अम्ल, क्षार एवं लवण (Acid, Base and salt)

 

अम्ल (Acid)


भौतिक गुणधर्म (Physical Properties)

  • स्वाद: सभी अम्ल स्वाद में खट्टे होते हैं (जैसे नींबू, सिरका आदि)।

  • सूचकों पर प्रभाव: ये नीले लिटमस पत्र को लाल कर देते हैं और मेथिल ऑरेंज को गुलाबी या लाल रंग में बदल देते हैं।

  • विद्युत चालन: अम्लों का जलीय विलयन विद्युत का सुचालक होता है क्योंकि इनमें मुक्त आयन पाए जाते हैं।

  • संक्षारक प्रकृति (Corrosive Nature): प्रबल अम्ल अत्यधिक संक्षारक होते हैं और त्वचा, वस्त्र या धातुओं को गंभीर नुकसान पहुँचा सकते हैं।


अम्ल को अलग-अलग वैज्ञानिक सिद्धांतों के आधार पर परिभाषित किया गया है, जो इस प्रकार हैं :

वैज्ञानिक सिद्धांतों के आधार पर परिभाषा


  1. आरहीनियस का सिद्धांत (Arrhenius Theory):

    • अम्ल वे पदार्थ हैं जो जल में घोलने पर हाइड्रोजन आयन ($\text{H}^+$) या हाइड्रोनियम आयन ($\text{H}_3\text{O}^+$) उत्पन्न करते हैं।

    • उदाहरण: $\text{HCl} \rightarrow \text{H}^+ + \text{Cl}^-$

  2. ब्रॉन्स्टेड-लाउरी संकल्पना (Bronsted-Lowry Theory):

    • इस सिद्धांत के अनुसार, अम्ल वे पदार्थ हैं जो किसी दूसरे पदार्थ को प्रोटॉन ($\text{H}^+$) दान करने की क्षमता रखते हैं। इन्हें प्रोटॉन दाता (Proton Donor) कहा जाता है।

  3. लुईस संकल्पना (Lewis Concept):

    • लुईस के अनुसार, अम्ल वे रासायनिक पदार्थ (अणु या आयन) हैं जो इलेक्ट्रॉन युग्म (Electron Pair) को ग्रहण कर सकते हैं (इलेक्ट्रॉन ग्राही)।

प्रमुख प्राकृतिक और खनिज अम्ल (उदाहारण)


  • खनिज अम्ल (अकार्बनिक अम्ल):

    • हाइड्रॉक्लोरिक अम्ल ($\text{HCl}$) - पेट में पाया जाता है और भोजन पचाने में मदद करता है।

    • सल्फ्यूरिक अम्ल ($\text{H}_2\text{SO}_4$) - इसे 'अम्लों का राजा' (King of Acids) कहा जाता है।

    • नाइट्रिक अम्ल ($\text{HNO}_3$)

  • कार्बनिक अम्ल (प्राकृतिक अम्ल):

    • एसिटिक अम्ल ($\text{CH}_3\text{COOH}$) - सिरका में पाया जाता है।

    • साइट्रिक अम्ल C₆H₈O₇ - नींबू और संतरे में पाया जाता है।

    • लैक्लिक अम्ल $\text{C}_3\text{H}_6\text{O}_3$ - दूध और दही में पाया जाता है।
    • फार्मिक अम्ल ( HCOOH )- चींटी के डंक में पाया जाता है।

अम्लों के प्रमुख रासायनिक गुणधर्म (Chemical Properties of Acids)

अम्ल अत्यधिक प्रतिक्रियाशील रासायनिक पदार्थ होते हैं। ये विभिन्न पदार्थों (जैसे धातु, धातु कार्बोनेट, क्षार और धातु ऑक्साइड) के साथ विशिष्ट रासायनिक अभिक्रियाएँ करते हैं। अम्लों के मुख्य रासायनिक गुण निम्नलिखित हैं:

1. धातुओं के साथ अभिक्रिया (Reaction with Metals)


सक्रिय धातुएं (जैसे जिंक, आयरन, मैग्नीशियम, एल्युमिनियम) तनु अम्लों के साथ अभिक्रिया करके संगत लवण (Salt) बनाती हैं और हाइड्रोजन गैस ($\text{H}_2$) मुक्त करती हैं।

  • सामान्य समीकरण: धातु + तनु अम्ल $ \rightarrow $ लवण + हाइड्रोजन गैस

  • उदाहरण: जब जिंक ($\text{Zn}$) की अभिक्रिया तनु सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ कराई जाती है, तो जिंक सल्फेट और हाइड्रोजन गैस बनती है:

    $$\text{Zn} + \text{H}_2\text{SO}_4 \rightarrow \text{ZnSO}_4 + \text{H}_2\uparrow$$
अपवाद: नाइट्रिक अम्ल ($\text{HNO}_3$) एक प्रबल ऑक्सीकारक है। यह अधिकांश धातुओं के साथ अभिक्रिया करने पर हाइड्रोजन गैस $\text{(H}_2\text{)}$ के स्थान पर जल $\text{(H}_2\text{O)}$ और नाइट्रोजन के ऑक्साइड ($\text{NO}_2$, $\text{NO}$) बनाता है।

2. धातु कार्बोनेट और हाइड्रोजन कार्बोनेट के साथ अभिक्रिया


अम्ल धातु कार्बोनेटों और धातु बाइकार्बोनेटों (हाइड्रोजन कार्बोनेटों) के साथ तेजी से अभिक्रिया करके लवण, जल तथा कार्बन डाइऑक्साइड ($\text{CO}_2$) गैस बनाते हैं।

  • उदाहरण: सोडियम कार्बोनेट की हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ अभिक्रिया:

    $$\text{Na}_2\text{CO}_3 + 2\text{HCl} \rightarrow 2\text{NaCl} + \text{H}_2\text{O} + \text{CO}_2\uparrow$$
  • पहचान: निकलने वाली $\text{CO}_2$ गैस को जब चूने के पानी में प्रवाहित किया जाता है, तो चूने का पानी दूधिया हो जाता है।

3. क्षार के साथ अभिक्रिया (उदासीनीकरण अभिक्रिया - Neutralization)


अम्ल और क्षार आपस में मिलकर एक-दूसरे के रासायनिक प्रभाव को समाप्त (उदासीन) कर देते हैं। इस अभिक्रिया के फलस्वरूप लवण और जल का निर्माण होता है।

  • सामान्य समीकरण: अम्ल + क्षार$ \rightarrow $ लवण + जल

  • उदाहरण: हाइड्रोक्लोरिक अम्ल और सोडियम हाइड्रोक्साइड की अभिक्रिया:

    $$\text{HCl} + \text{NaOH} \rightarrow \text{NaCl} + \text{H}_2\text{O}$$

4. धातु ऑक्साइडों के साथ अभिक्रिया (Reaction with Metal Oxides)


धातु ऑक्साइड प्रायः क्षारीय प्रकृति के होते हैं। जब कोई अम्ल किसी धातु ऑक्साइड के साथ अभिक्रिया करता है, तो यह भी एक प्रकार की उदासीनीकरण अभिक्रिया होती है जिसमें लवण और जल बनते हैं।

  • उदाहरण: कॉपर ऑक्साइड (जो कि काले रंग का होता है) की हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ अभिक्रिया कराने पर कॉपर क्लोराइड बनता है, जिससे विलयन का रंग नीला-हरा हो जाता है:

    $$\text{CuO} + 2\text{HCl} \rightarrow \text{CuCl}_2 + \text{H}_2\text{O}$$

5. विद्युत का चालन (Conduction of Electricity)


