टिकोण से पाचक ग्रंथियों (Digestive Glands) और उनके स्रावों का विस्तृत और व्यवस्थित विवरण नीचे दिया गया है।


मानव शरीर में भोजन के रासायनिक पाचन के लिए कई ग्रंथियां अपने पाचक रस स्रावित करती हैं। इन्हें मुख्य रूप से निम्नलिखित श्रेणियों में बांटा गया है:

पाचक ग्रंथियाँ और उनके स्राव (Digestive Glands & Their Secretions)

1. लार ग्रंथियाँ (Salivary Glands)

मनुष्य के मुख गुहा में 3 जोड़ी लार ग्रंथियाँ पाई जाती हैं—पैरोटिड (Parotid), सबमैक्सिलरी (Submandibular), और सबलिंग्वल (Sublingual)।

  • स्राव: लार (Saliva) (दैनिक स्राव लगभग 1 से 1.5 लीटर)।

  • लार की प्रकृति: हल्की अम्लीय (pH लगभग 6.8)।

  • प्रमुख घटक और एंजाइम:

    1. टायलिन / सेलिबरी एमाइलेज (Ptyalin / Salivary Amylase): यह जटिल स्टार्च (मंड) को सरल शर्करा (माल्टोज़) में तोड़ता है।

    2. लाइसोज़ाइम (Lysozyme): यह एक प्रतिजीवाणु (Antibacterial) एंजाइम है जो भोजन के साथ आए हानिकारक बैक्टीरिया और सूक्ष्मजीवों को नष्ट करता है।

    3. श्लेष्म (Mucus): भोजन को चिकना और लसदार बनाता है ताकि उसे आसानी से निगला जा सके।

2. जठर ग्रंथियां (Gastric Glands)

ये आमाशय की आंतरिक दीवार (म्यूकोसा) में स्थित सूक्ष्म ग्रंथियां होती हैं।

  • स्राव: जठर रस (Gastric Juice)

  • प्रमुख कोशिकाएं और उनके स्राव:

    1. ऑक्सिंटिक / पैराइटल कोशिकाएं (Parietal Cells):

      • स्राव: हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl)

      • कार्य: माध्यम को अत्यधिक अम्लीय बनाता है, हानिकारक बैक्टीरिया मारता है और निष्क्रिय पेप्सिनोजेन को सक्रिय पेप्सिन में बदलता है।

      • स्राव: कैसल का इंट्रिंसिक कारक (विटामिन B12 के अवशोषण में सहायक)।

    2. मुख्य / पेप्टिक कोशिकाएं (Chief / Peptic Cells):

      • स्राव: पेप्सिनोजेन और प्रोरेनिन (निष्क्रिय एंजाइम)। सक्रिय होने पर पेप्सिन प्रोटीन का पाचन करता है और रेनिन दूध के प्रोटीन (कैसीन) को पचाता है।

    3. म्यूकस कोशिकाएं (Mucus Cells):

      • स्राव: श्लेष्म (Mucus)

      • कार्य: आमाशय की दीवार को HCl के तेज़ अम्ल से सुरक्षित रखता है।

3. यकृत (Liver) - शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि

यकृत मानव शरीर की सबसे बड़ी ठोस ग्रंथि है, जो पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में स्थित होती है।

  • स्राव: पित्त रस (Bile Juice) (यह पित्ताशय / Gallbladder में संग्रहित होता है)।

  • विशेषता: पित्त रस में कोई पाचक एंजाइम नहीं होता है।

  • प्रमुख घटक और कार्य:

    1. पित्त वर्णक (Bilirubin & Biliverdin): हीमोग्लोबिन के टूटने से बनते हैं (जो मल को पीला रंग देते हैं)।

    2. पित्त लवण (Bile Salts): ये वसा की बड़ी बूंदों को छोटी बूंदों में तोड़ते हैं, जिसे वसा का पायसीकरण (Emulsification of Fats) कहा जाता है। यह लाइपेज एंजाइम के काम को आसान बनाता है।

    3. यह माध्यम को क्षारीय (Alkaline) बनाता है ताकि अग्नाशयी एंजाइम सही से काम कर सकें।

4. अग्न्याशय (Pancreas)


यह शरीर की दूसरी सबसे बड़ी ग्रंथि है और एक मिश्रित ग्रंथि (Mixed Gland) है क्योंकि यह अंतःस्रावी (हॉर्मोन ) और बहिःस्रावी (एंजाइम) दोनों रूप में कार्य करती है।

  • स्राव: अग्नाशयी रस (Pancreatic Juice)

  • प्रमुख पाचक एंजाइम:

    1. ट्रिप्सिनोजेन / ट्रिप्सिन (Trypsin): प्रोटीन और पेप्टोन्स को पॉलीपेप्टाइड और अमीनो एसिड में तोड़ता है।

    2. अग्नाशयी एमाइलेज (Pancreatic Amylase): बचे हुए स्टार्च को डाइसैकेराइड में बदलता है।

    3. लाइपेज (Lipase): पायसीकृत वसा को वसीय अम्ल और ग्लिसरोल में तोड़ता है।

    4. न्युक्लियस (Nucleases): न्यूक्लिक एसिड (DNA और RNA) को न्यूक्लियोटाइड्स में तोड़ते हैं।

5. आंत की ग्रंथियां (Intestinal Glands / Crypts of Lieberkühn)

छोटी आंत की दीवारों में स्थित ग्रंथियां आंत्र रस का स्राव करती हैं।

  • स्राव: आंत्र रस (Succus Entericus)

  • प्रमुख एंजाइम और कार्य:

    1. माल्टेज़ (Maltase): माल्टोज़ को ग्लूकोज में बदलता है।

    2. सुक्रेज़ (Sucrase): सुक्रोज को ग्लूकोज और फ्रुक्टोज में बदलता है।

    3. लैक्टेज (Lactase): लैक्टोज (दूध की शर्करा) को ग्लूकोज और गैलेक्टोज़ में बदलता है।

