श्वसन (Respiration)
- अंतःश्वसन (Inhalation): वातावरण से ऑक्सीजनयुक्त हवा को नाक या अन्य श्वसन अंगों के माध्यम से फेफड़ों के अंदर खींचना।
- उच्छ्वास (Exhalation): शरीर के भीतर बनी कार्बन डाइऑक्साइड युक्त हवा को फेफड़ों से बाहर वातावरण में छोड़ना।
साँस लेने की प्रक्रिया से जुड़ी मुख्य बातें:
- भौतिक क्रिया: इसमें गैसों का केवल आदान-प्रदान होता है, रासायनिक परिवर्तन नहीं।
- मांसपेशियों का काम: इसमें डायफ्राम (Diaphragm) और पसलियों की मांसपेशियां सिकुड़ती और फैलती हैं, जिससे फेफड़ों का आयतन बदलता है।
- ऊर्जा का उत्पादन नहीं: इस प्रक्रिया में कोशिकाओं के भीतर भोजन का ऑक्सीकरण नहीं होता, इसलिए सीधे तौर पर कोई ऊर्जा (ATP) नहीं बनती।
साँस लेते समय (अंतःश्वसन) और साँस छोड़ते समय (उच्छ्वास) वायुमंडल से ली जाने वाली और शरीर से बाहर निकाली जाने वाली हवा में गैसों का संगठन (Composition) अलग-अलग होता है।
नीचे दी गई तालिका से इसे आसानी से समझा जा सकता है:
गैसों का संगठन (आर्गन सहित)
| गैस का नाम | साँस लेते समय वायु में मात्रा (लगभग) | साँस छोड़ते समय वायु में मात्रा (लगभग) |
| नाइट्रोजन ($\text{N}_2$) | 78% | 78% |
| ऑक्सीजन ($\text{O}_2$) | 21% | 16% से 17% |
| आर्गन ($\text{Ar}$) | 0.93% | 0.93% |
| कार्बन डाइऑक्साइड ($\text{CO}_2$) | 0.04% | 4% से 4.4% |
| जल वाष्प ($\text{H}_2\text{O}$) और अन्य गैसें | बहुत कम (अल्प मात्रा) | अधिक (संतृप्त / नमीयुक्त) |
मुख्य बातें:
नाइट्रोजन ($\text{N}_2$): इसकी मात्रा पर कोई असर नहीं पड़ता। जितनी नाइट्रोजन अंदर जाती है, उतनी ही बाहर आ जाती है क्योंकि शरीर इसका उपयोग नहीं करता।
ऑक्सीजन ($\text{O}_2$): हम 21% ऑक्सीजन अंदर लेते हैं, जिसमें से शरीर की कोशिकाएं लगभग 4-5% ऑक्सीजन का उपयोग कर लेती हैं, इसलिए बाहर निकलने वाली हवा में ऑक्सीजन घटकर 16-17% रह जाती है।
कार्बन डाइऑक्साइड ($\text{CO}_2$): वातावरण में इसकी मात्रा बहुत कम (0.04%) होती है, लेकिन कोशिकीय श्वसन के दौरान शरीर के अंदर कार्बन डाइऑक्साइड बनती है, जिसे साँਸ छोड़ते समय बाहर निकाला जाता है, इसलिए इसकी मात्रा बढ़कर 4% से अधिक हो जाती है।
साँस लेना (Breathing) और श्वसन (Respiration) सुनने में एक जैसे लगते हैं, लेकिन जीव विज्ञान में इनमें स्पष्ट अंतर होता है। साँस लेना श्वसन प्रक्रिया का ही एक हिस्सा है।
साँस लेना बनाम श्वसन में अंतर
| विशेषता | साँस लेना (Breathing) | श्वसन (Respiration) |
| प्रक्रिया का प्रकार | यह एक भौतिक (Physical) प्रक्रिया है। | यह एक जैव-रासायनिक (Biochemical) प्रक्रिया है। |
| स्थान | यह फेफड़ों और श्वसन अंगों (जैसे नासिका, श्वासनली) में होती है। | यह फेफड़ों के साथ-साथ कोशिकाओं के भीतर (साइटोप्लाज्म और माइटोकॉन्ड्रिया में) होती है। |
| ऊर्जा का बनना | इसमें ऊर्जा खर्च होती है (मांसपेशियों के हिलने-डुलने के लिए), पर ऊर्जा बनती नहीं है। | इसमें ग्लूकोज के टूटने से ATP के रूप में ऊर्जा मुक्त होती है। |
| एंजाइम की भूमिका | इसमें किसी विशेष एंजाइम की आवश्यकता नहीं होती। | यह पूरी तरह से एंजाइमों द्वारा नियंत्रित होती है। |