अम्लों के जलीय विलयन में स्वतंत्र आयन ($\text{H}^+$ और ऋणायन) उपस्थित होते हैं, जिसके कारण ये विद्युत धारा को अपने अंदर से प्रवाहित होने देते हैं और विद्युत के सुचालक होते हैं।


क्षार की परिभाषा (Definition of Bases)

सामान्य भाषा में, क्षार वे रासायनिक पदार्थ हैं जो स्वाद में कड़वे होते हैं, छूने पर साबुन जैसे चिकने (पिचपिचे) लगते हैं, और लाल लिटमस पत्र को नीला कर देते हैं।

वैज्ञानिक सिद्धांतों के आधार पर क्षार की परिभाषा निम्नलिखित है:

  • आरहीनियस का सिद्धांत (Arrhenius Theory):

    • क्षार वे पदार्थ हैं जो जल में घोलने पर हाइड्रॉक्साइड आयन ($\text{OH}^-$) उत्पन्न करते हैं।

    • उदाहरण: $\text{NaOH} \rightarrow \text{Na}^+ + \text{OH}^-$

  • ब्रॉन्स्टेड-लाउरी संकल्पना (Bronsted-Lowry Theory):

    • क्षार वे पदार्थ हैं जो किसी अन्य पदार्थ से प्रोटॉन ($\text{H}^+$) ग्रहण करने की क्षमता रखते हैं (प्रोटॉन ग्राही / Proton Acceptor)।

  • लुईस संकल्पना (Lewis Concept):

    • क्षार वे रासायनिक पदार्थ (अणु या आयन) हैं जो इलेक्ट्रॉन युग्म (Electron Pair) का दान कर सकते हैं (इलेक्ट्रॉन दाता)।

विशेष नोट: जल में घुलनशील क्षारों को क्षारिका (Alkalis) कहा जाता है (जैसे सोडियम हाइड्रोक्साइड)। सभी क्षार जल में नहीं घुलते, लेकिन जो घुलते हैं उन्हें एल्काली कहते हैं।

क्षार के प्रकार (Types of Bases)

क्षार को मुख्य रूप से उनकी तीव्रता (Strength) और जल में घुलनशीलता के आधार पर बांटा जाता है:

  • प्रबल क्षार (Strong Bases): जो जल में पूरी तरह घुल जाते हैं और अधिक मात्रा में $\text{OH}^-$ आयन उत्पन्न करते हैं।

    • उदाहरण: सोडियम हाइड्रोक्साइड ($\text{NaOH}$), पोटैशियम हाइड्रोक्साइड ($\text{KOH}$)।

  • दुर्बल क्षार (Weak Bases): जो जल में आंशिक रूप से वियोजित होते हैं और कम $\text{OH}^-$ आयन देते हैं।

    • उदाहरण: अमोनियम हाइड्रोक्साइड ($\text{NH}_4\text{OH}$), मैग्नीशियम हाइड्रोक्साइड ($\text{Mg(OH)}_2$) [मिल्क ऑफ मैग्नीशिया]।

3. क्षार के प्रमुख उदाहरण (Examples of Bases)

  1. सोडियम हाइड्रोक्साइड ($\text{NaOH}$): इसे 'कॉस्टिक सोडा' भी कहते हैं; इसका उपयोग साबुन और कागज बनाने में होता है।

  2. कैल्शियम हाइड्रोक्साइड ($\text{Ca(OH)}_2$): इसे 'बुझा हुआ चूना' (Slaked Lime) कहते हैं; इसका उपयोग सफेदी (पुताई) में होता है।

  3. मैग्नीशियम हाइड्रोक्साइड ($\text{Mg(OH)}_2$): इसे 'मिल्क ऑफ मैग्नीशिया' कहते हैं; पेट की अम्लता (Acidity) को दूर करने के लिए एंटासिड के रूप में इसका उपयोग होता है।

  4. अमोनियम हाइड्रोक्साइड ($\text{NH}_4\text{OH}$): इसका उपयोग प्रयोगशाला में अभिकर्मक के रूप में और कपड़ों से ग्रीस के दाग हटाने के लिए किया जाता है।


