महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना (MGNREGS) और इसके स्थान पर लाई गई नई योजना VB-G RAM G (विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)) से संबंधित संपूर्ण जानकारी दी गई है, जिसका विवरण नीचे बिंदुओं के रूप में दिया गया है:
1. महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना (MGNREGS)
- परिचय: यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक सुरक्षा के रूप में गारंटीकृत रोज़गार प्रदान करने हेतु वर्ष 2005 में शुरू की गई एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसका नोडल मंत्रालय ग्रामीण विकास मंत्रालय है।
- वैधानिक रोज़गार गारंटी: इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक परिवार को प्रति वर्ष 100 दिनों के वेतनभोगी रोज़गार की गारंटी दी जाती है, तथा सूखा या आपदा प्रभावित क्षेत्रों में 50 अतिरिक्त दिनों की रोज़गार गारंटी का प्रावधान है।
- बेरोज़गारी भत्ता: यदि आवेदन के 15 दिनों के भीतर कार्य उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो परिवारों को बेरोज़गारी भत्ता (पहले 30 दिनों के लिए न्यूनतम मज़दूरी का 25% और उसके बाद 50%) दिया जाता है।
- प्रशासनिक ढाँचा: इस योजना के कम से कम 50% कार्य ग्राम पंचायतों द्वारा निष्पादित किए जाने आवश्यक हैं। जिलाधिकारी (DMs) ज़िला कार्यक्रम समन्वयक के रूप में व्यापक कार्यान्वयन सुनिश्चित करते हैं।
- वित्तपोषण: केंद्र सरकार अकुशल श्रमिकों की मज़दूरी का 100% और सामग्री लागत का 75% वहन करती है, जबकि राज्य सरकारें शेष 25% का वहन करती हैं।
- केंद्रीय पर्यवेक्षण: MGNREGA अधिनियम, 2005 की धारा 27 के तहत केंद्र सरकार निधि के दुरुपयोग की विश्वसनीय शिकायत मिलने पर जाँच का आदेश दे सकती है और निधि जारी करना रोक सकती है।
- पारिश्रमिक व मुआवजा: भुगतान प्रत्यक्ष रूप से श्रमिकों के बैंक/आधार से जुड़े खातों में किया जाता है। मस्टर रोल बंद होने के 16वें दिन से विलंबित भुगतानों पर श्रमिकों को 0.05% दैनिक मुआवज़ा मिलता है, और दुर्घटना में मृत्यु या स्थायी दिव्यांगता पर वित्तीय सहायता दी जाती है।
- समता के उपाय: इसमें एक तिहाई महिला भागीदारी अनिवार्य की गई है। वन क्षेत्रों में निजी संपत्ति विहीन जनजातीय परिवार (FRA, 2006 के भूमि अधिकारों को छोड़कर) उन्नत रोज़गार प्रावधानों के पात्र हैं।
- डिजिटल अवसंरचना: इसके अंतर्गत GeoMGNREGA (संपत्तियों की भौगोलिक टैगिंग), JanMGNREGA (मोबाइल ऐप - उपस्थिति, भुगतान ट्रैकिंग, शिकायत समाधान) और NREGASoft (आसूचना प्रणाली) का उपयोग किया जाता है।
2. नई योजना: VB-G RAM G (विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण))
- परिचय: केंद्र सरकार द्वारा MGNREGS के स्थान पर VB-G RAM G नामक नई योजना लाई गई है, जिसे 1 जुलाई 2026 से संपूर्ण ग्रामीण भारत में लागू किया गया है। इसका उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करना और इसे 'विकसित भारत @ 2047' के दृष्टिकोण के साथ संरेखित करना है।
- प्रमुख तिथियाँ: यह विधेयक 16 दिसंबर 2025 को लोकसभा में पेश किया गया, 18-19 दिसंबर 2025 को संसद से पारित हुआ, और 21 दिसंबर 2025 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद कानून बना।
3. VB-G RAM G अधिनियम, 2025 की मुख्य विशेषताएँ
- बढ़ी हुई आय सुरक्षा: गारंटीकृत मज़दूरी रोज़गार की वैधानिक हकदारी को 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है।
- 60-दिवसीय विराम (ब्लैकआउट अवधि): कृषि श्रम आपूर्ति की सुरक्षा के लिए मुख्य बुवाई और कटाई के मौसम के दौरान कुल 60 दिनों की अवधि निर्धारित की गई है, जिसमें कार्य नहीं होंगे। शेष 125 दिन बाकी 305 दिनों के भीतर उपलब्ध कराए जाते हैं।
- न्यूनतम मज़दूरी सीमा: पहली बार ₹300 प्रतिदिन की राष्ट्रव्यापी न्यूनतम मज़दूरी सीमा निर्धारित की गई है, जिससे किसी भी राज्य की मज़दूरी इस सीमा से नीचे न जा सके।
- मज़दूरी की समय-सीमा: दैनिक मज़दूरी का भुगतान साप्ताहिक या कार्य पूरा होने के 14 दिनों के भीतर किया जाना अनिवार्य है।
- नई पहचान: श्रमिकों को ग्रामीण रोज़गार गारंटी कार्ड जारी किए जाएंगे (संक्रमण काल में e-KYC सत्यापित जॉब कार्ड वैध रहेंगे)।
4. VB-G RAM G की वित्तीय संरचना और आवंटन
- संशोधित वित्तपोषण अनुपात: नया अधिनियम सामान्य राज्यों के लिए 60:40 (केंद्र:राज्य) वित्तपोषण विभाजन अनिवार्य करता है।
- पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्य / विधानमंडल वाले केंद्रशासित प्रदेश: केंद्र 90% वहन करता है।
- विधानमंडल रहित केंद्रशासित प्रदेश: केंद्र 100% वहन करता है।
- नॉर्मेटिव आवंटन (Normative Allocation): पारंपरिक मांग-संचालित मॉडल के स्थान पर "टॉप-टू-बॉटम" मानक आवंटन अपनाया गया है, जहाँ केंद्र 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर राज्य-वार व्यय सीमाएँ निर्धारित करता है। राज्य केवल बेरोज़गारी भत्ते और विलंबित मुआवजे के व्यय के लिए जिम्मेदार हैं।
5. रणनीतिक स्तंभ, एकीकरण और डिजिटल तकनीक
- चार प्राथमिक क्षेत्र:
- जल सुरक्षा (जल संरक्षण और प्रबंधन कार्य)
- मूल ग्रामीण अवसंरचना
- आजीविका-संबंधी अवसंरचना
- जलवायु अनुकूलन क्षमता (चरम मौसमी घटनाओं को कम करने के लिए विशेष कार्य)
- PM गति शक्ति के साथ एकीकरण: स्थानीयकृत योजनाओं को PM गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के साथ एकीकृत किया गया है ताकि खंडित संपत्ति सृजन को रोका जा सके।
- डिजिटल शासन: इसमें लेन-देन के लिए बायोमैट्रिक प्रमाणीकरण, भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी, वास्तविक समय ट्रैकिंग के लिए मोबाइल ऐप-आधारित डैशबोर्ड और साप्ताहिक सार्वजनिक प्रकटीकरण प्रणाली का प्रावधान है।