    4. पेप्टिडेज़ (Peptidases): पेप्टाइड्स को अंतिम रूप से अमीनो एसिड में बदल देते हैं, जिससे पाचन पूर्ण हो जाता है।


 पाचन तंत्र से जुड़े प्रमुख रोग और विकार


  • पीलिया (Jaundice): यकृत की खराबी के कारण रक्त में पित्त वर्णक (Bilirubin) की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे त्वचा और आँखें पीली हो जाती हैं।

  • अम्लता (Acidity / GERD): आमाशय में HCl का अत्यधिक स्राव होना।

  • कब्ज (Constipation): कोलन में मल का रुक जाना, जिससे मल त्याग कठिन हो जाता है।

  • दस्त (Diarrhea): आंतों द्वारा जल का सही से अवशोषण न होना।

परीक्षा के लिए कुछ महत्वपूर्ण बिंदु (Quick Facts)


  • पाचन की शुरुआत: मुख गुहा से (स्टार्च का पाचन)।

  • प्रोटीन का पाचन शुरू: आमाशय से।

  • पाचन की समाप्ति (पूर्ण पाचन): छोटी आंत (ग्रहणी)।

  • एंजाइम मुक्त रस: पित्त रस (Bile Juice)।

बहुविकल्पीय प्रश्न और विस्तृत व्याख्यात्मक हल



Q.1 मानव दंत विन्यास (Dentition) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. मनुष्य के दाँत जबड़ों की हड्डियों के खांचों में धंसे होते हैं, जिसे 'गर्तदंती' (Thecodent) कहा जाता है।

  2. मनुष्य अपने जीवनकाल में केवल एक ही बार दाँत प्राप्त करता है, जिसे 'मोनोफायोडॉन्ट' (Monophyodont) कहते हैं।

  • उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?

  • (अ) केवल 1

  • (ब) केवल 2

  • (स) 1 और 2 दोनों

  • (द) न तो 1, न ही 2

उत्तर: (अ) केवल 1
व्याख्या: कथन 1 सही है क्योंकि मानव दाँत जबड़े की अस्थि में धंसे होते हैं। कथन 2 गलत है क्योंकि मनुष्य द्विबारदंती (Diphyodont) होते हैं, यानी उनके जीवनकाल में दाँत दो बार निकलते हैं—पहले दूध के दाँत और बाद में स्थायी दाँत।

Q.2 वयस्क मनुष्य का सही स्थायी दंत सूत्र (Permanent Dental Formula) निम्नलिखित में से कौन सा है?

  • (अ) 2, 1, 2, 3 / 2, 1, 2, 3

  • (_) 2, 1, 0, 2 / 2, 1, 0, 2

  • (स) 2, 0, 2, 3 / 2, 0, 2, 3

  • (द) 3, 1, 3, 3 / 3, 1, 3, 3

उत्तर: (अ) 2, 1, 2, 3 / 2, 1, 2, 3
व्याख्या: वयस्क मनुष्य के एक जबड़े के आधे भाग का दंत सूत्र कृंतक (Incisors - 2), रद्दनक (Canines - 1), अग्रचवर्णक (Premolars - 2) और चवर्णक (Molars - 3) यानी $I:2, C:1, PM:2, M:3$ होता है। कुल मिलाकर यह 32 स्थायी दाँत बनाता है।

Q.3 बच्चों में पाए जाने वाले दूध के दाँतों (Deciduous Teeth) में निम्नलिखित में से कौन सा दंत प्रकार पूरी तरह से अनुपस्थित होता है?

  • (अ) कृंतक (Incisors)

  • (ब) रद्दनक (Canines)

  • (स) अग्रचवर्णक (Premolars)

  • (द) चवर्णक (Molars)

उत्तर: (स) अग्रचवर्णक (Premolars)
व्याख्या: बच्चों के दूध के दाँतों का सूत्र $2, 1, 0, 2 / 2, 1, 0, 2$ होता है, जिसका अर्थ है कि बच्चों में अग्रचवर्णक (Premolars) पूरी तरह अनुपस्थित होते हैं। बच्चों में कुल 20 दूध के दाँत होते हैं।

Q.4 दाँत का सबसे कठोर भाग कौन सा है जो मानव शरीर का भी सबसे मजबूत ऊतक है?

  • (अ) डेंटाइन (Dentine)

  • (ब) इनेमल (Enamel)

  • (स) पल्प (Pulp)

  • (द) सीमेंटम (Cementum)

उत्तर: (ब) इनेमल (Enamel)
व्याख्या: इनेमल दाँत का सबसे बाहरी सफेद आवरण है। यह कैल्शियम हाइड्रॉक्सीएपाटाइट से बना होता है और यह मानव शरीर का सबसे कठोर और मजबूत ऊतक है, जो चबाने के दौरान होने वाले घिसाव से दाँत की रक्षा करता है।

Q.5 मानव लार में पाया जाने वाला एंजाइम 'टायलिन' (Salivary Amylase) किस पाचक प्रक्रिया को शुरू करता है?

  • (अ) प्रोटीन का पाचन

  • (ब) वसा का पायसीकरण

  • (स) स्टार्च (मंड) का माल्टोज़ शर्करा में पाचन

  • (द) न्यूक्लिक एसिड का विघटन

उत्तर: (स) स्टार्च (मंड) का माल्टोज़ शर्करा में पाचन
व्याख्या: मुख गुहा में लार ग्रंथियों से निकलने वाला टायलिन (एमाइलेज) भोजन में मौजूद जटिल स्टार्च (मंड) के लगभग 30% हिस्से को डाइसैकेराइड (माल्टोज़) में तोड़ देता है। यही कारण है कि ज्यादा देर चबाने पर रोटी मीठी लगने लगती है।

Q.6 ग्रसिका (Oesophagus) से भोजन आमाशय तक किस विशेष क्रमागत पेशीय संकुचन के माध्यम से पहुँचता है?

