Human Health and Diseases
मानव स्वास्थ्य एवं रोग
रोग (Disease)
व्यक्ति का शारीरिक एवं मानसिक रूप से असंतुलित होना रोग है |
रोगों से सम्बन्धित परिभाषाएं
पैथोलॉजी (Pathology) :- रोग तथा उसके लक्षणों का अध्ययन करना
इटियोलॉजी (Etiology) :- रोग के कारणों का अध्ययन करना
एपिडेमियोलोजी (Epidemiology) (महामारी विज्ञान) - रोगों के फैलने का अध्ययन
रोगकारक (Pathogen) :- ये सामान्यतया सूक्ष्म जीव होते है, जो कि रोग उत्पन्न करते है | जैसे - जीवाणु, वायरस, कवक, कृमि, प्रोटोजोआ आदि
रोग वाहक (vector) :- ये किसी रोगकारक को अपने शरीर में भोजन एवं आवास प्रदान करते है तथा रोगकारक के प्रसार में सहायता करते है | जैसे :- मादा एनाफ्लिज मच्छर |
वाहक (carrier) :- ये किसी रोगकारक को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाने का कार्य करते है | जैसे :- मक्खी हैजा की वाहक होती है
आशय (Reservoir) :- ये जीव किसी रोगकारक को अपने शरीर पर आवास तो प्रदान करते है लेकिन स्वयं इससे प्रभावित नहीं होते है तथा अप्रत्यक्ष रूप से रोगकारक को फ़ैलाने में सहायक होते है | जैसे फल चमगादड़ निपाह वायरस का आशय होता है
इंटरफेरॉन :- वायरस संक्रमण के समय हमारी कोशिकाओं के द्वारा स्त्रावित प्रोटीन से बना पदार्थ जो कि इनके संक्रमण को बढने से रोकता है |
एंटीजन :- वह बाहरी पदार्थ जो हमारे प्रतिरक्षा तंत्र को सक्रिय कर दे, एंटीजन कहलाता है | ये सजीव या निर्जीव भी हो सकता है | जैसे :- जीवाणु, वायरस, धूल मिट्टी के कण |
एंटीबॉडीज :- हमारे शरीर में एंटीजन के प्रति सुरक्षा हेतु प्रतिरक्षा तंत्र के द्वारा एंटीबॉडीज का निर्माण किया जाता है |
टीकाकरण :- ये रोगों के प्रति प्रतिरोधकता उत्पन्न करने में सहायक होते है टीके निर्माण के आधार पर मुख्य: दो प्रकार के होते है |
1. सक्रिय टीका (Active Vaccine) :- इसमें किसी रोगकारक को निष्क्रिय या मृत अवस्था में शरीर में प्रवेश कराया जाता है जिसमें हमारे शरीर में उस रोगकारक के प्रति एंटीबॉडी का निर्माण हो जाता है | ये पूरे जीवन भर रोग से सुरक्षा प्रदान करता है | जैसे पोलियो का टीका |
2. निष्क्रिय टीका (Inactive Vaccine) :- इससे पहले से तैयार एंटीबॉडी को हमारे शरीर में प्रवेश कराया जाता है | ये कम समय तक रोग क्र प्रति सुरक्षा प्रदान करता है | जैसे टिटेनस का टीका |
- फ़्रांस के वैज्ञानिक लुईस पाश्चर ने बताया कि रोग सूक्ष्मजीवों के संक्रमण से होते है जिसे रोग का रोगाणु सिद्धांत कहते है |
- रोबर्ट कोच ने बताया कि प्रत्येक रोग के लिए एक विशेष रोगाणु जिम्मेदार होता है जो हवा, पानी, सम्पर्क आदि से फैलता है |
स्पोरेडिक (Sporadic): यह रोग छिटपुट रूप से कभी-कभार और अनियमित रूप से सामने आते हैं (जैसे- टिटनेस के कुछ मामले)
एंडेमिक (Endemic): एक सीमित क्षेत्र में लगातार और स्थिर रूप से पाया जाने वाला रोग।
एपिडेमिक (Epidemic - महामारी): जब कोई रोग किसी क्षेत्र में अचानक तेजी से और बहुत कम समय में बड़ी संख्या में लोगों को संक्रमित कर दे (जैसे- भारत में अतीत में फैला प्लेग)।
पेंडेमिक (Pandemic - वैश्विक महामारी): जब कोई संक्रामक रोग दुनिया भर के कई देशों या महाद्वीपों में फैल जाए और भारी तबाही मचाए (जैसे- कोविड-19 या स्वाइन फ्लू)।
रोग का रोगाणु सिद्धांत (Germ plasm theory) :- लुई पाश्चर ने दी थी | इन्हें सूक्ष्मजीवविज्ञान का जनक माना जाता है |
रोगों के प्रकार ( Types of Diseases ) :-
जीवाणु से होने वाले रोग :-
(1) T.B./ ट्यूबरक्लोसिस / Tuberculosis/ कॉच disease / तबेदिक/ क्षय / यक्ष्मा :-
रोगकारक :- ट्यूबरक्लोसिस बेसिलस |
संक्रमण :- रोगी के संपर्क में आने से, दूषित जल एवं भोजन से |
लक्षण :- मुख्य रूप से श्वसन पथ एवं फेफड़ों में संक्रमण |
टीका :- BCG का टीका (बैसीलस, कोल्मेट, ग्यूरीन)
उपचार :- एंटीबायोटिक्स, MDR थैरेपी, DOTS पद्धति (Direct Observation Treatment Short - Course)|
टेस्ट :- मेन्टोक्स टेस्ट |
(2) टायफाइड / Typhoid / एन्टेरिक फीवर / मोतीझारा / slow - fever / मियादी बुखार :-
रोगकारक:- साल्मोनेला टायफी
संक्रमण :- दूषित जल एवं भोजन से |
लक्षण :- आँतों में संक्रमण, उल्टी-दस्त, तेज बुखार जो की शाम - रात्रि में बहुत तेज हो जाता है |
परीक्षण (Test) :- विडाल टेस्ट Widal Test |
टीका :- TABC वैक्सीन (टायफाइड, पैराटायफाइड A और B और हैजा)
उपचार :- एंटीबायोटिक दवाएँ |
(3) कॉलेरा / हैजा / विसूचिका (Cholera :):-
रोगकारक (Pathogen) :- विब्रियो कॉलेरी (Vibrio cholerae)
वाहक (vector):- मक्खी Fly
संक्रमण :- दूषित जल एवं भोजन से |
लक्षण :- आँतों में संक्रमण, उल्टी - दस्त एवं तेज बुखार |
परीक्षण :- शिक परीक्षण |
टीका :- TABC वैक्सीन और ड्यूकोरल वैक्सीन |
उपचार :- एंटीबायोटिक दवाएँ, ORS(Oral Rehydration Solution) का घोल |
(4) डिफ्थीरिया (गलघोंटू /Diphtheria) :-
रोगकारक :- कोर्निबैक्टेरियम डीफ्थिरियाई |
संक्रमण :- संक्रमित वस्तुओं एवं दूषित जल एवं भोजन से |
