रासायनिक अभिक्रिया (Chemical Reaction)


रासायनिक अभिक्रिया (Chemical Reaction) के प्रकार 

1. संयोजन अभिक्रिया (Combination Reaction)

दो या दो से अधिक अभिकारक मिलकर केवल एक एकल उत्पाद का निर्माण करते हैं। ($A + B \rightarrow C$)

  • कोयले का दहन:

    $$C(s) + O_2(g) \rightarrow CO_2(g)$$
  • जल का निर्माण:

    $$2H_2(g) + O_2(g) \rightarrow 2H_2O(l)$$
  • बिना बुझे चूने की पानी से क्रिया:

    $$CaO(s) + H_2O(l) \rightarrow Ca(OH)_2(aq) + $$ ऊष्मा
  • अमोनिया और हाइड्रोजन क्लोराइड की क्रिया:

    $$NH_3(g) + HCl(g) \rightarrow NH_4Cl(s)$$
  • मैग्नीशियम का आक्सीजन से संयोग:

    $$2Mg(s) + O_2(g) \rightarrow 2MgO(s)$$
नोट :- प्रत्येक संयोजन अभिक्रिया उष्माक्षेपी अभिक्रिया होती है लेकिन प्रत्येक ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया संयोजन अभिक्रिया नही होती है | 

ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया (Exothermic Reaction)

जिन रासायनिक अभिक्रियाओं में उत्पादों के निर्माण के साथ-साथ ऊष्मा या ऊर्जा का उत्सर्जन (निकलना) होता है, उन्हें ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया कहते हैं।

  • ऊष्मागतिकीय पक्ष: इन अभिक्रियाओं में अभिकारकों की कुल ऊर्जा उत्पादों से अधिक होती है, जिसके कारण ऊर्जा बाहर निकलती है। इसके लिए एन्थैल्पी परिवर्तन ($\Delta H$) का मान ऋणात्मक (-ve) होता है।

ऊष्माक्षेपी अभिक्रियाओं के  प्रमुख उदाहरण एवं समीकरण:

  1. प्राकृतिक गैस (मेथेन) का दहन:

    $$CH_4(g) + 2O_2(g) \rightarrow CO_2(g) + 2H_2O(l) + $$ ऊष्मा
  2. श्वसन (Respiration) - जैव रासायनिक ऊष्माक्षेपी प्रक्रम:

    $$C_6H_{12}O_6(aq) + 6O_2(g) \rightarrow 6CO_2(g) + 6H_2O(l) + $$ ऊर्जा (ATP)

2. वियोजन/अपघटन अभिक्रिया (Decomposition Reaction)

एक एकल अभिकारक ऊर्जा (ऊष्मा, प्रकाश या विद्युत) के प्रभाव से टूटकर दो या दो से अधिक सरल उत्पाद प्रदान करता है। ($AB \rightarrow A + B$)

  • कैल्सियम कार्बोनेट का तापीय अपघटन:

    $$CaCO_3(s) \xrightarrow{\Delta} CaO(s) + CO_2(g)$$
  • पोटेशियम क्लोरेट का तापीय अपघटन:

    $$2KClO_3(s) \xrightarrow{\Delta} 2KCl(s) + 3O_2(g)$$
  • जल का वैद्युत अपघटन:

    $$2H_2O(l) \xrightarrow{\text{Current}} 2H_2(g) + O_2(g)$$
  • सिल्वर क्लोराइड का प्रकाशीय अपघटन:

    $$2AgCl(s) \xrightarrow{h\nu} 2Ag(s) + Cl_2(g)$$
  • फेरस सल्फेट का तापीय अपघटन:

    $$2FeSO_4(s) \xrightarrow{\Delta} Fe_2O_3(s) + SO_2(g) + SO_3(g)$$

वियोजन या अपघटन अभिक्रियाओं को उस ऊर्जा के प्रकार के आधार पर मुख्य रूप से तीन भागों में वर्गीकृत किया जाता है जिसके कारण कोई यौगिक दो या दो से अधिक सरल भागों में टूटता है:

  • 1. तापीय अपघटन (Thermal Decomposition)

    जब किसी अभिकारक का अपघटन ऊष्मा (Heat) देने पर होता है, तो उसे तापीय अपघटन कहते हैं। इस प्रकार की अधिकांश अभिक्रियाएँ ऊष्माशोषी (Endothermic) होती हैं।