  • (अ) विसरण (Diffusion)

  • (ब) क्रमाकुंचन (Peristalsis)

  • (स) परासरण (Osmosis)

  • (द) सक्रिय परिवहन (Active Transport)

उत्तर: (ब) क्रमाकुंचन (Peristalsis)
व्याख्या: ग्रसिका की भित्ति की पेशियों के क्रमिक संकुचन (Contraction) और शिथिलन (Relaxation) को क्रमाकुंचन कहते हैं, जिसके कारण भोजन एक तरंग के रूप में नीचे आमाशय की ओर धकेला जाता है।

Q.7 श्वास नली में भोजन के कणों को जाने से रोकने के लिए कौन सा संरचनात्मक ढक्कन कार्य करता है?

  • (अ) यूवला (Uvula)

  • (ब) एपिग्लॉइटिस (Epiglottis)

  • (स) ग्लोटिस (Glottis)

  • (द) पाइलोरिक स्पिंक्टर

उत्तर: (ब) एपिग्लॉइटिस (Epiglottis)
व्याख्या: ग्रसनी (Pharynx) में एपिग्लॉइटिस नामक एक लचीला उपास्थि (Cartilage) का ढक्कन होता है जो निगलते समय श्वास नली (Glottis) को ढक लेता है, जिससे भोजन केवल ग्रसिका में ही जाता है।

Q.8 आमाशय (Stomach) के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन असत्य है?

  • (अ) आमाशय अंग्रेजी के 'J' आकार का एक थैलेनुमा अंग है।

  • (ब) आमाशय की ऑक्सिंटिक कोशिकाओं से हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) स्रावित होता है।

  • (स) आमाशय में वसा का पूर्ण पाचन और अवशोषण होता है।

  • (द) आमाशय के प्रवेश द्वार पर कार्डियक स्पिंक्टर वाल्व होता है।

उत्तर: (स) आमाशय में वसा का पूर्ण पाचन और अवशोषण होता है।
व्याख्या: यह कथन असत्य है। आमाशय में मुख्य रूप से प्रोटीन का पाचन होता है (पेप्सिन द्वारा), वसा का पूर्ण पाचन और पोषक तत्वों का मुख्य अवशोषण छोटी आंत में होता है।

Q.9 आमाशय में स्रावित होने वाले हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) का मुख्य कार्य क्या है?

  • (अ) माध्यम को अम्लीय बनाना और निष्क्रिय पेप्सिनोजेन को सक्रिय पेप्सिन में बदलना

  • (ब) आमाशय की आंतरिक दीवार को सुरक्षा देना

  • (स) दूध के कैसीन प्रोटीन को पचाना

  • (द) कार्बोहाइड्रेट का ग्लूकोज में बदलना

उत्तर: (अ) माध्यम को अम्लीय बनाना और निष्क्रिय पेप्सिनोजेन को सक्रिय पेप्सिन में बदलना
व्याख्या: HCl माध्यम को अम्लीय (pH 1.8 - 3.0) बनाता है, जिससे भोजन के साथ आए हानिकारक बैक्टीरिया नष्ट होते हैं और पाचक एंजाइम पेप्सिनोजेन सक्रिय पेप्सिन में बदलकर प्रोटीन पाचन शुरू करता है।

Q.10 आमाशय की आंतरिक भित्ति को अपने ही प्रबल HCl अम्ल के प्रभाव से सुरक्षित रखने के लिए किसका स्राव होता है?

  • (अ) पित्त रस

  • (ब) श्लेष्म (Mucus)

  • (स) ट्रिप्सिन

  • (द) इंसुलिन

उत्तर: (ब) श्लेष्म (Mucus)
व्याख्या: आमाशय की म्यूकस कोशिकाओं द्वारा स्रावित श्लेष्म (Mucus) आमाशय की आंतरिक दीवार पर एक रक्षक आवरण बनाता है, जो इसे HCl के संक्षारक प्रभाव से बचाता है।

Q.11 नवजात शिशुओं में दूध के पाचन के लिए आमाशय में कौन सा विशेष एंजाइम स्रावित होता है?

  • (अ) पेप्सिन

  • (ब) रेनिन (Rennin)

  • (स) एमाइलेज

  • (द) लाइपेज

उत्तर: (ब) रेनिन (Rennin)
व्याख्या: बच्चों के आमाशय में प्रोरेनिन/रेनिन एंजाइम स्रावित होता है, जो दूध में घुले हुए प्रोटीन (कैसीन) को कैल्सियम पैराकैसिनेट में बदलकर दही के रूप में जमा देता है ताकि उसका आसानी से पाचन हो सके।

Q.12 आमाशय से भोजन के बाहर निकलने की प्रक्रिया को नियंत्रित करने वाला पेशीय वाल्व (Sphincter) कौन सा है?

  • (अ) कार्डियक स्पिंक्टर

  • (ब) पाइलोरिक स्पिंक्टर (Pyloric Sphincter)

  • (स) इलियोसीकल वाल्व

  • (द) ओडिए की अवरोधनी

उत्तर: (ब) पाइलोरिक स्पिंक्टर (Pyloric Sphincter)
व्याख्या: आमाशय का अंतिम भाग पाइलोरिक क्षेत्र कहलाता है, जिसके द्वार पर पाइलोरिक स्पिंक्टर होता है। यह आमाशय से पचे हुए अर्ध-तरल भोजन (काइम) को नियंत्रित मात्रा में छोटी आंत (ग्रहणी) में जाने देता है।

Q.13 मानव शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि (Gland) कौन सी है?

  • (अ) अग्न्याशय (Pancreas)

  • (ब) यकृत (Liver)

  • (स) लार ग्रंथि

  • (द) थायराइड

उत्तर: (ब) यकृत (Liver)
व्याख्या: यकृत मानव शरीर की सबसे बड़ी ठोस ग्रंथि है, जो पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में स्थित होती है। यह पित्त रस का निर्माण करती है और कई चयापचय क्रियाओं का केंद्र है।

Q.14 पित्त रस (Bile Juice) के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?