लक्षण :- गले में संक्रमण, गहरे लाल डेन दिखाई देते है, श्वसन मार्ग / ट्रेकिआ में गाढ़ा पदार्थ ठोस होकर हमने लगता है | जिससे साँस लेने में कठिनाई आती है |
परीक्षण :- Sputum Test (कफ परीक्षण) |
वैक्सीन :- DPT का टीका (डिफ्थीरिया, परट्यूसिस, टिटेनस)
उपचार :- एंटीबायोटिक दवाएँ |
(5) परट्यूसिस / Pertussis / काली खाँसी / कुकर खाँसी / 100 - days cough / Whooping cough
रोगकारक :- हीमोफीलस परट्यूसिस / बोर्ड़ेटेला परट्यूसिस
संक्रमण :- संक्रमित वस्तुओं एवं रोगी के संपर्क में आने पर |
लक्षण :- लगातार लम्बे समय तक चलने वाली खाँसी |
वैक्सीन :- DPT का टीका |
उपचार :- एंटीबायोटिक दवाएं |
(6) बोटूलिज्म (Botulism) :- (खतरनाक खाद्य विषाक्तता / Food Poisoning)
रोगकारक :- क्लोस्ट्रिडियम बोटूलिनम
संक्रमण :- डिब्बा बंद भोज्य पदार्थों में उपरोक्त जीवाणु के संक्रमण से |
लक्षण :- तंत्रिका तंत्र एवं मांसपेशियां प्रभावित, व्यक्ति बेहोश हो जाता है और उपचार न मिलने पर व्यक्ति की मृत्यु तक हो जाती है |
उपचार :- एंटीबायोटिक दवाएँ, एंटी - टॉक्सिन्स |
(7) कुष्ठ रोग/ Leprosy / लेप्रोसी / हेनसन का रोग / Hansen's disease :-
रोगकारक :- मायकोबैक्टीरियम लैप्रे
संक्रमण :- रोगी व्यक्ति के संपर्क में लगातार रहने पर, दूषित जल एवं भोजन से |
लक्षण :- शरीर के दूरस्थ अंग पर सफेद दाग बनते है और यहाँ की कोशिकाएँ नष्ट होती रहती है, जिससे ये अंग गलने लगते है |
टीका :- BCG वैक्सीन इसमें भी उपयोगी है |
उपचार :- एंटीबायोटिक दवाएँ (MDR थैरेपी)
परीक्षण :- लेप्रोमिन टेस्ट |
(8) प्लेग / काली मौत / ब्यूबोनिक प्लेग :
रोगकारक :- थेरसीनिया पेस्टिस
रोगवाहक :- जिनोप्सिला चियोप्सिस (ओरियेटीलिस रेट फ्लाई)
आशय :- चूहा
लक्षण :- लसिका तंत्र में संक्रमण, शरीर दूरस्थ अंग काले पड़ने लगते है | जिससे गेंग्रीन होने लगता है |
वैक्सीन :- प्लेग - वैक्सीन
उपचार :- एंटीबायोटिक दवाएँ एवं शल्य चिकित्सा |
(9) एंथ्रेक्स / Anthrax: :
रोगकारक :- बैसीलस एंथ्रेसिस
संक्रमण :- रोगी के व्यक्ति के संपर्क में आने से, संक्रमित दुधारू पशुओं से |
लक्षण :- त्वचा पर छाले, श्वसन पथ में संक्रमण |
वैक्सीन :- एंथ्रेक्स वैक्सीन
उपचार :- एंटीबायोटिक दवाएँ |
नोट :- बैसीलस एंथ्रेसिस का दुरूपयोग जैविक हथियार के रूप में भी किया जाता है |
(10) गोनेरिया / Gonorrhea / सुजाक :
रोगकारक :- नेस्सिरिया गोनोराई
संक्रमण :- संक्रमित व्यक्ति के साथ असुरक्षित यौन - सम्बन्ध से |
लक्षण :- जननांगों में संक्रमण, मूत्र त्याग करते समय जलन, मूत्र पथ में घाव बन जाते है | बाँझपन हो जाता है |
उपचार :- एंटीबायोटिक दवाएँ |
(11) सिफलिस / Syphilis :-
रोगकारक :- ट्रेपोनिमा पैलिडम
संक्रमण :- संक्रमित व्यक्ति के साथ असुरक्षित यौन - सम्बन्ध से |
लक्षण :- जननांगों में संक्रमण, मूत्र त्याग करते समय जलन, मूत्र पथ में घाव बन जाते है | बाँझपन हो जाता है, याददाश्त में कमी आने लगती है और बाल झड़ने लगते है |
उपचार :- एंटीबायोटिक दवाएँ |
(12) न्यूमोनिया :
रोगकारक :- डिप्लोकोकस या न्यूमोकोकस या स्ट्रेप्टोकोकस निमोनियाई |
संक्रमण :- दूषित जल एवं भोजन से |
लक्षण :- तेज बुखार - जुकाम एवं फेफड़ों में संक्रमण, साँस लेने में कठिनाई |
उपचार :- एंटीबायोटिक दवाएँ
वायरस जनित रोग (Viral diseases) :
(1) बड़ी माता / small pox / चेचक :
रोगकारक : वेरियोला वायरस
संक्रमण : रोगी के संपर्क में आने से, संक्रमित वस्तुओं से |
लक्षण : पूरे शरीर पर संक्रमित तरल से भरे दानों का होना, संक्रमण ठीक होने के बाद भी त्वचा पर ये गढ्ढ़ों के रूप में पाए जाते है |
टीका : स्माल पॉक्स वैक्सीन (खोजकर्ता - एडवर्ड जेनर)
उपचार : लक्षणात्मक उपचार
नोट :- इसका विश्व से उन्मूलन हो चुका है |
(1) छोटी माता / चिकन पॉक्स :
रोगकारक :- वैरीसेला जोस्टर वायरस
संक्रमण :- संक्रमित वस्तुओं से, रोगी के संपर्क में आने से |
लक्षण :- तेज बुखार, पूरे शरीर पर संक्रमित तरल से युक्त गहरे लाल रंग के दाने बन जाते है जो कि संक्रमण मुक्त होने पर ठीक हो जाते है |
उपचार :- लक्षणात्मक उपचार
नोट :- चिकन पॉक्स जीवन में एक बार ही होता है इसके बाद शरीर में एंटीबॉडी बन जाती है जिसके कारण दुबारा संक्रमण नहीं होता है |
(3) डेंगू (हड्डी तोड़ बुखार):
रोगकारक :- डेंगू वायरस
रोगवाहक :- एडीज इजिप्टाई मच्छर
संक्रमण :- संक्रमित मच्छर के काटने से
लक्षण :- प्रथम अवस्था में (प्रारम्भिक 4-5 दिन) - तेज बुखार, शरीर में दर्द होता है इसी लिए इसे हड्डी तोड़ बुखार कहते है |
:- द्वितीय अवस्था में (4-5 दिन के बाद ) - प्लेटलेट्स की संख्या में कमी आने लगती है रक्त पतला हो जाने से रोगी बेहोश हो जाता है और कोमा में भी जा सकता है |
(4) पोलियो मायलाईटिस
रोगकारक :- पोलियो वायरस / एंटीरोवायरस / पिकोर्नो वायरस
संक्रमण : दूषित जल एवं भोजन से |
लक्षण : सर्वप्रथम आँतों में संक्रमण से डायरिया हो जाता है, फिर रोगकारक रक्त में होता हुआ अस्थि मज्जा में संक्रमण करता है, साथ ही तंत्रिका तंत्र एवं पेशियां भी प्रभावित होती है जिससे विकलांगता उत्पन्न हो जाती है |