    • कैल्सियम कार्बोनेट का अपघटन:

      $$CaCO_3(s) \xrightarrow{\Delta} CaO(s) + CO_2(g)$$
    • फेरस सल्फेट का अपघटन:

      $$2FeSO_4(s) \xrightarrow{\Delta} Fe_2O_3(s) + SO_2(g) + SO_3(g)$$
  • 2. विद्युत अपघटन (Electrolytic Decomposition)

    जब किसी यौगिक के जलीय विलयन या गलित अवस्था में विद्युत धारा (Electric Current) प्रवाहित करने पर उसका अपघटन होता है, तो उसे विद्युत अपघटन कहते हैं। इसमें आयनों का अभिगमन इलेक्ट्रोड की ओर होता है।

    • जल का वैद्युत अपघटन:

      $$2H_2O(l) \xrightarrow{\text{Current}} 2H_2(g) + O_2(g)$$
    • गलित सोडियम क्लोराइड का अपघटन:

      $$2NaCl(l) \xrightarrow{\text{Current}} 2Na(s) + Cl_2(g)$$
  • 3. प्रकासीय अपघटन (Photolytic Decomposition / Photolysis)

    जब किसी अभिकारक का अपघटन सूर्य के प्रकाश (Light / $h\nu$) की ऊर्जा के अवशोषण के कारण होता है, तो उसे प्रकासीय अपघटन कहते हैं। इसका उपयोग श्याम-श्वेत (Black and White) फोटोग्राफी में किया जाता है।

    • सिल्वर क्लोराइड का अपघटन:

      $$2AgCl(s) \xrightarrow{h\nu} 2Ag(s) + Cl_2(g)$$
    • सिल्वर ब्रोमाइड का अपघटन:

      $$2AgBr(s) \xrightarrow{h\nu} 2Ag(s) + Br_2(g)$$

नोट :- प्रत्येक अपघटन अभिक्रिया ऊष्माशोषी अभिक्रिया होती है लेकिन प्रत्येक ऊष्माशोषी अभिक्रिया अपघटन अभिक्रिया नही होती है | 

ऊष्माशोषी अभिक्रिया (Endothermic Reaction)

जिन रासायनिक अभिक्रियाओं में अभिकारकों को क्रिया करने या टूटने के लिए बाहर से ऊष्मा, प्रकाश या विद्युत ऊर्जा का अवशोषण करना पड़ता है, उन्हें ऊष्माशोषी अभिक्रिया कहते हैं।

  • ऊष्मागतिकीय पक्ष: इन अभिक्रियाओं में उत्पादों की कुल ऊर्जा अभिकारकों से अधिक होती है। इसके लिए एन्थैल्पी परिवर्तन ($\Delta H$) का मान धनात्मक (+ve) होता है।

ऊष्माशोषी अभिक्रियाओं के 4 प्रमुख उदाहरण एवं समीकरण:

कैल्सियम कार्बोनेट का तापीय अपघटन:


$CaCO_3(s) + $ऊष्मा$ \rightarrow CaO(s) + CO_2(g)$

नाइट्रोजन और ऑक्सीजन का उच्च तापमान पर संयोग (नाइट्रिक ऑक्साइड का निर्माण):
$N_2(g) + O_2(g)$ + ऊष्मा$ \rightarrow 2NO(g)$

प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) - सौर ऊर्जा का अवशोषण:

$6CO_2(g) + 6H_2O(l) + $सौर ऊर्जा$ \rightarrow C_6H_{12}O_6(aq) + 6O_2(g)$

अमोनियम क्लोराइड का जल में घुलना (इस प्रक्रिया में बर्तन ठंडा हो जाता है क्योंकि यह ऊष्मा अवशोषित करता है):

$NH_4Cl(s) +$ जल + ऊष्मा $ \rightarrow NH_4Cl(aq)$


3. विस्थापन अभिक्रिया (Displacement Reaction)

अधिक अभिक्रियाशील तत्व अपनी सक्रियता के आधार पर कम अभिक्रियाशील तत्व को उसके यौगिक से विस्थापित कर देता है। ($A + BC \rightarrow AC + B$)

  • आयरन और कॉपर सल्फेट:

    $$Fe(s) + CuSO_4(aq) \rightarrow FeSO_4(aq) + Cu(s)$$
  • जिंक और कॉपर सल्फेट:

    $$Zn(s) + CuSO_4(aq) \rightarrow ZnSO_4(aq) + Cu(s)$$
  • लेड और कॉपर क्लोराइड:

    $$Pb(s) + CuCl_2(aq) \rightarrow PbCl_2(aq) + Cu(s)$$
  • जिंक और तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल:

    $$Zn(s) + 2HCl(aq) \rightarrow ZnCl_2(aq) + H_2(g)$$
  • मैग्नीशियम और हाइड्रोक्लोरिक अम्ल:

    $$Mg(s) + 2HCl(aq) \rightarrow MgCl_2(aq) + H_2(g)$$

सक्रियता श्रेणी (Reactivity Series)

