जैव प्रौद्योगिकी (Biotechnology)
भाग 1: पुनःसंयोजक डीएनए तकनीक और कृषि अनुप्रयोग (rDNA Technology & Agricultural Applications)
Q1. पुनःसंयोजक डीएनए तकनीक (Recombinant DNA Technology) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- इस तकनीक में दो अलग-अलग स्रोतों से डीएनए अणुओं को मिलाकर एक नया आनुवंशिक संयोजन बनाया जाता है।
- रेस्ट्रिक्शन एंडोन्यूक्लिएज (Restriction Endonucleases) एंजाइम का उपयोग डीएनए को विशिष्ट स्थानों पर काटने के लिए किया जाता है, जिन्हें 'आणविक कैंची' भी कहते हैं।
- डीएनए लाइगेज (DNA Ligase) एंजाइम का उपयोग कटे हुए डीएनए खंडों को आपस में जोड़ने के लिए किया जाता है।
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
व्याख्या: पुनःसंयोजक डीएनए (rDNA) तकनीक जेनेटिक इंजीनियरिंग का मूल आधार है। इसमें रेस्ट्रिक्शन एंजाइम विशिष्ट पैलिंड्रोमिक अनुक्रमों (Palindromic sequences) को पहचानकर डीएनए को काटते हैं, और डीएनए लाइगेज फॉस्फोडाइएस्टर बंध बनाकर उन्हें जोड़ता है। तीनों कथन सत्य हैं।
Q2. भारत में व्यावसायिक खेती के लिए अनुमोदित एकमात्र आनुवंशिक रूप से संशोधित (GM) फसल 'बीटी कपास' (Bt Cotton) है। बीटी कपास में 'बीटी' (Bt) शब्द का क्या अर्थ है?
(b) बैसिलस थुरिंगिएंसिस (Bacillus thuringiensis) - एक जीवाणु
(c) बोटैनिकल ट्रांसफॉर्मेशन (Botanical Transformation)
(d) बेरी थुरिंगिएंसिस - एक कवक
व्याख्या: बीटी (Bt) वास्तव में 'बैसिलस थुरिंगिएंसिस' नामक एक मिट्टी का जीवाणु है। यह जीवाणु एक विशेष क्रिस्टल प्रोटीन (Cry Protein) बनाता है जो 'बोलवर्म' (Ballworm) जैसे कीटों के लिए विषैला होता है। इस जीन को कपास में डालकर उसे कीट-प्रतिरोधी बनाया गया है।
Q3. 'जीएम सरसों' (Dham-11 या DMH-11) जिसे भारत में फील्ड ट्रायल की मंजूरी दी गई थी, के निर्माण में किस आनुवंशिक प्रणाली का उपयोग किया गया है?
(b) बरनेस और बारस्टार (Barnase-Barstar) प्रणाली
(c) आरएनए हस्तक्षेप (RNAi) तकनीक
(d) पॉलीप्लोइडी उत्प्रेरण
व्याख्या: DMH-11 एक हाइब्रिड सरसों है जिसे दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा विकसित किया गया है। इसमें मृदा जीवाणु बैसिलस एमाइलोलिक्विफेशिएंस से प्राप्त 'बारनेज' (नर बांझपन के लिए) और 'बारस्टार' (उर्वरता बहाली के लिए) जीन प्रणाली का उपयोग किया गया है, जो सरसों जैसी स्व-परागित फसल में संकरण को सुगम बनाती है।
Q4. 'गोल्डन राइस' (Golden Rice) आनुवंशिक इंजीनियरिंग का एक प्रसिद्ध उत्पाद है। इसके संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- इसे मानव शरीर में विटामिन-A की कमी (VAD) को दूर करने के लिए विकसित किया गया है।
- इसमें डैफोडिल (Daffodil) पौधे और एक जीवाणु से जीन स्थानांतरित किए गए हैं ताकि यह बीटा-कैरोटीन (Beta-carotene) का उत्पादन कर सके।
- इसका रंग हल्का पीला या सुनहरा होता है क्योंकि इसमें आयरन की मात्रा अत्यधिक होती है।
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
व्याख्या: गोल्डन राइस जैव-सुदृढ़ीकरण (Biofortification) का उदाहरण है। यह चावल की प्रजाति बीटा-कैरोटीन का निर्माण करती है, जो हमारे शरीर में जाकर विटामिन-A में बदल जाता है। इसका पीला रंग बीटा-कैरोटीन के कारण होता है, न कि आयरन के कारण। इसलिए कथन 3 गलत है।
Q5. पौधों में कीट प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने के लिए उपयोग की जाने वाली 'आरएनए हस्तक्षेप' (RNA Interference - RNAi) तकनीक के संबंध में कौन सा कथन सत्य है?
(b) यह एक कोशिकीय रक्षा प्रणाली है जिसमें विशिष्ट मैसेंजर आरएनए (mRNA) को साइलेंस (Silence) या निष्क्रिय कर दिया जाता है।
(c) यह डीएनए को सीधे नष्ट कर देती है।
(d) इसका कृषि में कोई उपयोग नहीं है।
व्याख्या: RNAi एक प्राकृतिक रूप से पाई जाने वाली कोशिकीय सुरक्षा प्रक्रिया है। जेनेटिक इंजीनियरिंग में इसका उपयोग करके विशिष्ट कीटों या परजीवियों (जैसे सूत्रकृमि/Nematodes) के आवश्यक जीनों के mRNA को डबल-स्ट्रेंडेड आरएनए (dsRNA) बनाकर साइलेंस कर दिया जाता है, जिससे कीट जीवित नहीं रह पाता।
Q6 से Q15 तक (त्वरित वैचारिक प्रश्न)
(a) भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR)
(b) जेनेटिक इंजीनियरिंग मूल्यांकन समिति (GEAC)
(c) वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR)
(d) जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT)
उत्तर: (b) व्याख्या: GEAC पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत एक वैधानिक निकाय है, जो जीएम फसलों की मंजूरी तय करता है।
(a) जीवाणु कोशिका में मुख्य गुणसूत्र के अलावा पाया जाने वाला गोलाकार, अतिरिक्त-गुणसूत्रीय डीएनए (Extra-chromosomal DNA)।
(b) विषाणु का प्रोटीन आवरण।
(c) पौधों की कोशिकाओं का रस।
(d) मानव कोशिका का केंद्रक।
उत्तर: (a) व्याख्या: प्लास्मिड स्वतंत्र रूप से प्रतिकृति (Replicate) बना सकते हैं, इसलिए इनमें वांछित जीन जोड़कर उन्हें होस्ट कोशिका में पहुँचाया जाता है।
(a) कीड़ों को खेत से भगाने के लिए।
(b) पादप कोशिकाओं (Plant Cells) में सीधे वांछित डीएनए या जीन को उच्च वेग से प्रवेश कराने के लिए।
(c) डीएनए की शुद्धता जांचने के लिए।
(d) कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए।
(a) आलू
(b) मक्का
(c) टमाटर
(d) बैंगन
(a) फसलों की लंबाई बढ़ाना।