उपचार :- कोई उपचार उपलब्ध नहीं है |
टीका :- दो प्रकार के टीके उपलब्ध है :-
IPV :- Inactivated Polio Vaccine
खोजकर्ता :- साल्क
इसमें मृत वायरस को शरीर में इंजेक्शन के द्वारा डाला जाता है, जिससे शरीर में एंटीबॉडिज का निर्माण होता है |
OPV :- Oral Polio Vaccine
खोजकर्ता :- सेबिन
इसमें जीवित लेकिन रोग उत्पन्न करने की क्षमता से रहित वायरस को मुखीय टीके के रूप में दिया जाता है |
नोट : मार्च 2014 में भारत को पोलियो मुक्त घोषित किया गया |
(5) मम्प्स / गलसुआ :-
रोगकारक :- पेरामिक्सो वायरस
संक्रमण :- रोगी के संपर्क में आने पर, सामान्यतया बच्चों में लेकिन वयस्कों में भी |
लक्षण : पैरोटिड लार ग्रन्थियों में सूजन जो कि गले तक पहुँच जाती है, कभी ये वायरस रक्त से होता हुआ जननांगों में भी सुजन कर देता है, ऐसे में रोगी बंध्य / बाँझ हो जाता है |
वैक्सीन :- MMR का टीका (मम्प्स , मीजल्स और रूबेला)
उपचार :- लक्षणात्मक उपचार
(6) मीजल्स / खसरा / रूबियोला :
रोगकारक : रूबियोला वायरस
संक्रमण :- रोगी के संपर्क में आने पर
लक्षण :- चेहरे एवं गर्दन पर गहरे लाल रंग के डेन, तीव्र बुखार एवं साँस लेने में परेशानी |
वैक्सीन :- MMR
उपचार :- लक्षणात्मक उपचार
(7) रूबेला / जर्मन खसरा
रोगकारक :- रूबेला वायरस
संक्रमण :- रोगी व्यक्ति के संपर्क में आने से
लक्षण :- खसरे के समान ही लक्षण
वैक्सीन :- MMR
उपचार :- लक्षणात्मक उपचार
नोट :- वर्तमान में भारत सरकार के द्वारा स्कूलों, आंगनबाड़ी एवं मदरसों में MR टीकाकरण किया जाता है | जिसके तहत 13 वर्ष के बच्चों को मीजल्स रूबेला का टीकाकरण किया जाता है |
(8) हर्पीज
रोगकारक : हर्पीज वायरस
संक्रमण : रोगी व्यक्ति से |
लक्षण : मुख के किनारे पर घाव होना
वैक्सीन : हर्पीज वैक्सीन
उपचार : लक्षणात्मक उपचार
(9) एड्स / AIDS (एक्वायर्ड इम्यूनोडेफिशियेंसी सिन्ड्रोम)
रोगकारक : HIV (ह्युमन इम्यूनोडेफिशियेंसी वायरस)
H.T.L.V. (ह्यूमन T4 Cell ल्यूकेमिया वायरस )
एड्स वायरस एक प्रकार का रिट्रो वायरस है जिसमें RNA पाया जाता है जो मनुष्य के शरीर में प्रवेश करने के बाद अपने RNA को DNA में रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन के द्वारा बदल लेता है |
सक्रमण : रोगी व्यक्ति के साथ असुरक्षित यौन सम्बन्ध बनाने से, माता से गर्भस्थ शिशु में, संक्रमित रक्त चढ़ाने से, संक्रमित सूई के प्रयोग से |
लक्षण : रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी, व्यक्ति में WBC की संख्या में कमी आने लगती है तथा धीरे - धीरे दूसरे संक्रमण होने से व्यक्ति के अंग कार्य करना बंद कर देते है, अंततः मृत्यु हो जाती है |
उपचार : उपलब्ध नहीं है |
वैक्सीन : उपलब्ध नहीं है |
परीक्षण :- एलिसा परीक्षण (ELISA / एंजाइम लिंक्ड इम्यूनो सोर्बेंट एस्से)
निश्चात्मक परीक्षण : वेस्टर्न ब्लॉट
(10) रेबीज / जल भीति / हाइड्रोफोबिया
रोगकारक : रैब्ड़ो वायरस
संक्रमण : रैबिड कुत्ते के काटने से
लक्षण : कुत्ते के काटने के बाद घाव पर संक्रमण उत्पन्न, मांसपेशियाँ प्रभावित, मुख्यतया गले की पेशियाँ, जल निगलने में परेशानी |
वैक्सीन : एंटी रेबीज वैक्सीन
उपचार : लक्षणात्मक उपचार |
(11) हिपेटाईटिस / यकृत संक्रमण
रोगकारक : हिपेटाईटिस वायरस (A,B,C,D,E)
संक्रमण : दूषित / संक्रमित वस्तुओं से, रोगी के संपर्क में आने से |
लक्षण : यकृत में संक्रमण होने से इसमें सूजन और दर्द होने लग जाता है |
उपचार : लक्षणात्मक उपचार
वैक्सीन : हिपेटाईटिस वैक्सीन
नोट : अत्यधिक मात्रा में शराब / एल्कोहल का सेवन करने पर यकृत में वसा का जमाव होने लगता है जिससे यकृत में सूजन आने लगती है | इसे 'लीवर सिरोसिस / वसीय यकृत संलक्षण कहते है |
- प्रोटोजोआ द्वारा होने वाले रोग ( Diseases caused by protozoa ) -
1. पायरिया
रोगकारक : एन्टअमीबा जिन्जिवेलिस
संक्रमण : दांतों की सफाई न करना, दूषित जल एवं भोजन
लक्षण : मसूड़ों में सूजन, रक्त स्राव तथा मुख से तेज दुर्गन्ध आना |
उपचार : एंटीबायोटिक दवाएँ, नियमित दांतों की सफाई |
2. मलेरिया
रोगकारक : प्लाज्मोडियम
रोगवाहक : मादा एनाफिलीज मच्छर
नोट:- मलेरिया रोग मादा एनाफिलीज मच्छर के काटने से होता है। यह रोग प्लाज्मोडियम नामक द्विपोषदीय परजीवी द्वारा होता है। अर्थात् प्लाज्मोडियम का जीवन चक्र दो परपोषियों में पूरा होता है। मनुष्य इसका द्वितीय परपोषी होता है। जिसमें इसका अलैंगिक चक्र पूरा होता है। जबकि मादा एनाफिलीज इसका प्रथमिक परपोषी होता है। जिसमें इसका लैंगिक चक्र पूरा होता है।मानव शरीर में प्लाज्मोडियम को स्पोरोजोइट कहते है। और मादा एनाफिलीज में उसिस्ट कहते है।
world malaria day - 25 अप्रेल
उपचार : सिनकोना वृक्ष की छाल से प्राप्त कुनैन सल्फेट तथा हाइड्रोक्सी
3. अमीबीयोसिस / अमीबता / अमीबीय पेचिश
रोगकारक : एन्टअमीबा हिस्टोलाइटिका
संक्रमण : दूषित जल एवं भोजन