वह सूची है जिसमें धातुओं को उनकी रासायनिक अभिक्रियाशीलता के घटते हुए क्रम में व्यवस्थित किया जाता है। इस श्रेणी में सबसे अधिक अभिक्रियाशील धातु सबसे ऊपर और सबसे कम अभिक्रियाशील धातु सबसे नीचे होती है।

धातुओं की सक्रियता श्रेणी (शीर्ष से नीचे की ओर)

K — पोटैशियम (Potassium) — सर्वाधिक अभिक्रियाशील
Na — सोडियम (Sodium)
Ca — कैल्सियम (Calcium)
Mg — मैग्नीशियम (Magnesium)
Al — एल्युमीनियम (Aluminium)
Zn — जिंक (Zinc)
Fe — आयरन / लोहा (Iron)
Pb — लेड / सीसा (Lead)
[H] — हाइड्रोजन (Hydrogen) — संदर्भ के रूप में (अधातु)
Cu — कॉपर (Copper)
Hg — मरकरी / पारा (Mercury)
Ag — सिल्वर / चांदी (Silver)
Au — गोल्ड / सोना (Gold) — न्यूनतम अभिक्रियाशील (उत्कृष्ट धातु)


सक्रियता श्रेणी के प्रमुख गुण और उपयोग

  • विस्थापन अभिक्रिया का निर्धारण: श्रेणी में जो धातु जितनी ऊपर है, वह अपने से नीचे स्थित किसी भी धातु को उसके लवण विलयन से विस्थापित कर सकती है। (जैसे: जिंक, कॉपर सल्फेट से कॉपर को विस्थापित कर देता है)।

  • अम्लों से हाइड्रोजन का विस्थापन: हाइड्रोजन से ऊपर स्थित सभी सक्रिय धातुएँ तनु अम्लों ($HCl$ या $H_2SO_4$) के साथ अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस ($H_2$) मुक्त करती हैं, जबकि हाइड्रोजन से नीचे की धातुएँ (जैसे $Cu, Ag, Au$) अम्लों से अभिक्रिया करके $H_2$ गैस नहीं देतीं।

  • ऑक्सीकरण और अपचयन की प्रवृत्ति: श्रेणी में ऊपर से नीचे जाने पर धातुओं के आयनित होने की क्षमता घटती है और उनका अपचयन होना आसान होता जाता है (ऊपर की धातुएँ अच्छी अपचायक होती हैं)।


4. द्वि-विस्थापन अभिक्रिया (Double Displacement Reaction)

अभिकारकों के बीच आयनों का आदान-प्रदान होता है। इसमें अक्सर एक अघुलनशील ठोस (अवक्षेप) प्राप्त होता है। ($AB + CD \rightarrow AD + CB$)

  • सोडियम सल्फेट और बेरियम क्लोराइड:

    $$Na_2SO_4(aq) + BaCl_2(aq) \rightarrow BaSO_4(s)\downarrow + 2NaCl(aq)$$
  • सिल्वर नाइट्रेट और सोडियम क्लोराइड:

    $$AgNO_3(aq) + NaCl(aq) \rightarrow AgCl(s)\downarrow + NaNO_3(aq)$$
  • कॉपर सल्फेट और हाइड्रोजन सल्फाइड:

    $$CuSO_4(aq) + H_2S(g) \rightarrow CuS(s)\downarrow + H_2O_4(aq) \quad (\text{Or} H_2SO_4)$$
  • सोडियम हाइड्रॉक्साइड और हाइड्रोक्लोरिक अम्ल:

    $$NaOH(aq) + HCl(aq) \rightarrow NaCl(aq) + H_2O(l)$$
  • लेड नाइट्रेट और पोटेशियम आयोडाइड:

    $$Pb(NO_3)_2(aq) + 2KI(aq) \rightarrow PbI_2(s)\downarrow + 2KNO_3(aq)$$

नोट :- द्वि - विस्थापन अभिक्रिया उदासीनीकरण अभिक्रिया होती है | ये अभिक्रिया कभी भी रेड़ोक्स अभिक्रिया नही होती है | 

ऑक्सीकरण-अपचयन (रेडॉक्स - Redox) अभिक्रिया: 