| चरण | इसमें केवल हवा का अंदर आना (अंतःश्वसन) और बाहर जाना (उच्छ्वास) शामिल है। | इसमें साँस लेना, गैसों का परिवहन, और कोशिकीय श्वसन (ऑक्सीकरण) सभी शामिल हैं। |
मुख्य बिंदु: साँस लेना केवल गैसों का आदान-प्रदान है (ऑक्सीजन लेना और कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ना), जबकि श्वसन एक व्यापक प्रक्रिया है जिसके अंतर्गत भोजन से ऊर्जा का उत्पादन होता है।
श्वसन की परिभाषा
(Definition of Respiration)
श्वसन (Respiration) एक जैविक एवं जैव-रासायनिक प्रक्रिया (Biochemical Process) है, जिसके द्वारा सभी जीवित कोशिकाएं भोजन (मुख्य रूप से ग्लूकोज) को तोड़कर ऊर्जा (ATP - एडेनोसिन ट्राइफॉस्फेट) उत्पन्न करती हैं। इस प्रक्रिया में जीव पर्यावरण से ऑक्सीजन ग्रहण करते हैं और कोशिकाओं में ऊर्जा मुक्त होने के पश्चात कार्बन डाइऑक्साइड और जल बाहर निकालते हैं।
श्वसन का रासायनिक समीकरण (Chemical Equation)
सामान्यतः वायवीय श्वसन (Aerobic Respiration) का रासायनिक समीकरण निम्नलिखित है:
समीकरण के घटक:
$C_6H_{12}O_6$ (ग्लूकोज): यह वह भोजन (आहार) है जिसे कोशिकाएं तोड़कर ऊर्जा प्राप्त करती हैं।
$O_2$ (ऑक्सीजन): यह श्वसन के दौरान शरीर के अंदर ली जाती है जो ग्लूकोज के ऑक्सीकरण में मदद करती है।
$CO_2$ (कार्बन डाइऑक्साइड): यह प्रक्रिया के बाद बचा हुआ अपशिष्ट है जिसे सांस छोड़ते समय बाहर निकाला जाता है।
$H_2O$ (जल): रासायनिक प्रक्रिया के दौरान उत्पन्न पानी।
ऊर्जा (ATP): शरीर के सभी जैविक कार्यों को चलाने के लिए मुख्य ऊर्जा स्रोत।
श्वसन के प्रकार
1. ऑक्सी श्वसन (Aerobic Respiration)
- स्थान: यह प्रक्रिया कोशिका के कोशिकाद्रव्य (Cytoplasm) और माइटोकॉन्ड्रिया (Mitochondria) के भीतर होती है।
- उत्पाद: इसमें कार्बन डाइऑक्साइड ($\text{CO}_2$), जल ($\text{H}_2\text{O}$) और प्रचुर मात्रा में ऊर्जा (ATP) बनती है।
- समीकरण:$$C_6H_{12}O_6 + 6O_2 \rightarrow 6CO_2 + 6H_2O + \text{ ( 38 ATP)}$$
- उदाहरण: अधिकांश उच्च श्रेणी के जीव-जंतु (जैसे मनुष्य, पशु, पक्षी) और पौधे ऑक्सी श्वसन करते हैं।
2. अनॉक्सी श्वसन (Anaerobic Respiration)
- स्थान: यह मुख्य रूप से कोशिकाद्रव्य (Cytoplasm) में होता है।
- उत्पाद: इसमें एथिल अल्कोहल (या लैक्टिक अम्ल) और कार्बन डाइऑक्साइड बनती है, तथा बहुत कम ऊर्जा निकलती है।
- प्रकार और उदाहरण:
- यीस्ट और कुछ बैक्टीरिया में: ग्लूकोज टूटकर एल्कोहल, $\text{CO}_2$ और ऊर्जा बनाता है (इस प्रक्रिया को किण्वन या Fermentation भी कहते हैं)।
- हमारी मांसपेशियों में (भारी व्यायाम के दौरान): जब हम बहुत तेज दौड़ते या कसरत करते हैं, तो ऑक्सीजन की कमी के कारण हमारी पेशी कोशिकाओं में अनॉक्सी श्वसन होता है, जिससे लैक्टिक अम्ल ($\text{Lactic Acid}$) बनता है। लैक्टिक अम्ल के जमने से ही मांसपेशियों में खिंचाव या दर्द (Cramps) होता है।
- समीकरण (यीस्ट में):$$C_6H_{12}O_6 \rightarrow 2C_2H_5OH (\text{अल्कोहल}) + 2CO_2 + \text{कम ऊर्जा}$$
ऑक्सी और अनॉक्सी श्वसन में मुख्य अंतर:
| विशेषता | ऑक्सी श्वसन (Aerobic) | अनॉक्सी श्वसन (Anaerobic) |
| ऑक्सीजन की उपस्थिति | ऑक्सीजन आवश्यक है। | ऑक्सीजन की आवश्यकता नहीं होती। |
| ऊर्जा की मात्रा | बहुत अधिक ऊर्जा (38 ATP) बनती है। | बहुत कम ऊर्जा (2 ATP) बनती है। |
| अंतिम उत्पाद | $\text{CO}_2$ और $\text{H}_2\text{O}$ | अल्कोहल या लैक्टिक अम्ल और $\text{CO}_2$ |
| स्थान | कोशिकाद्रव्य और माइटोकॉन्ड्रिया | केवल कोशिकाद्रव्य |
श्वसन गुणांक
श्वसन के दौरान श्वास की प्रक्रिया में निकलने वाली कार्बन डाइऑक्साइड ($\text{CO}_2$) के आयतन और उपयोग की जाने वाली ऑक्सीजन ($\text{O}_2$) के आयतन के अनुपात (Ratio) को श्वसन गुणांक (RQ) कहा जाता है।
सूत्र (Formula)
श्वसन गुणांक (RQ) = उत्सर्जित CO₂ का आयतन / उपभोग की गई O₂ का आयतन
विभिन्न भोज्य पदार्थों (Respiratory Substrates) के लिए RQ के मान:
श्वसन में कौन सा पदार्थ (कार्बोहाइड्रेट, वसा या प्रोटीन) टूट रहा है, इस बात पर श्वसन गुणांक का मान निर्भर करता है:
- कार्बोहाइड्रेट (Carbohydrates):
- मान: 1 (इकाई)
- कारण: कार्बोहाइड्रेट के पूर्ण ऑक्सीकरण में जितनी ऑक्सीजन ($\text{O}_2$) की खपत होती है, बिल्कुल उतना ही आयतन कार्बन डाइऑक्साइड ($\text{CO}_2$) का बाहर निकलता है।
- समीकरण के अनुसार: $6\text{CO}_2 / 6\text{O}_2 = 1$
- वसा या फैट (Fats / Lipids):
- मान: 1 से कम (लगभग 0.7)
- कारण: वसा के अणुओं में हाइड्रोजन अधिक और ऑक्सीजन कम होती है, इसलिए इसके ऑक्सीकरण के लिए ऑक्सीजन की अधिक आवश्यकता होती है, जबकि $\text{CO}_2$ कम मात्रा में निकलती है।
- प्रोटीन (Proteins):
- मान: लगभग 0.8 से 0.9 के बीच होता है।
- अनॉक्सी श्वसन या कार्बनिक अम्ल (Anaerobic Respiration / Organic Acids):
- मान: अनंत ($\infty$) या 1 से अधिक।
- कारण: अनॉक्सी श्वसन में ऑक्सीजन ($\text{O}_2$) का उपभोग शून्य (0) होता है, लेकिन कार्बन डाइऑक्साइड ($\text{CO}_2$) बाहर निकलती है, इसलिए किसी संख्या को शून्य से भाग देने पर मान अनंत आता है।
- कार्बोहाइड्रेट (Carbohydrates):
- मान: 1 (इकाई)
- कारण: कार्बोहाइड्रेट के पूर्ण ऑक्सीकरण में जितनी ऑक्सीजन ($\text{O}_2$) की खपत होती है, बिल्कुल उतना ही आयतन कार्बन डाइऑक्साइड ($\text{CO}_2$) का बाहर निकलता है।
- समीकरण के अनुसार: $6\text{CO}_2 / 6\text{O}_2 = 1$
- वसा या फैट (Fats / Lipids):
- मान: 1 से कम (लगभग 0.7)
- कारण: वसा के अणुओं में हाइड्रोजन अधिक और ऑक्सीजन कम होती है, इसलिए इसके ऑक्सीकरण के लिए ऑक्सीजन की अधिक आवश्यकता होती है, जबकि $\text{CO}_2$ कम मात्रा में निकलती है।
- प्रोटीन (Proteins):
- मान: लगभग 0.8 से 0.9 के बीच होता है।
- अनॉक्सी श्वसन या कार्बनिक अम्ल (Anaerobic Respiration / Organic Acids):
- मान: अनंत ($\infty$) या 1 से अधिक।
- कारण: अनॉक्सी श्वसन में ऑक्सीजन ($\text{O}_2$) का उपभोग शून्य (0) होता है, लेकिन कार्बन डाइऑक्साइड ($\text{CO}_2$) बाहर निकलती है, इसलिए किसी संख्या को शून्य से भाग देने पर मान अनंत आता है।
श्वसन गुणांक का महत्व:
- इससे यह पता चलता है कि जीव शरीर ऊर्जा प्राप्त करने के लिए वर्तमान में किस प्रकार के खाद्य पदार्थ (कार्बोहाइड्रेट, वसा या प्रोटीन) का उपयोग कर रहा है।
- इससे यह पता चलता है कि जीव शरीर ऊर्जा प्राप्त करने के लिए वर्तमान में किस प्रकार के खाद्य पदार्थ (कार्बोहाइड्रेट, वसा या प्रोटीन) का उपयोग कर रहा है।
कोशिकीय श्वसन (Cellular Respiration)
कोशिकीय श्वसन के मुख्य चरण
1. ग्लाइकोलाइसिस (Glycolysis)
- स्थान: यह कोशिका के कोशिकाद्रव्य (Cytoplasm) में होती है।
- प्रक्रिया: इस चरण में ग्लूकोज का एक अणु (जो 6 कार्बन का होता है) टूटकर पाइरुविक अम्ल (Pyruvic Acid) के दो अणुओं में बदल जाता है।
- विशेषता: इस चरण के लिए ऑक्सीजन की आवश्यकता नहीं होती (यह ऑक्सी और अनॉक्सी दोनों प्रकार के श्वसन में होता है)। इसमें थोड़ी सी ऊर्जा (ATP) भी बनती है।
2. क्रैब्स चक्र (Krebs Cycle / साइट्रिक एसिड चक्र)
- स्थान: यह माइटोकॉन्ड्रिया (Mitochondria) के अंदर (मैट्रिक्स में) होती है।
- प्रक्रिया: ग्लाइकोलाइसिस के बाद बनने वाला पाइरुविक अम्ल माइटोकॉन्ड्रिया में प्रवेश करता है। यहाँ ऑक्सीजन की उपस्थिति में इसका पूर्ण ऑक्सीकरण होता है, जिससे कार्बन डाइऑक्साइड ($\text{CO}_2$) गैस निकलती है और कुछ मात्रा में ATP के साथ-साथ ऊर्जावान इलेक्ट्रॉन वाहक (NADH और $FADH_2$) बनते हैं।
3. इलेक्ट्रॉन परिवहन श्रृंखला (Electron Transport Chain - ETC)
- स्थान: यह माइटोकॉन्ड्रिया की भीतरी झिल्ली (Inner Membrane) पर होती है।
- प्रक्रिया: पिछले चरणों में बने ऊर्जा वाहक अणु यहाँ इलेक्ट्रॉन और हाइड्रोजन आयन छोड़ते हैं। अंत में, ऑक्सीजन ($\text{O}_2$) इन इलेक्ट्रॉनों और हाइड्रोजन के साथ मिलकर जल ($\text{H}_2\text{O}$) बनाती है और इसी चरण में सबसे अधिक मात्रा में ATP (ऊर्जा) का उत्पादन होता है।
ATP (Adenosine Triphosphate)
1. ATP क्या है?
- पूरा नाम:
एडेनोसिन ट्राइफॉस्फेट (Adenosine Triphosphate)। - परिभाषा:
ATP को कोशिका की "ऊर्जा मुद्रा" (Energy Currency of the Cell) कहा जाता है। - शरीर की सभी जीवित कोशिकाओं को अपनी दैनिक गतिविधियों (जैसे मांसपेशियों का सिकुड़ना, प्रोटीन संश्लेषण, तंत्रिका संकेत आदि) को चलाने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है, और यह ऊर्जा मुख्य रूप से ATP के रूप में ही संग्रहित और उपयोग की जाती है।
- इसमें एक एडेनाइन बेस, एक राइबोज शुगर और तीन फॉस्फेट समूह जुड़े होते हैं।
इसके फॉस्फेट बंधों में ही अपार ऊर्जा छिपी होती है।
2. ATP की खोज किसने की थी?
- ATP की खोज वर्ष 1929 में जर्मन रसायनज्ञ कार्ल लोहमान (Karl Lohmann) ने की थी।
- इसके अलावा, अमेरिकी जैव रसायनज्ञ साइरस फिस्क (Cyrus H. Fiske) और भारतीय-अमेरिकी वैज्ञानिक येल्लाप्रगड़ा सुब्बाराव (Yellapragada Subbarow) ने भी इसी समय के आसपास मांसपेशियों में ऊर्जा हस्तांतरण और इसके कार्यों को खोजने में महत्वपूर्ण योगदान दिया था।
- वर्ष 1948 में स्कॉटिश रसायनज्ञ अलेक्जेंडर टॉड (Alexander Todd) ने पहली बार प्रयोगशाला में ATP को कृत्रिम रूप से संश्लेषित (Synthesize) किया था।
3. 1 ATP से कितनी ऊर्जा बनती (मुक्त होती) है?