लक्षण : आँतों में संक्रमण, उल्टी - दस्त एवं तेज बुखार, संक्रमण बढ़ने पर मल के साथ खून आना |
उपचार : एंटीबायोटिक दवाएँ , ORS |
4. काला अजार / लीशमानियेसिस
रोगकारक : लिशमानिया डोनोवानी
रोगवाहक : रेत मक्खी / sand fly
लक्षण : RBC की संख्या में कमी, शरीर पर काले धब्बे बनने लगते है और एनीमिया के लक्षण दिखने लगते है |
उपचार : एंटीबायोटिक दवाएँ |
5. अफ्रीकन निद्रा रोग / ट्रिपनोसोमियेसिस
रोगकारक : ट्रिपनोसोमा गैम्बियेंस
रोगवाहक : सी - सी मक्खी (Tse - Tse मक्खी)
लक्षण : जैविक घड़ी तंत्र प्रभावित होता है जिससे व्यक्ति को असमय ही निद्रा आती है |
उपचार : एंटीबायोटिक दवाएँ
- कवक द्वारा होने वाले रोग:-
- दाद - ट्राइकोडर्मोफायटॉन द्वारा
एथलीट फुट – एपिडर्मोफायटॉन द्वारा
मोनिलियासिस – केंडिडाएल्बीकेन्स द्वारा
एस्पर्जिलोसिस – एस्पर्जिलस द्वारा
टोरूलोसिस – क्रिप्टोकोकस नियोफ़ोमैन्स द्वारा
जेनेटिक विकार (आनुवंशिक विकार)
वे रोग हैं जो जीन या गुणसूत्रों (गुणसूत्रों) में परिवर्तन या स्कोर (उत्परिवर्तन) के कारण होते हैं। इन विकारों को मुख्य रूप से दो स्थानों में जाना जाता है: मेंडलीय विकार और गुणसूत्र संबंधी विकार (क्रोमोसोमल विकार) ।
1. मेंडेलीय विकार :-
प्रमुख मंडलीय विकार और उनके उदाहरण:
क. हीमोफिलिया (हीमोफीलिया) - रक्त से स्नेह
- प्रकार: लिंग सहज्ञान अप्रभावी (सेक्स-लिंक्ड रिसेसिव) विकार।
- विवरण: इस रोग क्षमता से प्रभावित व्यक्ति में रक्त का थक्का जमने से प्रभावित होता है। वंड सी चोट लगने पर भी लगातार रक्त बहता रहता है (रक्तस्राव नहीं रुकता)।
- वंशगति: यह रोग मुख्य रूप से पुरुषों में प्रकट होता है क्योंकि महिलाओं में दो एक्स बैक्टीरिया होने के कारण एक सामान्य एक्स सेमेस्टर में यह रोग होता है (महिलाओं में इसके वाहक होते हैं)।
- अन्य नाम - शाही रोग / राज परिवार का रोग
हीमोफिलिया दो प्रकार का होता है -
(i) हीमोफिलिया ए - यह रक्त का थक्का बनाने वाले VIII वें कारक (AHF) की अनुपस्थिति का कारण होता है |
(ii) हीमोफिलिया बी - यह रक्त का थक्का बनाने वाले IX वें कारक (क्रिसमस कारक) की अनुपस्थिति का कारण होता है |
ख. वर्णांधता (कलर ब्लाइंडनेस)
प्रकार: यह एक लिंग सहज्ञान अप्रभावी (सेक्स-लिंक्ड रिसेसिव) मानसिक विकार है।
कारण: यह एक्स (X) वैज्ञानिकों पर मौजूद जीन में अंकित मूल्य का कारण होता है। इसका कारण व्यक्ति की आँखों की हरे रंग की कलाकृतियों में विद्यमान स्कानल कोशिका (शंकु कोशिकाएँ) के माध्यम से लाल और/या रंग में अंतर नहीं कर पाता है।
वंशगति (विरासत):
पूछताछ यह एक एक्स-लिंक्ड अप्रभावी रोग है, इसलिए महिलाओं में दोनों एक्स वैज्ञानिकों के दोषयुक्त पर यह रोग प्रकट होता है (यानी $X^c X^c$ होने पर)। यदि केवल एक एक्स उपकरण पर दोष हो ( $ X ^ c
पुरुषों में केवल एक ही X वर्ष होता है ( $XY$ )। इसलिए यदि पुरुष के एकमात्र एक्स स्टोर पर वर्णांधता का जीन आ जाए ( $X^c Y$ ), तो वह तुरंत यह रोग से ग्रसित हो जाता है। यही कारण है कि महिलाओं की तुलना में पुरुष इस रोग से बहुत अधिक प्रभावित होते हैं।
जी. सिकल-सेल एनीमिया
- प्रकार: ऑटोसोमल अप्रभावी (ऑटोसोमल रिसेसिव) विकार।
- विवरण: यह क्रोमा ऑर्गेनिक 11 पर स्थित हीमोग्लोबिन जीन में स्कोर का कारण होता है। सामान्य लाल रक्त संरचना (आरबीसी) में ऑक्सीजन की कमी होने पर हँसिए (दरांती) के आकार की हो जाती है, जिससे ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता कम हो जाती है और रक्त वाहिकाओं में विखंडन पैदा हो जाता है।
घ. फेनिलकेटोनुरिया (फेनिलकेटोनुरिया - पीकेयू)
- प्रकार: ऑटोसोमल अप्रभावी (ऑटोसोमल रिसेसिव) मेटाबॉलिक विकार।
- विवरण: इस नामांकित रोग से पीड़ित व्यक्ति में एक विशेष एंजाइम (फेनाइलएलेनिन ऑक्सिलेज) की कमी हो जाती है, जो 'फेनाइलएलेनिन' एमीनो एसिड को 'टाइरो' में बदल रहा है। इसके साथ होने से मानसिक मंदता (मानसिक मंदता) और तंत्रिका तंत्र से जुड़े होते हैं।
ङ. सिस्टिक फाइब्रोसिस (सिस्टिक फाइब्रोसिस)
- प्रकार: ऑटोसोमल अप्रभावी विकार।
- विवरण: यह मुख्य रूप से फेफड़े और पाचन तंत्र को प्रभावित करता है, जिससे शरीर में मोटापा और चिपचिपा बलगम (बलगम) बनने लगता है।
च. थैलेसीमिया (थैलेसीमिया)
- प्रकार: ऑटोसोमल अप्रभावी विकार।
- विवरण: शरीर में हीमोग्लोबिन की श्रृंखला (अल्फा या बीटा) का अनुपात ठीक से नहीं होता है, जिससे गंभीर रक्त की कमी उत्पन्न होती है।
2. गुणसूत्र संबंधी विकार (क्रोमोसोमल विकार)
प्रमुख लैंगिक गुणसूत्रों की संख्या में परिवर्तन से होने वाले विकार
1 . टर्नर सिंड्रोम (Turner Syndrome) :- यह एक आनुवंशिक स्थिति है जो केवल महिलाओं को प्रभावित करती है। यह तब होती है जब किसी लड़की का जन्म सामान्य दो XX लिंग गुणसूत्रों (chromosomes) के बजाय केवल एक पूर्ण या आंशिक X गुणसूत्र (X0) के साथ होता है।
इस स्थिति की खोज सबसे पहले 1938 में डॉ. हेनरी टर्नर (Dr. Henry Turner) द्वारा की गई थी, इसलिए इसे टर्नर सिंड्रोम कहा जाता है। यह लगभग हर 2,000 से 2,500 नवजात लड़कियों में से एक को प्रभावित करती है।