क्षार के भौतिक गुणधर्म (Physical Properties)

  • स्वाद: ये स्वाद में कड़वे (Bitter) होते हैं।

  • स्पर्श: छूने पर ये साबुन जैसे चिकने और फिसलन भरे लगते हैं।

  • सूचकों पर प्रभाव: ये लाल लिटमस पत्र को नीला कर देते हैं और फिनोलफथैलीन को गुलाबी कर देते हैं।

  • विद्युत चालन: अम्लों की तरह क्षारों का जलीय विलयन भी विद्युत का सुचालक होता है।

5. क्षार के रासायनिक गुणधर्म (Chemical Properties)

  1. अम्लों के साथ अभिक्रिया (उदासीनीकरण):

    • क्षार, अम्लों के साथ मिलकर उनके प्रभाव को खत्म कर देते हैं और लवण तथा जल बनाते हैं।

    • समीकरण: क्षार + अम्ल $\rightarrow $ लवण + जल

    • उदाहरण: $\text{NaOH} + \text{HCl} \rightarrow \text{NaCl} + \text{H}_2\text{O}$

  2. अधातु ऑक्साइडों के साथ अभिक्रिया:

    • अधातु ऑक्साइड (जैसे $\text{CO}_2, \text{SO}_2$) प्रकृति में अम्लीय होते हैं। जब ये किसी क्षार के साथ क्रिया करते हैं, तो लवण और जल बनता है (यह भी एक प्रकार की उदासीनीकरण अभिक्रिया है)।

    • उदाहरण: कैल्शियम हाइड्रोक्साइड की कार्बन डाइऑक्साइड के साथ अभिक्रिया:

      $$\text{Ca(OH)}_2 + \text{CO}_2 \rightarrow \text{CaCO}_3\downarrow (\text{सफेद अवक्षेप}) + \text{H}_2\text{O}$$
  3. कुछ सक्रिय धातुओं के साथ अभिक्रिया:

    • कुछ प्रबल क्षार (जैसे $\text{NaOH}$) कुछ विशिष्ट धातुओं (जैसे जिंक - $\text{Zn}$) के साथ गर्म करने पर अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस मुक्त करते हैं।

    • उदाहरण: $\text{Zn} + 2\text{NaOH} \rightarrow \text{Na}_2\text{ZnO}_2 $ (सोडियम जिंकेट) + $\text{H}_2\uparrow$



सूचक (Indicators) 


सूचक (Indicator) वे रासायनिक पदार्थ हैं जिनका उपयोग यह जांचने के लिए किया जाता है कि कोई दिया गया विलयन अम्लीय (Acidic) है, क्षारीय (Basic) है या उदासीन (Neutral) है।

सूचक अपने रंग में परिवर्तन करके या अपनी गंध बदलकर यह सूचना देते हैं कि पदार्थ की प्रकृति कैसी है।

सूचकों के प्रमुख प्रकार

सूचकों को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में बांटा गया है:

1. प्राकृतिक सूचक (Natural Indicators)

वे सूचक जो प्रकृति में पेड़-पौधों या प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त होते हैं, प्राकृतिक सूचक कहलाते हैं।

  • लिटमस पत्र (Litmus): यह थैलोफाइटा समूह के लाइकेन (Lichen) पौधे से निकाला जाता है।

    • अम्लीय विलयन में: नीला लिटमस लाल हो जाता है।

    • क्षारीय विलयन में: लाल लिटमस नीला हो जाता है।

  • हल्दी (Turmeric):

    • अम्ल के साथ: हल्दी का पीला रंग ज्यों का त्यों रहता है।

    • क्षार के साथ: हल्दी का रंग भूरा-लाल (Reddish-brown) हो जाता है (जैसे साबुन या चूने के संपर्क में आने पर कपड़े पर लगे हल्दी के दाग का लाल होना)।