रेडॉक्स अभिक्रिया वह रासायनिक प्रक्रम है जिसमें ऑक्सीकरण (Oxidation) और अपचयन (Reduction) दोनों क्रियाएँ एक साथ (समकालिक रूप से) होती हैं।

1. ऑक्सीकरण (Oxidation):

  • शास्त्रीय अवधारणा: ऑक्सीजन का जुड़ना या हाइड्रोजन का हटना।

  • इलेक्ट्रॉनिक अवधारणा: किसी परमाणु, आयन या अणु द्वारा इलेक्ट्रॉनों का त्याग (Loss of electrons) करना ऑक्सीकरण कहलाता है।

  • ऑक्सीकरण संख्या: इस प्रक्रिया में तत्व की ऑक्सीकरण अंक / संख्या में वृद्धि होती है।

2. अपचयन (Reduction):

  • शास्त्रीय अवधारणा: हाइड्रोजन का जुड़ना या ऑक्सीजन का हटना।

  • इलेक्ट्रॉनिक अवधारणा: किसी परमाणु, आयन या अणु द्वारा इलेक्ट्रॉनों को ग्रहण करना (Gain of electrons) अपचयन कहलाता है।

  • ऑक्सीकरण संख्या: इस प्रक्रिया में तत्व की ऑक्सीकरण अंक / संख्या में कमी आती है।

3. ऑक्सीकारक और अपचायक:

  • ऑक्सीकारक (Oxidizing Agent): वह पदार्थ जो दूसरे का ऑक्सीकरण करता है और स्वयं का अपचयन करवाता है (इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है)।

  • अपचायक (Reducing Agent): वह पदार्थ जो दूसरे का अपचयन करता है और स्वयं का ऑक्सीकरण करवाता है (इलेक्ट्रॉन त्यागता है)।

1. जिंक और कॉपर सल्फेट की अभिक्रिया

$$Zn(s) + CuSO_4(aq) \rightarrow ZnSO_4(aq) + Cu(s)$$
  • ऑक्सीकरण: जिंक ($Zn$) का ऑक्सीकरण होकर यह जिंक सल्फेट बनाता है (इलेक्ट्रॉन का त्याग)।

  • अपचयन: कॉपर आयन ($Cu^{2+}$) का अपचयन होकर कॉपर धातु ($Cu$) बनती है।

2. मेथेन का दहन (Combustion of Methane)

$$CH_4(g) + 2O_2(g) \rightarrow CO_2(g) + 2H_2O(l)$$
  • ऑक्सीकरण: मेथेन ($CH_4$) में हाइड्रोजन हटकर ऑक्सीजन जुड़ती है, जिससे यह कार्बन डाइऑक्साइड में ऑक्सीकृत होता है।

  • अपचयन: ऑक्सीजन ($O_2$) का अपचयन होकर जल ($H_2O$) का निर्माण होता है।

3. प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) - जैव-रासायनिक रेडॉक्स

$$6CO_2(g) + 6H_2O(l) \xrightarrow{\text{Sun light / क्लोरोफिल}} C_6H_{12}O_6(s) + 6O_2(g)$$
  • ऑक्सीकरण: जल ($H_2O$) का ऑक्सीकरण होकर ऑक्सीजन गैस ($O_2$) मुक्त होती है।

  • अपचयन: कार्बन डाइऑक्साइड ($CO_2$) का अपचयन होकर ग्लूकोज ($C_6H_{12}O_6$) का निर्माण होता है।

4. लोहे पर जंग लगना (Rusting of Iron)

$$4Fe(s) + 3O_2(g) + xH_2O(l) \rightarrow 2Fe_2O_3 \cdot xH_2O(s)$$
  • ऑक्सीकरण: वायुमंडलीय ऑक्सीजन और नमी की उपस्थिति में लोहे ($Fe$) का ऑक्सीकरण होता है, जिससे हाइड्रेटेड फेरिक ऑक्साइड (जंग) बनता है।

5. जिंक और हाइड्रोक्लोरिक अम्ल की अभिक्रिया

$$Zn(s) + 2HCl(aq) \rightarrow ZnCl_2(aq) + H_2(g)$$
  • ऑक्सीकरण: $Zn(s) \rightarrow Zn^{2+}(aq) + 2e^-$ (जिंक द्वारा इलेक्ट्रॉनों का त्याग)

  • अपचयन: $2H^+(aq) + 2e^- \rightarrow H_2(g)$ (हाइड्रोजन आयनों द्वारा इलेक्ट्रॉनों को ग्रहण करना)