गुणसूत्रों की संरचना, न्यूक्लिक अम्ल, प्रोटीन संश्लेषण का केंद्रीय सिद्धांत, मनुष्य में लिंग निर्धारण
भाग 1: गुणसूत्रों की संरचना एवं प्रकार (Structure & Types of Chromosomes)
Q1. गुणसूत्र (Chromosomes) की संरचना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- गुणसूत्र शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग 'वाल्डेयर' (Waldeyer) द्वारा 1888 में किया गया था।
- कोशिका विभाजन की केवल 'मेटाफेज' (Metaphase) अवस्था में ही गुणसूत्रों की संरचना का सबसे स्पष्ट अध्ययन किया जा सकता है।
- गुणसूत्र के सिरों या अंतिम छोरों को 'टीलोमियर' (Telomere) कहा जाता है, जो इन्हें आपस में चिपकने से रोकते हैं।
उपरोक्त कथनों में से कौन से सही हैं?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 and 3
(d) 1, 2 और 3
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 and 3
(d) 1, 2 और 3
गुणसूत्र (Chromosomes) की संरचना से संबंधित दिए गए कथनों का विश्लेषण नीचे दिया गया है:
- पहला कथन सही है: 'गुणसूत्र' (Chromosome) शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग सन् 1888 में वाल्डेयर (Waldeyer) द्वारा किया गया था।
- दूसरा कथन सही है: कोशिका विभाजन की मेटाफेज (Metaphase) अवस्था के दौरान गुणसूत्रों की मोटाई और लंबाई सबसे स्पष्ट होती है, इसलिए इसी अवस्था में इनकी संरचना का सबसे अच्छा अध्ययन किया जाता है।
- तीसरा कथन सही है: गुणसूत्र के अंतिम सिरों को टीलोमियर (Telomere) कहा जाता है, जो डीएनए के छोरों की रक्षा करते हैं और पड़ोसी गुणसूत्रों को आपस में चिपकने से रोकते हैं।
अतः तीनों कथन सही हैं।
सही उत्तर (d) 1, 2 और 3 है।
Q2. गुणसूत्रों में पाए जाने वाले 'सेंट्रोमियर' (Centromere) के स्थान के आधार पर उनके वर्गीकरण के संबंध में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
- मेटासेंट्रिक (Metacentric): सेंट्रोमियर बिल्कुल बीच में होता है, जिससे दोनों भुजाएं बराबर होती हैं।
- एक्रोसेंट्रिक (Acrocentric): सेंट्रोमियर एक सिरे के बहुत पास होता है, जिससे एक भुजा बहुत छोटी और दूसरी बहुत लंबी होती है।
- टीलोसेंट्रिक (Telocentric): सेंट्रोमियर बिल्कुल छोर पर होता है।
उपरोक्त में से कितने युग्म सही सुमेलित हैं?
(a) केवल एक युग्म
(b) केवल दो युग्म
(c) सभी तीनों युग्म
(d) कोई भी नहीं
(a) केवल एक युग्म
(b) केवल दो युग्म
(c) सभी तीनों युग्म
(d) कोई भी नहीं
गुणसूत्रों में सेंट्रोमियर (Centromere) की स्थिति के आधार पर उनका वर्गीकरण निम्नलिखित प्रकार से किया जाता है:
- मेटासेंट्रिक (Metacentric): इसमें सेंट्रोमियर गुणसूत्र के बिल्कुल बीच में स्थित होता है, जिससे दोनों भुजाएं (Arms) लगभग बराबर लंबाई की होती हैं। यह कथन सही है।
- एक्रोसेंट्रिक (Acrocentric): इसमें सेंट्रोमियर एक सिरे के बहुत पास स्थित होता है, जिसके परिणामस्वरूप एक भुजा बहुत छोटी (p-arm) और दूसरी भुजा बहुत लंबी (q-arm) होती है। यह कथन भी सही है।
- टीलोसेंट्रिक (Telocentric): इसमें सेंट्रोमियर गुणसूत्र के बिल्कुल अंतिम छोर (Terminal end) पर स्थित होता है। यह कथन भी सही है।
यहाँ दिए गए तीनों युग्म सही सुमेलित हैं।
सही उत्तर (c) सभी तीनों युग्म है।
Q3. 'हिस्टोन प्रोटीन' (Histone Proteins) के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
(a) ये अम्लीय प्रोटीन होते हैं जिन पर ऋणावेश (Negative charge) होता है।
(b) ये क्षारीय प्रोटीन होते हैं जो लाइसिन और आर्जिनिन अमीनो अम्लों से भरपूर होते हैं और इन पर धनावेश होता है।
(c) इनका डीएनए पैकेजिंग में कोई योगदान नहीं होता।
(d) ये केवल आरएनए के चारों ओर लिपटे रहते हैं।
(b) ये क्षारीय प्रोटीन होते हैं जो लाइसिन और आर्जिनिन अमीनो अम्लों से भरपूर होते हैं और इन पर धनावेश होता है।
(c) इनका डीएनए पैकेजिंग में कोई योगदान नहीं होता।
(d) ये केवल आरएनए के चारों ओर लिपटे रहते हैं।
'हिस्टोन प्रोटीन' (Histone Proteins) के संदर्भ में सही कथन (b) है।
व्याख्या:
- क्षारीय प्रकृति और आवेश: हिस्टोन प्रोटीन क्षारीय (Basic) प्रोटीन होते हैं, जो लाइसिन (Lysine) और आर्जिनिन (Arginine) जैसे बेसिक अमीनो अम्लों से भरपूर होते हैं। अपने मूल (Basic) स्वभाव के कारण इन पर धनावेश (Positive charge) होता है।
- डीएनए पैकेजिंग: चूंकि डीएनए पर ऋणावेश (Negative charge) होता है, इसलिए धनावेशित हिस्टोन प्रोटीन और ऋणावेशित डीएनए आपस में मजबूती से आकर्षित होकर केंद्रक में डीएनए की सघन पैकेजिंग (न्यूक्लियोसोम निर्माण) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
अतः सही उत्तर (b) है।
Q4. गुणसूत्र के 'यूक्रोमेटिन' (Euchromatin) और 'हेटेरोक्रोमेटिन' (Heterochromatin) क्षेत्रों के बीच मुख्य अंतर क्या है?
(a) यूक्रोमेटिन सघन रूप से पैक होता है और आनुवंशिक रूप से निष्क्रिय होता है।
(b) यूक्रोमेटिन शिथिल रूप से पैक (Loose) होता है, हल्का रंग लेता है और आनुवंशिक रूप से अत्यधिक सक्रिय (Transcriptionally active) होता है।
(c) हेटेरोक्रोमेटिन बहुत तेजी से आरएनए बनाता है।
(d) दोनों क्षेत्रों में डीएनए नहीं पाया जाता।
(b) यूक्रोमेटिन शिथिल रूप से पैक (Loose) होता है, हल्का रंग लेता है और आनुवंशिक रूप से अत्यधिक सक्रिय (Transcriptionally active) होता है।
(c) हेटेरोक्रोमेटिन बहुत तेजी से आरएनए बनाता है।
(d) दोनों क्षेत्रों में डीएनए नहीं पाया जाता।
गुणसूत्र के 'यूक्रोमेटिन' (Euchromatin) और 'हेटेरोक्रोमेटिन' (Heterochromatin) क्षेत्रों के संदर्भ में सही कथन (b) है।
व्याख्या:
- यूक्रोमेटिन (Euchromatin): यह गुणसूत्र का वह क्षेत्र है जहाँ क्रोमैटिन शिथिल (Loosely packed) रूप से व्यवस्थित होता है। यह रंजक (Stain) लेने पर हल्का रंग दिखाई देता है और आनुवंशिक रूप से अत्यधिक सक्रिय (Transcriptionally active) होता है, यानी यह प्रोटीन निर्माण के लिए आरएनए (RNA) का सक्रिय रूप से अनुलेखन करता है।
- हेटेरोक्रोमेटिन (Heterochromatin): इसके विपरीत, यह सघन रूप से पैक (Densely packed) होता है, गहरा रंग लेता है और आनुवंशिक रूप से निष्क्रिय (Transcriptionally inactive) या कम सक्रिय होता है।
अतः सही उत्तर (b) है।
Q5. कुछ जीवों में पाए जाने वाले 'विशाल गुणसूत्रों' (Giant Chromosomes) जैसे 'लैम्पब्रश गुणसूत्र' (Lampbrush Chromosomes) के संदर्भ में कौन सा कथन सत्य है?
(a) ये केवल मानव की त्वचा कोशिकाओं में पाए जाते हैं।
(b) ये एम्फीबिया (उभयचरों) के ऊसाइट्स (Oocytes) में अर्धसूत्री विभाजन के दौरान पाए जाते हैं और अत्यधिक सक्रिय प्रोटीन संश्लेषण करते हैं।
(c) इनमें डीएनए की मात्रा शून्य होती है।
(d) इनकी खोज वॉटसन और क्रिक ने की थी।
(b) ये एम्फीबिया (उभयचरों) के ऊसाइट्स (Oocytes) में अर्धसूत्री विभाजन के दौरान पाए जाते हैं और अत्यधिक सक्रिय प्रोटीन संश्लेषण करते हैं।
(c) इनमें डीएनए की मात्रा शून्य होती है।
(d) इनकी खोज वॉटसन और क्रिक ने की थी।
'लैम्पब्रश गुणसूत्र' (Lampbrush Chromosomes) के संदर्भ में सही कथन (b) है।
व्याख्या:
- उद्भव और उपस्थिति: लैम्पब्रश गुणसूत्र और पॉलिटेन गुणसूत्र (Polytene chromosomes) 'विशाल गुणसूत्र' (Giant Chromosomes) के उदाहरण हैं। लैम्पब्रश गुणसूत्र मुख्य रूप से उभयचरों (Amphibians) के डिंब या ऊसाइट्स (Oocytes) में अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis) की डिप्लोटीन (Diplotene) अवस्था के दौरान स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं।
- कार्य: ये अत्यधिक सक्रिय रूप से ट्रांसक्रिप्शन (Transcription) करते हैं, जिससे अंडे के विकास के लिए आवश्यक आरएनए और प्रोटीन का संश्लेषण होता है।
- खोज: इनकी खोज सबसे पहले फ्लेमिंग (1882) द्वारा की गई थी और इनका विस्तृत अध्ययन रीयल (Rückert, 1892) द्वारा किया गया था (वॉटसन और क्रिक द्वारा नहीं)।
अतः सही उत्तर (b) है।
Q6. गुणसूत्र के उस छोटे हिस्से को क्या कहते हैं जो द्वितीयक संकीर्णन (Secondary Constriction) के आगे स्थित होता है और एक मार्कर की तरह कार्य करता है?
(a) क्रोमेटिड
(b) सैटेलाइट (Satellite / SAT-DNA)
(c) सेंट्रोसोम
(d) काइनेटोकोर
(a) क्रोमेटिड
(b) सैटेलाइट (Satellite / SAT-DNA)
(c) सेंट्रोसोम
(d) काइनेटोकोर
गुणसूत्र के उस छोटे हिस्से को जो द्वितीयक संकीर्णन (Secondary Constriction) के आगे स्थित होता है और एक मार्कर की तरह कार्य करता है, सैटेलाइट (Satellite / SAT-DNA) कहा जाता है।
अतः सही उत्तर (b) सैटेलाइट (Satellite / SAT-DNA) है।
Q7. कोशिका विभाजन के समय स्पिंडल फाइबर (तर्कु तंतु) गुणसूत्र के किस विशिष्ट प्रोटीन आवरण से आकर जुड़ते हैं?
(a) काइनेटोकोर (Kinetochore)
(b) हिस्टोन
(c) टीलोमियर
(d) आरएनए प्राइमर
(a) काइनेटोकोर (Kinetochore)
(b) हिस्टोन
(c) टीलोमियर
(d) आरएनए प्राइमर
कोशिका विभाजन के समय स्पिंडल फाइबर (तर्कु तंतु) गुणसूत्र के काइनेटोकोर (Kinetochore) नामक विशिष्ट प्रोटीन आवरण से आकर जुड़ते हैं।
व्याख्या:
- काइनेटोकोर (Kinetochore): यह सेंट्रोमियर के क्षेत्र में स्थित एक जटिल प्रोटीन संरचना है। कोशिका विभाजन की मेटाफेज अवस्था के दौरान, स्पिंडल फाइबर इसी संरचना से जुड़ते हैं, जो बाद में गुणसूत्रों को कोशिका के विपरीत ध्रुवों की ओर खींचने में मदद करती है।
अतः सही उत्तर (a) है।
Q8. एक सामान्य मानव कायिक कोशिका (Somatic Cell) में गुणसूत्रों की कुल संख्या और विन्यास क्या होता है?