  • (अ) इसमें शक्तिशाली पाचक एंजाइम होते हैं।

  • (ब) यह वसा का पायसीकरण (Emulsification) करता है और इसमें कोई एंजाइम नहीं होता।

  • (स) यह आमाशय में स्रावित होता है।

  • (द) यह रक्त में ग्लूकोज की मात्रा नियंत्रित करता है।

उत्तर: (ब) यह वसा का पायसीकरण करता है और इसमें कोई एंजाइम नहीं होता।
व्याख्या: पित्त रस का निर्माण यकृत में होता है और यह पित्ताशय में जमा रहता है। इसमें किसी भी प्रकार का पाचक एंजाइम नहीं होता, लेकिन इसके पित्त लवण वसा की बड़ी बूंदों को छोटी बूंदों में तोड़ते हैं (पायसीकरण)।

Q.15 मानव शरीर की कौन सी ग्रंथि अंतःस्रावी (Endocrine) और बहिःस्रावी (Exocrine) दोनों रूपों में कार्य करती है?

  • (अ) यकृत

  • (ब) अग्न्याशय (Pancreas)

  • (स) पिट्यूटरी

  • (द) अधिवृक्क (Adrenal)

उत्तर: (ब) अग्न्याशय (Pancreas)
व्याख्या: अग्न्याशय एक मिश्रित ग्रंथि (Mixed Gland) है। इसका बहिःस्रावी हिस्सा अग्नाशयी रस (एंजाइम) स्रावित करता है और अंतःस्रावी हिस्सा (लैंगरहैंस की द्वीपिकाएं) इंसुलिन और ग्लूकागन हॉर्मोन स्रावित करता है।

Q.16 अग्नाशयी रस में पाए जाने वाले पाचक एंजाइमों का मुख्य समुच्चय कौन सा है?

  • (अ) टायलिन, पेप्सिन, रेनिन

  • (ब) ट्रिप्सिन, अग्नाशयी एमाइलेज, लाइपेज

  • (स) माल्टेज़, सुक्रेज़, लैक्टेज

  • (द) पेप्सिन, ट्रिप्सिन, हाइड्रोक्लोरिक अम्ल

उत्तर: (ब) ट्रिप्सिन, अग्नाशयी एमाइलेज, लाइपेज
व्याख्या: अग्नाशयी रस में ट्रिप्सिन (प्रोटीन पाचक), अग्नाशयी एमाइलेज (कार्बोहाइड्रेट पाचक) और लाइपेज (वसा पाचक) प्रमुख एंजाइम होते हैं, इसलिए इसे 'पूर्ण पाचक रस' के करीब माना जाता है।

Q.17 छोटी आंत (Small Intestine) की लंबाई औसतन कितनी होती है?

  • (अ) 1.5 मीटर

  • (ब) 3 मीटर

  • (स) 6 से 7 मीटर

  • (द) 10 मीटर से अधिक

उत्तर: (स) 6 से 7 मीटर
व्याख्या: छोटी आंत आहार नाल का सबसे लंबा भाग है, जिसकी लंबाई लगभग 6 से 7 मीटर होती है, लेकिन अत्यधिक कुंडलित होने के कारण यह उदर गुहा में कम जगह घेरती है।

Q.18 छोटी आंत के आंतरिक भाग में उंगली जैसी दिखने वाली संरचनाएं, जो अवशोषण का क्षेत्रफल बढ़ाती हैं, क्या कहलाती हैं?

  • (अ) विलाई / रसांकुर (Villi)

  • (ब) नेफ्रॉन (Nephrons)

  • (स) एल्वियोलाई (Alveoli)

  • (द) सिस्टर्ना चाइली

उत्तर: (अ) विलाई / रसांकुर (Villi)
व्याख्या: छोटी आंत की आंतरिक दीवार पर हजारों सूक्ष्म उंगली जैसी संरचनाएं होती हैं जिन्हें विलाई (Villi) कहा जाता है। इनके माध्यम से पचे हुए पोषक तत्वों का रक्त में तेजी से अवशोषण होता है।

Q.19 वसा के पचे हुए अंश (वसीय अम्ल और ग्लिसरोल) का अवशोषण छोटी आंत में मुख्य रूप से किसके द्वारा होता है?

  • (अ) रक्त केशिकाएं (Blood capillaries)

  • (ब) लसिका वाहिकाएं / लैक्टियल्स (Lacteals)

  • (स) यकृत शिरा

  • (द) वृक्क धमनी

उत्तर: (ब) लसिका वाहिकाएं / लैक्टियल्स (Lacteals)
व्याख्या: जबकि ग्लूकोज और अमीनो एसिड का अवशोषण सीधे रक्त केशिकाओं द्वारा होता है, पानी में अघुलनशील वसीय अम्ल और ग्लिसरोल पहले छोटी आंत की विलाई में स्थित लसिका वाहिकाओं (Lacteals) द्वारा अवशोषित किए जाते हैं।

Q.20 निम्नलिखित में से कौन सा आंत्र रस (Succus Entericus) का एंजाइम कार्बोहाइड्रेट (माल्टोज़) को ग्लूकोज में बदलता है?

  • (अ) पेप्टिडेज़

  • (ब) माल्टेज़ (Maltase)

  • (स) लाइपेज

  • (द) ट्रिप्सिन

उत्तर: (ब) माल्टेज़ (Maltase)
व्याख्या: छोटी आंत की ग्रंथियों द्वारा स्रावित आंत्र रस में मौजूद 'माल्टेज़' एंजाइम माल्टोज़ को सरल ग्लूकोज इकाइयों में बदल देता है। सुक्रेज़ सुक्रोज को और लैक्टेज लैक्टोज को पचाता है।

Q.21 बड़ी आंत (Large Intestine) की कुल लंबाई लगभग कितनी होती है?

  • (अ) 0.5 मीटर

  • (ब) 1.5 मीटर

  • (स) 4 मीटर

  • (द) 6 मीटर

उत्तर: (ब) 1.5 मीटर
व्याख्या: बड़ी आंत की चौड़ाई (व्यास) छोटी आंत से अधिक होती है, लेकिन इसकी लंबाई अपेक्षाकृत कम यानी लगभग 1.5 मीटर होती है।

Q.22 बड़ी आंत के प्रथम भाग (सीकम) से निकलने वाली उंगली जैसी अवशेषी संरचना क्या कहलाती है?