(b) प्रजनन या आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी के माध्यम से फसलों के खाद्य भागों में पोषक तत्वों (विटामिन, खनिज) की मात्रा बढ़ाना।
(c) रासायनिक खादों का अधिक उपयोग करना।
(d) कीटनाशकों का छिड़काव।
(a) डीएनए पॉलीमरेज़
(b) रिवर्स ट्रांसक्रिप्टेज़ (Reverse Transcriptase)
(c) आरएनए पॉलीमरेज़
(d) एमाइलेज
(a) सोडियम ($Na^+$)
(b) पोटेशियम ($K^+$)
(c) कैल्शियम ($Ca^{2+}$)
(d) आयरन ($Fe^{2+}$)
(a) एग्रोबैक्टीरियम ट्यूमीफेशियन्स (Agrobacterium tumefaciens)
(b) ई. कोलाई (E. coli)
(c) थर्मस एक्वाटिकस
(d) लैक्टोबैसिलस
(a) शराब का रंग पूरी तरह काला करना।
(b) किण्वन (Fermentation) की दक्षता बढ़ाना और वाइन की सुगंध व स्वाद में सुधार करना।
(c) अल्कोहल की मात्रा शून्य करना।
(d) चीनी की मात्रा अत्यधिक बढ़ाना।
(a) एक समुद्री कवक
(b) थर्मस एक्वाटिकस (Thermus aquaticus) नामक थर्मोफिलिक जीवाणु
(c) एक मरुस्थलीय पौधा
(d) मानव यकृत कोशिका
भाग 2: चिकित्सा अनुप्रयोग, स्टेम सेल और जीन एडिटिंग (Medical Applications, Stem Cells & Gene Editing)
Q16. 'स्टेम सेल' (Stem Cells / मूल कोशिकाएं) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- स्टेम सेल में शरीर की किसी भी अन्य प्रकार की विशिष्ट कोशिका (जैसे रक्त, मांसपेशी, तंत्रिका) में विकसित होने की क्षमता होती है।
- 'टोटीपोटेंट' (Totipotent) स्टेम सेल एक संपूर्ण जीव को जन्म देने की क्षमता रखती हैं।
- केवल वयस्क मनुष्यों के शरीर से ही स्टेम सेल प्राप्त की जा सकती हैं, भ्रूण (Embryo) से नहीं।
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
अतः सही संयोजन केवल (1) और (2) है।
व्याख्या:
पहला कथन सही है: स्टेम सेल (मूल कोशिकाएं) ऐसी विशेष कोशिकाएं होती हैं जिनमें शरीर की किसी भी अन्य प्रकार की विशिष्ट कोशिका (जैसे रक्त कोशिकाएं, मांसपेशी कोशिकाएं या तंत्रिका कोशिकाएं) में विभाजित और विकसित होने की अद्वितीय क्षमता (प्लास्टिकिटी) होती है।
दूसरा कथन सही है: 'टोटीपोटेंट' (Totipotent) स्टेम सेल (जैसे युग्मनज या जायगोट) में इतनी क्षमता होती है कि वे शरीर की सभी कोशिकाओं के साथ-साथ एक पूर्ण जीव (Entire organism) को भी जन्म दे सकती हैं।
तीसरा कथन गलत है: स्टेम सेल केवल वयסकों (Adults) से ही नहीं, बल्कि भ्रूण (Embryo - विशेष रूप से ब्लास्टोसिस्ट अवस्था) से भी प्राप्त की जाती हैं, जिन्हें 'भ्रूण स्टेम सेल' (Embryonic Stem Cells) कहा जाता है। इसके अलावा ये नाभि रज्जु (Umbilical Cord) और कुछ वयस्क ऊतकों में भी पाई जाती हैं।
Q17. जैव चिकित्सा के क्षेत्र में अक्सर चर्चा में रहने वाली 'प्रेरित बहुशक्तियुक्त स्टेम कोशिका' (Induced Pluripotent Stem Cells - iPSCs) तकनीक क्या है?
(b) वयस्क सामान्य कायिक कोशिकाओं (जैसे त्वचा कोशिका) को आनुवंशिक रूप से पुन: प्रोग्राम करके भ्रूण स्टेम सेल जैसी बहुमुखी अवस्था में बदलना।
(c) कैंसर पैदा करने वाली कृत्रिम कोशिकाएं।
(d) केवल पौधों में पाई जाने वाली कोशिकाएं।
व्याख्या:
- 'प्रेरित बहुशक्तियुक्त स्टेम कोशिकाएं' (iPSCs) वे वयस्क दैहिक (somatic) कोशिकाएं होती हैं (जैसे त्वचा या रक्त की कोशिकाएं), जिन्हें विशिष्ट ट्रांसक्रिप्शन कारकों के परिचय के माध्यम से आनुवंशिक रूप से वापस पुन: प्रोग्राम (reprogram) किया जाता है।
- इस प्रक्रिया के बाद ये कोशिकाएं भ्रूण स्टेम सेल (Embryonic Stem Cells) जैसी विशेषताओं को प्राप्त कर लेती हैं, यानी इनमें शरीर की किसी भी अन्य कोशिका में विकसित होने की क्षमता (Pluripotency) आ जाती है।
- इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसके लिए भ्रूण को नष्ट करने की आवश्यकता नहीं पड़ती और यह पुनर्योजी चिकित्सा (Regenerative Medicine) व वैयक्तिकृत चिकित्सा (Personalized Medicine) में अत्यधिक महत्वपूर्ण है। (इसकी खोज के लिए वैज्ञानिक शििन्या यामानाका को नोबेल पुरस्कार भी मिला था।)
Q18. जीन एडिटिंग तकनीक 'CRISPR-Cas9' के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- यह प्रणाली जीवाणुओं (Bacteria) की एक प्राकृतिक रक्षा प्रणाली (Immune System) पर आधारित है जिसका उपयोग वे वायरसों से लड़ने के लिए करते हैं।
- 'Cas9' एक प्रोटीन एंजाइम है जो डीएनए श्रृंखला को सटीक स्थान पर काटने के लिए आणविक गाइड-आरएनए (gRNA) का उपयोग करता है।
- इसका उपयोग केवल आनुवंशिक बीमारियों के इलाज में किया जा सकता है, फसलों में सुधार के लिए नहीं।
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1
(d) 1, 2 और 3
व्याख्या:
- पहला कथन सही है: 'CRISPR-Cas9' प्रणाली वास्तव में बैक्टीरिया की एक प्राकृतिक रक्षा प्रणाली (Adaptive Immune System) पर आधारित है, जिसका उपयोग बैक्टीरिया अपने ऊपर आक्रमण करने वाले वायरसों (बैक्टीरियोफेज) के डीएनए को पहचानकर नष्ट करने के लिए करते हैं।
- दूसरा कथन सही है: इसमें 'Cas9' एक 'अण्वस्त्र' या आणविक कैंची (Molecular Scissor) की तरह काम करने वाला प्रोटीन एंजाइम है, जो गाइड-आरएनए (gRNA) की मदद से जीनोम के भीतर बिल्कुल सटीक स्थान पर पहुँचकर डीएनए श्रृंखला को काटता है।
- तीसरा कथन गलत है: इस तकनीक का उपयोग केवल चिकित्सा क्षेत्र (जैसे आनुवंशिक बीमारियों का इलाज) तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उपयोग फसलों के सुधार (जैसे रोग-प्रतिरोधी, अधिक उपज देने वाली और जलवायु-अनुकूल फसलें विकसित करने) में भी बड़े पैमाने पर किया जा रहा है।