(a) 23 गुणसूत्र
(b) 46 गुणसूत्र (22 जोड़े ऑटोसोम + 1 जोड़ा लिंग गुणसूत्र)
(c) 48 गुणसूत्र
(d) 44 ऑटोसोम + 2 जोड़े लिंग गुणसूत्र
(a) 23 गुणसूत्र
(b) 46 गुणसूत्र (22 जोड़े ऑटोसोम + 1 जोड़ा लिंग गुणसूत्र)
(c) 48 गुणसूत्र
(d) 44 ऑटोसोम + 2 जोड़े लिंग गुणसूत्र
एक सामान्य मानव कायिक कोशिका (Somatic Cell) में गुणसूत्रों की कुल संख्या 46 होती है, जो 23 जोड़ों के रूप में व्यवस्थित होते हैं। इनमें से 22 जोड़े ऑटोसोम (Autosomes) होते हैं और 1 जोड़ा लिंग गुणसूत्र (Sex Chromosomes) का होता है।
अतः सही उत्तर (b) 46 गुणसूत्र (22 जोड़े ऑटोसोम + 1 जोड़ा लिंग गुणसूत्र) है।
Q9. पॉलिटीन गुणसूत्रों (Polytene Chromosomes) की खोज सर्वप्रथम किसने और किस जीव में की थी?
(a) बालमियानी (Balbiani) ने काइरोनोमस कीट की लार ग्रंथि में
(b) मेंडल ने मटर में
(c) मॉर्गन ने चूहे में
(d) फ्लेमिंग ने कवक में
(a) बालमियानी (Balbiani) ने काइरोनोमस कीट की लार ग्रंथि में
(b) मेंडल ने मटर में
(c) मॉर्गन ने चूहे में
(d) फ्लेमिंग ने कवक में
पॉलिटीन गुणसूत्रों (Polytene Chromosomes) की खोज सर्वप्रथम बालमियानी (Balbiani) ने 1881 में काइरोनोमस (Chironomus) नामक कीट की लार ग्रंथि (Salivary gland) की कोशिकाओं में की थी। इन्हें 'लार ग्रंथि गुणसूत्र' (Salivary gland chromosomes) भी कहा जाता है।
अतः सही उत्तर (a) बालमियानी (Balbiani) ने काइरोनोमस कीट की लार ग्रंथि में है।
Q10. उम्र बढ़ने (Aging) के साथ कोशिकाओं में क्रोमोसोम के किस भाग का क्षरण (Shortening) होता है, जिसे 'जैविक घड़ी' (Biological Clock) भी माना जाता है?
(a) सेंट्रोमियर
(b) टीलोमियर (Telomere)
(c) क्रोमोमियर
(d) मैट्रिक्स
(a) सेंट्रोमियर
(b) टीलोमियर (Telomere)
(c) क्रोमोमियर
(d) मैट्रिक्स
उम्र बढ़ने (Aging) के साथ कोशिकाओं में क्रोमोसोम के टीलोमियर (Telomere) भाग का क्षरण (Shortening) होता है।
व्याख्या:
- टीलोमियर (Telomere): ये गुणसूत्र के सिरों पर स्थित डीएनए के दोहराव वाले अनुक्रम (Repetitive sequences) होते हैं। कोशिका विभाजन के साथ-साथ इनका आकार धीरे-धीरे छोटा होता जाता है।
- जैविक घड़ी (Biological Clock): टीलोमियर की लंबाई को कोशिका की 'जैविक घड़ी' माना जाता है। जब टीलोमियर एक निश्चित सीमा से अधिक छोटे हो जाते हैं, तो कोशिका विभाजन करना बंद कर देती है और कोशिका 'सीनेसेंस' (Senescence) या वृद्धावस्था में पहुँच जाती है।
अतः सही उत्तर (b) टीलोमियर (Telomere) है।
Q11. किसी जीव के गुणसूत्रों के आकार, संख्या और उनकी बनावट के योजनाबद्ध ग्राफिक प्रदर्शन को क्या कहा जाता है?
(a) जीनोटाइप
(b) कैरियोटाइप या इडियोग्राम (Karyotype / Idiogram)
(c) फेनोटाइप
(d) वंशावली चार्ट
(a) जीनोटाइप
(b) कैरियोटाइप या इडियोग्राम (Karyotype / Idiogram)
(c) फेनोटाइप
(d) वंशावली चार्ट
किसी जीव के गुणसूत्रों के आकार, संख्या और उनकी बनावट के योजनाबद्ध ग्राफिक प्रदर्शन को कैरियोटाइप (Karyotype) या इडियोग्राम (Idiogram) कहा जाता है।
अतः सही उत्तर (b) कैरियोटाइप या इडियोग्राम (Karyotype / Idiogram) है।
Q12. गुणसूत्रों का वह भाग जो आनुवंशिकी की मूल भौतिक और कार्यात्मक इकाई है, क्या कहलाता है?
(a) सेंट्रोसोम
(b) जीन (Gene)
(c) हिस्टोन अष्टक
(d) टीलोमरेज
(a) सेंट्रोसोम
(b) जीन (Gene)
(c) हिस्टोन अष्टक
(d) टीलोमरेज
गुणसूत्रों का वह भाग जो आनुवंशिकी की मूल भौतिक और कार्यात्मक इकाई है, जीन (Gene) कहलाता है।
सही उत्तर:
(b) जीन (Gene)
संक्षिप्त विवरण:
- जीन (Gene): यह डीएनए (DNA) की एक विशिष्ट खंड या इकाई है, जो जीवों में लक्षणों (Traits) को माता-पिता से संतानों में स्थानांतरित करती है।
- अन्य विकल्प:
- सेंट्रोसोम: यह कोशिका विभाजन में मदद करने वाला अंगक है।
- हिस्टोन अष्टक: यह वह प्रोटीन कोर है जिस पर डीएनए कुंडलित रहता है।
- टीलोमरेज: यह गुणसूत्रों के सिरों (टीलोमेरेस) की लंबाई बनाए रखने वाला एंजाइम है।
Q13. अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis) के दौरान समजात गुणसूत्रों के गैर-सहोदर क्रोमेटिड्स (Non-sister chromatids) के बीच आनुवंशिक पदार्थों का आदान-प्रदान क्या कहलाता है?
(a) उत्परिवर्तन
(b) जीन विनिमय या क्रॉसिंग ओवर (Crossing Over)
(c) सहलग्नता
(d) प्रतिकृतिकरण
(a) उत्परिवर्तन
(b) जीन विनिमय या क्रॉसिंग ओवर (Crossing Over)
(c) सहलग्नता
(d) प्रतिकृतिकरण
अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis) के दौरान समजात गुणसूत्रों के गैर-सहोदर क्रोमेटिड्स (Non-sister chromatids) के बीच आनुवंशिक पदार्थों का आदान-प्रदान जीन विनिमय या क्रॉसिंग ओवर (Crossing Over) कहलाता है।
व्याख्या:
- क्रॉसिंग ओवर (Crossing Over): यह अर्धसूत्री विभाजन की प्रथम अवस्था (Meiosis I) की प्रोफेज-I (Prophase-I) की पैकीटीन (Pachytene) उप-अवस्था के दौरान होता है। इसमें समजात गुणसूत्रों के बीच आनुवंशिक सामग्री (DNA) की अदला-बदली होती है, जिससे जीवों में विभिन्नताएँ (Variations) उत्पन्न होती हैं।
अतः सही उत्तर (b) जीन विनिमय या क्रॉसिंग ओवर (Crossing Over) है।
Q14. जब किसी कोशिका में गुणसूत्रों के पूरे सेट की संख्या दोगुनी या तिगुनी हो जाती है (जैसे 2n से 3n या 4n), तो इस स्थिति को क्या कहते हैं?
(a) एन्यूप्लोइडी
(b) पॉलीप्लोइडी (Polyploidy / बहुगुणिता)
(c) विलोपन
(d) स्थानान्तरण
(a) एन्यूप्लोइडी
(b) पॉलीप्लोइडी (Polyploidy / बहुगुणिता)
(c) विलोपन
(d) स्थानान्तरण
जब किसी कोशिका में गुणसूत्रों के पूरे सेट की संख्या दोगुनी या तिगुनी हो जाती है (जैसे 2n से 3n, 4n आदि), तो इस स्थिति को पॉलिटीन या पॉलीप्लोइडी (Polyploidy / बहुगुणिता) कहा जाता है।
अतः सही उत्तर (b) पॉलीप्लोइडी (Polyploidy / बहुगुणिता) है।
विस्तृत व्याख्या एवं अन्य विकल्पों के गलत होने का कारण:
- विकल्प (b) पॉलीप्लोइडी क्यों सही है?
- सामान्यतः जीव द्विगुणित (Diploid, 2n) होते हैं, लेकिन जब कोशिका विभाजन के दौरान केंद्रक विभाजन के बाद साइटोकाइनेसिस नहीं होता है, तो गुणसूत्रों के पूरे सेट की संख्या बढ़कर 3n (त्रिगुणित), 4n (चतुर्गुणिता) आदि हो जाती है। इस आनुवंशिक स्थिति को पॉलीप्लोइडी (Polyploidy) कहते हैं। यह पौधों में बहुत सामान्य है और बड़े आकार के फल या फूल विकसित करने में सहायक होती है।
- अन्य विकल्प क्यों गलत हैं?
- (a) एन्यूप्लोइडी (Aneuploidy): यह गुणसूत्रों के पूरे सेट में वृद्धि या कमी नहीं, बल्कि किसी एक या दो विशिष्ट गुणसूत्रों की संख्या में कमी (जैसे Monosomy, 2n-1) या वृद्धि (जैसे Trisomy, 2n+1) को दर्शाती है (जैसे डाउन सिंड्रोम)।
- (c) विलोपन (Deletion): यह गुणसूत्र की संरचना में होने वाला परिवर्तन है, जिसमें गुणसूत्र का एक खंड या सिरा टूटकर अलग हो जाता है (यह संख्या में गुणसूत्रों के दोगुने/तिगुने होने से संबंधित नहीं है)।
- (d) स्थानान्तरण (Translocation): यह भी गुणसूत्र की संरचनात्मक असामान्यता है, जिसमें गैर-समजात (Non-homologous) गुणसूत्रों के बीच डीएनए खंडों का आदान-प्रदान या स्थानांतरण होता है।
Q15. मानव जीनोम परियोजना के अनुसार, मनुष्यों के किस गुणसूत्र पर जीनों की संख्या सर्वाधिक (2968) और किस पर सबसे कम (231) पाई गई है?