1. मुख्य कारण (Causes)
सामान्य तौर पर, महिलाओं में दो X गुणसूत्र (XX) होते हैं—एक पिता से और एक माता से। लेकिन टर्नर सिंड्रोम से पीड़ित महिलाओं में दूसरा X गुणसूत्र या तो पूरी तरह गायब होता है या उसका कोई हिस्सा क्षतिग्रस्त होता है। इसके मुख्य रूप से निम्नलिखित प्रकार हैं:
- मोनोसोमी एक्स (Monosomy X - 45, X): इसमें शरीर की प्रत्येक कोशिका में दो के बजाय केवल एक ही X गुणसूत्र होता है। यह लगभग आधे मामलों में देखा जाता है और यह शुक्राणु या अंडाणु के निर्माण के समय कोशिका विभाजन की त्रुटि के कारण होता है।
- मोज़ेक टर्नर सिंड्रोम (Mosaic Turner Syndrome): इसमें शरीर की कुछ कोशिकाओं में दो सामान्य X गुणसूत्र होते हैं और कुछ कोशिकाओं में केवल एक ही X गुणसूत्र होता है। इसके लक्षण आमतौर पर हल्के होते हैं।
- X गुणसूत्र असामान्यताएं (X Chromosome Abnormalities): इसमें दोनों X गुणसूत्र मौजूद होते हैं, लेकिन उनमें से एक संरचनात्मक रूप से असामान्य या क्षतिग्रस्त होता है।
- मोनोसोमी एक्स (Monosomy X - 45, X): इसमें शरीर की प्रत्येक कोशिका में दो के बजाय केवल एक ही X गुणसूत्र होता है। यह लगभग आधे मामलों में देखा जाता है और यह शुक्राणु या अंडाणु के निर्माण के समय कोशिका विभाजन की त्रुटि के कारण होता है।
- मोज़ेक टर्नर सिंड्रोम (Mosaic Turner Syndrome): इसमें शरीर की कुछ कोशिकाओं में दो सामान्य X गुणसूत्र होते हैं और कुछ कोशिकाओं में केवल एक ही X गुणसूत्र होता है। इसके लक्षण आमतौर पर हल्के होते हैं।
- X गुणसूत्र असामान्यताएं (X Chromosome Abnormalities): इसमें दोनों X गुणसूत्र मौजूद होते हैं, लेकिन उनमें से एक संरचनात्मक रूप से असामान्य या क्षतिग्रस्त होता है।
2. प्रमुख लक्षण (Symptoms)
टर्नर सिंड्रोम के लक्षण और उनकी गंभीरता हर महिला में अलग-अलग हो सकती है। उम्र के विभिन्न चरणों में इसके लक्षण इस प्रकार हैं:
जन्म के समय या बाल्यावस्था में:
- नवजात अवस्था में हाथों और पैरों की पीठ पर सूजन (Lymphedema)
- छोटी गर्दन या गर्दन पर त्वचा की अतिरिक्त परत (Webbed neck)
- चौड़ी छाती और दूर-दूर स्थित स्तनों के निप्पल
- कम जन्म वजन और धीमी वृद्धि
- बार-बार कान में संक्रमण या सुनने में कठिनाई
- उंगलियां और पैर की उंगलियां छोटी होना
- नवजात अवस्था में हाथों और पैरों की पीठ पर सूजन (Lymphedema)
- छोटी गर्दन या गर्दन पर त्वचा की अतिरिक्त परत (Webbed neck)
- चौड़ी छाती और दूर-दूर स्थित स्तनों के निप्पल
- कम जन्म वजन और धीमी वृद्धि
- बार-बार कान में संक्रमण या सुनने में कठिनाई
- उंगलियां और पैर की उंगलियां छोटी होना
किशोरावस्था (Puberty) और वयस्कता में:
- छोटा कद (Short Stature): सामान्य रूप से विकास रुक जाना (इलाज के बिना वयस्क होने पर औसत ऊंचाई लगभग 4 फीट 8 इंच तक हो सकती है)।
- किशोरावस्था का अभाव: स्तनों का विकास न होना, मासिक धर्म (Periods) का समय पर न आना या बिल्कुल न होना।
- बांझपन (Infertility): अंडाशय (Ovaries) ठीक से विकसित नहीं होते (Ovarian failure), जिसके कारण प्राकृतिक रूप से गर्भधारण करना असंभव हो जाता है।
- हार्मोनल असंतुलन: एस्ट्रोजन का स्तर कम होना।
- छोटा कद (Short Stature): सामान्य रूप से विकास रुक जाना (इलाज के बिना वयस्क होने पर औसत ऊंचाई लगभग 4 फीट 8 इंच तक हो सकती है)।
- किशोरावस्था का अभाव: स्तनों का विकास न होना, मासिक धर्म (Periods) का समय पर न आना या बिल्कुल न होना।
- बांझपन (Infertility): अंडाशय (Ovaries) ठीक से विकसित नहीं होते (Ovarian failure), जिसके कारण प्राकृतिक रूप से गर्भधारण करना असंभव हो जाता है।
- हार्मोनल असंतुलन: एस्ट्रोजन का स्तर कम होना।
3. जटिलताएं (Complications)
टर्नर सिंड्रोम के कारण शरीर के अन्य अंगों पर भी प्रभाव पड़ सकता है, जैसे:
- हृदय संबंधी समस्याएं: महाधमनी संकीर्णन (Coarctation of the aorta) या उच्च रक्तचाप।
- मूत्र मार्ग की समस्याएं: किडनी का असामान्य आकार या स्थिति।
- हड्डियों की कमजोरी (Osteoporosis): एस्ट्रोजन की कमी के कारण हड्डियां कमजोर होना और फ्रैक्चर का खतरा बढ़ना।
- थायराइड विकार: हाइपोथायराइडिज्म (Hypothyroidism) की समस्या होना।
- मधुमेह: टाइप 1 या टाइप 2 डायबिटीज का खतरा।
- सीखने की क्षमता: गणित, स्थानिक दृश्य (spatial visualization) या याददाश्त से जुड़ी कुछ विशेष मानसिक क्षमताओं में कठिनाई, हालांकि सामान्य बौद्धिक स्तर सामान्य रहता है।
- हृदय संबंधी समस्याएं: महाधमनी संकीर्णन (Coarctation of the aorta) या उच्च रक्तचाप।
- मूत्र मार्ग की समस्याएं: किडनी का असामान्य आकार या स्थिति।
- हड्डियों की कमजोरी (Osteoporosis): एस्ट्रोजन की कमी के कारण हड्डियां कमजोर होना और फ्रैक्चर का खतरा बढ़ना।
- थायराइड विकार: हाइपोथायराइडिज्म (Hypothyroidism) की समस्या होना।
- मधुमेह: टाइप 1 या टाइप 2 डायबिटीज का खतरा।