Q19. 'मोनोक्लोनल एंटीबॉडी' (Monoclonal Antibodies - mAbs) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- ये प्रयोगशाला में निर्मित ऐसी प्रतिरक्षी (Antibodies) हैं जो किसी विशिष्ट एंटीजन या वायरस को ही निशाना बनाती हैं।
- इनके उत्पादन के लिए 'हाइब्रिडोमा तकनीक' (Hybridoma Technology) का उपयोग किया जाता है, जिसमें बी-कोशिकाओं को कैंसर कोशिकाओं के साथ संकरित किया जाता है।
- इनका उपयोग कैंसर और कोविड-19 के उपचार में किया गया है।
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
व्याख्या:
- पहला कथन सत्य है: मोनोक्लोनल एंटीबॉडी (mAbs) प्रयोगशाला में कृत्रिम रूप से तैयार की गई ऐसी प्रोटीनयुक्त प्रतिरक्षी होती हैं, जो शरीर में प्रवेश करने वाले किसी विशिष्ट एंटीजन या रोगजनक (जैसे वायरस या कैंसर कोशिका) को ही सटीक रूप से पहचानकर निशाना बनाती हैं।
- दूसरा कथन सत्य है: इनके बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए 'हाइब्रिडोमा तकनीक' (Hybridoma Technology) का उपयोग किया जाता है। इस तकनीक में विशिष्ट एंटीबॉडी बनाने वाली बी-कोशिकाओं (B-cells) को मायलोमा (कैंसर) कोशिकाओं के साथ संकरित (fuse) किया जाता है, जिससे अनिश्चित काल तक तेजी से विभाजित होने वाली और वांछित एंटीबॉडी उत्पन्न करने वाली संकर कोशिकाएं (Hybridoma) प्राप्त होती हैं।
- तीसरा कथन सत्य है: इनका उपयोग विभिन्न गंभीर बीमारियों जैसे कि कई प्रकार के कैंसर, ऑटोइम्यून विकारों और कोविड-19 के उपचार (जैसे एंटीबॉडी कॉकटेल थेरेपी) में सफलतापूर्वक किया गया है।
Q20 से Q30 तक (कथन एवं वैचारिक प्रश्न)
(a) थायरोक्सिन
(b) ह्यूमलिन (Humulin - कृत्रिम इंसुलिन)
(c) एस्ट्रोजन
(d) ग्रोथ हार्मोन
व्याख्या:
- ह्यूमलिन (Humulin) पुनःसंयोजक डीएनए (Recombinant DNA) तकनीक का उपयोग करके बनाया गया दुनिया का पहला व्यावसायिक रूप से उत्पादित आनुवंशिक रूप से इंजीनियर मानव हार्मोन (इंसुलिन) था।
- इसे 1983 में एली लिली एंड कंपनी (Eli Lilly) द्वारा बाजार में लॉन्च किया गया था।
- इससे पहले मधुमेह (Diabetes) के रोगियों के लिए इंसुलिन सुअर और मवेशियों (जानवरों) के अग्नाशय से निकाला जाता था, जिससे कई लोगों को एलर्जी या अन्य प्रतिरक्षा प्रतिक्रियाएं हो जाती थीं। आर डीएनए तकनीक से बने इस इंसुलिन ने इस समस्या को दूर कर दिया क्योंकि यह बिल्कुल मानव इंसुलिन के समान होता है।
(a) इसमें किए गए आनुवंशिक सुधार आने वाली पीढ़ियों में स्थानांतरित होते हैं।
(b) यह केवल शरीर की गैर-प्रजनन कोशिकाओं (जैसे फेफड़े, त्वचा या अस्थि मज्जा) में दोषपूर्ण जीन को बदलने तक सीमित है।
(c) इस पर वैश्विक स्तर पर पूर्ण प्रतिबंध है।
(d) यह केवल भ्रूण अवस्था में की जाती है।
व्याख्या:
- 'सॉमेटिक सेल जीन थेरेपी' (Somatic Cell Gene Therapy): इस तकनीक में शरीर की कायिक या दैहिक कोशिकाओं (Somatic cells यानी गैर-जनन कोशिकाएं जैसे रक्त कोशिकाएं, यकृत, फेफड़े या त्वचा की कोशिकाएं) में आनुवंशिक संशोधन किया जाता है।
- चूँकि यह सुधार केवल उसी व्यक्ति तक सीमित रहते हैं और उसके शुक्राणु या अंडाणु (जनन कोशिकाओं) को प्रभावित नहीं करते, इसलिए ये आने वाली पीढ़ियों में स्थानांतरित (Inherit) नहीं होते हैं।
- इसके विपरीत, 'जर्मलाइन जीन थेरेपी' (Germline Gene Therapy) में जनन कोशिकाओं या भ्रूण में संशोधन किया जाता है, जिसके प्रभाव अगली पीढ़ियों में जाते हैं और इस पर कई देशों में नैतिक कारणों से प्रतिबंध या कड़े नियम हैं।
(a) शरीर में नया डीएनए डालना।
(b) एक लघु ओलिगोन्यूक्लियोटाइड श्रृंखला का उपयोग करके किसी विशिष्ट रोगजनक प्रोटीन बनाने वाले mRNA से जुड़ना और उसकी कोडिंग को रोकना।
(c) एंटीबायोटिक दवाओं की शक्ति बढ़ाना।
(d) रक्त कोशिकाओं को पूरी तरह बदल देना।
व्याख्या:
- एंटीसेंस थेरेपी (Antisense Therapy): यह एक ऐसी आणविक चिकित्सा तकनीक है जिसमें कृत्रिम रूप से तैयार किए गए छोटे न्यूक्लिक एसिड के टुकड़े (जिन्हें एंटीसेंस ओलिगोन्यूक्लियोटाइड कहा जाता है) का उपयोग किया जाता है।
- यह ओलिगोन्यूक्लियोटाइड किसी विशेष रोग पैदा करने वाले प्रोटीन के लिए कोड करने वाले मैसेंजर आरएनए (mRNA) के पूरक (complementary) क्रम से जाकर जुड़ जाता है।
- इस जुड़ाव के कारण mRNA का अनुवाद (Translation) रुक जाता है और वह हानिकारक प्रोटीन नहीं बन पाता है, जिससे बीमारी के विकास को रोका जा सकता है।
(a) शरीर में सीधे मृत वायरस को प्रवेश कराना।
(b) शरीर की कोशिकाओं को वायरस का एक हानिरहित हिस्सा (जैसे स्पाइक प्रोटीन) बनाने के लिए आनुवंशिक निर्देश (mRNA) देना, जिससे प्रतिरक्षी तंत्र सक्रिय हो सके।
(c) मानव डीएनए को सीधे बदल देना।
(d) एंटीबॉडी का सीधे इंजेक्शन देना।
व्याख्या:
- एमआरएनए वैक्सीन (mRNA Vaccine): यह आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी पर आधारित एक क्रांतिकारी तकनीक है। इसमें संपूर्ण या मृत वायरस को शरीर में प्रवेश कराने के बजाय, केवल वायरस के एक विशिष्ट हिस्से (जैसे कोरोना वायरस का स्पाइक प्रोटीन) का आनुवंशिक कोड या निर्देश (mRNA) शरीर की कोशिकाओं को दिया जाता है।
- हमारी कोशिकाएं इस 'संदेश' का उपयोग करके उस हानिरहित प्रोटीन की प्रतिलिपियां बनाती हैं।
- इसे देखकर हमारा प्रतिरक्षी तंत्र (Immune System) इसे एक बाहरी और हानिकारक तत्व के रूप में पहचानता है और इसके खिलाफ एंटीबॉडी (प्रतिरक्षी) तथा मेमोरी सेल्स का निर्माण कर लेता है, ताकि भविष्य में वास्तविक वायरस के संक्रमण से सुरक्षा मिल सके।