- जब 1 ATP अणु का जल-अपघटन (Hydrolysis) होता है और यह ADP (Adenosine Diphosphate) तथा अकार्बनिक फॉस्फेट में टूटता है, तब इससे लगभग 7.3 kcal/mol (किलो कैलोरी प्रति मोल) या लगभग 30.5 kJ/mol (किलो जूल प्रति मोल) ऊर्जा मुक्त होती है।
कैलोरी (Calorie) को जूल (Joule) में बदलना
कैलोरी (Calorie) को जूल (Joule) में बदलना बहुत आसान है। ऊर्जा की ये दोनों इकाइयाँ हैं, जिन्हें आपस में एक निश्चित गुणांक (Conversion Factor) के जरिए बदला जा सकता है।
बदलने का नियम (Conversion Formula):
1 कैलोरी (cal) = लगभग 4.184 जूल (J)
(साधारण गणना के लिए इसे 4.2 जूल भी मान लिया जाता है)
नियम: किसी भी मान को कैलोरी से जूल में बदलने के लिए, कैलोरी की संख्या को 4.184 से गुणा (Multiply) कर दिया जाता है।
उदाहरण:
यदि आपके पास 10 कैलोरी है, तो उसे जूल में ऐसे बदलेंगे:
$$10 \times 4.184 = 41.84 \text{ Joule (J)}$$
जूल (Joule) को कैलोरी (Calorie) में बदलना भी बहुत आसान है। इसके लिए आपको कैलोरी से जूल में बदलने की प्रक्रिया की बिल्कुल उल्टी प्रक्रिया करनी होती है।
बदलने का नियम (Conversion Formula):
1 जूल (J) = लगभग 0.239 कैलोरी (cal)
यानी, जूल के मान को 4.184 से भाग (Divide) देना होता है (या 0.239 से गुणा करना होता है)।
उदाहरण:
यदि आपके पास 100 जूल (J) ऊर्जा है, तो उसे कैलोरी में इस प्रकार बदलेंगे:
मानव श्वसन तंत्र
(Human Respiratory System)
1. नासिका और नासिका मार्ग (Nostrils & Nasal Cavity)
- यह श्वसन तंत्र का पहला द्वार है। हवा यहीं से शरीर के अंदर प्रवेश करती है।
- नासिका के भीतर छोटे-छोटे बाल और श्लेष्म (Mucus) होते हैं, जो हवा में मौजूद धूल के कणों, मिट्टी और बैक्टीरिया को रोक लेते हैं ताकि शुद्ध हवा फेफड़ों तक पहुँचे।
- यहाँ हवा शरीर के तापमान के अनुसार गर्म और नम भी हो जाती है।
2. ग्रसनी (Pharynx)
- यह नासिका कक्ष के पीछे का हिस्सा होता है।
- यह भोजन नली और श्वासनली (Windpipe) का एक साझा रास्ता होता है।
3. स्वरयंत्र या लैरिंक्स (Larynx / Voice Box)
- इसे 'वॉइस बॉक्स' भी कहा जाता है क्योंकि इसी से हमारी आवाज़ उत्पन्न होती है।
- लैरिंक्स के ऊपर एक मस्कुलर ढक्कन होता है जिसे एपिग्लॉस्ट (Epiglottis) कहते हैं। इसका मुख्य काम यह होता है कि जब हम खाना या पानी निगलते हैं, तो यह श्वासनली का रास्ता बंद कर देता है ताकि भोजन श्वासनली में न जाए।
4. श्वासनली (Trachea / Windpipe)
- यह लगभग 10-12 सेंटीमीटर लंबी एक नली होती है जो गले से शुरू होकर छाती के मध्य तक जाती है।
- श्वासनली की दीवार पर 'C' आकार के कार्टिलेज (उपस्थि) के छल्ले बने होते हैं। ये छल्ले श्वासनली को पिचकने (collapse होने) से बचाते हैं, चाहे उसमें हवा हो या न हो।
5. ब्रोंकाई (Bronchi)
- छाती के पास आकर श्वासनली दो भागों में बंट जाती है—एक दाएँ फेफड़े के लिए और दूसरी बाएँ फेफड़े के लिए। इन दोनों नलियों को ब्रोंकाई (Bronchi) कहते हैं।
6. ब्रोंकिओल्स (Bronchioles)
- फेफड़ों के अंदर जाने के बाद ब्रोंकाई और अधिक छोटी-छोटी शाखाओं में बंट जाती है, जिन्हें ब्रोंकिओल्स कहा जाता है। यह ठीक किसी पेड़ की छोटी-छोटी टहनियों की तरह दिखती हैं।
7. वायु कूपिकाएँ (Alveoli)
- ब्रोंकिओल्स के सिरों पर अंगूर के गुच्छों जैसी सूक्ष्म और पतली दीवारों वाली थैलीनुमा संरचनाएँ होती हैं, जिन्हें कूपिकाएँ (Alveoli) कहते हैं।
- यह श्वसन तंत्र का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है: यहीं पर रक्त और हवा के बीच गैसों का असली आदान-प्रदान होता है। फेफड़ों में ऑक्सीजन कूपिकाओं से खून में मिल जाती है और खून की कार्बन डाइऑक्साइड कूपिकाओं में आ जाती है।
8. फेफड़े (Lungs)