- सीखने की क्षमता: गणित, स्थानिक दृश्य (spatial visualization) या याददाश्त से जुड़ी कुछ विशेष मानसिक क्षमताओं में कठिनाई, हालांकि सामान्य बौद्धिक स्तर सामान्य रहता है।
4. निदान (Diagnosis)
- कैरियोटाइपिंग (Karyotype Test): यह एक रक्त परीक्षण है जो गुणसूत्रों की जांच करता है और X गुणसूत्र की कमी या असामान्यता की पुष्टि करता है। यह सबसे सटीक परीक्षण है।
- प्रसवपूर्व जांच (Prenatal Screening): गर्भावस्था के दौरान अल्ट्रासाउंड या एमनीसेंटेसिस (Amniocentesis) के जरिए भी इसका पता लगाया जा सकता है।
- कैरियोटाइपिंग (Karyotype Test): यह एक रक्त परीक्षण है जो गुणसूत्रों की जांच करता है और X गुणसूत्र की कमी या असामान्यता की पुष्टि करता है। यह सबसे सटीक परीक्षण है।
- प्रसवपूर्व जांच (Prenatal Screening): गर्भावस्था के दौरान अल्ट्रासाउंड या एमनीसेंटेसिस (Amniocentesis) के जरिए भी इसका पता लगाया जा सकता है।
5. उपचार और प्रबंधन (Treatment & Management)
यद्यपि गुमशुदा गुणसूत्र को बदला नहीं जा सकता, लेकिन आधुनिक चिकित्सा विज्ञान द्वारा लक्षणों को प्रबंधित किया जा सकता है:
- ग्रोथ हार्मोन थेरेपी (Growth Hormone Therapy): बचपन में लंबाई बढ़ाने के लिए ग्रोथ हार्मोन के इंजेक्शन दिए जाते हैं ताकि वयस्क होने पर सामान्य कद प्राप्त किया जा सके।
- एस्ट्रोजन रिप्लेसमेंट थेरेपी (Estrogen Replacement Therapy): किशोरावस्था की उम्र में (लगभग 11-12 साल की उम्र में) स्तनों के विकास और मासिक धर्म को शुरू करने के लिए हार्मोन थेरेपी शुरू की जाती है, जिसे रजोनिवृत्ति की उम्र तक जारी रखा जाता है।
- प्रजनन उपचार (Assisted Reproductive Technology): डोनर एग (Donor Egg IVF) के माध्यम से टर्नर सिंड्रोम से पीड़ित महिलाएं भी मां बनने का सुख प्राप्त कर सकती हैं।
- नियमित स्वास्थ्य जांच: हृदय, किडनी, थाायराइड और हड्डियों के स्वास्थ्य की समय-समय पर जांच कराना आवश्यक है।
- ग्रोथ हार्मोन थेरेपी (Growth Hormone Therapy): बचपन में लंबाई बढ़ाने के लिए ग्रोथ हार्मोन के इंजेक्शन दिए जाते हैं ताकि वयस्क होने पर सामान्य कद प्राप्त किया जा सके।
- एस्ट्रोजन रिप्लेसमेंट थेरेपी (Estrogen Replacement Therapy): किशोरावस्था की उम्र में (लगभग 11-12 साल की उम्र में) स्तनों के विकास और मासिक धर्म को शुरू करने के लिए हार्मोन थेरेपी शुरू की जाती है, जिसे रजोनिवृत्ति की उम्र तक जारी रखा जाता है।
- प्रजनन उपचार (Assisted Reproductive Technology): डोनर एग (Donor Egg IVF) के माध्यम से टर्नर सिंड्रोम से पीड़ित महिलाएं भी मां बनने का सुख प्राप्त कर सकती हैं।
- नियमित स्वास्थ्य जांच: हृदय, किडनी, थाायराइड और हड्डियों के स्वास्थ्य की समय-समय पर जांच कराना आवश्यक है।
2 . क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम (Klinefelter Syndrome):-
यह एक आनुवंशिक स्थिति है जो पुरुषों को प्रभावित करती है। यह तब होती है जब किसी लड़के का जन्म सामान्य XY गुणसूत्र (chromosome) के बजाय XXY लिंग गुणसूत्र के साथ होता है।
इस स्थिति की खोज सबसे पहले 1942 में डॉ. हैरी क्लाइनफेल्टर (Dr. Harry Klinefelter) और उनके सहयोगियों द्वारा की गई थी, इसलिए उन्हीं के नाम पर इसे क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम कहा जाता है।
2 . क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम (Klinefelter Syndrome):-
1. मुख्य कारण (Causes)
सामान्य तौर पर, पुरुषों में एक X और एक Y गुणसूत्र (XY) होता है और महिलाओं में दो X गुणसूत्र (XX) होते हैं। लेकिन क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम से पीड़ित पुरुषों में अतिरिक्त X गुणसूत्र होता है। इसके मुख्य रूप से निम्नलिखित प्रकार हो सकते हैं:
- 47, XXY (सबसे आम): इसमें प्रत्येक कोशिका में एक अतिरिक्त X गुणसूत्र होता है। यह स्थिति विरासत में नहीं मिलती, बल्कि यह शुक्राणु या अंडाणु के निर्माण के समय कोशिका विभाजन (Meiosis) में हुई त्रुटि के कारण होती है।
- मोज़ेक क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम (Mosaic Klinefelter Syndrome): इसमें शरीर की कुछ कोशिकाओं में XXY गुणसूत्र होते हैं और कुछ में सामान्य XY गुणसूत्र होते हैं। इसके लक्षण आमतौर पर हल्के होते हैं।
- बहु-X गुणसूत्र (XXXY या XXXXY): यह एक अत्यंत दुर्लभ और गंभीर रूप है, जिसमें एकाधिक अतिरिक्त X गुणसूत्र मौजूद होते हैं।
- 47, XXY (सबसे आम): इसमें प्रत्येक कोशिका में एक अतिरिक्त X गुणसूत्र होता है। यह स्थिति विरासत में नहीं मिलती, बल्कि यह शुक्राणु या अंडाणु के निर्माण के समय कोशिका विभाजन (Meiosis) में हुई त्रुटि के कारण होती है।
- मोज़ेक क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम (Mosaic Klinefelter Syndrome): इसमें शरीर की कुछ कोशिकाओं में XXY गुणसूत्र होते हैं और कुछ में सामान्य XY गुणसूत्र होते हैं। इसके लक्षण आमतौर पर हल्के होते हैं।