(a) गुणसूत्र 1 पर सर्वाधिक और Y गुणसूत्र पर सबसे कम
(b) X पर सर्वाधिक और Y पर सबसे कम
(c) गुणसूत्र 21 पर सर्वाधिक और 22 पर सबसे कम
(d) सभी गुणसूत्रों पर जीनों की संख्या बराबर होती है
(a) गुणसूत्र 1 पर सर्वाधिक और Y गुणसूत्र पर सबसे कम
(b) X पर सर्वाधिक और Y पर सबसे कम
(c) गुणसूत्र 21 पर सर्वाधिक और 22 पर सबसे कम
(d) सभी गुणसूत्रों पर जीनों की संख्या बराबर होती है
मानव जीनोम परियोजना (Human Genome Project) के निष्कर्षों के अनुसार, सही उत्तर (a) है।
व्याख्या:
- सर्वाधिक जीन: मानव गुणसूत्रों में गुणसूत्र 1 (Chromosome 1) सबसे बड़ा है और इसमें जीनों की संख्या सर्वाधिक यानी 2968 पाई गई है।
- सबसे कम जीन: Y गुणसूत्र (Y Chromosome) में जीनों की संख्या सबसे कम है, जो कि लगभग 231 है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
- (b) X पर सर्वाधिक: यह गलत है, क्योंकि X गुणसूत्र में जीनों की संख्या गुणसूत्र 1 से कम है (X में लगभग 1098 जीन होते हैं)।
- (c) गुणसूत्र 21 और 22: ये मानव गुणसूत्रों में सबसे छोटे गुणसूत्रों में से हैं, जिनमें जीनों की संख्या बहुत कम होती है, न कि सर्वाधिक।
- (d) सभी पर बराबर: यह कथन पूरी तरह से गलत है, क्योंकि अलग-अलग गुणसूत्रों के आकार और उन पर स्थित डीएनए अनुक्रमों के आधार पर जीनों की संख्या में बहुत अधिक अंतर होता है।
भाग 2: न्यूक्लिक अम्ल - डीएनए और आरएनए (Nucleic Acids - DNA & RNA)
Q16. न्यूक्लिक अम्लों (Nucleic Acids) की रासायनिक संरचना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- न्यूक्लिक अम्ल न्यूक्लियोटाइड (Nucleotides) के बहुलक (Polymers) होते हैं।
- एक न्यूक्लियोटाइड तीन घटकों से मिलकर बनता है - एक पेंटोज शर्करा, एक नाइट्रोजनस बेस और एक फॉस्फेट समूह।
- न्यूक्लिक अम्ल में दो न्यूक्लियोटाइड आपस में 'पेप्टाइड बंध' द्वारा जुड़े होते हैं।
उपरोक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1
(d) 1, 2 और 3
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1
(d) 1, 2 और 3
न्यूक्लिक अम्लों (Nucleic Acids) के संदर्भ में सही उत्तर (a) केवल 1 और 2 है।
व्याख्यात्मक हल:
- कथन 1 सही है: न्यूक्लिक अम्ल (जैसे डीएनए और आरएनए) वास्तव में न्यूक्लियोटाइड (Nucleotides) की लंबी श्रृंखला या बहुलक (Polymers) होते हैं।
- कथन 2 सही है: एक न्यूक्लियोटाइड की संरचना में तीन मुख्य घटक होते हैं:
- एक पेंटोज शर्करा (डीएनए में डीऑक्सीराइबोज और आरएनए में राइबोज)।
- एक नाइट्रोजनस बेस (प्यूरीन या पिरिमिडीन)।
- एक फॉस्फेट समूह।
- कथन 3 गलत है: न्यूक्लिक अम्ल में दो न्यूक्लियोटाइड आपस में पेप्टाइड बंध (Peptide bond) द्वारा नहीं, बल्कि फॉस्फोडाइएस्टर बंध (Phosphodiester bond) द्वारा जुड़े होते हैं।
- नोट: पेप्टाइड बंध का उपयोग प्रोटीन (अमीनो एसिड) की श्रृंखला बनाने के लिए किया जाता है, न कि न्यूक्लिक अम्लों में।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
- (b) केवल 2 और 3: गलत है क्योंकि कथन 3 असत्य है।
- (c) केवल 1: अधूरा है क्योंकि कथन 2 भी पूर्णतः सत्य है।
- (d) 1, 2 और 3: गलत है क्योंकि कथन 3 (पेप्टाइड बंध वाला भाग) वैज्ञानिक रूप से गलत है।
Q17. डीएनए में पाए जाने वाले नाइट्रोजनस बेसों (Nitrogenous Bases) के वर्गीकरण के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- प्यूरीन (Purines) दोहरे वलय (Double ring) वाली संरचनाएं हैं, जिनमें एडिनिन (A) और ग्वानिन (G) शामिल हैं।
- पिरिमिडिन (Pyrimidines) एकल वलय (Single ring) वाली संरचनाएं हैं, जिनमें साइटोसिन (C) और थायमीन (T) शामिल हैं।
- आरएनए में थायमीन के स्थान पर यूरेसिल (U) पिरिमिडिन पाया जाता है।
उपरोक्त में से कौन से कथन सत्य हैं?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
डीएनए और आरएनए में पाए जाने वाले नाइट्रोजनस बेसों (Nitrogenous Bases) के संदर्भ में दिए गए तीनों कथन सत्य हैं।
विस्तृत व्याख्या एवं विश्लेषण:
- कथन 1 सत्य है: प्यूरीन (Purines) दो चक्रीय या दोहरे वलय (Double ring) वाली नाइट्रोजनयुक्त संरचनाएं होती हैं, जिसके अंतर्गत एडिनिन (Adenine - A) और ग्वानिन (Guanine - G) आते हैं।
- कथन 2 सत्य है: पिरिमिडिन (Pyrimidines) एकल वलय (Single ring) वाली संरचनाएं होती हैं, जिसके अंतर्गत साइटोसिन (Cytosine - C) और डीएनए के मामले में थायमीन (Thymine - T) शामिल होते हैं।
- कथन 3 सत्य है: डीएनए और आरएनए की रासायनिक संरचना में एक मुख्य अंतर यह होता है कि आरएनए (RNA) में थायमीन (T) के स्थान पर यूरेसिल (Uracil - U) नामक पिरिमिडिन बेस पाया जाता है।
अतः सही उत्तर (d) 1, 2 और 3 है।
Q18. 'न्यूक्लियोसाइड' (Nucleoside) और 'न्यूक्लियोटाइड' (Nucleotide) के बीच मुख्य अंतर क्या है?
(a) न्यूक्लियोसाइड में फॉस्फेट समूह नहीं होता है; यह केवल शर्करा और नाइट्रोजनस बेस का संयोजन है।
(b) न्यूक्लियोटाइड में शर्करा नहीं होती है।
(c) न्यूक्लियोसाइड केवल आरएनए में पाया जाता है।
(d) दोनों में कोई रासायनिक अंतर नहीं है।
(b) न्यूक्लियोटाइड में शर्करा नहीं होती है।
(c) न्यूक्लियोसाइड केवल आरएनए में पाया जाता है।
(d) दोनों में कोई रासायनिक अंतर नहीं है।
'न्यूक्लियोसाइड' (Nucleoside) और 'न्यूक्लियोटाइड' (Nucleotide) के बीच मुख्य अंतर के संदर्भ में सही उत्तर (a) है।
विस्तृत व्याख्या एवं अन्य विकल्पों के गलत होने का कारण:
- विकल्प (a) क्यों सही है?
- न्यूक्लियोसाइड (Nucleoside): यह केवल पेंटोज शर्करा (Pentose Sugar) और एक नाइट्रोजनस बेस (Nitrogenous Base) से मिलकर बनता है। इसमें फॉस्फेट समूह नहीं होता है। (अर्थात: न्यूक्लियोसाइड = शर्करा + नाइट्रोजनस बेस)।
- न्यूक्लियोटाइड (Nucleotide): जब एक न्यूक्लियोसाइड के साथ फॉस्फेट समूह (Phosphate group) जुड़ जाता है, तब वह न्यूक्लियोटाइड बनता है। (अर्थात: न्यूक्लियोटाइड = न्यूक्लियोसाइड + फॉस्फेट समूह, या शर्करा + बेस + फॉस्फेट)।
- अन्य विकल्प क्यों गलत हैं?
- (b) गलत है: न्यूक्लियोटाइड में शर्करा अनुपस्थित नहीं होती, बल्कि शर्करा, नाइट्रोजनस बेस और फॉस्फेट तीनों इसके अनिवार्य घटक हैं।
- (c) गलत है: न्यूक्लियोसाइड केवल आरएनए तक सीमित नहीं है, बल्कि यह डीएनए (Deoxynucleosides) में भी पाया जाता है।
- (d) गलत है: दोनों की रासायनिक संरचना में स्पष्ट अंतर होता है, क्योंकि न्यूक्लियोटाइड में फॉस्फेट समूह जुड़ा होता है जबकि न्यूक्लियोसाइड में फॉस्फेट समूह नहीं होता है।
Q19. आरएनए (RNA) के विभिन्न प्रकारों और उनके कार्यों के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
- m-RNA (मैसेंजर आरएनए): डीएनए से आनुवंशिक कोड को राइबोसोम तक ले जाना।
- t-RNA (ट्रांसफर आरएनए): अमीनो अम्लों को पकड़कर प्रोटीन संश्लेषण के स्थान (राइबोसोम) तक लाना।
- r-RNA (राइबोसोमल आरएनए): राइबोसोम का संरचनात्मक घटक होना और उत्प्रेरक (Ribozyme) की भूमिका निभाना।
उपरोक्त में से कितने युग्म सही सुमेलित हैं?
(a) केवल एक युग्म
(b) केवल दो युग्म
(c) सभी तीनों युग्म
(d) कोई भी नहीं
(a) केवल एक युग्म
(b) केवल दो युग्म
(c) सभी तीनों युग्म
(d) कोई भी नहीं
RNA के प्रकारों और उनके कार्यों के संदर्भ में दिए गए तीनों युग्म सही सुमेलित हैं।
विस्तृत व्याख्या:
- m-RNA (Messenger RNA): यह डीएनए (DNA) से आनुवंशिक सूचनाओं (Genetic code) को केंद्रक (Nucleus) से कोशिका द्रव्य में स्थित राइबोसोम तक ले जाने का कार्य करता है। यह प्रोटीन संश्लेषण के लिए टेम्पलेट की तरह काम करता है। (यह युग्म सही है)।
- t-RNA (Transfer RNA): इसका मुख्य कार्य कोशिका द्रव्य में मौजूद अमीनो अम्लों को पहचानना और उन्हें राइबोसोम (प्रोटीन निर्माण के स्थान) तक लाना है, जहाँ उन्हें m-RNA पर लगे कोड के अनुसार श्रृंखला में व्यवस्थित किया जाता है। (यह युग्म सही है)।
- r-RNA (Ribosomal RNA): यह राइबोसोम का मुख्य संरचनात्मक हिस्सा होता है। इसके अलावा, r-RNA 'राइबोजाइम' (Ribozyme) की तरह कार्य करके प्रोटीन संश्लेषण की प्रक्रिया में उत्प्रेरक (Catalyst) के रूप में भी भूमिका निभाता है। (यह युग्म सही है)।
अतः, सभी तीनों युग्म सही सुमेलित हैं। सही उत्तर (c) सभी तीनों युग्म है।
Q20. डीएनए की दोनों श्रृंखलाओं को आपस में थामे रखने वाले बंधों की प्रकृति कैसी होती है?
(a) सहसंयोजक बंध (Covalent bonds)
(b) आयनिक बंध
(c) हाइड्रोजन बंध (Hydrogen bonds)
(d) धात्विक बंध
(a) सहसंयोजक बंध (Covalent bonds)
(b) आयनिक बंध
(c) हाइड्रोजन बंध (Hydrogen bonds)
(d) धात्विक बंध
डीएनए (DNA) की दोनों श्रृंखलाओं को आपस में थामे रखने वाले बंधों की प्रकृति (c) हाइड्रोजन बंध (Hydrogen bonds) होती है।
विस्तृत व्याख्या:
- हाइड्रोजन बंध (Hydrogen bonds): डीएनए के 'डबल हेलिक्स' (Double Helix) मॉडल में, दोनों श्रृंखलाएं नाइट्रोजनस बेसों (Adenine, Thymine, Guanine, Cytosine) के बीच बनने वाले हाइड्रोजन बंधों के कारण आपस में जुड़ी रहती हैं। एडिनिन (A) और थायमीन (T) के बीच दो हाइड्रोजन बंध होते हैं, जबकि ग्वानिन (G) और साइटोसिन (C) के बीच तीन हाइड्रोजन बंध होते हैं। यह बंध डीएनए को स्थिरता तो देते हैं, लेकिन आवश्यकता पड़ने पर आसानी से टूट भी सकते हैं (जैसे डीएनए प्रतिकृतिकरण के दौरान), जो इसे एक गतिशील अणु बनाता है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं?
- (a) सहसंयोजक बंध (Covalent bonds): डीएनए अणु के भीतर सहसंयोजक बंध मौजूद होते हैं, लेकिन वे नाइट्रोजनस बेसों को आपस में नहीं जोड़ते। सहसंयोजक बंध (फॉस्फोडाइएस्टर बंध) डीएनए की रीढ़ (Backbone) यानी शर्करा (Sugar) और फॉस्फेट समूह को आपस में जोड़ने का कार्य करते हैं।
- (b) आयनिक बंध: ये डीएनए की संरचना के मुख्य बंध नहीं हैं।
- (d) धात्विक बंध: धात्विक बंध धातुओं के परमाणुओं के बीच पाए जाते हैं, इनका जैविक अणुओं जैसे डीएनए से कोई संबंध नहीं है।
Q21. 'बी-डीएनए' (B-DNA), जो कोशिकाओं में पाया जाने वाला सबसे सामान्य डीएनए है, के एक पूर्ण घुमाव (Pitch of Helix) की लंबाई और उसमें बेस जोड़ों की संख्या कितनी होती है?