- यह श्वसन तंत्र के मुख्य और सबसे बड़े स्पंजी अंग हैं। मनुष्य के शरीर में दो फेफड़े होते हैं—बायाँ फेफड़ा और दायाँ फेफड़ा।
- बायाँ फेफड़ा थोड़ा छोटा होता है क्योंकि उसी तरफ हृदय (Heart) स्थित होता है।
- फेफड़े 'प्ल्युरा' (Pleura) नामक एक दोहरी झिल्ली से सुरक्षित रहते हैं, जो इन्हें बाहरी झटकों से बचाती है।
9. डायफ्राम (Diaphragm)
- यह छाती (Thoracic cavity) और पेट के बीच स्थित एक मजबूत पेशीय (Muscular) पर्दा या गुंबद जैसा भाग होता है।
- डायफ्राम के नीचे-ऊपर होने से ही फेफड़ों का आकार बदलता है, जिससे हवा अंदर खिंचती है (अंतःश्वसन) और बाहर निकलती है (उच्छ्वास)।
प्रमुख रोग
1. दमा या अस्थमा (Asthma)
- कारण: यह वायु मार्गों (Bronchioles) की एक दीर्घकालिक (Chronic) समस्या है। इसमें वायु मार्ग में सूजन आ जाती है और वे सिकुड़ जाते हैं, जिससे बलगम (Mucus) बनने लगता है।
- लक्षण: साँस लेने में घरघराहट (Wheezing), सीने में जकड़न, और बार-बार जोर से खाँसी आना।
2. ब्रोंकाइटिस (Bronchitis)
- कारण: इसमें श्वासनली की मुख्य शाखाओं (Bronchi) की झिल्ली में सूजन आ जाती है। यह अक्सर वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण के कारण होता है।
- लक्षण: लगातार खाँसी के साथ गाढ़ा पीला या हरा बलगम निकलना और सीने में हल्की बेचैनी होना।
3. निमोनिया (Pneumonia)
- कारण: यह फेफड़ों का एक गंभीर संक्रमण है जो बैक्टीरिया, वायरस या कवक (Fungi) के कारण होता है। इसमें फेफड़ों की वायु कूपिकाएँ (Alveoli) तरल पदार्थ या मवाद (Pus) से भर जाती हैं।
- लक्षण: तेज बुखार, ठंड लगना, खाँसी के साथ कफ आना और साँस लेने में तेज दर्द होना।
4. तपेदिक या टीबी (Tuberculosis - TB)
- कारण: यह 'माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस' (Mycobacterium tuberculosis) नामक बैक्टीरिया के संक्रमण से होने वाला संक्रामक रोग है। यह मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करता है।
- लक्षण: 2 सप्ताह से अधिक समय तक लगातार खाँसी (कभी-कभी खून आना), शाम को हल्का बुखार, वजन घटना और रात में पसीना आना।
5. वातस्फीति या एम्फिसीमा (Emphysema)
- कारण: यह मुख्य रूप से लंबे समय तक धूम्रपान करने या वायु प्रदूषण के संपर्क में रहने के कारण होता है। इसमें फेफड़ों की वायु कूपिकाएँ (Alveoli) क्षतिग्रस्त और नष्ट हो जाती हैं।
- लक्षण: फेफड़ों का क्षेत्रफल कम होने के कारण थोड़ा सा काम करने पर भी बहुत जल्दी साँস फूलना (थकान)।
6. फेफड़ों का कैंसर (Lung Cancer)
- कारण: तंबाकू या सिगरेट के धुएँ में मौजूद हानिकारक रसायन फेफड़ों की कोशिकाओं के असामान्य और अनियंत्रित विकास (Tumor) का कारण बनते हैं।
- लक्षण: पुरानी खाँसी जो ठीक न हो, खाँसी के साथ खून आना, सीने में लगातार दर्द और बिना किसी कारण के वजन कम होना।
7. सामान्य सर्दी-जुकाम और इन्फ्लूएंजा (Common Cold & Influenza)
- कारण: यह विभिन्न वायरस (जैसे राइनोवायरस) के कारण ऊपरी श्वसन तंत्र में होने वाला हल्का संक्रमण है।
- लक्षण: नाक बहना, गला खराब होना, हल्की खाँसी और छींक आना।
बचाव के उपाय: श्वसन तंत्र को स्वस्थ रखने के लिए धूम्रपान से दूरी, प्रदूषित हवा से बचाव (मास्क का उपयोग), नियमित व्यायाम (प्राणायाम) और संतुलित आहार लेना बेहद जरूरी है।
भाग 1: श्वसन की परिभाषा एवं समीकरण
- उत्तर: (स) जैव-रासायनिक प्रक्रिया
- व्याख्या: श्वसन कोशिकाओं के भीतर होने वाली एक जैव-रासायनिक प्रक्रिया है जिसमें भोजन के ऑक्सीकरण से ऊर्जा मुक्त होती है।
- उत्तर: (ब) कार्बन डाइऑक्साइड, जल और ऊर्जा
- व्याख्या: ग्लूकोज और ऑक्सीजन की प्रतिक्रिया से $\text{CO}_2$, जल ($\text{H}_2\text{O}$) और ऊर्जा (ATP) बनते हैं।