- बहु-X गुणसूत्र (XXXY या XXXXY): यह एक अत्यंत दुर्लभ और गंभीर रूप है, जिसमें एकाधिक अतिरिक्त X गुणसूत्र मौजूद होते हैं।
2. प्रमुख लक्षण (Symptoms)
उम्र के अलग-अलग चरणों में इसके लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं:
शिशुओं और बालकों में:
- मांसपेशियों का कमजोर होना (Hypotonia)
- मोटर कौशल (जैसे बैठना, रेंगना या चलना) सीखने में देरी होना
- बोलने में देरी या भाषा सीखने में कठिनाई
- शांत और शर्मीला स्वभाव
- मांसपेशियों का कमजोर होना (Hypotonia)
- मोटर कौशल (जैसे बैठना, रेंगना या चलना) सीखने में देरी होना
- बोलने में देरी या भाषा सीखने में कठिनाई
- शांत और शर्मीला स्वभाव
किशोरावस्था (Puberty) में:
- किशोरावस्था का देर से आना या अधूरा आना
- शरीर और चेहरे के बालों का कम उगना
- आवाज का गहरा (भारी) न होना
- शरीर की चर्बी का मुख्य रूप से पेट के आस-पास जमा होना
- लंबे हाथ-पैर और कम ऊंचाई वाला धड़ (Eunuchoid body proportions)
- छोटे अंडकोष (Testicles) और लिंग (Penis)
- किशोरावस्था का देर से आना या अधूरा आना
- शरीर और चेहरे के बालों का कम उगना
- आवाज का गहरा (भारी) न होना
- शरीर की चर्बी का मुख्य रूप से पेट के आस-पास जमा होना
- लंबे हाथ-पैर और कम ऊंचाई वाला धड़ (Eunuchoid body proportions)
- छोटे अंडकोष (Testicles) और लिंग (Penis)
वयस्क पुरुषों में:
- बांझपन (Infertility): अतिरिक्त X गुणसूत्र के कारण सामान्य शुक्राणु का उत्पादन नहीं हो पाता (Azospermatogenesis), जिससे प्राकृतिक रूप से पिता बनना मुश्किल हो जाता है।
- सेक्स ड्राइव में कमी (Low Libido): टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का स्तर कम होना।
- गाइनेकोमास्टिया (Gynecomastia): स्तनों का असामान्य रूप से विकास होना।
- हड्डियों की कमजोरी (Osteoporosis): उम्र बढ़ने के साथ हड्डियां कमजोर होना।
- बांझपन (Infertility): अतिरिक्त X गुणसूत्र के कारण सामान्य शुक्राणु का उत्पादन नहीं हो पाता (Azospermatogenesis), जिससे प्राकृतिक रूप से पिता बनना मुश्किल हो जाता है।
- सेक्स ड्राइव में कमी (Low Libido): टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का स्तर कम होना।
- गाइनेकोमास्टिया (Gynecomastia): स्तनों का असामान्य रूप से विकास होना।
- हड्डियों की कमजोरी (Osteoporosis): उम्र बढ़ने के साथ हड्डियां कमजोर होना।
3. जटिलताएं (Complications)
यदि इसका समय पर निदान और उपचार न किया जाए, तो इससे निम्नलिखित समस्याएं हो सकती हैं:
- हृदय रोग (Cardiovascular issues)
- टाइप 2 मधुमेह (Type 2 Diabetes)
- ऑटोइम्यून विकार (जैसे ल्यूपस या rheumatoid arthritis)
- चिंता, डिप्रेशन और सामाजिक या भावनात्मक समायोजन में कठिनाई
- हृदय रोग (Cardiovascular issues)
- टाइप 2 मधुमेह (Type 2 Diabetes)
- ऑटोइम्यून विकार (जैसे ल्यूपस या rheumatoid arthritis)
- चिंता, डिप्रेशन और सामाजिक या भावनात्मक समायोजन में कठिनाई
4. निदान (Diagnosis)
क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम का निदान मुख्य रूप से निम्नलिखित तरीकों से किया जाता है:
- कैरियोटाइपिंग (Karyotype Test / Chromosome Analysis): यह एक रक्त परीक्षण है जो गुणसूत्रों की जांच करता है और अतिरिक्त X गुणसूत्र की पुष्टि करता है।
- हार्मोन परीक्षण (Hormone Testing): रक्त में टेस्टोस्टेरोन और अन्य गोनाडोट्रोपिन हार्मोन्स के स्तर की जांच करना।
- वीर्य विश्लेषण (Semen Analysis): वयस्क पुरुषों में शुक्राणु की उपस्थिति की जांच के लिए।
- कैरियोटाइपिंग (Karyotype Test / Chromosome Analysis): यह एक रक्त परीक्षण है जो गुणसूत्रों की जांच करता है और अतिरिक्त X गुणसूत्र की पुष्टि करता है।
- हार्मोन परीक्षण (Hormone Testing): रक्त में टेस्टोस्टेरोन और अन्य गोनाडोट्रोपिन हार्मोन्स के स्तर की जांच करना।
- वीर्य विश्लेषण (Semen Analysis): वयस्क पुरुषों में शुक्राणु की उपस्थिति की जांच के लिए।
5. उपचार और प्रबंधन (Treatment & Management)
यद्यपि अतिरिक्त गुणसूत्र को पूरी तरह से हटाया नहीं जा सकता, लेकिन विभिन्न उपचारों के माध्यम से लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है और सामान्य जीवन जिया जा सकता है:
- टेस्टोस्टेरोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (TRT): किशोरावस्था की शुरुआत में या वयस्क होने पर टेस्टोस्टेरोन हार्मोन के इंजेक्शन या जेल दिए जाते हैं। इससे पुरुष विशेषताओं (जैसे गहरी आवाज, चेहरे के बाल, मांसपेशियों की ताकत और हड्डियों का घनत्व) को विकसित करने में मदद मिलती है।
- स्पीच और फिजिकल थेरेपी: बचपन में बोलने की समस्याओं और मांसपेशियों के विकास को बेहतर बनाने के लिए।
- प्रजनन उपचार (Fertility Treatments): आधुनिक तकनीकों जैसे ICSI (Intracytoplasmic Sperm Injection) के माध्यम से कुछ मामलों में जैविक संतान प्राप्ति संभव हो सकती है।