- यह तकनीक मानव डीएनए के साथ किसी प्रकार का छेड़छाड़ या बदलाव नहीं करती है, क्योंकि mRNA नाभिक (Nucleus) तक नहीं पहुँचता है।
(a) प्राचीन काल की दवाओं का इतिहास।
(b) किसी व्यक्ति की आनुवंशिक संरचना (Genetics) दवाओं के प्रति उसकी प्रतिक्रिया को कैसे प्रभावित करती है (सटीक या व्यक्तिगत चिकित्सा)।
(c) पौधों से दवाएं निकालने की विधि।
(d) दवाओं के मूल्य का निर्धारण।
व्याख्या:
- फार्माकोजेनोमिक्स (Pharmacogenomics): यह औषधि विज्ञान (Pharmacology) और आनुवंशिकी (Genetics) का एक संयुक्त क्षेत्र है।
- यह इस बात का अध्ययन करता है कि किसी व्यक्ति के जीन (DNA) उसकी दवाइयों के प्रति प्रतिक्रिया को कैसे प्रभावित करते हैं।
- इस तकनीक की मदद से डॉक्टर यह पता लगा सकते हैं कि कौन सी दवा और उसकी कितनी खुराक किसी विशेष रोगी के लिए सबसे सुरक्षित और प्रभावी होगी, जिसे वैयक्तिकृत चिकित्सा (Personalized Medicine) या सटीक चिकित्सा कहा जाता है। इससे दवाओं के दुष्प्रभावों (Side Effects) को कम करने में भी मदद मिलती है।
(a) मलेरिया
(b) एड्स (HIV संक्रमण) की प्रारंभिक स्क्रीनिंग
(c) कुष्ठ रोग
(d) मधुमेह
व्याख्या:
- 'एलिसा' (ELISA) टेस्ट का पूरा नाम 'एंजाइम-लिंक्ड इम्यूनोसॉरबेंट एसे' (Enzyme-Linked Immunosorbent Assay) है।
- यह एंटीजन-एंटीबॉडी प्रतिक्रिया के सिद्धांत पर काम करने वाली एक अत्यधिक संवेदनशील और व्यापक रूप से उपयोग की जाने वाली नैदानिक तकनीक है।
- इसका प्राथमिक और सबसे प्रसिद्ध उपयोग एचआईवी (HIV) संक्रमण की प्रारंभिक स्क्रीनिंग और निदान के लिए किया जाता है, हालांकि इसका उपयोग अन्य कई संक्रामक रोगों, हार्मोन्स और एंटीबॉडी की उपस्थिति का पता लगाने के लिए भी किया जाता है।
(a) केरी मुलिस (Kary Mullis)
(b) एलेक जेफ्रीज
(c) फ्रेडरिक सैंगर
(d) डेविड बाल्टीमोर
व्याख्या:
- केरी मुलिस (Kary Mullis) ने 1983 में 'पोलीमरेज़ चेन रिएक्शन' (PCR) तकनीक की खोज की थी, जिसके लिए उन्हें 1993 में रसायन विज्ञान के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
- पीसीआर (PCR) एक ऐसी शक्तिशाली तकनीक है जिसका उपयोग डीएनए (DNA) की एक छोटी सी प्रति (या उसके एक छोटे खंड) की लाखों-करोड़ों प्रतियां (Amplification) कुछ ही घंटों में तैयार करने के लिए किया जाता है। इसका उपयोग फोरेंसिक विज्ञान, आनुवंशिक अनुसंधान और बीमारियों (जैसे कोविड-19 या एचआईवी) के निदान में व्यापक रूप से किया जाता है।
(a) मानव अंगों का कृत्रिम थ्री-डी प्रिंटिंग।
(b) गैर-मानव जीवों (जैसे सूअर/Pig) के जीवित अंगों, ऊतकों या कोशिकाओं को मानव प्राप्तकर्ता में प्रत्यारोपित करना।
(c) मृत व्यक्ति के अंगों का प्रत्यारोपण।
(d) केवल यकृत का प्रत्यारोपण।
व्याख्या:
- 'जैनोट्रांसप्लांटेशन' (Xenotransplantation): यह चिकित्सा विज्ञान और जैव प्रौद्योगिकी की एक ऐसी शाखा है जिसमें किसी एक प्रजाति से दूसरी प्रजाति (विशेष रूप से पशुओं, जैसे सूअर के अंगों, ऊतकों या कोशिकाओं) को मानव शरीर में प्रत्यारोपित (Transplant) किया जाता है।
- इसका मुख्य उद्देश्य मानव अंगों की भारी कमी (Shortage of human donor organs) को दूर करना है। सूअर (Pig) के अंगों का उपयोग इस क्षेत्र में सबसे अधिक शोध का विषय रहा है क्योंकि उनका आकार और शारीरिक क्रियाएं मनुष्यों से काफी हद तक मिलती-जुलती हैं।
(a) सामान्य जेनेरिक रासायनिक दवाएं।
(b) मूल पेटेंटेड जैविक दवाओं (Biologics) की लगभग समान आनुवंशिक प्रतियां जो उनकी प्रभावकारिता और सुरक्षा के अनुरूप होती हैं।
(c) केवल हर्बल अर्क।
(d) एंटीबायोटिक गोलियां।
व्याख्या:
- बायोसिमिलर्स (Biosimilars): ये ऐसे जैविक उत्पाद (Biological products) होते हैं जो पहले से ही स्वीकृत किसी मूल 'रेफरेंस' बायोलॉजिक दवा के अत्यधिक समान होते हैं।
- इन्हें जैव प्रौद्योगिकी की मदद से जीवित जीवों (जैसे यीस्ट, बैक्टीरिया या स्तनधारी कोशिकाओं) से तैयार किया जाता है।
- हालांकि ये रासायनिक जेनेरिक दवाओं की तरह बिल्कुल 'हूबहू' (identical) नहीं होती हैं (क्योंकि जैविक अणु बहुत जटिल और बड़े होते हैं), लेकिन विनियामक एजेंसियों के कड़े मानकों के अनुसार इनकी सुरक्षा, गुणवत्ता और प्रभावकारिता मूल दवा के समान ही होती है। इनका मुख्य उद्देश्य रोगियों के लिए उन्नत बायोलॉजिक उपचारों को अधिक किफायती और सुलभ बनाना है।
(a) एंडोस्कोपी
(b) एम्नियोसेंटेसिस (Amniocentesis)
(c) डायलिसिस
(d) सीटी स्कैन
व्याख्या:
- एम्नियोसेंटेसिस (Amniocentesis): यह एक प्रसव पूर्व (prenatal) नैदानिक तकनीक है। इसमें गर्भवती महिला के गर्भाशय से भ्रूण के चारों ओर मौजूद एमनियोटिक द्रव (Amniotic fluid) की कुछ मात्रा को एक सुई की मदद से निकाला जाता है।
- इस द्रव में भ्रूण की कोशिकाएं होती हैं, जिनका विश्लेषण करके क्रोमोसोमल असामान्यताएं (जैसे डाउन सिंड्रोम), आनुवंशिक विकार और चयापचय संबंधी समस्याओं का पता जन्म से पहले ही लगाया जा सकता है। (हालांकि, इसका उपयोग कई स्थानों पर भ्रूण के लिंग परीक्षण के लिए अवैध रूप से दुरुपयोग किए जाने के कारण प्रतिबंधित या विनियमित भी है)।
(a) वायरस-संक्रमित कोशिकाओं द्वारा स्रावित प्रोटीन जो अन्य स्वस्थ कोशिकाओं को वायरस संक्रमण से बचाते हैं (एंटी-वायरल प्रोटीन)।
(b) कैंसर पैदा करने वाले तत्व।
(c) जीवाणुनाशक दवाएं।
(d) पौधों के हार्मोन।
व्याख्या:
- इंटरफेरॉन (Interferons): ये कशेरुकी जीवों (vertebrates) की कोशिकाओं द्वारा वायरस, बैक्टीरिया या ट्यूमर के जवाब में स्रावित होने वाले प्राकृतिक ग्लाइकोप्रोटीन (Proteins) होते हैं।
- इनका मुख्य कार्य आसपास की स्वस्थ कोशिकाओं को यह संकेत देना होता है कि उनके पास एक रोगजनक (वायरल) आक्रमण हुआ है, जिससे वे अपनी रक्षा के लिए एंटी-वायरल यौगिकों का उत्पादन कर सकें और वायरस को फैलने से रोक सकें।
- जैव प्रौद्योगिकी और चिकित्सा विज्ञान में, इनका उत्पादन पुनःसंयोजक डीएनए तकनीक (Recombinant DNA Technology) के माध्यम से बड़े पैमाने पर किया जाता है। इनका उपयोग विभिन्न वायरल संक्रमणों (जैसे हेपेटाइटिस बी और सी) और कुछ प्रकार के कैंसर (जैसे ल्यूकेमिया और कपोजी सरकोमा) के उपचार में महत्वपूर्ण औषधि के रूप में किया जाता है।
भाग 3: औद्योगिक, पर्यावरणीय जैव प्रौद्योगिकी और भविष्य की तकनीकें (Industrial, Environmental & Future Tech)
Q31. पर्यावरण प्रदूषण को नियंत्रित करने में जैव प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग 'फाइटारेमेडिएशन' (Phytoremediation) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- इसमें मिट्टी या पानी से भारी धातुओं और प्रदूषकों को हटाने या कम करने के लिए सीधे पौधों का उपयोग किया जाता है।
- कुछ पौधे बिना नष्ट हुए अपने ऊतकों में अत्यधिक मात्रा में विषाक्त पदार्थों को संचित कर सकते हैं, जिन्हें 'हाइपरएक्युमुलेटर' (Hyperaccumulators) कहा जाता है।
- यह तकनीक केवल खारे पानी के महासागरों की सफाई के लिए ही प्रभावी है।
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1
(d) 1, 2 और 3
व्याख्या:
- पहला कथन सही है: फाइटारेमेडिएशन (Phytoremediation) पर्यावरण प्रदूषण को नियंत्रित करने की एक जैव-प्रौद्योगिकी (Biotechnology) तकनीक है, जिसमें मिट्टी, तलछट (sediments) या पानी से भारी धातुओं, हाइड्रोकार्बन और अन्य जहरीले प्रदूषकों को अवशोषित करने, नष्ट करने या स्थिर करने के लिए जीवित पौधों का उपयोग किया जाता है।
- दूसरा कथन सही है: कुछ विशेष पौधे अपने अंदर भारी मात्रा में विषाक्त पदार्थों (जैसे कैडमियम, निकेल, सीसा आदि) को अवशोषित करके बिना किसी नुकसान के अपने ऊतकों में संचित करने की क्षमता रखते हैं। ऐसे पौधों को 'हाइपरएक्युमुलेटर' (Hyperaccumulators) कहा जाता है।
- तीसरा कथन गलत है: यह तकनीक केवल खारे पानी के महासागरों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उपयोग मुख्य रूप से प्रदूषित स्थलीय मिट्टी (contaminated soils), भूजल (groundwater), और सतही जल स्रोतों को साफ करने के लिए किया जाता है।
Q32. 'बायोइन्फर्मेटिक्स' (Bioinformatics / जैव-सूचना विज्ञान) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- यह जीवविज्ञान, कंप्यूटर विज्ञान, सूचना प्रौद्योगिकी और गणित का एक अंतःविषय क्षेत्र है।
- इसका मुख्य कार्य भारी मात्रा में जैविक डेटा (जैसे जीनोम अनुक्रम, प्रोटीन संरचनाएं) को संग्रहीत, विश्लेषित और मॉडल करना है।
- 'ब्लैस्ट' (BLAST) बायोइन्फर्मेटिक्स में प्रयुक्त होने वाला एक प्रसिद्ध कंप्यूटर एल्गोरिदम टूल है।
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
व्याख्या:
- पहला कथन सही है: 'बायोइन्फर्मेटिक्स' (Bioinformatics) जीवविज्ञान, कंप्यूटर विज्ञान, सूचना प्रौद्योगिकी (IT) और गणित/सांख्यिकी का एक अंतःविषय (Interdisciplinary) क्षेत्र है।
- दूसरा कथन सही है: इसका मुख्य उद्देश्य आनुवंशिक डेटा, जीनोम अनुक्रम (Genome Sequences), प्रोटीन संरचनाओं और अन्य बड़े जैविक डेटासेट का प्रबंधन करना, उन्हें संग्रहीत करना और जटिल सॉफ्टवेयर टूल्स के माध्यम से उनका विश्लेषण व मॉडलिंग करना है।
- तीसरा कथन सही है: 'BLAST' (Basic Local Alignment Search Tool) बायोइन्फर्मेटिक्स में सबसे अधिक उपयोग किया जाने वाला एक प्रसिद्ध एल्गोरिदम और टूल है, जिसका उपयोग किसी अज्ञात डीएनए या प्रोटीन अनुक्रम की तुलना डेटाबेस में पहले से मौजूद अनुक्रमों से करने के लिए किया जाता है।
Q33 से Q50 तक (उच्च स्तरीय एवं समसामयिक प्रश्न)
(a) पॉलीहाइड्रॉक्सीअल्केनोएट्स (PHA) उत्पादक बैक्टीरिया
(b) नाइट्रीफाइंग बैक्टीरिया
(c) यीस्ट की सामान्य किस्में
(d) साइनोबैक्टीरिया
व्याख्या:
- पॉलीहाइड्रॉक्सीअल्केनोएट्स (PHA): ये बैक्टीरिया द्वारा प्राकृतिक रूप से उत्पादित पॉलीस्टर हैं, जिन्हें कई आनुवंशिक रूप से संशोधित सूक्ष्मजीवों (या प्राकृतिक बैक्टीरिया जैसे Ralstonia eutropha) की मदद से बड़े पैमाने पर तैयार किया जाता है।
- जब इन बैक्टीरिया को कार्बन या पोषक तत्वों की अधिकता और अन्य तत्वों की कमी जैसी तनावपूर्ण स्थितियों में रखा जाता है, तो वे ऊर्जा भंडार के रूप में PHA का उत्पादन करते हैं।
- इनका उपयोग पूरी तरह से बायोडिग्रेडेबल (जैविक रूप से नष्ट होने वाले) बायोप्लास्टिक्स के निर्माण में व्यापक रूप से किया जाता है, जो पारंपरिक पेट्रोलियम-आधारित प्लास्टिक का एक बेहतरीन और पर्यावरण-अनुकूल विकल्प हैं।
(a) पृथ्वी पर पाया जाने वाला सबसे प्राचीन जीवाश्म।
(b) प्रयोगशाला में रसायनों से निर्मित कृत्रिम, जीवित कोशिका जैसी प्राथमिक संरचना (Artificial Cell)।
(c) पौधों की मृत कोशिका।
(d) एक प्रकार का वायरस।
व्याख्या:
- प्रोटोसेल (Protocell): सिंथेटिक बायोलॉजी (Synthetic Biology) और जीव विज्ञान की उत्पत्ति (Origin of Life) के अध्ययन में प्रोटोसेल एक ऐसी प्रयोगशाला-निर्मित संरचना है जो जीवित कोशिकाओं (Living Cells) की कुछ बुनियादी विशेषताओं, जैसे कि झिल्ली (Membrane) जैसी संरचना, आंतरिक चयापचय (Metabolism) और आनुवंशिक जानकारी को दोहराने की क्षमता की नकल करती है।
- इसका उद्देश्य यह समझना है कि निर्जीव रसायनों से शुरुआती जीवन की शुरुआत कैसे हुई होगी और साथ ही चिकित्सा या जैव-उत्पादन के लिए कृत्रिम जैविक प्रणालियाँ तैयार करना है।
(a) केवल पौधों की लंबाई मापना।
(b) एक जैविक घटक (जैसे एंजाइम या एंटीबॉडी) को एक इलेक्ट्रॉनिक कनवर्टर से जोड़कर किसी विशिष्ट रसायन या प्रदूषक की सूक्ष्म मात्रा का सटीक पता लगाना।
(c) रक्तचाप को नियंत्रित करना।
(d) उपग्रहों को निर्देश भेजना।
व्याख्या:
- बायोसेंसर (Biosensor): यह एक विश्लेषणात्मक उपकरण है जो किसी जैविक मान्यता तत्व (Biological recognition element, जैसे एंजाइम, एंटीबॉडी, न्यूक्लिक एसिड या कोशिकाएं) को एक भौतिक-रासायनिक ट्रांसड्यूसर (Transducer) के साथ जोड़ता है।
- जब यह जैविक घटक अपने लक्ष्य (जैसे ग्लूकोज, प्रदूषक, रोगाणु या टॉक्सिन) के संपर्क में आता है, तो एक जैव-रासायनिक प्रतिक्रिया होती है, जिसे ट्रांसड्यूसर द्वारा एक विद्युत (Electrical) या प्रकाशीय संकेत में बदल दिया जाता है।
- इसका उपयोग चिकित्सा (जैसे ब्लड शुगर मापने के लिए), खाद्य सुरक्षा, पर्यावरण निगरानी और जैव प्रौद्योगिकी में अत्यधिक सटीकता से पदार्थों का पता लगाने के लिए किया जाता है।
(a) बायोसोर्पशन (Biosorption)
(b) बायोमाइनिंग
(c) बायोलीचिंग
(d) बायोवेंटिंग
सही उत्तर (a) बायोसोर्पशन (Biosorption) है।
व्याख्या:
बायोसोर्पशन (Biosorption): यह एक भौतिक-रासायनिक प्रक्रिया है जिसमें मृत या जीवित सूक्ष्मजीवों (जैसे कवक, बैक्टीरिया, शैवाल) के बायोमास का उपयोग करके जलीय विलयनों या औद्योगिक अपशिष्ट जल से भारी धातुओं (जैसे कैडमियम, क्रोमियम, सीसा, निकल आदि) को उनकी सतह पर सोख (sorb) कर हटाया जाता है।
अन्य विकल्पों का संक्षिप्त परिचय:
बायोमाइनिंग (Biomining): अयस्कों से धातुओं को निकालने के लिए सूक्ष्मजीवों का उपयोग।
बायोलीचिंग (Bioleaching): कम श्रेणी के अयस्कों से सूक्ष्मजीवों की मदद से धातुओं को घोलकर अलग करना।
बायोवेंटिंग (Bioventing): प्रदूषित मिट्टी के भीतर सूक्ष्मजीवों की गतिविधि को बढ़ाने के लिए हवा (ऑक्सीजन) प्रदान करना ताकि हाइड्रोकार्बन जैसे प्रदूषक नष्ट हो सकें।
(a) समुद्र से तेल निकालने में।
(b) सूक्ष्मजीवों (जैसे थायोबैसिलस) का उपयोग करके कम गुणवत्ता वाले अयस्कों (Ores) या ई-कचरे से मूल्यवान धातुएं (जैसे सोना, तांबा) अलग करना।
(c) कोयले की नई खदानों का पता लगाना।
(d) मिट्टी की जुताई करना।
व्याख्या:
- बायोमाइनिंग (Biomining): यह जैव-धातुविज्ञान (Biometallurgy) की एक तकनीक है जिसमें विशिष्ट सूक्ष्मजीवों (विशेष रूप से एसिडोफिलिक बैक्टीरिया जैसे Thiobacillus ferrooxidans) की मदद से कम श्रेणी या निम्न गुणवत्ता वाले अयस्कों (Low-grade ores), खनिज अवशेषों और ई-कचरे से तांबा, सोना, यूरेनियम और निकल जैसी मूल्यवान धातुओं को पर्यावरण-अनुकूल तरीके से निकाला जाता है।
- यह पारंपरिक और अत्यधिक प्रदूषणकारी खनन विधियों का एक बेहतरीन और टिकाऊ विकल्प है।
(a) रेड बायोटेक्नोलॉजी
(b) ग्रीन बायोटेक्नोलॉजी
(c) ब्लू बायोटेक्नोलॉजी (Blue Biotechnology)
(d) व्हाइट बायोटेक्नोलॉजी
व्याख्या:
- ब्लू बायोटेक्नोलॉजी (Blue Biotechnology): जैव प्रौद्योगिकी (Biotechnology) के विभिन्न क्षेत्रों को रंगों के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। इसमें 'नीला रंग' समुद्री और जलीय जीवों (Marine and Aquatic organisms) से जुड़ी जैव प्रौद्योगिकी को दर्शाता है। इसका उपयोग समुद्री जीवों से नई औषधियां, खाद्य उत्पाद, प्रसाधन सामग्री और जलीय कृषि (Aquaculture) में सुधार के लिए किया जाता है।
- अन्य रंगों का संक्षिप्त परिचय:
- रेड बायोटेक्नोलॉजी (Red Biotechnology): चिकित्सा और स्वास्थ्य देखभाल (Medical & Healthcare) से संबंधित, जैसे टीके, एंटीबायोटिक्स और जीन थेरेपी।
- ग्रीन बायोटेक्नोलॉजी (Green Biotechnology): कृषि (Agriculture) से संबंधित, जैसे फसल सुधार और जीएम फसलें।
- व्हाइट बायोटेक्नोलॉजी (White Biotechnology): औद्योगिक प्रक्रियाएं (Industrial Biotechnology), जैसे जैव-ईंधन (Biofuels) और बायोप्लास्टिक का निर्माण।
(a) दूध का उत्पादन बढ़ाना।
(b) औद्योगिक प्रक्रियाओं में सुधार के लिए एंजाइमों और सूक्ष्मजीवों का उपयोग करना (जैसे बायोकैटेलिसिस, बायोफ्यूल उत्पादन)।
(c) अंतरिक्ष अनुसंधान।
(d) केवल कपास की खेती।
व्याख्या:
- व्हाइट बायोटेक्नोलॉजी (White Biotechnology): इसे औद्योगिक जैव प्रौद्योगिकी (Industrial Biotechnology) भी कहा जाता है।
- इसका मुख्य फोकस उद्योगों (जैसे रसायन, प्लास्टिक, वस्त्र, ऊर्जा आदि) में पारंपरिक, प्रदूषणकारी और ऊर्जा-गहन रासायनिक प्रक्रियाओं के स्थान पर पर्यावरण-अनुकूल एंजाइमों और सूक्ष्मजीवों का उपयोग करना है।
- इसके अंतर्गत बायोफ्यूल (जैव ईंधन), बायोप्लास्टिक, डिटर्जेंट में प्रयुक्त होने वाले विशेष एंजाइम और जैव-रसायनों का उत्पादन किया जाता है, जिससे कार्बन उत्सर्जन और कचरे को कम करने में मदद मिलती है।
(a) यह सिलिकॉन चिप्स के स्थान पर सूचनाओं के प्रसंस्करण और भंडारण के लिए डीएनए अणुओं (A, T, G, C बेस) का उपयोग करता है।
(b) यह केवल सामान्य कंप्यूटरों से धीमा काम करता है।