  • (अ) गॉल ब्लैडर

  • (ब) वर्मीफॉर्म अपेंडिक्स (Vermiform Appendix)

  • (स) स्प्लेंनिक फ्लेक्चर

  • (द) पैंक्रियाटिक डक्ट

उत्तर: (ब) वर्मीफॉर्म अपेंडिक्स (Vermiform Appendix)
व्याख्या: सीकम से जुड़ी वर्मीफॉर्म अपेंडिक्स एक अवशेषी अंग (Vestigial Organ) है, जो मानव पूर्वजों में सेलूलोज़ के पाचन में सहायक थी, लेकिन अब इसका पाचन में कोई सक्रिय योगदान नहीं है।

Q.23 बड़ी आंत का मुख्य कार्य निम्नलिखित में से क्या है?

  • (अ) प्रोटीन का पाचन करना

  • (ब) जल और कुछ खनिजों का अवशोषण करना

  • (स) पित्त रस का निर्माण करना

  • (द) वसा का पूर्ण पाचन करना

उत्तर: (ब) जल और कुछ खनिजों का अवशोषण करना
व्याख्या: बड़ी आंत में मुख्य रूप से बिना पचे अपशिष्ट से अतिरिक्त पानी और कुछ खनिज लवणों का अवशोषण होता है, तथा मल का निर्माण होता है।

Q.24 बड़ी आंत में पाए जाने वाले कौन से सहजीवी बैक्टीरिया विटामिन K और विटामिन B-कॉप्लेक्स का संश्लेषण करते हैं?

  • (अ) लैक्टोबैसिलस

  • (ब) एस्चेरिचिया कोलाई (E. coli)

  • (स) राइजोबियम

  • (द) विब्रियो कोलेरा

उत्तर: (ब) एस्चेरिचिया कोलाई (E. coli)
व्याख्या: बड़ी आंत में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले E. coli जैसे सहजीवी बैक्टीरिया अपशिष्ट पदार्थों पर क्रिया करके विटामिन K और विटामिन B12 का संश्लेषण करते हैं, जिन्हें शरीर द्वारा अवशोषित कर लिया जाता है।

Q.25 यकृत की खराबी या पित्त वाहिका के अवरुद्ध होने से रक्त में किस पित्त वर्णक (Bile Pigment) की मात्रा बढ़ने पर पीलिया (Jaundice) हो जाता है?

  • (अ) हीमोग्लोबिन

  • (ब) बिलिरुबिन (Bilirubin)

  • (स) कैरोटीन

  • (द) मेलानिन

उत्तर: (ब) बिलिरुबिन (Bilirubin)
व्याख्या: आरबीसी (RBC) के टूटने से बने बिलिरुबिन वर्णक को जब यकृत ठीक से उत्सर्जित नहीं कर पाता (यकृत की बीमारी या पित्त नली में रुकावट के कारण), तो यह रक्त में मिल जाता है जिससे त्वचा और आँखें पीली हो जाती हैं (पीलिया)।

Q.26 आमाशय की आंतरिक दीवार पर होने वाले घाव या अल्सर का मुख्य कारण सामान्यतः किस बैक्टीरिया का संक्रमण माना जाता है?

  • (अ) हेलिकोबैक्टर पाइलोरी (H. pylori)

  • (ब) साल्मोनेला टाइफी

  • (स) माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस

  • (द) स्ट्रेप्टोकोकस

उत्तर: (अ) हेलिकोबैक्टर पाइलोरी (H. pylori)
व्याख्या: पेप्टिक अल्सर (आमाशय या ग्रहणी का घाव) मुख्य रूप से Helicobacter pylori नामक जीवाणु के संक्रमण या अत्यधिक एसिडिटी के कारण आमाशय की म्यूकस परत के क्षतिग्रस्त होने से होता है।

Q.27 मानव आहार नाल का सही क्रमानुसार मार्ग कौन सा है?

  • (अ) मुँह $\rightarrow$ ग्रसिका $\rightarrow$ आमाशय $\rightarrow$ छोटी आंत $\rightarrow$ बड़ी आंत

  • (ब) मुँह $\rightarrow$ आमाशय $\rightarrow$ ग्रसिका $\rightarrow$ बड़ी आंत $\rightarrow$ छोटी आंत

  • (स) मुँह $\rightarrow$ छोटी आंत $\rightarrow$ बड़ी आंत $\rightarrow$ आमाशय $\rightarrow$ ग्रसिका

  • (द) ग्रसिका $\rightarrow$ मुँह $\rightarrow$ आमाशय $\rightarrow$ बड़ी आंत $\rightarrow$ छोटी आंत

उत्तर: (अ) मुँह $\rightarrow$ ग्रसिका $\rightarrow$ आमाशय $\rightarrow$ छोटी आंत $\rightarrow$ बड़ी आंत
व्याख्या: पाचन तंत्र की मुख्य आहार नाल (Alimentary Canal) मुख गुहा से शुरू होकर ग्रसनी, ग्रसिका, आमाशय, छोटी आंत, बड़ी आंत और अंत में मलाशय व गुदा तक जाती है।

Q.28 छोटी आंत का सबसे पहला भाग, जहाँ यकृत और अग्न्याशय की वाहिकाएं आकर मिलती हैं, क्या कहलाता है?

  • (अ) जेजुनम

  • (ब) ग्रहणी (Duodenum)

  • (स) इलियम

  • (द) सीकम

उत्तर: (ब) ग्रहणी (Duodenum)
व्याख्या: छोटी आंत का पहला भाग 'C' आकार की ग्रहणी (Duodenum) है, जहाँ यकृत से पित्त रस और अग्न्याशय से अग्नाशयी रस संयुक्त रूप से एक नली के माध्यम से गिरते हैं।

Q.29 निम्नलिखित में से कौन सा पाचक रस बिना किसी एंजाइम के भी वसा के पाचन में मदद करता है?