(a) $34\,\mathring{\text{A}}$ (या 3.4 nm) लंबाई और 10 बेस जोड़े
(b) $20\,\mathring{\text{A}}$ लंबाई और 12 बेस जोड़े
(c) $45\,\mathring{\text{A}}$ लंबाई और 8 बेस जोड़े
(d) $11\,\mathring{\text{A}}$ लंबाई और 9 बेस जोड़े
(a) $34\,\mathring{\text{A}}$ (या 3.4 nm) लंबाई और 10 बेस जोड़े
(b) $20\,\mathring{\text{A}}$ लंबाई और 12 बेस जोड़े
(c) $45\,\mathring{\text{A}}$ लंबाई और 8 बेस जोड़े
(d) $11\,\mathring{\text{A}}$ लंबाई और 9 बेस जोड़े
'बी-डीएनए' (B-DNA) के एक पूर्ण घुमाव (Pitch of Helix) की लंबाई और उसमें बेस जोड़ों के संदर्भ में सही उत्तर (a) $34\,\mathring{\text{A}}$ (या 3.4 nm) लंबाई और 10 बेस जोड़े है।
विस्तृत व्याख्या एवं अन्य विकल्पों के गलत होने का कारण:
- विकल्प (a) क्यों सही है?
- वॉटसन और क्रिक (Watson and Crick) द्वारा प्रस्तुत डीएनए के डबल हेलिक्स मॉडल (विशेषकर B-DNA) के अनुसार, डीएनए के हेलिक्स का प्रत्येक पूर्ण घुमाव (Pitch) लगभग $34\,\mathring{\text{A}}$ (या 3.4 नैनोमीटर) लंबा होता है।
- इस एक पूर्ण घुमाव के भीतर न्यूक्लियोटाइड के 10 बेस जोड़े (Base pairs) स्थित होते हैं। इसके परिणामस्वरूप, दो क्रमिक (consecutive) बेस जोड़ों के बीच की दूरी लगभग $3.4\,\mathring{\text{A}}$ होती है।
- अन्य विकल्प क्यों गलत हैं?
- (b), (c) और (d) गलत हैं: ये माप B-DNA की मानक और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित संरचनात्मक ज्यामिति (Geometric measurements) से मेल नहीं खाते हैं। जैसे, $20\,\mathring{\text{A}}$ डीएनए डबल हेलिक्स का व्यास (Diameter) होता है, न कि एक पूर्ण घुमाव की लंबाई।
Q22. निम्नलिखित में से कौन सा न्यूक्लिक अम्ल एक 'एंजाइम' या उत्प्रेरक (Catalyst) के रूप में भी कार्य कर सकता है, जिसे 'राइबोजाइम' (Ribozyme) कहते हैं?
(a) डीएनए (DNA)
(b) आरएनए (RNA)
(c) हिस्टोन प्रोटीन
(d) ग्लाइकोजन
(a) डीएनए (DNA)
(b) आरएनए (RNA)
(c) हिस्टोन प्रोटीन
(d) ग्लाइकोजन
न्यूक्लिक अम्ल जो एक 'एंजाइम' या उत्प्रेरक (Catalyst) के रूप में कार्य कर सकता है, उसे 'राइबोजाइम' (Ribozyme) कहते हैं। इस प्रश्न का सही उत्तर (b) आरएनए (RNA) है।
विस्तृत व्याख्या:
- राइबोजाइम (Ribozyme): आम तौर पर एंजाइम प्रोटीन प्रकृति के होते हैं (प्रोटीनेशियस), लेकिन 1980 के दशक की शुरुआत में वैज्ञानिकों ने यह खोज की कि कुछ आरएनए (RNA) अणु भी उत्प्रेरक की तरह कार्य कर सकते हैं। ऐसे उत्प्रेरक आरएनए अणुओं को 'राइबोजाइम' कहा जाता है (उदाहरण के लिए- राइबोसोम के भीतर पाया जाने वाला r-RNA जो पेप्टाइड बंध के निर्माण को उत्प्रेरित करता है)।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं?
- (a) डीएनए (DNA): डीएनए एक आनुवंशिक सामग्री है जो मुख्य रूप से सूचनाओं को संग्रहित और स्थानांतरित करती है। यह प्राकृतिक रूप से उत्प्रेरक (एंजाइम) के रूप में कार्य नहीं करता है।
- (c) हिस्टोन प्रोटीन: यह एक प्रोटीन है (न कि न्यूक्लिक अम्ल), जो डीएनए को पैक करने और न्यूक्लियोसोम बनाने का कार्य करता है।
- (d) ग्लाइकोजन: यह एक पॉलिसैराइड (कार्बोहाइड्रेट) है, जिसका उपयोग जंतुओं में ऊर्जा भंडारण के लिए किया जाता है, न कि यह न्यूक्लिक अम्ल या एंजाइम है।
Q23. डीएनए अणु को जब उच्च तापमान ($90^{\circ}\text{C}$ से अधिक) पर गर्म किया जाता है, तो इसकी दोनों श्रृंखलाएं अलग हो जाती हैं। इस प्रक्रिया को क्या कहते हैं?
(a) रेप्लीकेशन
(b) विकृतीकरण (Denaturation / Melting)
(c) ट्रांसक्रिप्शन
(d) स्प्लिसिंग
(a) रेप्लीकेशन
(b) विकृतीकरण (Denaturation / Melting)
(c) ट्रांसक्रिप्शन
(d) स्प्लिसिंग
डीएनए अणु को जब उच्च तापमान पर गर्म किया जाता है, तो इसकी दोनों श्रृंखलाएं (strands) अलग हो जाती हैं। इस प्रक्रिया को (b) विकृतीकरण (Denaturation / Melting) कहते हैं।
विस्तृत व्याख्या:
- विकृतीकरण (Denaturation): डीएनए की दोनों श्रृंखलाएं हाइड्रोजन बंधों (Hydrogen bonds) द्वारा जुड़ी होती हैं। जब डीएनए को $90^{\circ}\text{C}$ से अधिक तापमान पर गर्म किया जाता है, तो ये हाइड्रोजन बंध टूट जाते हैं। इस कारण डीएनए का 'डबल हेलिक्स' खुल जाता है और दोनों श्रृंखलाएं अलग हो जाती हैं। इसे 'डीएनए मेल्टिंग' भी कहा जाता है क्योंकि यह प्रक्रिया बर्फ के पिघलने की तरह भौतिक रूप से अणुओं को अलग करती है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं?
- (a) रेप्लीकेशन (Replication): यह वह प्रक्रिया है जिसमें एक डीएनए अणु अपनी सटीक कॉपी (प्रतिलिपि) बनाता है। इसमें विकृतीकरण शामिल तो होता है, लेकिन यह एक जैविक प्रक्रिया है जो एंजाइमों द्वारा नियंत्रित होती है, न कि केवल उच्च तापमान द्वारा।
- (c) ट्रांसक्रिप्शन (Transcription): यह वह प्रक्रिया है जिसमें डीएनए के एक खंड को आरएनए (RNA) में बदला जाता है।
- (d) स्प्लिसिंग (Splicing): यह यूकैरियोटिक कोशिकाओं में आरएनए प्रसंस्करण (RNA processing) की एक प्रक्रिया है, जिसमें आरएनए के गैर-कोडिंग भागों (Introns) को हटाकर कोडिंग भागों (Exons) को जोड़ा जाता है।
Q24. डीएनए की रीढ़ (Backbone) रासायनिक रूप से किसकी बनी होती है?
(a) केवल नाइट्रोजनस बेसों की
(b) शर्करा और फॉस्फेट की वैकल्पिक श्रृंखला (Sugar-Phosphate Chain)
(c) अमीनो अम्लों की
(d) वसीय अम्लों की
(a) केवल नाइट्रोजनस बेसों की
(b) शर्करा और फॉस्फेट की वैकल्पिक श्रृंखला (Sugar-Phosphate Chain)
(c) अमीनो अम्लों की
(d) वसीय अम्लों की
डीएनए की रीढ़ (Backbone) रासायनिक रूप से (b) शर्करा और फॉस्फेट की वैकल्पिक श्रृंखला (Sugar-Phosphate Chain) की बनी होती है।
विस्तृत व्याख्या:
- शर्करा-फॉस्फेट बैकबोन: डीएनए के प्रत्येक न्यूक्लियोटाइड में एक 'डीऑक्सीराइबोज शर्करा' और एक 'फॉस्फेट समूह' होता है। ये दोनों मिलकर एक लंबी श्रृंखला बनाते हैं। इसमें शर्करा का एक अणु अगले न्यूक्लियोटाइड के फॉस्फेट समूह से जुड़ा होता है, जिससे यह एक मजबूत और स्थिर 'रीढ़' (backbone) का निर्माण करता है। इसी रीढ़ से नाइट्रोजनस बेस (A, T, G, C) अंदर की ओर जुड़े होते हैं।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं?
- (a) केवल नाइट्रोजनस बेसों की: यह गलत है क्योंकि नाइट्रोजनस बेस डीएनए की रीढ़ का हिस्सा नहीं होते, बल्कि वे रीढ़ से जुड़े होते हैं और डीएनए की दोनों श्रृंखलाओं को आपस में (हाइड्रोजन बंधों के माध्यम से) जोड़ने का कार्य करते हैं।
- (c) अमीनो अम्लों की: अमीनो अम्ल प्रोटीन की आधारभूत इकाइयाँ (building blocks) हैं। डीएनए एक न्यूक्लिक अम्ल है, प्रोटीन नहीं।
- (d) वसीय अम्लों की: वसीय अम्ल (Fatty acids) लिपिड या वसा की संरचनात्मक इकाइयाँ हैं। इनका डीएनए की संरचना से कोई संबंध नहीं है।
Q25. निम्नलिखित में से किस कोशिकीय अंगक (Organelle) में केंद्रक के अलावा अपना स्वयं का वृत्ताकार डीएनए (Circular DNA) और राइबोसोम पाया जाता है?
- सूत्रकणिका (Mitochondria)
- हरितलवक (Chloroplast)
- गोल्जी केंट्रक
सही कूट चुनें:
(a) केवल 1
(b) केवल 1 और 2
(c) 1, 2 और 3
(d) केवल 3
कोशिकीय अंगकों (Organelles) में केंद्रक के अलावा अपना स्वयं का वृत्ताकार डीएनए (Circular DNA) और राइबोसोम मुख्य रूप से सूत्रकणिका (Mitochondria) और हरितलवक (Chloroplast) में पाए जाते हैं।
अतः सही उत्तर (b) केवल 1 और 2 है।
विस्तृत व्याख्या:
- सूत्रकणिका (Mitochondria) और हरितलवक (Chloroplast): इन्हें "अर्ध-स्वायत्त अंगक" (Semi-autonomous organelles) कहा जाता है। इसका कारण यह है कि इनमें अपना स्वयं का डीएनए (जो बैक्टीरिया के डीएनए के समान वृत्ताकार होता है) और राइबोसोम (70S प्रकार के) होते हैं। यह उन्हें कोशिका के भीतर अपना स्वयं का प्रोटीन बनाने और अपनी प्रतिकृति (Replication) बनाने में सक्षम बनाता है। यह समानता इस सिद्धांत (Endosymbiotic theory) को पुष्ट करती है कि ये अंगक कभी स्वतंत्र रहने वाले बैक्टीरिया थे जिन्हें प्राचीन यूकैरियोटिक कोशिकाओं द्वारा अपना लिया गया था।
- अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
- गोल्जी उपकरण (Golgi apparatus): यह एक झिल्लीदार अंगक है जिसका मुख्य कार्य प्रोटीनों और लिपिड्स का संशोधन, छंटाई और पैकेजिंग करना है। इसमें अपना कोई डीएनए या राइबोसोम नहीं होता है। अतः यह विकल्प गलत है।
Q26. 'सेंगर विधि' (Sanger Method) का उपयोग जीवविज्ञान में किस कार्य के लिए किया जाता है?