  • लाल पत्तागोभी का रस और हाइड्रेंजिया पौधे के फूल भी प्राकृतिक सूचक हैं।

2. संश्लेषित या कृत्रिम सूचक (Synthetic Indicators)

वे सूचक जो प्रयोगशाला में रसायनों द्वारा बनाए जाते हैं, कृत्रिम सूचक कहलाते हैं।

  • फिनोलफथैलीन (Phenolphthalein):

    • अम्लीय विलयन में: यह रंगहीन (Colorless) रहता है।

    • क्षारीय विलयन में: यह गुलाबी (Pink) रंग का हो जाता है।

  • मेथिल ऑरेंज (Methyl Orange):

    • अम्लीय विलयन में: इसका रंग गुलाबी/लाल हो जाता है।

    • क्षारीय विलयन में: इसका रंग पीला (Yellow) हो जाता है।

3. गंधीय सूचक (Olfactory Indicators)

वे पदार्थ जिनकी गंध (सुगंध) अम्लीय या क्षारीय माध्यम में बदल जाती है, गंधीय सूचक कहलाते हैं। इनका उपयोग उन दृष्टबाधित (देखने में असमर्थ) छात्रों के लिए किया जाता है जो रंग नहीं देख सकते।

  • प्याज का रस: अम्ल मिलाने पर इसकी गंध बनी रहती है, लेकिन क्षार मिलाने पर इसकी तीखी गंध गायब हो जाती है।

  • वैनिला अर्क (Vanilla Essence): अम्ल मिलाने पर इसकी खुशबू बनी रहती है, लेकिन किसी प्रबल क्षार के संपर्क में आने पर इसकी खुशबू समाप्त हो जाती है।

  • लौंग का तेल: अम्लीय माध्यम में इसकी गंध सुरक्षित रहती है, जबकि क्षारीय माध्यम में इसकी गंध नहीं आती।

सारणी: प्रमुख सूचकों के रंग परिवर्तन

सूचक का नाममूल रंगअम्लीय माध्यम में रंगक्षारीय माध्यम में रंग
लिटमस पत्रबैंगनी / नीला-लाललालनीला
फिनोलफथैलीनरंगहीनरंगहीनगुलाबी
मेथिल ऑरेंजनारंगीलाल / गुलाबीपीला
हल्दीपीलापीलाभूरा-लाल
महत्वपूर्ण बिंदु: सूचकों का उपयोग प्रयोगशालाओं में अनुमापन (Titration) प्रक्रिया के दौरान उदासीनीकरण बिंदु (Neutralization point) का पता लगाने के लिए मुख्य रूप से किया जाता है।

pH पैमाना (pH Scale)


pH पैमाना किसी विलयन में हाइड्रोजन आयनों ($\text{H}^+$) की सांद्रता को मापने का एक सार्वत्रिक पैमाना (Universal Scale) है। इसके माध्यम से यह पता लगाया जाता है कि कोई पदार्थ कितना अम्लीय या क्षारीय है।

इस पैमाने की खोज सोरेन्सेन (Sörensen) ने सन 1909 में की थी।

  • नाम का अर्थ: 'pH' में 'p' जर्मन शब्द 'Potenz' (अर्थात शक्ति या Power) को दर्शाता है, और 'H' हाइड्रोजन आयन ($\text{H}^+$) को इंगित करता है। इसका अर्थ 'हाइड्रोजन की शक्ति' (Power of Hydrogen) है।

pH पैमाने की मुख्य विशेषताएँ

यह पैमाना 0 से 14 तक की अंकों की एक संख्या रेखा की तरह होता है:

  1. उदासीन विलयन (Neutral):

    • जब किसी विलयन का pH मान ठीक 7 होता है, तो वह उदासीन होता है (न तो अम्ल और न ही क्षार)।

    • उदाहरण: शुद्ध जल।

  2. अम्लीय विलयन (Acidic):