  • (अ) जठर रस

  • (ब) पित्त रस (Bile Juice)

  • (स) आंत्र रस

  • (द) लार

उत्तर: (ब) पित्त रस (Bile Juice)
व्याख्या: पित्त रस में कोई पाचक एंजाइम नहीं होता, लेकिन इसमें मौजूद पित्त लवण वसा की बड़ी बूंदों को पायसीकृत (Emulsify) करके लाइपेज एंजाइम के लिए उसका सतही क्षेत्रफल बढ़ा देते हैं।

Q.30 पचे हुए भोजन का सर्वाधिक अवशोषण (Absorption) मानव शरीर में कहाँ होता है?

  • (अ) आमाशय

  • (ब) बड़ी आंत

  • (स) छोटी आंत (Small Intestine)

  • (द) ग्रसिका

उत्तर: (स) छोटी आंत (Small Intestine)
व्याख्या: छोटी आंत में विलाई और माइक्रोविलाई की उपस्थिति के कारण अवशोषण का क्षेत्रफल बहुत अधिक होता है, और पचे हुए पोषक तत्वों का 90% से अधिक भाग यहीं अवशोषित होता है।

Q.31 पाचक एंजाइमों और उनके स्रोतों के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:

  1. पेप्सिन - जठर ग्रंथियां (आमाशय)

  2. ट्रिप्सिन - अग्न्याशय

  3. माल्टेज़ - लार ग्रंथियां

  • उपर्युक्त युग्मों में से कौन-सा/से सही सुमेलित है/हैं?

  • (अ) केवल 1 और 2

  • (ब) केवल 2 और 3

  • (स) केवल 1 और 3

  • (द) 1, 2 और 3

उत्तर: (अ) केवल 1 और 2
व्याख्या: युग्म 1 और 2 सही हैं क्योंकि पेप्सिन आमाशय के जठर रस से और ट्रिप्सिन अग्नाशयी रस से स्रावित होता है। युग्म 3 गलत है क्योंकि 'माल्टेज़' आंत्र रस (छोटी आंत की ग्रंथियों) द्वारा स्रावित होता है, लार ग्रंथियों द्वारा नहीं।

Q.32 मानव शरीर में 'लेक्टेज़' (Lactase) एंजाइम का मुख्य कार्य क्या है?

  • (अ) सुक्रोज को ग्लूकोज और फ्रुक्टोज में तोड़ना

  • (ब) दूध की शर्करा (लैक्टोज) को ग्लूकोज और गैलेक्टोज में तोड़ना

  • (स) स्टार्च को माल्टोज में बदलना

  • (द) वसा को वसीय अम्ल में बदलना

उत्तर: (ब) दूध की शर्करा (लैक्टोज) को ग्लूकोज और गैलेक्टोज में तोड़ना
व्याख्या: लैक्टेज एक आंत्र एंजाइम है जो दूध में पाई जाने वाली प्राकृतिक शर्करा (लैक्टोज) का जलअपघटन करके उसे सरल शर्कराओं—ग्लूकोज और गैलेक्टोज—में परिवर्तित करता है।

Q.33 भोजन को निकलते समय उसे श्वास नली में जाने से रोकने वाली संरचना 'एपिग्लोटिस' (Epiglottis) मूल रूप से किस ऊतक की बनी होती है?

  • (अ) अस्थि (Bone)

  • (ब) उपास्थि (Cartilage)

  • (स) कंकाल पेशी (Skeletal Muscle)

  • (द) तंत्रिका ऊतक (Nervous Tissue)

उत्तर: (ब) उपास्थि (Cartilage)
व्याখ্যা: एपिग्लॉइटिस लचीली ह्यालिन या इलास्टिक उपास्थि (Cartilage) का बना एक फ्लैप या ढक्कन होता है, जो निगलने की प्रक्रिया के दौरान श्वास नली के द्वार (Glottis) को यांत्रिक रूप से बंद कर देता है।

Q.34 आमाशय में भोजन के साथ आने वाले सूक्ष्मजीवों और बैक्टीरिया को नष्ट करने में मुख्य रूप से कौन मदद करता है?

  • (अ) श्लेष्म (Mucus)

  • (ब) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl)

  • (स) टायलिन

  • (द) पित्त लवण

उत्तर: (ब) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl)
व्याख्या: आमाशय में स्रावित होने वाला HCl माध्यम को अत्यधिक अम्लीय बनाता है, जो अधिकांश ingested pathogens (जीवाणु और हानिकारक सूक्ष्मजीव) को मार देता है और भोजन को सड़ने से बचाता है।

Q.35 'क्रिप्ट्स ऑफ़ लीबरकुहिन' (Crypts of Lieberkühn) मानव शरीर में कहाँ पाए जाते हैं?

  • (अ) यकृत और अग्न्याशय के बीच

  • (ब) आमाशय की आंतरिक दीवार पर

  • (स) छोटी आंत के मकोसा की परतों के बीच

  • (द) बड़ी आंत के मलाशय में

उत्तर: (स) छोटी आंत के मकोसा की परतों के बीच
व्याख्या: क्रिप्ट्स ऑफ़ लीबरकुहिन छोटी आंत की म्यूकोसा की सतह पर विлай के आधार के बीच पाई जाने वाली नलिकाकार ग्रंथियां हैं, जो आंत्र रस (Succus Entericus) का स्राव करती हैं।

Q.36 वसा के पाचन में मदद करने वाले 'पित्त लवण' (Bile Salts) रासायनिक रूप से किसके व्युत्पन्न (Derivatives) होते हैं?

  • (अ) कोलेस्ट्रॉल

  • (ब) ग्लूकोज

  • (स) अमीनो एसिड

  • (द) वसीय अम्ल

उत्तर: (अ) कोलेस्ट्रॉल
व्याख्या: यकृत द्वारा निर्मित पित्त लवण (जैसे सोडियम ग्लाइकोकोलेट) रासायनिक रूप से कोलेस्ट्रॉल से उत्पन्न होते हैं। ये वसा की बड़ी बूंदों का पृष्ठीय तनाव कम करके उन्हें छोटी बूंदों (पायसीकरण) में बदलते हैं।

Q.37 निम्नलिखित में से कौन सा एंजाइम प्रोटीन को पूरी तरह से अमीनो एसिड में तोड़ने की अंतिम प्रक्रिया में भाग लेता है?