(a) आरएनए को नष्ट करने के लिए
(b) डीएनए अनुक्रमण (DNA Sequencing - नाइट्रोजनस बेसों के क्रम का पता लगाने) के लिए
(c) प्रोटीन को छानने के लिए
(d) कोशिका के आकार को मापने के लिए
(a) आरएनए को नष्ट करने के लिए
(b) डीएनए अनुक्रमण (DNA Sequencing - नाइट्रोजनस बेसों के क्रम का पता लगाने) के लिए
(c) प्रोटीन को छानने के लिए
(d) कोशिका के आकार को मापने के लिए
'सेंगर विधि' (Sanger Method) का उपयोग जीवविज्ञान में (b) डीएनए अनुक्रमण (DNA Sequencing - नाइट्रोजनस बेसों के क्रम का पता लगाने) के लिए किया जाता है।
विस्तृत व्याख्या:
- सेंगर डिएक्सी विधि (Sanger Dideoxy Method): फ्रेडरिक सेंगर (Frederick Sanger) द्वारा विकसित यह तकनीक डीएनए अनुक्रमण (DNA Sequencing) की एक बेहद प्रसिद्ध और पारंपरिक विधि है। इस विधि में डाइडीऑक्सीन्यूक्लियोटाइड्स (ddNTPs) का उपयोग करके डीएनए अणु में मौजूद नाइट्रोजनस बेसों (A, T, G, C) के सटीक क्रम (sequence) का पता लगाया जाता है। इसके लिए सेंगर को रसायन विज्ञान में नोबेल पुरस्कार भी मिला था।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं?
- (a) आरएनए को नष्ट करने के लिए: आरएनए को तोड़ने या नष्ट करने वाले एंजाइम को 'रिबोन्यूक्लियोंस' (Ribonuclease / RNase) कहा जाता है, न कि सेंगर विधि।
- (c) प्रोटीन को छानने के लिए: प्रोटीन के पृथक्करण और विश्लेषण के लिए इलेक्ट्रोफोरेसिस (Electrophoresis) या क्रोमैटोग्राफी जैसी तकनीकों का उपयोग किया जाता है।
- (d) कोशिका के आकार को मापने के लिए: कोशिका के आकार को मापने के लिए माइक्रोमेट्री (Micrometry) या सूक्ष्मदर्शी (Microscope) तकनीकों का उपयोग किया जाता है।
Q27. 'टी-आरएनए' (t-RNA) की त्रिविमीय संरचना कैसी होती है और इसे किस मॉडल द्वारा दर्शाया जाता है?
(a) क्लोवर लीफ मॉडल (Clover Leaf Model) - जो लौंग के पत्ते जैसा दिखता है
(b) सीढ़ीदार मॉडल
(c) गोलाकार मॉडल
(d) रैखिक मॉडल
(a) क्लोवर लीफ मॉडल (Clover Leaf Model) - जो लौंग के पत्ते जैसा दिखता है
(b) सीढ़ीदार मॉडल
(c) गोलाकार मॉडल
(d) रैखिक मॉडल
'टी-आरएनए' (t-RNA) की संरचना के संदर्भ में सही उत्तर (a) क्लोवर लीफ मॉडल (Clover Leaf Model) है।
विस्तृत व्याख्या:
- क्लोवर लीफ मॉडल (Clover Leaf Model): t-RNA की संरचना को सर्वप्रथम इसके द्वि-आयामी (2D) रूप में 'क्लोवर लीफ' (लौंग के पत्ते या तिपतिया घास के पत्ते) के मॉडल के रूप में दर्शाया गया था। इसमें कई लूप्स (loops) होते हैं, जैसे एंटीकोडोन लूप (Anticodon loop) और टी-लूप, जो प्रोटीन संश्लेषण के दौरान विशिष्ट अमीनो एसिड को राइबोसोम तक ले जाने और m-RNA के कोड को पढ़ने में मदद करते हैं।
- त्रिविमीय (3D) संरचना: हालांकि इसका 2D मॉडल क्लोवर लीफ जैसा दिखता है, लेकिन जब हम इसकी त्रिविमीय (3D) संरचना की बात करते हैं, तो इसे 'एल-शेप्ड' (L-shaped) या उल्टे 'L' के आकार का मॉडल माना जाता है। परीक्षाओं में अक्सर 'क्लोवर लीफ मॉडल' को ही इसके प्रमुख संरचनात्मक मॉडल के रूप में पूछा जाता है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं?
- (b) सीढ़ीदार मॉडल (Ladder-like model): यह डीएनए (DNA) के डबल हेलिक्स संरचना का वर्णन करने के लिए उपयोग किया जाता है।
- (c) और (d) गोलाकार या रैखिक मॉडल: t-RNA न तो गोलाकार होता है और न ही रैखिक। इसका कार्य विशिष्ट लूप्स की उपस्थिति पर निर्भर करता है, इसलिए यह एक जटिल मुड़ी हुई संरचना होती है।
Q28. डीएनए के कोडिंग अनुक्रम जो परिपक्व आरएनए में बने रहते हैं और प्रोटीन को कोड करते हैं, क्या कहलाते हैं?
(a) इंट्रॉन (Introns)
(b) एक्सॉन (Exons)
(c) प्राइमर
(d) प्रमोटर
(a) इंट्रॉन (Introns)
(b) एक्सॉन (Exons)
(c) प्राइमर
(d) प्रमोटर
डीएनए के वे कोडिंग अनुक्रम जो परिपक्व आरएनए (Mature RNA) में बने रहते हैं और प्रोटीन को कोड करते हैं, (b) एक्सॉन (Exons) कहलाते हैं।
विस्तृत व्याख्या एवं अन्य विकल्पों के गलत होने का कारण:
- विकल्प (b) एक्सॉन (Exons) क्यों सही है?
- यूकैरियोटिक कोशिकाओं में आनुवंशिक सामग्री में कोडिंग और नॉन-कोडिंग दोनों भाग होते हैं। एक्सॉन (Exons) वे उपयोगी भाग होते हैं जो आनुवंशिक सूचनाओं को व्यक्त करते हैं, स्प्लिसिंग (Splicing) प्रक्रिया के बाद भी आरएनए में बने रहते हैं, और अंततः प्रोटीन के निर्माण के लिए अमीनो अम्लों को कोड करते हैं।
- अन्य विकल्प क्यों गलत हैं?
- (a) इंट्रॉन (Introns): ये डीएनए या प्रारंभिक आरएनए के गैर-कोडिंग (Non-coding) अनुक्रम होते हैं, जो प्रोटीन संश्लेषण में भाग नहीं लेते। आरएनए परिपक्वता (RNA processing) के दौरान स्प्लिसिंग प्रक्रिया में इन्हें काटकर हटा दिया जाता है।
- (c) प्राइमर (Primer): यह आरएनए या डीएनए का एक छोटा टुकड़ा होता है जो डीएनए प्रतिकृतिकरण (Replication) की शुरुआत करने के लिए आवश्यक होता है।
- (d) प्रमोटर (Promoter): यह डीएनए का वह विशिष्ट स्थल (Region) है जहाँ आरएनए पॉलीमरेज एंजाइम जुड़कर अनुलेखन (Transcription) की प्रक्रिया को शुरू करता है।
Q29. डीएनए में शर्करा अणु के किस कार्बन स्थान पर ऑक्सीजन परमाणु की कमी होती है, जिसके कारण इसे 'डीऑक्सीराइबोज' कहा जाता है?
(a) 1' कार्बन पर
(b) 2' कार्बन पर (2' Carbon)
(c) 3' कार्बन पर
(d) 5' कार्बन पर
(a) 1' कार्बन पर
(b) 2' कार्बन पर (2' Carbon)
(c) 3' कार्बन पर
(d) 5' कार्बन पर
डीएनए में शर्करा अणु के जिस कार्बन स्थान पर ऑक्सीजन परमाणु की कमी होती है, जिसके कारण इसे 'डीऑक्सीराइबोज' (Deoxyribose) कहा जाता है, सही उत्तर (b) 2' कार्बन पर (2' Carbon) है।
विस्तृत व्याख्या एवं अन्य विकल्पों के गलत होने का कारण:
- विकल्प (b) 2' कार्बन क्यों सही है?
- आरएनए में पाई जाने वाली शर्करा 'राइबोज' (Ribose) के 2' कार्बन (2nd carbon position) पर हाइड्रॉक्सिल समूह ($\text{-OH}$) जुड़ा होता है।
- इसके विपरीत, डीएनए में पाई जाने वाली शर्करा 'डीऑक्सीराइबोज' में उसी 2' कार्बन से ऑक्सीजन हट जाती है और केवल हाइड्रोजन ($\text{-H}$) बचता है (यानी 'डी-ऑक्सी' का अर्थ है: ऑक्सीजन का निकल जाना)। इसी संरचनात्मक भिन्नता के कारण इसे डीऑक्सीराइबोज शर्करा और डीएनए को डीऑक्सीराइबोक्लिक एसिड कहा जाता है।
- अन्य विकल्प क्यों गलत हैं?
- (a) 1' कार्बन पर: यह वह स्थान है जहाँ नाइट्रोजनस बेस (प्यूरीन या पिरिमिडिन) सहसंयोजक बंध (N-glycosidic bond) द्वारा शर्करा से जुड़ता है।
- (c) 3' कार्बन पर: यहाँ $\text{-OH}$ समूह उपस्थित रहता है जो अगले न्यूक्लियोटाइड के साथ फॉस्फोडाइएस्टर बंध बनाने में मदद करता है।
- (d) 5' कार्बन पर: यह कार्बन शर्करा वलय के बाहर होता है और फॉस्फेट समूह इसी 5' स्थान से जुड़ता है।
Q30. 'चारगाफ के नियम' के अनुसार, यदि किसी डीएनए अणु में साइटोसिन (C) की मात्रा 20% है, तो उसमें एडिनिन (A) की मात्रा कितनी होगी?
(a) 20%
(b) 30%
(c) 40%
(d) 50%
(a) 20%
(b) 30%
(c) 40%
(d) 50%
'चारगाफ के नियम' (Chargaff's Rules) के अनुसार सही उत्तर (b) 30% है।
विस्तृत व्याख्या:
चारगाफ के नियम के अनुसार, डबल-स्ट्रैंडेड डीएनए में:
- साइटोसिन (C) की मात्रा हमेशा गुआनिन (G) की मात्रा के बराबर होती है ($C = G$)।
- एडिनिन (A) की मात्रा हमेशा थायमीन (T) की मात्रा के बराबर होती है ($A = T$)।
- इसके अलावा, प्यूरीन और पिरिमिडिन का अनुपात समान होता है, यानी $[A] + [G] = [T] + [C]$ या कुल योग 100% होता है।
गणना:
- यदि साइटोसिन ($C$) = 20% है, तो गुआनिन ($G$) भी = 20% होगा।
- इसलिए, $C$ और $G$ दोनों मिलकर कुल $20\% + 20\% = 40\%$ हो गए।
- बचा हुआ प्रतिशत ($100\% - 40\% = 60\%$) एडिनिन और थायमीन के लिए होगा।
- चूंकि $A$ और $T$ की मात्रा आपस में बराबर होती है ($A = T$), इसलिए एडिनिन की मात्रा होगी:$$\frac{60\%}{2} = 30\%$$
अतः एडिनिन की मात्रा 30% होगी।
भाग 3: प्रोटीन संश्लेषण का केंद्रीय सिद्धांत - सेंट्रल डोगमा (Central Dogma of Protein Synthesis)
Q31. आणविक जीवविज्ञान के 'सेंट्रल डोगमा' (Central Dogma) के चरणों के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
- प्रतिकृतिकरण (Replication): डीएनए से डीएनए का निर्माण।
- अनुलेखन (Transcription): डीएनए से मैसेंजर आरएनए (m-RNA) का निर्माण।
- रूपांतरण (Translation): m-RNA की सूचना के आधार पर राइबोसोम द्वारा प्रोटीन का निर्माण।
उपरोक्त में से कौन से युग्म सही सुमेलित हैं?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
आणविक जीवविज्ञान के 'सेंट्रल डोगमा' (Central Dogma) के चरणों के संदर्भ में दिए गए तीनों युग्म सही सुमेलित हैं।
विस्तृत व्याख्या:
फ्रांसिस क्रिक द्वारा प्रस्तावित 'सेंट्रल डोगमा' आनुवंशिक सूचनाओं के प्रवाह को दर्शाता है, जिसके मुख्य चरण इस प्रकार हैं:
- प्रतिकृतिकरण (Replication): यह वह प्रक्रिया है जिसमें कोशिका विभाजन के दौरान डीएनए (DNA) अपने स्वयं की सटीक प्रतिलिपि बनाता है। अतः डीएनए से डीएनए का निर्माण सही है।
- अनुलेखन (Transcription): इस प्रक्रिया में डीएनए की एक श्रृंखला का उपयोग करके मैसेंजर आरएनए (m-RNA) का संश्लेषण किया जाता है। अतः डीएनए से m-RNA का निर्माण सही है।
- रूपांतरण (Translation): यह अंतिम चरण है जहाँ m-RNA पर मौजूद आनुवंशिक कोड (Genetic code) का उपयोग राइबोसोम द्वारा अमीनो अम्लों को एक विशिष्ट क्रम में जोड़कर प्रोटीन बनाने के लिए किया जाता है। अतः m-RNA की सूचना के आधार पर प्रोटीन का निर्माण सही है।
अतः सही उत्तर (d) 1, 2 और 3 है।
Q32. 'अनुलेखन' (Transcription) की प्रक्रिया के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- यह प्रक्रिया मुख्य रूप से 'डीएनए-निर्भर आरएनए पॉलीमरेज़' (RNA Polymerase) एंजाइम द्वारा संचालित होती है।
- डीएनए के दोनों स्टैंडों का एक साथ आरएनए में अनुलेखन होता है।
- यह प्रक्रिया यूकेरियोटिक कोशिकाओं के केंद्रक (Nucleus) के भीतर संपन्न होती है।
उपरोक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1 और 3
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1
(d) 1, 2 और 3
(a) केवल 1 और 3
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1
(d) 1, 2 और 3
'अनुलेखन' (Transcription) की प्रक्रिया के संदर्भ में सही उत्तर (a) केवल 1 और 3 है।
विस्तृत व्याख्या एवं विश्लेषण:
- कथन 1 सही है: अनुलेखन की प्रक्रिया 'डीएनए-निर्भर आरएनए पॉलीमरेज़' (DNA-dependent RNA polymerase) एंजाइम द्वारा ही संचालित होती है। यह एंजाइम डीएनए के टेम्पलेट स्टैंड को पढ़कर उसके पूरक (complementary) आरएनए का निर्माण करता है।
- कथन 2 गलत है: अनुलेखन के दौरान डीएनए के दोनों स्टैंडों का एक साथ अनुलेखन नहीं होता है। डीएनए के केवल एक स्टैंड को ही 'टेम्पलेट स्टैंड' के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, जिसका अनुलेखन होता है। यदि दोनों स्टैंडों का एक साथ अनुलेखन हो जाए, तो दो अलग-अलग अनुक्रमों वाले आरएनए बनेंगे जो आपस में जुड़कर 'डबल-स्ट्रैंडेड आरएनए' (dsRNA) बना लेंगे, जो प्रोटीन निर्माण में बाधा उत्पन्न करेगा।
- कथन 3 सही है: यूकेरियोटिक (Eukaryotic) कोशिकाओं में, आनुवंशिक सामग्री केंद्रक (Nucleus) के भीतर सुरक्षित रहती है, इसलिए अनुलेखन की प्रक्रिया केंद्रक के भीतर ही संपन्न होती है (जहाँ से बाद में आरएनए निकलकर कोशिका द्रव्य में जाता है)।
अतः विकल्प (a) सही है।
Q33 से Q42 तक (त्वरित वैचारिक प्रश्न)
Q33. प्रोटीन संश्लेषण (Translation) की प्रक्रिया कोशिका के किस अंगक को 'प्रोटीन की फैक्ट्री' कहा जाता है, जहाँ संपन्न होती है?