- उत्तर: (अ) $\text{C}_6\text{H}_{12}\text{O}_6$
- व्याख्या: ग्लूकोज का रासायनिक सूत्र $\text{C}_6\text{H}_{12}\text{O}_6$ होता है।
- उत्तर: (स) ATP
- व्याख्या: ऊर्जा ATP (Adenosine Triphosphate) के रूप में संचित और मुक्त होती है।
- उत्तर: (ब) ऊर्जा (ATP) उत्पन्न करना
- व्याख्या: सभी जीवधारियों को अपनी जैविक गतिविधियों के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जो श्वसन से मिलती है।
भाग 2: साँस लेना और श्वसन में अंतर
- उत्तर: (ब) भौतिक
- व्याख्या: साँस लेना एक भौतिक प्रक्रिया है जिसमें केवल गैसों का अंदर आना और बाहर जाना होता है।
- उत्तर: (ब) नहीं, इसमें ऊर्जा बनती नहीं बल्कि मांसपेशियों के काम करने में खर्च होती है
- व्याख्या: ऊर्जा उत्पादन कोशिकीय श्वसन में होता है, जबकि साँस लेना केवल गैसीय आदान-प्रदान है।
- उत्तर: (ब) श्वसन
- व्याख्या: कोशिकीय श्वसन विभिन्न जैव-रासायनिक एंजाइमों द्वारा नियंत्रित होता है।
- उत्तर: (ब) फेफड़े और श्वसन मार्ग
- व्याख्या: साँस लेने की क्रिया फेफड़ों और वायुमार्ग के माध्यम से पूरी होती है।
- उत्तर: (ब) साँस लेना श्वसन प्रक्रिया का ही एक भाग है
- व्याख्या: गैसीय विनिमय (साँस लेना) श्वसन का एक चरण है, जबकि श्वसन एक व्यापक जैव-रासायनिक प्रक्रिया है।
भाग 3: गैसों का संगठन
- उत्तर: (ब) 21%
- व्याख्या: वायुमंडल की हवा में ऑक्सीजन लगभग 21% पाई जाती है।
- उत्तर: (स) 16% से 17%
- व्याख्या: शरीर की कोशिकाएं कुछ ऑक्सीजन का उपयोग कर लेती हैं, इसलिए छोड़ी गई हवा में ऑक्सीजन 16-17% बचती है।
- उत्तर: (ब) 0.93%
- व्याख्या: आर्गन एक अक्रिय गैस है जो वायुमंडल में लगभग 0.93% होती है और इसका शरीर पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
- उत्तर: (स) 4% से 4.4%
- व्याख्या: कोशिकीय श्वसन के दौरान बनी $\text{CO}_2$ को बाहर छोड़ा जाता है, जिससे इसकी मात्रा 0.04% से बढ़कर 4% हो जाती है।
- उत्तर: (स) नाइट्रोजन
- व्याख्या: नाइट्रोजन ($\text{78\%}$) का उपयोग शरीर नहीं करता, इसलिए जितनी अंदर जाती है उतनी ही बाहर आ जाती है।
भाग 4: श्वसन के प्रकार (ऑक्सी एवं अनॉक्सी)
- उत्तर: (ब) ऑक्सीजन
- व्याख्या: ऑक्सी श्वसन के लिए ऑक्सीजन ($\text{O}_2$) अनिवार्य है।
- उत्तर: (स) 2 ATP
- व्याख्या: ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में ग्लूकोज का पूर्ण विखंडन नहीं होता, जिससे केवल 2 ATP ऊर्जा मिलती है।
- उत्तर: (ब) लैक्टिक अम्ल
- व्याख्या: मांसपेशियों में अनॉक्सी श्वसन से लैक्टिक अम्ल जमा होता है जिससे दर्द या ऐंठन (Cramps) होती है।
- उत्तर: (ब) एथिल अल्कोहल, $\text{CO}_2$ और ऊर्जा
- व्याख्या: यीस्ट शर्करा को तोड़कर अल्कोहल और कार्बन डाइऑक्साइड का निर्माण करता है।
- उत्तर: (ब) माइटोकॉन्ड्रिया
- व्याख्या: माइटोकॉन्ड्रिया को कोशिका का पावरहाउस कहते हैं जहाँ क्रेब्स चक्र और ऑक्सी श्वसन होता है।
भाग 5: श्वसन की क्रियाविधि और कोशिकीय श्वसन
- उत्तर: (ब) ग्लाइकोलाइसिस
- व्याख्या: ग्लाइकोलाइसिस कोशिकीय श्वसन का पहला चरण है।
- उत्तर: (स) कोशिकाद्रव्य (Cytoplasm) में
- व्याख्या: ग्लाइकोलाइसिस कोशिका के साइटोप्लाज्म में पूरी होती है।
- उत्तर: (ब) ईएमपी पथ (EMP Pathway)
- व्याख्या: इसे Embden-Meyerhof-Parnas (EMP) पथ भी कहा जाता है।
- उत्तर: (ब) माइटोकॉन्ड्रिया के भीतर
- व्याख्या: पाइरुविक अम्ल माइटोकॉन्ड्रिया में प्रवेश करके क्रैब्स चक्र चलाता है।
- उत्तर: (ब) हीमोग्लोबिन
- व्याख्या: हीमोग्लोबिन ऑक्सीजन से जुड़कर ऑक्सीहीमोग्लोबिन बनाता है और कोशिकाओं तक पहुँचाता है।
भाग 6: 36 और 38 ATP का रहस्य (शटल तंत्र)
- उत्तर: (ब) 38 ATP
- व्याख्या: मैलेट-एस्पार्टेट शटल के उपयोग से ऊर्जा का नुकसान नहीं होता, जिससे कुल 38 ATP प्राप्त होते हैं।