  • (अ) पेप्सिन

  • (ब) ट्रिप्सिन

  • (स) इरेप्सिन / पेप्टिडेज़ (Erepsin / Peptidases)

  • (द) रेनिन

उत्तर: (स) इरेप्सिन / पेप्टिडेज़ (Erepsin / Peptidases)
व्याख्या: आंत्र रस में मौजूद पेप्टिडेज़ (या इरेप्सिन) पेप्टाइड्स और पॉलीपेप्टाइड्स को उनके अंतिम सरल घटक यानी अमीनो एसिड में बदल देता है, जिससे प्रोटीन का पाचन पूरा होता है।

Q.38 आमाशय की भित्ति में पाई जाने वाली कौन सी कोशिकाएं 'कैसल का इंट्रिंसिक कारक' (Castle's Intrinsic Factor) स्रावित करती हैं?

  • (अ) मुख्य कोशिकाएं (Chief Cells)

  • (ब) पैराइटल या ऑक्सिंटिक कोशिकाएं (Parietal Cells)

  • (स) गोबलेट कोशिकाएं (Goblet Cells)

  • (द) अर्जेंटाफिन कोशिकाएं

उत्तर: (ब) पैराइटल या ऑक्सिंटिक कोशिकाएं (Parietal Cells)
व्याख्या: आमाशय की पैराइटल (ऑक्सिंटिक) कोशिकाएं HCl के साथ-साथ 'इंट्रिंसिक फैक्टर' भी स्रावित करती हैं, जो छोटी आंत में विटामिन B12 (सायनोकोबामिन) के अवशोषण के लिए अनिवार्य होता है। इसकी कमी से पर्णपाती एनीमिया (Pernicious Anemia) हो सकता है।

Q.39 मानव शरीर में 'एपेक्स' या वर्मीफॉर्म अपेंडिक्स (Vermiform Appendix) बड़ी आंत के किस भाग से जुड़ा होता है?

  • (अ) कोलन

  • (ब) सीकम (Caecum)

  • (स) मलाशय

  • (द) सिग्मॉइड कोलन

उत्तर: (ब) सीकम (Caecum)
व्याख्या: सीकम बड़ी आंत का पहला थैलेनुमा भाग है, जिसके निचले छोर से एक संकरी अंगुली जैसी नली निकलती है जिसे वर्मीफॉर्म अपेंडिक्स कहते हैं। यह मनुष्य में एक अवशेषी अंग है।

Q.40 भोजन के पाचन के संदर्भ में 'काइम' (Chyme) किसे कहा जाता है?

  • (अ) मुख में लार के साथ मिला भोजन

  • (ब) आमाशय में जठर रस के साथ मथा गया अर्ध-तरल पचता हुआ भोजन

  • (स) छोटी आंत से पूरी तरह अवशोषित होकर रक्त में पहुँचा पोषक तत्व

  • (द) बड़ी आंत में बचा हुआ ठोस अपशिष्ट मल

उत्तर: (ब) आमाशय में जठर रस के साथ मथा गया अर्ध-तरल पचता हुआ भोजन
व्याख्या: जब भोजन आमाशय में 3-4 घंटे रहकर जठर रस और HCl के साथ अच्छी तरह मथ दिया जाता है, तो इस गाढ़े अम्लीय अर्ध-तरल मिश्रण को काइम (Chyme) कहा जाता है।

Q.41 निम्नलिखित में से कौन सा हार्मोन अग्नाशयी रस और पित्त रस के स्राव को उत्तेजित करता है?

  • (अ) गैस्ट्रिन (Gastrin)

  • (ब) секреटिन और कोलीसिस्टोकिनीन (Secretin & CCK)

  • (स) इंसुलिन और ग्लूकागन

  • (द) थायराक्सिन

उत्तर: (ब) секреटिन और कोलीसिस्टोकिनीन (Secretin & CCK)
व्याख्या: जब काइम आमाशय से ग्रहणी (Duodenum) में प्रवेश करता है, तो छोटी आंत की म्यूकोसा से सिक्रेटिन और कोलीसिस्टोकिनीन (CCK) हॉर्मोन स्रावित होते हैं, जो अग्न्याशय से पाचक रस और पित्ताशय से पित्त रस के निष्कासन को प्रेरित करते हैं।

Q.42 मानव शरीर में वसा का पाचन मुख्य रूप से किस स्थान पर शुरू होता है और कहाँ समाप्त होता है?

  • (अ) मुख गुहा से शुरू होकर आमाशय में समाप्त

  • (ब) आमाशय से शुरू होकर छोटी आंत में समाप्त

  • (स) केवल छोटी आंत में (यकृत और अग्न्याशय के सहयोग से)

  • (द) बड़ी आंत में

उत्तर: (स) केवल छोटी आंत में (यकृत और अग्न्याशय के सहयोग से)
व्याख्या: हालांकि बच्चों के आमाशय में थोड़ा गैस्ट्रिक लाइपेज होता है, लेकिन वयסकों में वसा का पाचन मुख्य रूप से छोटी आंत (ग्रहणी) में शुरू होता है जहाँ पित्त द्वारा पायसीकरण और अग्नाशयी लाइपेज द्वारा वसा का विघटन होता है।

Q.43 बड़ी आंत में जल के अत्यधिक अवशोषण के कारण उत्पन्न होने वाली पाचन संबंधी समस्या को क्या कहते हैं?