(a) लाइसोसोम
(b) गोल्जी बॉडी
(c) राइबोसोम (Ribosome)
(d) माइटोकॉन्ड्रिया
(a) लाइसोसोम
(b) गोल्जी बॉडी
(c) राइबोसोम (Ribosome)
(d) माइटोकॉन्ड्रिया
कोशिका के जिस अंगक को 'प्रोटीन की फैक्ट्री' कहा जाता है, वहीं प्रोटीन संश्लेषण (Translation) की प्रक्रिया संपन्न होती है।
सही उत्तर:
(c) राइबोसोम (Ribosome)
संक्षिप्त विवरण:
- राइबोसोम (Ribosome): इसे कोशिका की 'प्रोटीन फैक्ट्री' कहा जाता है क्योंकि यह प्रोटीन संश्लेषण (Protein Synthesis) का मुख्य स्थल है।
- अन्य विकल्प:
- लाइसोसोम: इसे 'आत्मघाती थैली' (Suicide bag) कहा जाता है, जो पाचक एंजाइमों से युक्त होती है।
- गोल्जी बॉडी (Golgi Body): यह पदार्थों के संचयन, रूपांतरण और परिवहन में मदद करती है।
- माइटोकॉन्ड्रिया: इसे कोशिका का 'बिजली घर' (Powerhouse) कहा जाता है, जहाँ एटीपी (ATP) के रूप में ऊर्जा का उत्पादन होता है।
Q34. आनुवंशिक कूट (Genetic Code) में 'नॉनसेंस कोडॉन' या 'स्टॉप कोडॉन' (Stop Codons) की कुल संख्या कितनी है जो प्रोटीन संश्लेषण को रोक देते हैं?
(a) 1
(b) 3 (UAA, UAG, UGA)
(c) 4
(d) 61
(a) 1
(b) 3 (UAA, UAG, UGA)
(c) 4
(d) 61
आनुवंशिक कूट (Genetic Code) में 'स्टॉप कोडॉन' (Stop Codons) की कुल संख्या 3 है।
सही उत्तर:
(b) 3 (UAA, UAG, UGA)
संक्षिप्त विवरण:
- स्टॉप कोडॉन: ये कोडॉन प्रोटीन संश्लेषण (Translation) की प्रक्रिया को समाप्त करने का संकेत देते हैं। इन्हें 'नॉनसेंस कोडॉन' भी कहा जाता है क्योंकि ये किसी भी अमीनो एसिड को कोड नहीं करते हैं।
- ये तीन कोडॉन हैं:
- UAA (ओकर - Ochre)
- UAG (अंबर - Amber)
- UGA (ओपल - Opal)
- अन्य जानकारी: कुल 64 कोडॉन होते हैं, जिनमें से 61 अमीनो एसिड को कोड करते हैं और शेष 3 स्टॉप कोडॉन होते हैं।
Q35. डीएनए प्रतिकृतिकरण (DNA Replication) के दौरान मुख्य कार्य करने वाले एंजाइम 'डीएनए पॉलीमरेज़' की सीमा क्या है?
(a) यह केवल एक श्रृंखला को काट सकता है।
(b) यह स्वयं नई श्रृंखला की शुरुआत नहीं कर सकता; इसे एक छोटे आरएनए प्राइमर (RNA Primer) की आवश्यकता होती है और यह केवल $5' \rightarrow 3'$ दिशा में ही काम करता है।
(c) यह बहुत धीमा काम करता है।
(d) यह प्रोटीन को नष्ट कर देता है।
(a) यह केवल एक श्रृंखला को काट सकता है।
(b) यह स्वयं नई श्रृंखला की शुरुआत नहीं कर सकता; इसे एक छोटे आरएनए प्राइमर (RNA Primer) की आवश्यकता होती है और यह केवल $5' \rightarrow 3'$ दिशा में ही काम करता है।
(c) यह बहुत धीमा काम करता है।
(d) यह प्रोटीन को नष्ट कर देता है।
डीएनए प्रतिकृतिकरण (DNA Replication) के दौरान मुख्य कार्य करने वाले एंजाइम 'डीएनए पॉलीमरेज़' की सीमा यह है कि यह स्वयं नई श्रृंखला की शुरुआत नहीं कर सकता; इसे एक छोटे आरएनए प्राइमर (RNA Primer) की आवश्यकता होती है और यह केवल $5' \rightarrow 3'$ दिशा में ही संश्लेषण कर सकता है।
सही उत्तर:
(b) यह स्वयं नई श्रृंखला की शुरुआत नहीं कर सकता; इसे एक छोटे आरएनए प्राइमर (RNA Primer) की आवश्यकता होती है और यह केवल $5' \rightarrow 3'$ दिशा में ही काम करता है।
संक्षिप्त विवरण:
- दिशा: डीएनए पॉलीमरेज़ (DNA Polymerase) हमेशा न्यूक्लियोटाइड को केवल $5' \rightarrow 3'$ दिशा में ही जोड़ सकता है।
- प्राइमर की आवश्यकता: यह सीधे खाली टेंपलेट पर डीएनए की नई श्रृंखला शुरू नहीं कर सकता, इसलिए शुरुआत के लिए 'प्राइमेज' (Primase) एंजाइम द्वारा एक छोटा आरएनए प्राइमर जोड़ा जाता है, जिससे डीएनए पॉलीमरेज़ आगे की प्रक्रिया बढ़ाता है।
Q36. डीएनए रेप्लीकेशन के समय खुलने वाले फॉर्क पर एक श्रृंखला पर निर्माण निरंतर (Leading strand) होता है और दूसरी पर टुकड़ों में होता है। इन छोटे डीएनए टुकड़ों को क्या कहते हैं?
(a) सैटेलाइट डीएनए
(b) ओकाजाकी खंड (Okazaki Fragments)
(c) सिस्ट्रॉन
(d) कूटलेख
(a) सैटेलाइट डीएनए
(b) ओकाजाकी खंड (Okazaki Fragments)
(c) सिस्ट्रॉन
(d) कूटलेख
डीएनए रेप्लीकेशन के समय खुलने वाले फॉर्क पर दूसरी श्रृंखला (lagging strand) पर बनने वाले छोटे डीएनए टुकड़ों को ओकाजाकी खंड (Okazaki Fragments) कहा जाता है।
सही उत्तर:
(b) ओकाजाकी खंड (Okazaki Fragments)
संक्षिप्त विवरण:
- ओकाजाकी खंड: चूँकि डीएनए पॉलीमरेज़ केवल $5' \rightarrow 3'$ दिशा में ही काम कर सकता है, इसलिए 'लैगिंग स्ट्रैंड' (Lagging strand) पर डीएनए का निर्माण छोटे-छोटे खंडों में होता है। बाद में, 'डीएनए लाइगेज' (DNA Ligase) नामक एंजाइम इन टुकड़ों को आपस में जोड़कर एक निरंतर श्रृंखला बना देता है।
- इनका नाम जापानी वैज्ञानिक रेइजी ओकाजाकी के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने इनकी खोज की थी।
Q37. यूकेरियोटिक कोशिकाओं में अनुलेखन के बाद बनने वाले प्राथमिक आरएनए (hnRNA) को स्थिर करने के लिए उसके 5' छोर पर कैपिंग (Capping) की जाती है। इस कैपिंग में कौन सा असामान्य न्यूक्लियोटाइड जोड़ा जाता है?
(a) मिथाइल ग्वानोसिन ट्राईफॉस्फेट (m7G)
(b) पॉली-ए टेल
(c) थायमीन
(d) फॉस्फेट
(a) मिथाइल ग्वानोसिन ट्राईफॉस्फेट (m7G)
(b) पॉली-ए टेल
(c) थायमीन
(d) फॉस्फेट
यूकेरियोटिक कोशिकाओं में अनुलेखन के बाद बनने वाले प्राथमिक आरएनए (hnRNA) के $5'$ छोर पर कैपिंग के दौरान मिथाइल ग्वानोसिन ट्राईफॉस्फेट जोड़ा जाता है।
सही उत्तर:
(a) मिथाइल ग्वानोसिन ट्राईफॉस्फेट (m7G)
संक्षिप्त विवरण:
- कैपिंग (Capping): यूकेरियोटिक जीवों में hnRNA को एक्सोन्यूक्लिअसेस (Exonucleases) से बचाने और राइबोसोम द्वारा आसानी से पहचानने के लिए इसके $5'$ छोर पर असामान्य न्यूक्लियोटाइड—मिथाइल ग्वानोसिन ट्राईफॉस्फेट ($m^7G$ capping) जोड़ा जाता है।
- अन्य विकल्प:
- पॉली-ए टेल (Poly-A Tail): यह आरएनए के $3'$ छोर पर एडेनिलाट अवशेषों को जोड़कर बनाई जाती है (इसे पॉलीएडेनिलेशन कहते हैं)।
- थायमीन: यह डीएनए में पाया जाने वाला पिरिमिडिन बेस है (आरएनए में इसकी जगह यूरेसिल होता है)।
Q38. आनुवंशिक कोड की 'अपभ्रष्टता' या 'डीजेनेरेसी' (Degeneracy of Genetic Code) का क्या अर्थ है?