    • जब pH मान 7 से कम (< 7) होता है, तो विलयन अम्लीय होता है।

    • विशेषता: pH मान जितना कम होता जाएगा, अम्ल उतना ही अधिक प्रबल (Strong) होता जाएगा।

  3. क्षारीय विलयन (Basic / Alkaline):

    • जब pH मान 7 से अधिक (> 7) होता है, तो विलयन क्षारीय होता है।

    • विशेषता: pH मान जितना अधिक होता जाएगा, क्षार उतना ही अधिक प्रबल होता जाएगा।

दैनिक जीवन में विभिन्न पदार्थों का pH मान (सारणी)

पदार्थ का नामलगभग pH मानप्रकृति
सांद्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल ($\text{HCl}$)0.0अत्यधिक प्रबल अम्ल
नींबू का रसलगभग 2.2अम्लीय
शुद्ध जल / नमक का घोल7.0उदासीन
मानव रक्त7.4हल्का क्षारीय
बेकिंग सोडा (खाने का सोडा)लगभग 8.5क्षारीय
सोडियम हाइड्रोक्साइड ($\text{NaOH}$)लगभग 14.0अत्यधिक प्रबल क्षार

दैनिक जीवन में pH का महत्व (Importance of pH)


  1. हमारे शरीर में pH का स्तर:

    • हमारा शरीर 7.0 से 7.8 pH परास (Range) के बीच कार्य करता है। जीवित जीव केवल इसी सीमित pH परास में जीवित रह सकते हैं।

  2. पाचन तंत्र और पेट की अम्लता (Acidity):

    • हमारे पेट में हाइड्रॉक्लोरिक अम्ल ($\text{HCl}$) उत्पन्न होता है जो भोजन पचाने में मदद करता है। अपच की स्थिति में पेट में अम्ल की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे दर्द और जलन होती है। इसे दूर करने के लिए दुर्बल क्षार (एंटासिड जैसे मिल्क ऑफ मैग्नीशिया) का उपयोग किया जाता है।

  3. मुँह का pH और दाँतों का क्षय:

    • मुँह के अंदर का pH मान जब 5.5 से कम हो जाता है, तब दाँतों का इनेमल (Enamel - कैल्सियम फॉस्फेट से बना शरीर का सबसे कठोर भाग) संक्षारित होने लगता है, जिससे दाँत खराब होने लगते हैं।

  4. पौधों और पशुओं की आत्मरक्षा:

    • चींटी, मधुमक्खी या नेटल (बिच्छू बूटी) के डंक मारने पर उनके द्वारा त्वचा में फार्मिक अम्ल छोड़ दिया जाता है, जिससे तेज दर्द और जलन होती है। इससे राहत पाने के लिए बेकिंग सोडा जैसे हल्के क्षार का उपयोग किया जाता है।



अम्लीय वर्षा ( Acid Rain)


सामान्यतः अम्लीय वर्षा (Acid Rain) का pH मान 5.6 से कम होता है (आमतौर पर यह 4.0 से 5.5 के बीच होता है, और अत्यधिक प्रदूषित क्षेत्रों में यह और भी कम हो सकता है)।

यह कैसे होती है और pH कम क्यों होता है?

  1. सामान्य वर्षा और pH:

    • शुद्ध वर्षा के जल का pH लगभग 7 (उदासीन) होना चाहिए, लेकिन वायुमंडल में प्राकृतिक रूप से मौजूद कार्बन डाइऑक्साइड ($\text{CO}_2$) वर्षा के जल में घुल जाती है और हल्का अम्लीय कार्बोनिक अम्ल ($\text{H}_2\text{CO}_3$) बनाती है। इसी कारण सामान्य वर्षा के जल का pH भी लगभग 5.6 होता है।

  2. अम्लीय वर्षा का बनना:

    • जब कारखानों, थर्मल पावर प्लांटों और वाहनों से निकलने वाले धुएं के कारण वायुमंडल में सल्फर डाइऑक्साइड ($\text{SO}_2$) और नाइट్రోजन के ऑक्साइड ($\text{NO}_x$) की मात्रा अत्यधिक बढ़ जाती है, तो ये गैसें बादलों के पानी के साथ रासायनिक क्रिया करती हैं।

    • इसके फलस्वरूप सल्फ्यूरिक अम्ल ($\text{H}_2\text{SO}_4$) और नाइट्रिक अम्ल ($\text{HNO}_3$) का निर्माण होता है। जब यह पानी बारिश के रूप में नीचे गिरता है, तो इसका pH मान 5.6 से काफी नीचे गिर जाता है, जिसे अम्लीय वर्षा कहते हैं।

अम्लीय वर्षा के प्रमुख दुष्प्रभाव

  • जलीय जीवन पर प्रभाव: जब अम्लीय वर्षा का पानी नदियों और झीलों में जाता है, तो वहाँ का pH मान बहुत कम हो जाता है, जिससे जलीय जीवों (विशेषकर मछलियों) के लिए जीवित रहना कठिन हो जाता है।

  • मिट्टी की अम्लता: इसके कारण मिट्टी अधिक अम्लीय हो जाती है, जिससे फसलों की पैदावार प्रभावित होती है।

  • ऐतिहासिक इमारतों का क्षरण (संगमरमर कैंसर / Marble Cancer): यह संगमरमर ($\text{CaCO}_3$) और अन्य पत्थरों से बनी इमारतों को नुकसान पहुँचाती है (जैसे ताजमहल के संगमरमर का पीला पड़ना और क्षरणा होना)।

लवण (Salt)


लवण (Salt) रसायन विज्ञान का एक अत्यंत महत्वपूर्ण यौगिक है। यह तब बनता है जब कोई अम्ल (Acid) किसी क्षार (Base) के साथ उदासीनीकरण (Neutralization) अभिक्रिया करता है।

इस प्रक्रिया में अम्ल का हाइड्रोजन आयन ($\text{H}^+$) और क्षार का हाइड्रॉक्साइड आयन ($\text{OH}^-$) मिलकर जल ($\text{H}_2\text{O}$) बनाते हैं, और शेष भाग मिलकर लवण का निर्माण करता है।

  • सामान्य अभिक्रिया: $\text{अम्ल} + \text{क्षार} \rightarrow \text{लवण} + \text{जल}$

  • उदाहरण: $\text{HCl} + \text{NaOH} \rightarrow \text{NaCl (सोडियम क्लोराइड - साधारण नमक)} + \text{H}_2\text{O}$

लवणों के प्रकार (Types of Salts)

रासायनिक प्रकृति और उनके बनने की प्रक्रिया के आधार पर लवणों को मुख्य रूप से निम्नलिखित भागों में बांटा गया है:

  1. सामान्य लवण (Normal Salts):

    • वे लवण जो किसी प्रबल अम्ल और प्रबल क्षार की पूर्ण उदासीनीकरण अभिक्रिया से बनते हैं। इनमें कोई विस्थापन योग्य $\text{H}^+$ या $\text{OH}^-$ आयन नहीं होता।

    • उदाहरण: सोडियम क्लोराइड ($\text{NaCl}$), पोटैशियम क्लोराइड ($\text{KCl}$)।

  2. अम्लीय लवण (Acidic Salts):

    • ये द्विभाषिक या त्रिभाषिक अम्लों के अपूर्ण उदासीनीकरण से बनते हैं। इनमें अभी भी कुछ प्रतिस्थापनीय हाइड्रोजन ($\text{H}$) परमाणु मौजूद होते हैं।

    • उदाहरण: सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट ($\text{NaHCO}_3$), सोडियम बाइसेफेट ($\text{NaHSO}_4$)।

  3. क्षारीय लवण (Basic Salts):

    • ये अम्लों के अपूर्ण उदासीनीकरण से बनते हैं जिनमें हाइड्रॉक्साइड आयन ($\text{OH}^-$) शेष रह जाते हैं।