- उत्तर: (ब) 36 ATP
- व्याख्या: ग्लिसरॉल-फॉस्फेट शटल के कारण परिवहन में 2 ATP खर्च हो जाते हैं, जिससे कुल 36 ATP बचते हैं।
- उत्तर: (अ) हृदय (Heart) और यकृत
- व्याख्या: इन अंगों में मैलेट-एस्पार्टेट शटल काम करती है जिससे 38 ATP बनते हैं।
- उत्तर: (अ) कंकाल की मांसपेशियां और मस्तिष्क
- व्याख्या: मांसपेशियों और मस्तिष्क में यह शटल होने के कारण 36 ATP बनते हैं।
- उत्तर: (ब) 2 ATP
- व्याख्या: ग्लाइकोलाइसिस में 4 ATP बनते हैं और 2 खर्च होते हैं, इसलिए शुद्ध लाभ 2 ATP का होता है।
भाग 7: ATP और ऊर्जा इकाइयाँ (कैलोरी/जूल)
- उत्तर: (अ) एडेनोसिन ट्राइफॉस्फेट
- व्याख्या: ATP का पूर्ण रूप Adenosine Triphosphate है।
- उत्तर: (अ) कार्ल लोहमान
- व्याख्या: जर्मन रसायनज्ञ कार्ल लोहमान ने 1929 में ATP की खोज की थी।
- उत्तर: (ब) 7.3 kcal/mol
- व्याख्या: 1 ATP के टूटने से लगभग 7.3 किलोकैलोरी प्रति मोल (या 30.5 kJ/mol) ऊर्जा मिलती है।
- उत्तर: (स) 4.184 J
- व्याख्या: 1 कैलोरी लगभग 4.184 जूल के बराबर होती है।
- उत्तर: (ब) 4.184
- व्याख्या: जूल को कैलोरी में बदलने के लिए 4.184 से भाग दिया जाता है ($\text{cal} = \text{J} / 4.184$).
भाग 8: मानव श्वसन तंत्र के भाग
- उत्तर: (ब) धूल के कणों और बैक्टीरिया को रोकना
- व्याख्या: यह अशुद्धियों को फेफड़ों में जाने से रोकते हैं और हवा को नम बनाते हैं।
- उत्तर: (ब) लैरिंक्स (Larynx)
- व्याख्या: लैरिंक्स से ही हमारी आवाज़ उत्पन्न होती है।
- उत्तर: (अ) भोजन को श्वासनली में जाने से रोकना
- व्याख्या: यह भोजन निकलते समय श्वासनली का द्वार ढक लेता है ताकि भोजन सही नली (ग्रसनी) में जाए।
- उत्तर: (ब) 'C' आकार
- व्याख्या: C-आकार के छल्ले श्वासनली को पिचकने (collapse होने) से बचाते हैं।
- उत्तर: (स) वायु कूपिकाएँ (Alveoli) में
- व्याख्या: कूपिकाएँ बहुत पतली थैलियाँ होती हैं जहाँ से ऑक्सीजन खून में और $\text{CO}_2$ बाहर जाती है।
- उत्तर: (ब) हृदय (Heart) की स्थिति के कारण
- व्याख्या: हृदय बाईं ओर थोड़ा झुका होता है, इसलिए बाएं फेफड़े के लिए जगह कम होती है और वह छोटा होता है।
- उत्तर: (ब) प्ल्युरा (Pleura)
- व्याख्या: प्ल्युरा झिल्ली फेफड़ों को घर्षण और बाहरी झटकों से बचाती है।
- उत्तर: (ब) गुंबद जैसी (Dome-shaped)
- व्याख्या: यह छाती और पेट के बीच स्थित एक मजबूत पेशीय पर्दा होता है।
- उत्तर: (अ) ब्रोंकिओल्स
- व्याख्या: ब्रोंकाई फेफड़ों के अंदर जाकर छोटी शाखाओं (ब्रोंकिओल्स) में बंट जाती है।
भाग 9: श्वसन तंत्र से संबंधित रोग
- उत्तर: (ब) वायु मार्ग / ब्रोंकिओल्स
- व्याख्या: अस्थमा में वायु मार्ग में सूजन आ जाती है और वे सिकुड़ जाते हैं जिससे साँस लेने में दिक्कत होती है।
- उत्तर: (ब) माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस (बैक्टीरिया)
- व्याख्या: यह बैक्टीरिया जनित संक्रामक रोग है जो मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करता है।
- उत्तर: (ब) वायु कूपिकाएँ (Alveoli)
- व्याख्या: निमोनिया संक्रमण के कारण कूपिकाओं में तरल पदार्थ भर जाता है जिससे गैसों का आदान-प्रदान रुक जाता है।
- उत्तर: (ब) लंबे समय तक धूम्रपान या प्रदूषण
- व्याख्या: धूम्रपान से फेफड़ों की वायु कूपिकाएँ नष्ट हो जाती हैं जिससे साँस फूलने लगती है।
- उत्तर: (अ) श्वासनली की मुख्य शाखाओं (Bronchi) में
- व्याख्या: ब्रोंकाई की झिल्ली में सूजन आना ब्रोंकाइटिस कहलाता है जिससे लगातार खाँसी और बलगम बनता है।
- उत्तर: (ब) तपेदिक (TB)
- व्याख्या: टीबी एक संक्रामक रोग है जो माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस बैक्टीरिया द्वारा फैलता है।