(a) एक कोडॉन कई अमीनो अम्लों को कोड कर सकता है।
(b) एक ही अमीनो अम्ल को एक से अधिक कोडॉन द्वारा कोड किया जा सकता है।
(c) जेनेटिक कोड समय के साथ बदल जाता है।
(d) यह केवल पौधों पर लागू होता है।
(a) एक कोडॉन कई अमीनो अम्लों को कोड कर सकता है।
(b) एक ही अमीनो अम्ल को एक से अधिक कोडॉन द्वारा कोड किया जा सकता है।
(c) जेनेटिक कोड समय के साथ बदल जाता है।
(d) यह केवल पौधों पर लागू होता है।
आनुवंशिक कोड की 'अपभ्रष्टता' या 'डीजेनेरेसी' (Degeneracy of Genetic Code) का अर्थ है कि एक ही अमीनो अम्ल को एक से अधिक कोडॉन द्वारा कोड किया जा सकता है।
सही उत्तर:
(b) एक ही अमीनो अम्ल को एक से अधिक कोडॉन द्वारा कोड किया जा सकता है।
संक्षिप्त विवरण:
- डीजेनेरेसी (Degeneracy): चूंकि कुल 61 कोडॉन अमीनो अम्लों को कोड करते हैं लेकिन अमीनो अम्ल केवल 20 प्रकार के ही होते हैं, इसलिए अधिकांश अमीनो अम्लों के लिए एक से अधिक कोडॉन (Triplet Codons) होते हैं।
- उदाहरण के लिए, ल्यूसिन (Leucine) और सेरीन (Serine) जैसे अमीनो अम्लों के लिए 6-6 कोडॉन होते हैं। यह विशेषता उत्परिवर्तन (Mutations) के हानिकारक प्रभावों को कम करने में मदद करती है।
Q39. फ्रांसिस क्रिक द्वारा दिए गए 'वोबल परिकल्पना' (Wobble Hypothesis) का संबंध किससे है?
(a) डीएनए के मुड़ने से
(b) कोडॉन और एंटीकोडॉन के बीच तीसरे क्षारक (Third base) के युग्मन में शिथिलता या लचीलेपन से
(c) प्रोटीन के टूटने से
(d) म्यूटेशन की दर से
(a) डीएनए के मुड़ने से
(b) कोडॉन और एंटीकोडॉन के बीच तीसरे क्षारक (Third base) के युग्मन में शिथिलता या लचीलेपन से
(c) प्रोटीन के टूटने से
(d) म्यूटेशन की दर से
फ्रांसिस क्रिक द्वारा दी गई 'वोबल परिकल्पना' (Wobble Hypothesis) का संबंध कोडॉन और एंटीकोडॉन के बीच तीसरे क्षारक (Third base) के युग्मन में शिथिलता या लचीलेपन से है।
सही उत्तर:
(b) कोडॉन और एंटीकोडॉन के बीच तीसरे क्षारक (Third base) के युग्मन में शिथिलता या लचीलेपन से
संक्षिप्त विवरण:
- वोबल परिकल्पना (Wobble Hypothesis): इसे फ्रांसिस क्रिक ने 1966 में प्रतिपादित किया था। इसके अनुसार, टीआरएनए (tRNA) के एंटीकोडॉन का पहला क्षारक (जो एमआरएनए के कोडॉन के तीसरे क्षारक से जुड़ता है) मानक वाटसन-क्रिक नियमों की तुलना में थोड़ा लचीला या 'वोबल' (डगमगाने वाला) हो सकता है।
- महत्व: इसी लचीलेपन के कारण कम संख्या में tRNA (लगभग 31-32) ही सभी 61 सेंस कोडॉन्स को पहचान लेते हैं, जिससे आनुवंशिक कोड की डीजेनेरेसी (Degeneracy) को समझाने में मदद मिलती है।
Q40. जीन अभिव्यक्ति के नियमन (Gene Regulation) के लिए जिम्मेदार 'ओपेरॉन अवधारणा' (Operon Concept) मुख्य रूप से किन जीवों में पाई जाती है?
(a) यूकेरियोट्स (मनुष्यों और पौधों) में
(b) प्रोकेरियोट्स (जीवाणुओं/Bacteria) में
(c) केवल वायरसों में
(d) कवक में
(a) यूकेरियोट्स (मनुष्यों और पौधों) में
(b) प्रोकेरियोट्स (जीवाणुओं/Bacteria) में
(c) केवल वायरसों में
(d) कवक में
जीन अभिव्यक्ति के नियमन (Gene Regulation) के लिए जिम्मेदार 'ओपेरॉन अवधारणा' (Operon Concept) मुख्य रूप से प्रोकेरियोट्स में पाई जाती है।
सही उत्तर:
(b) प्रोकेरियोट्स (जीवाणुओं/Bacteria) में
संक्षिप्त विवरण:
- ओपेरॉन अवधारणा (Operon Concept): इसे जैकोब और मोनाड (Jacob and Monad - 1961) ने बैक्टीरिया (जैसे E. coli) में चयापचय पथ के नियमन को समझाने के लिए प्रस्तुत किया था। इसका सबसे प्रसिद्ध उदाहरण लैक ओपेरॉन (Lac Operon) है।
- प्रोकेरियोट्स बनाम यूकेरियोट्स: ओपेरॉन आमतौर पर प्रोकेरियोटिक कोशिकाओं में पाए जाते हैं जहाँ कई संबंधित जीन एक साथ (Polycistronic) नियंत्रित होते हैं। यूकेरियोट्स में जीन अभिव्यक्ति का नियमन अधिक जटिल होता है और वहाँ क्लासिकल ओपेरॉन नहीं पाए जाते हैं।
Q41. रूपांतरण (Translation) की प्रक्रिया के दौरान पहला अमीनो अम्ल हमेशा कौन सा होता है जिसे स्टार्ट कोडॉन (AUG) द्वारा लाया जाता है?
(a) लाइसिन
(b) मिथायोनिन (Methionine)
(c) ट्रिप्टोफैन
(d) वैलीन
(a) लाइसिन
(b) मिथायोनिन (Methionine)
(c) ट्रिप्टोफैन
(d) वैलीन
रूपांतरण (Translation) की प्रक्रिया के दौरान पहला अमीनो अम्ल हमेशा मिथायोनिन (Methionine) होता है जिसे स्टार्ट कोडॉन (AUG) द्वारा लाया जाता है।
सही उत्तर:
(b) मिथायोनिन (Methionine)
संक्षिप्त विवरण:
- स्टार्ट कोडॉन (AUG): यह एमआरएनए (mRNA) पर प्रोटीन संश्लेषण की शुरुआत करता है और हमेशा अमीनो अम्ल मिथायोनिन को कोड करता है।
- प्रोकैरियोट्स में: यहाँ आरंभिक अमीनो अम्ल थोड़ा संशोधित रूप में होता है जिसे एन-फॉर्मिल मिथायोनिन (fMet) कहा जाता है।
Q42. 'उत्परिवर्तन' (Mutation) के संदर्भ में, जब डीएनए के एक सिंगल बेस जोड़े में बदलाव होता है (जैसे सिकल सेल एनीमिया में), तो इसे क्या कहा जाता है?
(a) फ्रेमशिफ्ट म्यूटेशन
(b) बिंदु उत्परिवर्तन (Point Mutation)
(c) गुणसूत्रीय विपथन
(d) विलोपन
(a) फ्रेमशिफ्ट म्यूटेशन
(b) बिंदु उत्परिवर्तन (Point Mutation)
(c) गुणसूत्रीय विपथन
(d) विलोपन
'उत्परिवर्तन' (Mutation) के संदर्भ में, जब डीएनए के एक सिंगल बेस जोड़े में बदलाव होता है, तो इसे बिंदु उत्परिवर्तन (Point Mutation) कहा जाता है।
सही उत्तर:
(b) बिंदु उत्परिवर्तन (Point Mutation)
संक्षिप्त विवरण:
- बिंदु उत्परिवर्तन (Point Mutation): यह डीएनए अनुक्रम में एक एकल न्यूक्लियोटाइड (बेस पेयर) के परिवर्तन, विलोपन या प्रवेशन के कारण होता है। इसका क्लासिक उदाहरण सिकल सेल एनीमिया (Sickle Cell Anemia) है, जिसमें हीमोग्लोबिन जीन के बीटा-ग्लोबिन श्रृंखला में एक सिंगल बेस (GAG का GUG/GUG होना) बदल जाने से ग्लूटामिक एसिड की जगह वैलीन अमीनो अम्ल आ जाता है।
- अन्य विकल्प:
- फ्रेमशिफ्ट म्यूटेशन (Frameshift Mutation): इसमें एक या अधिक बेस जोड़ों के जुड़ने (Insertion) या हटने (Deletion) से पूरा रीडिंग फ्रेम बदल जाता है।
भाग 4: मनुष्य में लिंग निर्धारण (Sex Determination in Humans)
Q43. मानव में लिंग निर्धारण (Sex Determination) प्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- मनुष्यों में लिंग निर्धारण 'XX-XY' प्रकार का होता है।
- पुरुष विषमयुग्मजी (Heterogametic) होते हैं क्योंकि वे दो प्रकार के शुक्राणु (X युक्त और Y युक्त) बनाते हैं।
- महिलाएँ समयुग्मजी (Homogametic) होती हैं क्योंकि उनके सभी अंडाणु केवल X गुणसूत्र युक्त होते हैं।
उपरोक्त कथनों में से कौन से सही हैं?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
दिए गए सभी कथन मानव में लिंग निर्धारण (Sex Determination) के संदर्भ में बिल्कुल सही हैं।
सही उत्तर:
उपर्युक्त सभी कथन सही हैं। (अर्थात: 1, 2 और 3 तीनों सही हैं)
संक्षिप्त विवरण:
- 'XX-XY' प्रकार: मनुष्यों में लिंग निर्धारण की प्रणाली XX-XY प्रकार की होती है, जहाँ महिलाओं में दो X गुणसूत्र (XX) और पुरुषों में एक X तथा एक Y गुणसूत्र (XY) होता है।
- विषमयुग्मजी (Heterogametic) पुरुष: पुरुष दो अलग-अलग प्रकार के युग्मक (शुक्राणु) बनाते हैं—50% शुक्राणुओं में X गुणसूत्र होता है और शेष 50% में Y गुणसूत्र होता है। इसलिए इन्हें विषमयुग्मजी कहा जाता है।
- समयुग्मजी (Homogametic) महिलाएँ: महिलाएँ केवल एक ही प्रकार के अंडाणु बनाती हैं, जिनमें सभी के पास केवल X गुणसूत्र होता है। इसलिए इन्हें समयुग्मजी कहा जाता है।
- लिंग निर्धारण में भूमिका: संतान का लिंग इस बात पर निर्भर करता है कि अंडे को निषेचित करने वाला शुक्राणु X युक्त है या Y युक्त।
Q44. मानव Y गुणसूत्र पर स्थित उस विशिष्ट जीन का नाम क्या है जो भ्रूण में वृषण (Testis) के विकास को प्रेरित करता है और पुरुषत्व का निर्धारण करता है?
(a) SRY जीन (Sex-determining Region Y)
(b) लैक-Z जीन
(c) हीमोग्लोबिन जीन
(d) ऑन्कोजीन
(b) लैक-Z जीन
(c) हीमोग्लोबिन जीन
(d) ऑन्कोजीन
मानव Y गुणसूत्र पर स्थित उस विशिष्ट जीन का नाम SRY जीन (Sex-determining Region Y) है, जो भ्रूण में वृषण (Testis) के विकास को प्रेरित करता है और पुरुषत्व का निर्धारण करता है।
सही उत्तर:
(a) SRY जीन (Sex-determining Region Y)
संक्षिप्त विवरण:
- SRY जीन: यह Y गुणसूत्र के छोटे हिस्से पर स्थित होता है। यह एक प्रोटीन का उत्पादन करता है जिसे 'टेस्टिस-डिटर्मिनिंग फैक्टर' (Testis-Determining Factor - TDF) कहा जाता है। यह कारक अविकसित भ्रूण के गोनाड्स को वृषण (Testes) में बदलने के लिए प्रेरित करता है।
- अन्य विकल्प:
- लैक-Z जीन: यह बैक्टीरिया (E. coli) के लैक ओपेरॉन का हिस्सा है जो बीटा-गैलेक्टोसिडेज़ एंजाइम बनाता है।
- हीमोग्लोबिन जीन: यह रक्त में ऑक्सीजन ढोने वाले प्रोटीन (हीमोग्लोबिन) का निर्माण करता है।
- ऑन्कोजीन (Oncogene): यह वह जीन है जिसके उत्परिवर्तन या अत्यधिक सक्रिय होने से कैंसर (ट्यूमर) हो सकता है।
Q45. सामान्य महिलाओं की कोशिकाओं के केंद्रक में पाया जाने वाला 'बार बॉडी' (Barr Body) वास्तव में क्या होता है?