- मनोवैज्ञानिक परामर्श (Psychological Counseling): आत्मविश्वास बढ़ाने, सीखने की अक्षमता से निपटने और सामाजिक जीवन को बेहतर बनाने के लिए।
- टेस्टोस्टेरोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (TRT): किशोरावस्था की शुरुआत में या वयस्क होने पर टेस्टोस्टेरोन हार्मोन के इंजेक्शन या जेल दिए जाते हैं। इससे पुरुष विशेषताओं (जैसे गहरी आवाज, चेहरे के बाल, मांसपेशियों की ताकत और हड्डियों का घनत्व) को विकसित करने में मदद मिलती है।
- स्पीच और फिजिकल थेरेपी: बचपन में बोलने की समस्याओं और मांसपेशियों के विकास को बेहतर बनाने के लिए।
- प्रजनन उपचार (Fertility Treatments): आधुनिक तकनीकों जैसे ICSI (Intracytoplasmic Sperm Injection) के माध्यम से कुछ मामलों में जैविक संतान प्राप्ति संभव हो सकती है।
- मनोवैज्ञानिक परामर्श (Psychological Counseling): आत्मविश्वास बढ़ाने, सीखने की अक्षमता से निपटने और सामाजिक जीवन को बेहतर बनाने के लिए।
3. जैकब सिंड्रोम (Jacob's Syndrome / 47, XYY सिंड्रोम) अतिनर (Supermale) अपराधी सिंड्रोम :-
- खोज: इसकी खोज सबसे पहले 1965 में पियरे जैकब (Pierre Jacobs) और उनके सहयोगियों ने की थी।
- मुख्य लक्षण:
- लंबा कद: इस सिंड्रोम से पीड़ित पुरुष सामान्य लोगों की तुलना में काफी लंबे होते हैं।
- सीखने में कठिनाई: बोलने में देरी, पढ़ने में कठिनाई (Dyslexia) या शैक्षणिक समस्याएं हो सकती हैं।
- चेहरे और त्वचा संबंधी समस्याएं: गंभीर मुंहासे (Severe acne) की समस्या होना आम है।
- व्यवहार और भावनाएं: बचपन या किशोरावस्था में कभी-कभी अतिसक्रियता (Hyperactivity), आक्रामकता या भावनात्मक नियंत्रण में हल्की कठिनाई देखी जा सकती है, हालांकि अधिकांश पुरुष सामान्य और स्वस्थ जीवन जीते हैं।
- प्रजनन क्षमता: अधिकांश मामलों में ये पुरुष सामान्य रूप से प्रजनन सक्षम (Fertile) होते हैं।
अतिमादा (Superfemale / 47, XXX सिंड्रोम / ट्रिप्लो-एक्स सिंड्रोम)
- मुख्य लक्षण:
- लंबी ऊंचाई: इस स्थिति से पीड़ित महिलाएं आमतौर पर सामान्य से लंबी होती हैं।
- सीखने और भाषा की समस्याएं: बोलने में देरी, भाषा सीखने में कठिनाई या स्कूल में पढ़ने से जुड़ी मामूली समस्याएं हो सकती हैं।
- मांसपेशियों की कमजोरी: बचपन में मांसपेशियों में थोड़ी कमजोरी (Hypotonia) या मोटर कौशल विकसित होने में देरी हो सकती है।
- भावनात्मक स्वास्थ्य: चिंता, तनाव या आत्मविश्वाश की कमी जैसी मानसिक समस्याएं हो सकती हैं।
- प्रजनन क्षमता: अधिकांश 'अतिमादा' महिलाओं का प्रजनन तंत्र पूरी तरह से सामान्य होता है और वे सामान्य रूप से बच्चे पैदा कर सकती हैं। कई महिलाओं को तो इसके बारे में कभी पता ही नहीं चलता क्योंकि उनके लक्षण बहुत हल्के होते हैं।
अलैंगिक गुणसूत्रों की संख्या में परिवर्तन (यानी ऑटोसोमल एप्लोइडी / ऑटोसोमल एन्यूप्लोइडी) के कारण कई गंभीर ऑर्गेनियम डिसऑर्डर उत्पन्न होते हैं।
1. डाउन सिंड्रोम / 21वाँ त्रिसूत्रता
कारण: यह 21वें ऑटोसोम की त्रिसूत्रता (ट्राइसोमी) का कारण होता है। इसमें 21 वें नंबर के सेमेस्टर के 2 के बजाय 3 प्रति (कॉपी) हो जाते हैं, जिससे कुल रिकॉर्ड की संख्या 47 के बजाय 46 के हो जाती है।
प्रमुख लक्षण:
मानसिक मंदता (मानसिक मंदता)।
सिर और माथा चपटा व नारियल होना।
मुंह खुला होना और जीभ का बाहर की ओर निकलना।
पथरी पर एक विशिष्ट मुड़ी हुई गहरी रेखा (सिमीयन क्रीज़)।
शारीरिक विकास का धीमा होना।
2. पटाऊ सिंड्रोम / 13वाँ त्रिसूत्रता
कारण: यह 13वें ऑटोसोम का त्रिसूत्रता (13वें गुणसूत्र का ट्राइसॉमी) का कारण होता है। इसमें भी कुल दुकानदारों की संख्या 47 हो गयी है।
प्रमुख लक्षण:
गंभीर मानसिक मंदता और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में दोष।
कटे होंठ और तालु का फटा होना।
बहुत छोटा होना या आँखों का न होना (एनोफथाल्मिया)।
हृदय से जुड़ी गंभीर बीमारियाँ। (इस रोग से संक्रमित बच्चा आम तौर पर जन्म के कुछ महीनों के भीतर ही जीवित नहीं रहता)।
3. एडवर्ड्स सिंड्रोम / 18वाँ त्रिसूत्रता
कारण: यह 18वें ऑटोसोम का त्रिसूत्रता (18वें गुणसूत्र का ट्राइसॉमी) का कारण होता है। कुल व्युत्पत्ति 47 हो जाते हैं।
प्रमुख लक्षण:
गंभीर विकास संबंधी बाधाएं और मानसिक मंदता।
छोटे जबड़े (माइक्रोगैनेथिया) और कान का असामान्य आकार।
एक दूसरे के ऊपर मुचा होना बंद होना।
हृदय और गुर्दे में गंभीर दोष (इस रोग से पीड़ित बच्चा भी अधिक समय तक जीवित नहीं रह पाता)।
संक्षेप में अंतर ज्ञान (सारांश तालिका)
| विशेष | मेंडेलीय विकार (मेंडेलियन विकार) | गुणसूत्र विकार (क्रोमोसोमल विकार) |
| कारण | एकल जीन में बदलाव या निशान। | एल्बमों की संख्या में कमी/भंडारण या बहुमत परिवर्तन। |
| उदाहरण | हीमोफिलिया, सिकल-सेल उद्देश्य, फेनिलकिटोन्यूरिया। | डाउन सिंड्रोम, क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम, टर्नर सिंड्रोम। |
| सिद्धांत | यह मेंडेलियन जेनेटिक के इलेक्ट्रानिक का पालन करता है। | यह सामान्य अलगाव विभाजन में विफलता (गैर-विच्छेदन) का कारण होता है। |