    • उदाहरण: बेसिक लेड क्लोराइड ($\text{PbCl(OH)}$)।

  4. द्विक लवण (Double Salts):

    • जब दो या दो से अधिक सरल लवणों के जलीय विलयन को निश्चित अनुपात में मिलाकर वाष्पीकृत किया जाता है, तो द्विक लवण बनते हैं। ये पानी में घुलने पर अपने सभी आयनों में टूट जाते हैं।

    • उदाहरण: फिटकरी (Potash Alum) – $\text{K}_2\text{SO}_4 \cdot \text{Al}_2(\text{SO}_4)_3 \cdot 24\text{H}_2\text{O}$।

  5. संकुल या जटिल लवण (Complex Salts):

    • ये ऐसे लवण होते हैं जो पानी में घुलने पर अपनी पहचान नहीं खोते और एक जटिल आयन बनाते हैं।

    • उदाहरण: पोटैशियम फेरोसाइनाइड ($\text{K}_4[\text{Fe(CN)}_6]$)।

दैनिक जीवन के महत्वपूर्ण लवण और उनके रासायनिक नाम

  1. साधारण नमक (Common Salt):

    • रासायनिक नाम: सोडियम क्लोराइड ($\text{NaCl}$)

    • उपयोग: भोजन में स्वाद बढ़ाने के लिए, खाद्य पदार्थों के संरक्षण में, और सोडियम हाइड्रोक्साइड व बेकिंग सोडा के निर्माण में।

  2. बेकिंग सोडा / खाने का सोडा (Baking Soda):

    • रासायनिक नाम: सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट ($\text{NaHCO}_3$)

    • उपयोग: केक और पकोड़े को फुलाने में (बेकिंग पाउडर बनाने में), पेट की अम्लता (Acidity) दूर करने के लिए एंटासिड के रूप में, और अग्निशामक यंत्रों में।

  3. धोने का सोडा (Washing Soda):

    • रासायनिक नाम: सोडियम कार्बोनेट डेकाहाइड्रेट ($\text{Na}_2\text{CO}_3 \cdot 10\text{H}_2\text{O}$)

    • उपयोग: कपड़े धोने में, पानी की स्थायी कठोरता को दूर करने के लिए, और कांच, साबुन एवं कागज उद्योग में।

  4. विरंजक चूर्ण (Bleaching Powder):

    • रासायनिक नाम: कैल्शियम ऑक्सीक्लोराइड ($\text{CaOCl}_2$)

    • उपयोग: वस्त्र उद्योग में सूती और लिनन के विरंजन के लिए, कागज की फैक्टरी में लकड़ी के मज्जा के विरंजन के लिए, और पीने के पानी को रोगाणुमुक्त करने के लिए।

  5. प्लास्टर ऑफ पेरिस (Plaster of Paris - POP):

    • रासायनिक नाम: कैथियम सल्फेट हेमीहाइड्रेट ($\text{CaSO}_4 \cdot \frac{1}{2}\text{H}_2\text{O}$)

    • उपयोग: टूटी हुई हड्डियों को सही स्थिति में जोड़ने के लिए प्लास्टर करने में, खिलौने और मूर्तियाँ बनाने में, तथा दीवारों की सतह को चिकना करने में।

लवणों के भौतिक गुणधर्म (Properties of Salts)


  • प्रकृति: अधिकांश लवण क्रिस्टलीय ठोस (Crystalline Solids) होते हैं।

  • गलनांक और क्वथनांक: इनके आयनिक बंध मजबूत होने के कारण इनके गलनांक और क्वथनांक उच्च (High) होते हैं।

  • विद्युत चालन: लवणों के जलीय विलयन या पिघले हुए (Molten) रूप में ये विद्युत का चालन करते हैं क्योंकि इनमें स्वतंत्र आयन मौजूद होते हैं।