  • (अ) दस्त (Diarrhea)

  • (ब) कब्ज (Constipation)

  • (स) अम्लता (Acidity)

  • (द) पीलिया (Jaundice)

उत्तर: (ब) कब्ज (Constipation)
व्याख्या: यदि बड़ी आंत (कोलन) भोजन के अवशेष से जरूरत से ज्यादा पानी सोख लेती है, तो मल अत्यधिक सख्त और सूखा हो जाता है, जिससे मल त्याग में कठिनाई होती है, जिसे कब्ज कहा जाता है।

Q.44 पित्त वर्णक (Bile Pigments) जैसे बिलिरुबिन और बिलिवरदिन का निर्माण मुख्य रूप से किसके टूटने से होता है?

  • (अ) श्वेत रक्त कोशिकाएं (WBC)

  • (ब) लाल रक्त कोशिकाओं का हीमोग्लोबिन (Hemoglobin)

  • (स) रक्त प्लेटलेट्स

  • (द) यकृत की प्रोटीन कोशिकाएं

उत्तर: (ब) लाल रक्त कोशिकाओं का हीमोग्लोबिन (Hemoglobin)
व्याख्या: जब पुरानी आरबीसी (RBC) प्लीहा (Spleen) या यकृत में नष्ट होती हैं, तो उनके हीमोग्लोबिन का विघटन होने से बिलिरुबिन और बिलिवरदिन नामक पित्त वर्णक बनते हैं, जो पित्त रस के माध्यम से बाहर आते हैं।

Q.45 मानव दंत संरचना में 'अकल दाँत' (Wisdom Tooth) कुल संख्या में कितने होते हैं और यह कौन सा दंत प्रकार है?

  • (अ) 2 दाँत, रद्दनक (Canine)

  • (ब) 4 दाँत, तीसरा चवर्णक (Third Molar)

  • (स) 4 दाँत, अग्रचवर्णक (Premolar)

  • (द) 2 दाँत, कृंतक (Incisor)

उत्तर: (ब) 4 दाँत, तीसरा चवर्णक (Third Molar)
व्याख्या: अकल दाँत प्रत्येक जबड़े के दोनों सिरों पर अंतिम यानी तीसरे चवर्णक (Third Molar) होते हैं। दोनों जबड़ों को मिलाकर इनकी कुल संख्या 4 होती है, जो सामान्यतः 18 से 25 वर्ष की आयु के बीच निकलते हैं।

Q.46 आमाशय की आंतरिक दीवार पर म्यूकस का स्राव कम हो जाने और HCl के प्रभाव से होने वाले घाव को क्या कहते हैं?

  • (अ) गैस्ट्राइटिस

  • (ब) पेप्टिक अल्सर (Peptic Ulcer)

  • (स) अपेंडिसाइटिस

  • (द) सिरोसिस

उत्तर: (ब) पेप्टिक अल्सर (Peptic Ulcer)
व्याख्या: जब आमाशय या ग्रहणी की आंतरिक म्यूकोसा परत सुरक्षात्मक म्यूकस के अभाव में HCl के अत्यधिक संपर्क में आकर कट जाती है या छिल जाती है, तो उसे पेप्टिक अल्सर कहा जाता है।

Q.47 जठर रस में पाए जाने वाले 'पेप्सिनोजेन' को सक्रिय 'पेप्सिन' में बदलने का मुख्य काम कौन करता है?

  • (अ) ट्रिप्सिन

  • (ब) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl)

  • (स) पित्त रस

  • (द) श्लेष्म

उत्तर: (ब) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl)
व्याख्या: पेप्सिनोजेन एक निष्क्रिय एंजाइम है। आमाशय में स्रावित होने वाला HCl इसे सक्रिय पेप्सिन में बदलता है, जो तत्पश्चात प्रोटीन के पाचन का कार्य शुरू करता है।

Q.48 मानव पाचन तंत्र में 'परिकुंचन' (Peristalsis) की गति मुख्य रूप से किस ऊतक के संकुचन के कारण होती है?

  • (अ) रेखित पेशी (Skeletal muscle)

  • (ब) चिकनी पेशी या अनैच्छिक पेशी (Smooth muscle)

  • (स) तंत्रिका ऊतक

  • (द) संयोजी ऊतक

उत्तर: (ब) चिकनी पेशी या अनैच्छिक पेशी (Smooth muscle)
व्याख्या: आहार नाल की दीवारों (ग्रसिका से लेकर मलाशय तक) में चिकनी पेशियां (Smooth muscles) पाई जाती हैं, जिनका क्रमिक संकुचन और शिथिलन परिकुंचन तरंगें उत्पन्न करता है जो भोजन को आगे बढ़ाती हैं।

Q.49 छोटी आंत के अंतिम भाग 'इलियम' (Ileum) और बड़ी आंत के प्रथम भाग 'सीकम' के बीच पाए जाने वाले वाल्व का नाम क्या है?

  • (अ) पाइलोरिक वाल्व

  • (ब) इलियोसीकल वाल्व (Ileocaecal Valve)

  • (स) माइट्रल वाल्व

  • (द) कार्डियक वाल्व

उत्तर: (ब) इलियोसीकल वाल्व (Ileocaecal Valve)
व्याख्या: इलियोसीकल वाल्व छोटी आंत के अंतिम हिस्से (इलियम) और बड़ी आंत के शुरुआती हिस्से (सीकम) के बीच स्थित एक कपाट है, जो पचे हुए मल को वापस छोटी आंत में जाने से रोकता है।

Q.50 मानव शरीर में पचे हुए भोजन (ग्लूकोज और अन्य पोषक तत्वों) का कोशिकाओं द्वारा ऊर्जा उत्पादन के लिए उपयोग क्या कहलाता है?

  • (अ) स्वांगीकरण (Assimilation)

  • (ब) अवशोषण (Absorption)

  • (स) मलनिसारण (Defecation)

  • (द) अंतर्ग्रहण (Ingestion)

उत्तर: (अ) स्वांगीकरण (Assimilation)

व्याख्या: छोटी आंत द्वारा पचे हुए पोषक तत्वों को रक्त के माध्यम से शरीर की प्रत्येक कोशिका तक पहुँचाना और कोशिकाओं द्वारा उनका उपयोग ऊर्जा या शरीर निर्माण के लिए करना 'स्वांगीकरण' कहलाता है।