(a) एक मृत कोशिकांग।
(b) एक निष्क्रिय या संघनित X गुणसूत्र (Inactivated X Chromosome)।
(c) एक अतिरिक्त Y गुणसूत्र।
(d) कैंसर ग्रंथि।
(b) एक निष्क्रिय या संघनित X गुणसूत्र (Inactivated X Chromosome)।
(c) एक अतिरिक्त Y गुणसूत्र।
(d) कैंसर ग्रंथि।
सामान्य महिलाओं की कोशिकाओं के केंद्रक में पाया जाने वाला 'बार बॉडी' (Barr Body) वास्तव में एक निष्क्रिय या संघनित X गुणसूत्र होता है।
सही उत्तर:
(b) एक निष्क्रिय या संघनित X गुणसूत्र (Inactivated X Chromosome)
संक्षिप्त विवरण:
- बार बॉडी (Barr Body): मरे बार (Murray Barr) द्वारा खोजी गई यह संरचना सामान्य महिलाओं की कायिक कोशिकाओं (Somatic cells) के केंद्रक में पाई जाती है।
- कारण: महिलाओं में दो X गुणसूत्र (XX) होते हैं, जबकि पुरुषों में एक (XY)। कोशिका के अंदर X-गुणसूत्रों से बनने वाले उत्पादों के संतुलन (dosage compensation) को बनाए रखने के लिए, महिलाओं के दोनों X गुणसूत्रों में से एक निष्क्रिय होकर संगलित हो जाता है, जिसे हेटेरोक्रोमैटिन (Heterochromatin) या बार बॉडी कहते हैं।
- संख्या का सूत्र: बार बॉडी की संख्या हमेशा कुल X गुणसूत्रों की संख्या से एक कम होती है ($N - 1$, जहाँ $N$ X गुणसूत्रों की संख्या है)। उदाहरण के लिए, सामान्य महिला ($XX$) में 1 बार बॉडी होती है, जबकि टर्नर सिंड्रोम ($XO$) में 0 और क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम ($XXY$) में 1 बार बॉडी होती है।
Q46 से Q50 तक (उच्च स्तरीय एवं नैदानिक प्रश्न)
Q46. यदि किसी व्यक्ति में गुणसूत्रों का विन्यास '47, XXY' है, तो वह किस आनुवंशिक विकार से पीड़ित है और उसके शारीरिक लक्षण क्या होंगे?
(a) टर्नर सिंड्रोम; बांझ महिला
(b) क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम (Klinefelter's Syndrome); पुरुष जिसमें अल्पविकसित वृषण और स्तन विकास (Gynecomastia) जैसे स्त्री लक्षण होते हैं।
(c) डाउन सिंड्रोम; मानसिक मंदता
(d) सुपर मेल; अत्यधिक हिंसक प्रवृत्ति
(a) टर्नर सिंड्रोम; बांझ महिला
(b) क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम (Klinefelter's Syndrome); पुरुष जिसमें अल्पविकसित वृषण और स्तन विकास (Gynecomastia) जैसे स्त्री लक्षण होते हैं।
(c) डाउन सिंड्रोम; मानसिक मंदता
(d) सुपर मेल; अत्यधिक हिंसक प्रवृत्ति
यदि किसी व्यक्ति में गुणसूत्रों का विन्यास '47, XXY' है, तो वह क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम से पीड़ित है।
सही उत्तर:
(b) क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम (Klinefelter's Syndrome); पुरुष जिसमें अल्पविकसित वृषण और स्तन विकास (Gynecomastia) जैसे स्त्री लक्षण होते हैं।
संक्षिप्त विवरण:
- क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम (Klinefelter's Syndrome): यह एक आनुवंशिक विकार है जो पुरुषों में एक अतिरिक्त X गुणसूत्र (Y के साथ कुल विन्यास 47, XXY) के कारण होता है। सामान्य पुरुषों में '46, XY' गुणसूत्र होते हैं।
- शारीरिक लक्षण:
- अल्पविकसित वृषण (Underdeveloped testes)
- शुक्राणु का उत्पादन न होना (बांझपन/Infertility)
- शरीर पर बालों का कम होना
- स्तनों का विकास होना, जिसे गाइनेकोमेस्टिया (Gynecomastia) कहा जाता है।
- लंबे कद और कुछ हद तक स्त्री जैसे शारीरिक गठन की प्रवृत्ति।
Q47. 'टर्नर सिंड्रोम' (Turner's Syndrome) से ग्रसित महिला का गुणसूत्र विन्यास क्या होता है और उसमें कितने बार बॉडी पाए जाएंगे?
(a) 45, XO विन्यास और शून्य बार बॉडी (Zero Barr Body)
(b) 47, XXX विन्यास और दो बार बॉडी
(c) 46, XX विन्यास और एक बार बॉडी
(d) 45, YO विन्यास और शून्य बार बॉडी
(a) 45, XO विन्यास और शून्य बार बॉडी (Zero Barr Body)
(b) 47, XXX विन्यास और दो बार बॉडी
(c) 46, XX विन्यास और एक बार बॉडी
(d) 45, YO विन्यास और शून्य बार बॉडी
'टर्नर सिंड्रोम' (Turner's Syndrome) से ग्रसित महिला का गुणसूत्र विन्यास 45, XO होता है और उसमें शून्य बार बॉडी पाई जाती है।
सही उत्तर:
(a) 45, XO विन्यास और शून्य बार बॉडी (Zero Barr Body)
संक्षिप्त विवरण:
- टर्नर सिंड्रोम (Turner's Syndrome): यह एक आनुवंशिक विकार है जो महिलाओं में एक X गुणसूत्र की कमी (केवल एक X गुणसूत्र, अर्थात 45, XO) के कारण होता है, जबकि सामान्य महिलाओं में दो X गुणसूत्र (46, XX) होते हैं।
- शारीरिक लक्षण: इस विकार से पीड़ित महिलाएँ बांझ (Infertile) होती हैं, उनके अंडाणु अल्पविकसित होते हैं, कद छोटा होता है और यौवन के लक्षण (जैसे स्तनों का विकास) ठीक से नहीं उभरते हैं।
- बार बॉडी: बार बॉडी की संख्या का सूत्र $N - 1$ होता है (जहाँ $N$ X गुणसूत्रों की संख्या है)। टर्नर सिंड्रोम में X गुणसूत्रों की संख्या केवल 1 है, इसलिए बार बॉडी की संख्या $1 - 1 = 0$ (शून्य) होती है।
Q48. निम्नलिखित में से कौन सा रोग एक 'लिंग-सहलग्न अप्रभावी' (X-linked Recessive) लक्षण है, जो पुरुषों में अधिक प्रकट होता है और स्त्रियां आमतौर पर इसकी वाहक होती हैं?
- वर्णांधता (Color Blindness)
- हीमोफिलिया (Hemophilia)
- थैलेसीमिया
सही कूट चुनें:
(a) केवल 1
(b) केवल 1 और 2
(c) 1, 2 और 3
(d) केवल 3
इस प्रश्न का सही उत्तर (b) केवल 1 और 2 है।
स्पष्टीकरण:
- वर्णांधता (Color Blindness) और हीमोफिलिया (Hemophilia) दोनों ही X-linked Recessive (लिंग-सहलग्न अप्रभावी) आनुवंशिक रोग हैं। महिलाओं में दो X गुणसूत्र ($XX$) होने के कारण यदि एक गुणसूत्र पर दोष हो, तो दूसरी सामान्य प्रति (allele) के कारण वे आमतौर पर केवल वाहक (carrier) होती हैं, जबकि पुरुषों में केवल एक X गुणसूत्र ($XY$) होने के कारण यह रोग उनमें अधिक प्रकट होता है।
- थैलेसीमिया (Thalassemia) एक ऑटोसोमल (Autosomal recessive) आनुवंशिक विकार है, न कि X-linked Recessive। यह गुणसूत्र 11 या 16 में खराबी के कारण होता है।
अतः कथन 1 और 2 सही हैं, इसलिए विकल्प (b) सही है।
Q49. पक्षियों (Birds) में लिंग निर्धारण की प्रणाली मनुष्यों से किस प्रकार भिन्न होती है?
(a) पक्षियों में कोई गुणसूत्र नहीं होते।
(b) पक्षियों में 'ZW-ZZ' प्रणाली होती है, जहाँ मादा विषमयुग्मजी (ZW) होती है और लिंग का निर्धारण अंडे (Ovum) द्वारा होता है, न कि शुक्राणु द्वारा।
(c) पक्षियों में केवल तापमान से लिंग निर्धारण होता है।
(d) पक्षियों की प्रणाली मनुष्यों के बिल्कुल समान होती है।
(a) पक्षियों में कोई गुणसूत्र नहीं होते।
(b) पक्षियों में 'ZW-ZZ' प्रणाली होती है, जहाँ मादा विषमयुग्मजी (ZW) होती है और लिंग का निर्धारण अंडे (Ovum) द्वारा होता है, न कि शुक्राणु द्वारा।
(c) पक्षियों में केवल तापमान से लिंग निर्धारण होता है।
(d) पक्षियों की प्रणाली मनुष्यों के बिल्कुल समान होती है।
पक्षियों (Birds) में लिंग निर्धारण की प्रणाली मनुष्यों से इस प्रकार भिन्न होती है कि पक्षियों में 'ZW-ZZ' प्रणाली पाई जाती है, जिसमें मादा विषमयुग्मजी (ZW) होती है और लिंग का निर्धारण अंडे (Ovum) द्वारा होता है, न कि शुक्राणु द्वारा।
सही उत्तर:
(b) पक्षियों में 'ZW-ZZ' प्रणाली होती है, जहाँ मादा विषमयुग्मजी (ZW) होती है और लिंग का निर्धारण अंडे (Ovum) द्वारा होता है, न कि शुक्राणु द्वारा।
संक्षिप्त विवरण:
- ZW-ZZ प्रणाली: पक्षियों, कुछ सरिसृपों (Reptiles) और कीटों (जैसे तितलियों) में लिंग निर्धारण की यह प्रणाली पाई जाती है।
- मादा का विषमयुग्मजी होना (Heterogametic Female): पक्षियों में नर (Male) ZZ (समयुग्मजी) होते हैं यानी वे सभी एक जैसे (Z युक्त) शुक्राणु बनाते हैं; जबकि मादा (Female) ZW (विषमयुग्मजी) होती हैं, जो दो प्रकार के अंडे (50% Z युक्त और 50% W युक्त) बनाती हैं।
- मनुष्यों से भिन्नता: मनुष्यों में नर विषमयुग्मजी (XY) होते हैं और लिंग का निर्धारण शुक्राणु द्वारा होता है, जबकि पक्षियों में इसका उल्टा यानी मादा द्वारा लिंग का निर्धारण होता है।
Q50. मगरमच्छों (Crocodiles) और कुछ कछुओं में लिंग निर्धारण आनुवंशिक गुणसूत्रों के बजाय किस पर्यावरणीय कारक द्वारा होता है?
(a) पानी की लवणता द्वारा
(b) तापमान (Environmental Temperature / Environmental Sex Determination) द्वारा
(c) भोजन की उपलब्धता द्वारा
(d) प्रकाश की तीव्रता द्वारा
(a) पानी की लवणता द्वारा
(b) तापमान (Environmental Temperature / Environmental Sex Determination) द्वारा
(c) भोजन की उपलब्धता द्वारा
(d) प्रकाश की तीव्रता द्वारा
मगरमच्छों (Crocodiles) और कुछ कछुओं में लिंग निर्धारण आनुवंशिक गुणसूत्रों के बजाय तापमान (Environmental Temperature / Environmental Sex Determination) द्वारा होता है।
सही उत्तर:
(b) तापमान (Environmental Temperature / Environmental Sex Determination) द्वारा
संक्षिप्त विवरण:
- पर्यावरणीय लिंग निर्धारण (ESD - Environmental Sex Determination): कई सरीसृपों (Reptiles) जैसे कि मगरमच्छ, कुछ कछुए और छिपकलियों में लिंग निर्धारण सेक्स क्रोमोजोम के आधार पर नहीं, बल्कि अंडे के विकास के समय (ऊष्मायन या Incubation अवधि के दौरान) मिलने वाले तापमान पर निर्भर करता है।
- उदाहरण:
- कई कछुओं में कम तापमान पर नर और अधिक तापमान पर मादा बच्चे पैदा होते हैं।
- मगरमच्छों और कुछ अन्य सरीसृपों में तापमान की एक निश्चित सीमा (जैसे बीच का तापमान) नर या मादा बनने का निर्धारण करती है।