(c) यह अत्यधिक बिजली की खपत करता है।
(d) इसका जीवविज्ञान से कोई संबंध नहीं है।
व्याख्या:
- डीएनए कंप्यूटर (DNA Computing): यह पारंपरिक सिलिकॉन-आधारित कंप्यूटरों का एक उन्नत और भविष्यवादी विकल्प है, जो डेटा के प्रसंस्करण (Processing), गणना और भंडारण के लिए सिलिकॉन चिप्स और बाइनरी कोड (0 और 1) के स्थान पर डीएनए अणुओं के न्यूक्लियोटाइड बेस (A, T, G, C) का उपयोग करता है।
- चूंकि डीएनए में विशाल मात्रा में डेटा को अत्यंत सूक्ष्म स्थान पर संग्रहीत करने की क्षमता होती है, इसलिए डीएनए कंप्यूटिंग में एक साथ लाखों-करोड़ों गणनाएं समानांतर (Parallel) रूप से करने की अद्भुत क्षमता होती है, जिससे यह पारंपरिक कंप्यूटरों की तुलना में कई मामलों में अत्यधिक तेज और ऊर्जा-कुशल साबित हो सकता है।
(a) कंप्यूटर में प्रयुक्त होने वाली हरी प्लास्टिक प्लेट।
(b) एक लघु सबस्ट्रेट (कांच या सिलिकॉन प्लेट) जिस पर हजारों संरेखित डीएनए या प्रोटीन अणु जड़े होते हैं, जिससे एक साथ कई आनुवंशिक परीक्षण किए जा सकते हैं (Microarray)।
(c) जानवरों की त्वचा में लगाई जाने वाली केवल पहचान चिप।
(d) रोबोट की बैटरी।
व्याख्या:
- बायोचिप (Biochip): यह जैव प्रौद्योगिकी और नैनो तकनीक पर आधारित एक उन्नत उपकरण है, जिसमें कांच, सिलिकॉन या नायलॉन की एक छोटी सी पट्टी (Substrate) पर हजारों छोटे-छोटे जैविक अणुओं (जैसे डीएनए, आरएनए, एंटीबॉडी या प्रोटीन) को व्यवस्थित रूप से जोड़ा या एम्बेड किया जाता है।
- इसे माइक्रोएरे (Microarray) भी कहा जाता है। इसकी सहायता से वैज्ञानिक एक ही समय में हजारों जीनों या प्रोटीनों की गतिविधि और उनके बीच की अंतःक्रियाओं (Interactions) का विश्लेषण कर सकते हैं।
- इसका उपयोग मुख्य रूप से चिकित्सा निदान, आनुवंशिक विकारों की पहचान, कैंसर अनुसंधान और नई दवाओं की खोज में किया जाता है।
(a) यह सौर ऊर्जा को सीधे बिजली में बदलता है।
(b) यह ऐसी जैव-विद्युतीय प्रणाली है जो बैक्टीरिया की चयापचय क्रियाओं द्वारा कार्बनिक कचरे या सीवेज को तोड़कर सीधे बिजली (Electricity) का उत्पादन करती है।
(c) यह केवल यूरेनियम पर काम करती है।
(d) इसमें अत्यधिक प्रदूषण होता है।
व्याख्या:
- माइक्रोबियल ईंधन सेल (Microbial Fuel Cells - MFCs): यह एक अभिनव जैव-प्रौद्योगिकी तकनीक है जो बैक्टीरिया (विद्युत-सक्रिय सूक्ष्मजीवों) की प्राकृतिक चयापचय (Metabolism) गतिविधियों का उपयोग करती है।
- ये सूक्ष्मजीव एनोड कक्ष में कार्बनिक पदार्थों (जैसे अपशिष्ट जल, सीवेज या गन्ने के रस) को विघटित करते हैं। इस प्रक्रिया में निकलने वाले इलेक्ट्रॉन और प्रोटॉन बिजली और पानी/कार्बन डाइऑक्साइड का उत्पादन करते हैं।
- इसका उपयोग अपशिष्ट जल उपचार (Wastewater treatment) के साथ-साथ पर्यावरण-अनुकूल और नवीकरणीय तरीके से बिजली उत्पन्न करने के लिए किया जाता है।
- 'बायोइथेनॉल' का उत्पादन मुख्य रूप से गन्ना, मक्का और गेहूं जैसी स्टार्च युक्त फसलों के किण्वन से होता है।
- 'बायोडिजल' का उत्पादन मुख्य रूप से गैर-खाद्य तेल उत्पादक पौधों जैसे जेट्रोफा (Jatropha) और पोंगामिया के बीजों से होता है।
सही कूट चुनें:
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1 और न ही 2
व्याख्या:
- पहला कथन सही है: बायोइथेनॉल एक प्रकार का जैव-ईंधन है जिसका उत्पादन मुख्य रूप से गन्ना, मक्का, गेहूं, शकरकंद और अन्य स्टार्च या चीनी युक्त फसलों के किण्वन (Fermentation) की प्रक्रिया द्वारा किया जाता है। यीस्ट जैसे सूक्ष्मजीव इन शर्करा/स्टार्च को इथेनॉल में परिवर्तित कर देते हैं।
- दूसरा कथन सही है: बायोडिजल मुख्य रूप से वनस्पति तेलों या जानवरों की वसा से बनाया जाता है। भारत जैसे देशों में, खाद्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, जेट्रोफा (Jatropha curcas) और पोंगामिया (Pongamia pinnata) जैसे गैर-खाद्य तेल उत्पादक पौधों के बीजों से बायोडिजल प्राप्त करने पर विशेष जोर दिया जाता है, क्योंकि इनका उपयोग भोजन के रूप में नहीं होता है।
(a) नवीनता (Novelty), आविष्कारशीलता (Inventive step) और औद्योगिक उपयोगिता (Industrial applicability)।
(b) आकार, रंग और वजन।
(c) केवल वैज्ञानिक का नाम।
(d) अत्यधिक लागत।
सही उत्तर (a) नवीनता (Novelty), आविष्कारशीलता (Inventive step) और औद्योगिक उपयोगिता (Industrial applicability) है।
व्याख्या:
वैश्विक पेटेंट मानदंड (Patentability Criteria): जैव प्रौद्योगिकी (Biotechnology) और अन्य क्षेत्रों में किसी भी आविष्कार (चाहे वह कोई जीन, आनुवंशिक रूप से संशोधित जीव, या कोई नई प्रक्रिया हो) को पेटेंट योग्य बनाने के लिए तीन बुनियादी शर्तों को पूरा करना अनिवार्य होता है:
नवीनता (Novelty): आविष्कार पूरी तरह से नया होना चाहिए, जो पहले कभी दुनिया में सार्वजनिक रूप से उपलब्ध या ज्ञात न हो।
आविष्कारशीलता या गैर-स्पष्टता (Inventive Step / Non-obviousness): वह आविष्कार उस क्षेत्र के किसी सामान्य जानकार विशेषज्ञ के लिए भी तुरंत या आसानी से समझ में आने वाला या सामान्य नहीं होना चाहिए, बल्कि उसमें एक तकनीकी प्रगति या बौद्धिक प्रयास दिखना चाहिए।
औद्योगिक उपयोगिता (Industrial Applicability): उस आविष्कार का कोई व्यावहारिक या उपयोगी अनुप्रयोग होना चाहिए, जिसका उपयोग उद्योग या कृषि आदि के उत्पादन में किया जा सके।
(a) पारंपरिक ज्ञान डिजिटल लाइब्रेरी (TKDL)
(b) भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी
(c) इसरो
(d) भारतीय वन सर्वेक्षण
व्याख्या:
- पारंपरिक ज्ञान डिजिटल लाइब्रेरी (Traditional Knowledge Digital Library - TKDL): यह भारत सरकार की एक अनूठी पहल है, जिसे वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) और आयुष मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से स्थापित किया गया है।
- इसका उद्देश्य: इसका मुख्य कार्य भारत के पारंपरिक ज्ञान (जैसे आयुर्वेद, योग, यूनानी और सिद्ध प्रणालियों) को डिजिटल रूप में दस्तावेजीकरण करना है।
- बायोपायरेसी पर रोक: विदेशी कंपनियों या अन्य देशों द्वारा भारत के पारंपरिक ज्ञान के आधार पर गलत तरीके से पेटेंट (पेटेंट चोरी या बायोपायरेसी) लेने की कोशिशों को रोकने के लिए इसे अंतरराष्ट्रीय पेटेंट कार्यालयों (जैसे WIPO) के साथ साझा किया जाता है, ताकि वे आसानी से साक्ष्य के रूप में इसका उपयोग कर सकें और किसी भी अनुचित पेटेंट आवेदन को खारिज कर सकें।
(a) खेतों से खरपतवार को पूरी तरह नष्ट करने की मशीन।
(b) ऐसी आनुवंशिक तकनीक जिसके द्वारा फसल के बीज अगली पीढ़ी में बांझ (Sterile) हो जाते हैं, जिससे किसान को हर साल नए बीज खरीदने पड़ते हैं।
(c) फसलों को पानी देने का आधुनिक यंत्र।
(d) कीटनाशक का एक प्रकार।
व्याख्या:
- टर्मिनेटर तकनीक (Terminator Technology): इसका आधिकारिक नाम जेनेटिक यूज़ रिस्ट्रिक्शन टेक्नोलॉजी (GURT) है। यह एक ऐसी विवादास्पद आनुवंशिक इंजीनियरिंग तकनीक है जिसके तहत पौधों में ऐसे जीन डाले जाते हैं जिससे उनके द्वारा उत्पादित बीज अगली पीढ़ी में पौधे उगने में असमर्थ (बांझ या sterile) हो जाते हैं।
- इसका प्रभाव: इस तकनीक का मुख्य उद्देश्य बीज कंपनियों के बौद्धिक संपदा अधिकारों (IPR) की रक्षा करना था, ताकि किसान पारंपरिक तरीके से अगली फसल के लिए बीजों को अपने पास बचाकर न रख सकें और उन्हें हर साल बीज कंपनियों से नए बीज खरीदने पड़े। नैतिक, सामाजिक और किसानों के अधिकारों के विरोध के कारण इस तकनीक पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी प्रतिबंध और आलोचनाएं रही हैं।
(a) एक निजी विदेशी बैंक।
(b) जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) के तहत स्थापित एक गैर-लाभकारी सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम (PSU) जो बायोटेक स्टार्टअप्स और नवाचारों को वित्तीय व तकनीकी सहायता देता है।
(c) केवल पौधों की नर्सरी।
(d) एक सॉफ्टवेयर कंपनी।
व्याख्या:
- BIRAC (Biotech Industry Research Assistance Council): इसकी स्थापना भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के जैव प्रौद्योगिकी विभाग (Department of Biotechnology - DBT) द्वारा एक गैर-लाभकारी धारा 8 (Section 8) कंपनी के रूप में की गई है।
- इसका उद्देश्य: इसका मुख्य कार्य भारत में उभरते हुए बायोटेक स्टार्टअप्स, उद्यमियों और शोधकर्ताओं को वित्तीय सहायता (Funding), ऊष्मायन (Incubation) और रणनीतिक मार्गदर्शन प्रदान करके देश में जैव प्रौद्योगिकी और नवाचार (Innovation) के पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना है।
(a) क्रेग वेंटर (Craig Venter)
(b) जेम्स वॉटसन
(c) फ्रांसिस क्रिक
(d) थॉमस मॉर्गन
(a) अत्यधिक मात्रा में नमक और चीनी का।
(b) हानिकारक बैक्टीरिया को नियंत्रित करने के लिए प्राकृतिक रूप से प्राप्त रोगाणुरोधी पदार्थों (जैसे नियोसिन, बैक्टीरियोसिन) और पर्यावरण-अनुकूल सूक्ष्मजीवों का।
(c) केवल रासायनिक सिरके का।
(d) प्लास्टिक कोटिंग का।
स्पष्टीकरण:
- सही विकल्प (b): हानिकारक बैक्टीरिया को नियंत्रित करने के लिए प्राकृतिक रूप से प्राप्त रोगाणुरोधी पदार्थों (जैसे नियोसिन, बैक्टीरियोसिन) और पर्यावरण-अनुकूल सूक्ष्मजीवों का।
- जैव-संरक्षण (Biopreservation) एक ऐसी विधि है जिसमें खाद्य पदार्थों के शेल्फ-लाइफ (भंडारण काल) को बढ़ाने और उन्हें खराब होने से बचाने के लिए प्राकृतिक सूक्ष्मजीवों या उनके द्वारा उत्पादित रोगाणुरोधी मेटाबोलाइट्स (जैसे बैक्टीरियोसिन, लैक्टिक एसिड आदि) का उपयोग किया जाता है। यह खाद्य सुरक्षा की एक अत्यधिक प्रभावी और सुरक्षित तकनीक है।
- अन्य विकल्पों का विश्लेषण:
- (a) अत्यधिक मात्रा में नमक और चीनी पारंपरिक संरक्षण विधियों (जैसे आचार या मुरब्बा बनाना) के अंतर्गत आते हैं, जो परासरण (Osmosis) के सिद्धांत पर काम करते हैं, न कि जैव-संरक्षण।
- (c) केवल रासायनिक सिरके का उपयोग रासायनिक संरक्षण (Chemical Preservation) का हिस्सा है।
- (d) प्लास्टिक कोटिंग खाद्य पदार्थों की पैकेजिंग से संबंधित है, जैव-संरक्षण से नहीं।
(a) अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF)
(b) विश्व बैंक (World Bank)
(c) एशियाई विकास बैंक
(d) न्यू डेवलपमेंट बैंक
स्पष्टीकरण:
- सही विकल्प (b): विश्व बैंक (World Bank)
- 'नेशनल बायोफार्मा मिशन' (National Biopharma Mission - NBM) को जून 2017 में भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) और जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (BIRAC) द्वारा शुरू किया गया था।
- इस महत्वाकांक्षी मिशन को विश्व बैंक के वित्तीय और तकनीकी सहयोग (50% सह-वित्तपोषण/को-फंडिंग) से लागू किया जा रहा है। इसे 'Innovate in India (i3)' कार्यक्रम के रूप में भी जाना जाता है, जिसका मुख्य उद्देश्य भारत को बायोफार्मास्यूटिकल्स और चिकित्सा उपकरणों के विकास के लिए एक वैश्विक केंद्र (Hub) बनाना है।